न्यूयॉर्क
पश्चिम एशिया में जारी सैन्य संघर्ष अब पांचवें सप्ताह में प्रवेश कर चुका है और इसके प्रभाव वैश्विक स्तर पर लगातार गहराते जा रहे हैं। लंबे समय तक खिंचते इस युद्ध ने न केवल क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित किया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर दबाव डाला है। ऊर्जा आपूर्ति, व्यापार मार्गों और निवेश गतिविधियों पर पड़ रहे प्रभाव के चलते दुनिया भर के देशों में चिंता बढ़ती जा रही है।
संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) की हालिया रिपोर्ट में इस संघर्ष के आर्थिक प्रभावों को लेकर गंभीर चेतावनी दी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम एशिया के देशों को इस युद्ध के कारण उनकी सामूहिक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 3.7 से 6 प्रतिशत तक नुकसान हो सकता है। यह नुकसान अधिकतम 194 अरब डॉलर तक पहुंचने की आशंका जताई गई है, जो कि वर्ष 2025 में इस क्षेत्र द्वारा हासिल की गई कुल जीडीपी वृद्धि से भी अधिक हो सकता है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो आर्थिक नुकसान और अधिक गहराता जाएगा। तेल और गैस जैसे प्रमुख संसाधनों के उत्पादन और निर्यात में बाधा आने से वैश्विक बाजार में अस्थिरता बढ़ रही है, जिससे महंगाई और आपूर्ति संकट जैसी समस्याएं उभर सकती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस युद्ध का प्रभाव केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका असर एशिया, यूरोप और अन्य क्षेत्रों की अर्थव्यवस्थाओं पर भी पड़ेगा। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने चुनौती है कि वह जल्द से जल्द कूटनीतिक समाधान निकालकर इस संकट को नियंत्रित करे, ताकि वैश्विक अर्थव्यवस्था को और अधिक नुकसान से बचाया जा सके।


