नई दिल्ली/लखनऊ। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आय से अधिक संपत्ति के आरोपों से जुड़े मामले में गुरुवार को सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया। उन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें आरोपों का केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो और प्रवर्तन निदेशालय से सत्यापन कराने के निर्देश दिए गए थे। सर्वोच्च न्यायालय में मामले पर 17 अगस्त को सुनवाई होगी।
राहुल गांधी ने इसके अलावा सर्वोच्च न्यायालय में स्थानांतरण याचिका भी दाखिल की है। इसमें उन्होंने मामले को इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ से दिल्ली उच्च न्यायालय स्थानांतरित करने की मांग की है।
यह मामला कर्नाटक के भाजपा कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर की ओर से दाखिल याचिका के बाद सामने आया। याचिकाकर्ता ने राहुल गांधी की संपत्ति और कथित वित्तीय लेन-देन की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो और प्रवर्तन निदेशालय सहित केंद्रीय एजेंसियों से कराने की मांग की थी। उच्च न्यायालय ने शिकायत में लगाए गए आरोपों का कानून के अनुसार सत्यापन करने के निर्देश दिए थे।
मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो विग्नेश शिशिर से दो दिनों में करीब 13 घंटे पूछताछ कर चुका है। याचिकाकर्ता के मुताबिक, पूछताछ के दौरान उसने भारत और विदेश से जुड़े कथित लेन-देन, विदेश यात्राओं और अन्य आरोपों से संबंधित दस्तावेज जांच अधिकारियों को उपलब्ध कराए।
उच्च न्यायालय में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो और प्रवर्तन निदेशालय की ओर से रिपोर्ट भी दाखिल की गई थी। अदालत ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की रिपोर्ट से जांच की प्रगति स्पष्ट नहीं होने पर विस्तृत शपथपत्र दाखिल करने को कहा था। प्रवर्तन निदेशालय के संबंध में अदालत ने कहा था कि एजेंसी ने शुरुआती कदम उठाए हैं और जांच में किसी गैरकानूनी गतिविधि या संबंधित दस्तावेज मिलने पर कानून के मुताबिक आगे कार्रवाई कर सकती है।
राहुल गांधी से जुड़े मामलों में ब्रिटिश नागरिकता का मामला भी इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ में लंबित है। इस मामले में भी याचिकाकर्ता विग्नेश शिशिर हैं। आय से अधिक संपत्ति का मामला अब सर्वोच्च न्यायालय पहुंचने के बाद नए न्यायिक चरण में प्रवेश कर गया है।


