21.2 C
Lucknow
Tuesday, March 10, 2026
Home Blog Page 90

एक्सीडेंट के बाद गुंडों ने कार चालक को पीटा, बीच-बचाव करने वाले से भी अभद्रता

0

कानपुर। सेन पश्चिम पारा थाना क्षेत्र में मामूली सड़क हादसे के बाद मारपीट का मामला सामने आया है। आरोप है कि एक्सीडेंट के बाद कुछ दबंगों ने कार चालक को घेरकर पीट दिया। बीच-बचाव करने पहुंचे एक राहगीर के साथ भी अभद्रता की गई। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस हरकत में आई है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सड़क पर कार और दूसरी गाड़ी के बीच टक्कर हो गई थी। विवाद बढ़ने पर मौके पर मौजूद कुछ लोगों ने कार चालक के साथ हाथापाई शुरू कर दी। वायरल वीडियो में कुछ युवक चालक को धक्का देते और मारपीट करते दिखाई दे रहे हैं।
मामले में “कैदी चाय” स्टाल संचालक पर भी मारपीट का आरोप लगा है। बताया जा रहा है कि विवाद के दौरान स्टाल संचालक और उसके समर्थकों ने कथित रूप से चालक के साथ दुर्व्यवहार किया। हालांकि पुलिस ने अभी तक किसी नाम की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
सूचना मिलने पर सेन पश्चिम पारा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस का कहना है कि वायरल वीडियो के आधार पर जांच की जा रही है और दोषियों की पहचान कर कार्रवाई की जाएगी।
घटना के बाद क्षेत्र में कुछ समय के लिए तनाव का माहौल रहा। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क दुर्घटना के मामलों में कानून हाथ में लेने की प्रवृत्ति चिंताजनक है। पुलिस ने आमजन से अपील की है कि किसी भी विवाद की स्थिति में तुरंत सूचना दें और स्वयं न्याय करने की कोशिश न करें।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है और वीडियो फुटेज को साक्ष्य के रूप में संकलित किया जा रहा है।

साल का पहला चंद्र ग्रहण आज, सूतक काल में मंदिरों के कपाट बंद

0

प्रयागराज। साल का पहला चंद्र ग्रहण आज लग रहा है, जिसके चलते धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूतक काल प्रभावी होने पर कई प्रमुख मंदिरों के कपाट अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं। संगम नगरी में श्रद्धालुओं के बीच ग्रहण को लेकर विशेष आस्था और सावधानी देखी जा रही है।
सूतक काल लागू होने के बाद प्रसिद्ध श्री बड़े हनुमान जी मंदिर के कपाट भी बंद कर दिए गए। मंदिर प्रशासन के अनुसार ग्रहण समाप्ति के बाद विधि-विधान से शुद्धिकरण और विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी।
धार्मिक परंपराओं के अनुसार ग्रहण काल में पूजा-पाठ और प्रतिमा स्पर्श वर्जित माना जाता है। इसी कारण मंदिरों में नियमित दर्शन अस्थायी रूप से रोके गए हैं। श्रद्धालुओं से घरों में ही मंत्र जाप और ध्यान करने की अपील की गई है।
ग्रहण की समाप्ति के बाद मंदिर परिसर में गंगाजल से शुद्धिकरण, हवन और विशेष आरती आयोजित की जाएगी। इसके बाद श्रद्धालुओं के लिए दर्शन पुनः प्रारंभ होंगे।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार ग्रहण के दौरान सावधानी बरतना और धार्मिक नियमों का पालन करना शुभ माना जाता है। वहीं प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा को लेकर आवश्यक इंतजाम किए हैं।
संगम नगरी में आस्था और परंपरा के बीच आज का दिन विशेष धार्मिक महत्व के रूप में देखा जा रहा है।

होली पर सियासी सौहार्द: डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने पूर्व सांसद विनय कटियार के आवास पहुंच दी शुभकामनाएं

0

लखनऊ। होली के अवसर पर उत्तर प्रदेश की राजनीति में आत्मीयता और पारिवारिक संबंधों की झलक देखने को मिली, जब डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक परिवार सहित पूर्व सांसद विनय कटियार के आवास पहुंचे और उन्हें रंगों के पर्व की शुभकामनाएं दीं।
इस मुलाकात ने यह संदेश दिया कि राजनीतिक व्यस्तताओं और बदलते समीकरणों के बीच भी पुराने रिश्ते और संस्कार कायम रहते हैं। “हिंदू हृदय सम्राट” के रूप में विख्यात रहे विनय कटियार और ब्रजेश पाठक के बीच वर्षों पुराने पारिवारिक संबंध बताए जाते हैं, जिनकी झलक होली के इस अवसर पर साफ दिखाई दी।
सूत्रों के अनुसार डिप्टी सीएम कुछ समय तक आवास पर रुके, जहां पारंपरिक तरीके से गुलाल लगाकर एक-दूसरे को बधाई दी गई। परिवार के अन्य सदस्यों की भी मौजूदगी रही। माहौल पूरी तरह आत्मीय और सौहार्दपूर्ण बताया गया।
राजनीतिक हलकों में इस मुलाकात को केवल त्योहार की औपचारिकता नहीं, बल्कि संगठनात्मक एकजुटता और आपसी सम्मान के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के बीच यह आत्मीय संवाद कार्यकर्ताओं के लिए भी सकारात्मक संदेश माना जा रहा है।
होली जैसे सांस्कृतिक पर्व पर इस तरह की मुलाकातें यह दर्शाती हैं कि राजनीति में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन व्यक्तिगत संबंध और संस्कार हमेशा ऊपर रहते हैं।
रंगों के इस पर्व पर दोनों नेताओं ने प्रदेशवासियों को शांति, समृद्धि और भाईचारे की शुभकामनाएं दीं।

इस्फहान में फंसे भारतीय छात्र: सुरक्षा पहले, पढ़ाई बाद में

0

पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव की गूंज अब सीधे भारतीय परिवारों तक पहुंच रही है। इस्फाहान में अध्ययनरत भारतीय छात्रों की अपील केवल एक प्रशासनिक मांग नहीं, बल्कि असुरक्षा और अनिश्चितता के बीच फंसे युवाओं की पुकार है। विशेष रूप से Isfahan University of Medical Sciences में पढ़ रहे छात्र जिस भयावह माहौल का उल्लेख कर रहे हैं, वह स्थिति की गंभीरता को स्पष्ट करता है।
करीब 25 से 30 भारतीय छात्र वहां मौजूद बताए जा रहे हैं। छात्रा फातिमा द्वारा जारी वीडियो संदेश ने देशभर के अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। विस्फोट जैसी आवाजें सुनाई देना, इंटरनेट सेवाओं का बाधित होना, बाजारों का बंद होना और छात्रावास से बाहर न निकलने की सलाह—ये सब संकेत हैं कि हालात सामान्य नहीं हैं। ऐसे समय में सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि क्या छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित है?
विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा प्रथम और द्वितीय वर्ष के छात्रों के लिए अगला सेमेस्टर ऑनलाइन करने की बात राहत देती है, लेकिन अंतिम वर्ष के छात्रों को अस्पताल में अनिवार्य ड्यूटी पर बनाए रखना संवेदनशील स्थिति में जोखिमपूर्ण निर्णय प्रतीत होता है। शिक्षा महत्वपूर्ण है, लेकिन जीवन उससे कहीं अधिक मूल्यवान है। यदि क्षेत्रीय हालात अस्थिर हैं, तो वैकल्पिक व्यवस्था पर तत्काल विचार होना चाहिए।
यह स्थिति केवल इस्फहान तक सीमित नहीं है। पश्चिम एशिया में समय-समय पर उभरते तनाव ने पहले भी भारतीय नागरिकों को प्रभावित किया है। भारत सरकार ने अतीत में संकटग्रस्त देशों से अपने नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए उल्लेखनीय अभियान चलाए हैं। ऐसे में उम्मीद की जाती है कि वर्तमान परिस्थिति में भी विदेश मंत्रालय सक्रियता दिखाएगा और स्थानीय दूतावास के माध्यम से छात्रों की सुरक्षा का ठोस आकलन करेगा।
छात्रों की दुविधा भी समझी जानी चाहिए। वर्षों की मेहनत, मेडिकल शिक्षा का दबाव, अस्पताल प्रशिक्षण की अनिवार्यता—इन सबके बीच अचानक देश छोड़ना आसान निर्णय नहीं होता। लेकिन जब जान पर बन आए, तो प्राथमिकता स्पष्ट होनी चाहिए। विश्वविद्यालय और स्थानीय प्रशासन को भी मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए और शैक्षणिक नुकसान की भरपाई के विकल्प तलाशने चाहिए।
परिसर के बाहर किराये के मकानों में रह रहे छात्रों की स्थिति और भी चिंताजनक है। सीमित संसाधनों, बंद बाजारों और बाधित ऑनलाइन सेवाओं के बीच जीवनयापन कठिन होता जा रहा है। यदि इंटरनेट बाधित है, तो परिवारों से संपर्क टूटना मानसिक तनाव को और बढ़ा देता है। यह केवल भौतिक सुरक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य का भी प्रश्न है।
भारत सरकार के लिए यह समय संवेदनशील कूटनीतिक संतुलन का है। एक ओर अंतरराष्ट्रीय संबंधों की जटिलता है, तो दूसरी ओर अपने नागरिकों की सुरक्षा का दायित्व। छात्रों ने सुरक्षित निकासी या कम से कम सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरण की मांग की है। यह मांग अनुचित नहीं कही जा सकती।
संकट के समय सरकार की सक्रियता ही नागरिकों का विश्वास मजबूत करती है। आवश्यक है कि भारतीय दूतावास छात्रों से नियमित संपर्क बनाए रखे, हेल्पलाइन को प्रभावी बनाए और यदि हालात बिगड़ते हैं तो चरणबद्ध निकासी योजना तैयार रखे।
युवाओं का भविष्य राष्ट्र की पूंजी है। वे पढ़ने गए हैं, युद्ध का सामना करने नहीं। इसलिए इस्फहान में फंसे भारतीय छात्रों की आवाज को केवल एक खबर न समझा जाए, बल्कि उसे राष्ट्रीय दायित्व के रूप में देखा जाए। सुरक्षा पहले, पढ़ाई बाद में—यही इस समय की सबसे बड़ी जरूरत है।

गोसेवा में रमे सीएम योगी, गोवंश को खिलाया गुड़-रोटी

0

नामों से पुकार कर, स्नेहिल थपकी देकर गायों-गोवंश को खूब दुलारा मुख्यमंत्री ने

भोले नामक विशाल नंदी के शरीर की धूल-मिट्टी को अपने हाथों से साफ किया सीएम योगी ने

गोरखपुर, 3 मार्च। गोरखनाथ मंदिर प्रवास के दौरान मंगलवार सुबह जनता दर्शन लगाकर जनसेवा करने के साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंदिर की गोशाला में जाकर गोसेवा में भी रमे रहे। उन्होंने नामों से पुकार कर, स्नेहिल थपकी देकर गायों-गोवंश को खूब दुलारा, उन्हें गुड़-रोटी खिलाया और गोशाला के कार्यकर्ताओं को गोवंश की समुचित देखभाल के निर्देश दिए।

गोरखनाथ मंदिर प्रवास पर मंगलवार प्रातःकाल सीएम योगी की दिनचर्या परंपरागत रही। उन्होंने गोरखनाथ मंदिर में शिवावतार महायोगी गुरु गोरखनाथ का दर्शन-पूजन किया और अपने गुरु ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की समाधि स्थल पर जाकर शीश झुकाकर आशीर्वाद लिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, जब भी गोरखनाथ मंदिर में होते हैं तो गोसेवा उनकी दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा रहती है। मंगलवार सुबह भी वह मंदिर परिसर का भ्रमण करते हुए गोशाला में पहुंचे और वहां कुछ समय व्यतीत किया।

गोशाला में सीएम योगी ने चारों तरफ भ्रमण करते हुए श्यामा, गौरी, गंगा, भोला आदि नामों से गोवंश को पुकारा। उनकी आवाज इन गोवंश के लिए जानी पहचानी है। प्यार भरी पुकार सुनते ही कई गोवंश दौड़ते-कूदते उनके पास आ गए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी के माथे पर हाथ फेरा, उन्हें खूब दुलारा और अपने हाथों से गुड़-रोटी खिलाया। इसी क्रम में उन्होंने भोले नामक एक विशाल नंदी को स्नेह की थपकी देते हुए गुड़-रोटी खिलाया। उसके शरीर पर लगी धूल-मिट्टी को पहले अपने हाथों से साफ किया और फिर गोशाला कार्यकर्ता को निर्देशित किया कि भोले के शरीर को सूखे कपड़े से साफ कर दिया जाए। मंदिर की गोशाला में सीएम योगी ने मोर पर भी स्नेह बरसाया और उसे अपने हाथों से रोटी खिलाई।

कायमगंज नगर पालिका क्षेत्र के ग्राम लुदइयाँ स्थित कूड़ा केंद्र में भीषण आग, गांवों में दहशत का माहौल

0

फर्रुखाबाद। नगर पालिका क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम लुदइयाँ स्थित कूड़ा निस्तारण केंद्र में अचानक भीषण आग लग जाने से आसपास के गांवों में अफरा-तफरी मच गई। आग लगते ही कूड़े के ऊंचे-ऊंचे ढेर धू-धू कर जलने लगे और देखते ही देखते लपटों ने विकराल रूप धारण कर लिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कूड़ा केंद्र से उठती आग की तेज लपटें और आसमान में फैलता घना काला धुआं कई किलोमीटर दूर से साफ दिखाई दे रहा था। आग लगने के समय तेज हवा चल रही थी, जिससे आग के और अधिक फैलने की आशंका बढ़ गई। इससे कूड़ा केंद्र के पास स्थित झोपड़ियों और रिहायशी मकानों में रहने वाले ग्रामीणों में दहशत फैल गई। लोगों को भय था कि यदि समय रहते आग पर काबू नहीं पाया गया तो यह रिहायशी इलाकों तक पहुंच सकती है।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और दमकल विभाग को अवगत कराया गया। सूचना पर दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का प्रयास शुरू किया गया। प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और आग पर जल्द से जल्द नियंत्रण पाने के निर्देश दिए।
ग्रामीणों ने भी सतर्कता दिखाते हुए अपने घरों के आसपास रखी ज्वलनशील वस्तुओं को हटाना शुरू कर दिया। कई लोगों ने एहतियातन बच्चों और बुजुर्गों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया।
कूड़े में लगी आग से निकलने वाले जहरीले धुएं के कारण आसपास के क्षेत्रों में सांस लेने में दिक्कत की शिकायतें भी सामने आईं। धुएं के कारण वातावरण में प्रदूषण का स्तर अचानक बढ़ गया, जिससे बच्चों, बुजुर्गों और दमा के मरीजों को विशेष परेशानी हुई।
इस घटना ने एक बार फिर कूड़ा प्रबंधन व्यवस्था और सुरक्षा इंतजामों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कूड़ा केंद्र पर न तो पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था है और न ही नियमित निगरानी की जाती है। कूड़े के ढेर लंबे समय से खुले में पड़े रहते हैं, जिससे आग लगने की आशंका बनी रहती है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि कूड़ा केंद्र की सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाए, नियमित निगरानी की व्यवस्था की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस एवं प्रभावी कदम उठाए जाएं।