शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद आश्रम रवाना, अमित शाह के बयान से सियासी चर्चाओं को नई धार
प्रयागराज: माघ मेले (Magh Mela) में बीते 12 दिनों से जारी धरना बुधवार को समाप्त हो गया। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद (Shankaracharya Avimukteshwarananda) ने धरना खत्म करने के बाद अपने आश्रम के लिए प्रस्थान किया। हालांकि धरना समाप्त होने के साथ मामला शांत होने के बजाय और गरमा गया है। कारण बना उसी दिन अमित शाह का गुजरात के गांधीनगर से दिया गया बयान, जिसने सनातन और सत्ता के रिश्ते पर नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का यह धरना प्रयागराज में बीते कई दिनों से चर्चा का केंद्र बना हुआ था। धरने के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार और शंकराचार्य के बीच टकराव की स्थिति खुलकर सामने आई। धार्मिक परंपराओं, सनातन मूल्यों और प्रशासनिक रवैये को लेकर शंकराचार्य के बयानों ने न केवल प्रदेश बल्कि देशभर में हलचल मचा दी थी। कई दिनों तक यह विवाद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में रहा।
बुधवार को धरना समाप्त कर आश्रम लौटते समय शंकराचार्य ने स्पष्ट संकेत दिए कि उनका आंदोलन किसी व्यक्ति या सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि सनातन परंपराओं के सम्मान के लिए था। हालांकि, धरना खत्म होने के बावजूद यह सवाल अब भी कायम है कि क्या सरकार और धर्माचार्यों के बीच संवाद की खाई पाटी जा सकेगी।
इसी बीच गांधीनगर में गृहमंत्री अमित शाह ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि “जो सरकार सनातन का सम्मान नहीं करती…”—इस बयान को सीधे तौर पर प्रयागराज प्रकरण से जोड़कर देखा जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में इसे संयोग नहीं, बल्कि संकेत माना जा रहा है। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के बीच हुए टकराव की चर्चाएं एक बार फिर तेज हो गई हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शंकराचार्य का धरना और अमित शाह का बयान मिलकर सनातन बनाम शासन की बहस को नया आयाम दे रहे हैं। जहां एक ओर सत्ता पक्ष संतुलन साधने की कोशिश में है, वहीं दूसरी ओर धार्मिक नेतृत्व अपनी भूमिका और प्रभाव को फिर से परिभाषित करता नजर आ रहा है।


