फर्रुखाबाद। शहर के प्रमुख श्मशान स्थल पांचाल घाट स्वर्ग धाम के बाहर इन दिनों लकड़ी की बिक्री को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि यहां कुछ लकड़ी विक्रेता शोक संतप्त परिवारों की मजबूरी का फायदा उठाकर मनमाने दाम वसूल रहे हैं। अंतिम संस्कार जैसे संवेदनशील अवसर पर भी कथित रूप से खुलेआम आर्थिक शोषण किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, जो लकड़ी सामान्य बाजार में लगभग 200 से 250 रुपये प्रति कुंतल उपलब्ध होती है, वही लकड़ी श्मशान घाट के बाहर 800 से 1000 रुपये प्रति कुंतल तक बेची जा रही है। दुख की घड़ी में पहुंचे परिवार मोलभाव की स्थिति में नहीं होते, जिसका लाभ उठाकर विक्रेता ऊंची कीमतें वसूल रहे हैं।
शोकाकुल परिजनों का कहना है कि जब परिवार पहले ही गहरे मानसिक आघात में होता है, तब इस तरह की अतिरिक्त आर्थिक मार उन्हें और तोड़ देती है। कई लोगों ने बताया कि बरसात के मौसम में यह समस्या और बढ़ जाती है। गीली लकड़ी, सीमित उपलब्धता और तात्कालिक आवश्यकता का हवाला देकर दाम और बढ़ा दिए जाते हैं। हालांकि, शिकायतें अन्य मौसमों में भी सामने आती रही हैं।
स्थानीय नागरिकों ने इसे “खुलेआम ठगी” बताते हुए प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि श्मशान घाट जैसे सार्वजनिक और संवेदनशील स्थल पर लकड़ी के दाम तय करने के लिए स्पष्ट दर सूची प्रदर्शित की जानी चाहिए, ताकि कोई भी विक्रेता मनमानी न कर सके।
कुछ लोगों ने यह भी संकेत दिया कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो इस संबंध में जिलाधिकारी से औपचारिक शिकायत की जाएगी। नागरिकों का मानना है कि प्रशासन को नियमित निगरानी, रेट सूची का अनिवार्य प्रदर्शन और उल्लंघन पर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।
अंतिम संस्कार केवल एक धार्मिक या सामाजिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि परिवार के लिए अत्यंत भावनात्मक क्षण होता है। ऐसे समय में यदि आवश्यक सामग्री भी उचित मूल्य पर उपलब्ध न हो, तो यह व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
अब देखना यह है कि संबंधित विभाग और प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और शोक की घड़ी में हो रहे इस कथित आर्थिक शोषण पर कब तक रोक लगती है।


