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Monday, February 9, 2026
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UPSC ने जारी किया CAPF परीक्षा का एडमिट कार्ड, इन स्टेप्स से करें डाउनलोड

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UPSC CAPF
UPSC CAPF Exam Admit Card Released

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC)ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (असिस्टेंट कमांडेंट) परीक्षा 2024 के लिए एडमिट कार्ड को जारी कर दिया है। अगर आप ने भी इस परीक्षा के लिए आवेदन किया है तो आप अपना एडमिट कार्ड ऑफिशियल वेबसाइट upsc.gov.in और upsconline.nic.in पर जाकर चेक कर सकते हैं। UPSC इस भर्ती प्रक्रिया के जरिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) में 506 असिस्टेंट कमांडेंट (ग्रुप ए) पदों पर नियुक्ति करेगा। इसमें असिस्टेंट कमांडेंट बीएसएफ, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी और एसएसबी शामिल है।

UPSC CAPF असिस्टेंट कमांडेंट परीक्षा का एडमिट कार्ड डाउनलोड करें-

1. सबसे पहले उम्मीदवार को ऑफिशियल वेबसाइट upsc.gov.in या upsconline.nic.in पर जाना होगा।
2. इसके बाद आपको होम पेज पर दिए गए लिंक UPSC CAPF असिस्टेंट कमांडेंट परीक्षा 2024 का एडमिट कार्ड पर क्लिक करना होगा।
3. अब आप को अपना रजिस्ट्रेशन नंबर या रोल नंबर और पासवर्ड डालकर लॉग इन करना होगा।
4. आप अब अपनी स्क्रीन पर परीक्षा का एडमिट कार्ड देख सकते हैं।
5. इसके बाद आप अपने एडमिट कार्ड को डाउनलोड कर लीजिए।
6. परीक्षा के लिए अपने एडमिट कार्ड का प्रिंट आउट जरूर निकाल लीजिए।

अगर किसी उम्मीदवार को ऑनलाइन ऑफिशियल वेबसाइट से एडमिट कार्ड डाउनलोड करने में कोई परेशानी हो रही है, तो वे आयोग द्वारा जारी किए गए ईमेल आईडी पर संपर्क कर सकते हैं।

1. एप्लीकेशन डेटा समस्या के लिए- soe23-upsc@gov.in
2. टेक्निकल समस्या के लिए- system-upsc@gov.in

UP Police कांस्टेबल भर्ती परीक्षा की नई की तारीखें घोषित, यहां देखें शेड्यूल

UPSC CAPF परीक्षा 2024 का आयोजन 4 अगस्त, 2024 को होगा। इस परीक्षा में उम्मीदवार को does पेपर देने होंगे। पेपर-1 सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक होगा। पेपर- 2 दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक होगा। पेपर- 1 में जनरल एबिलीटी और जनरल इंटेलीजेंस से प्रश्न पूछे जाएंगे। वहीं पेपर-2 में जनरल स्टडीज, निबंध और काॅम्प्रीहेन्शन से प्रश्न पूछे जाएंगे।

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण गाइडलाइंस-

1. उम्मीदवार परीक्षा सेंटर पर जाने से पहले महत्वपूर्ण जानकारी वाले पेज को एडमिट कार्ड के साथ जरूर डाउनलोड करके प्रिंट आउट निकाल लें।
2. उम्मीदवार को उनके एडमिट कार्ड में लिखे गए फोटो आईडी की ओरिजिनल कॉपी को जरूर ले जाना होगा।
3. उम्मीदवारों की परीक्षा सेंटर पर परीक्षा से आधे घंटे पहले एंट्री बंद हो जाएगी। पेपर-1 की एंट्री सुबह 9:30 बजे और पेपर-2 की एंट्री दोपहर 1:30 बजे बंद हो जाएगी।
4. परीक्षा में ओएमआर शीट में मार्क करने के लिए सिर्फ काला बॉल पॉइंट पैन की ही इजाजत होगी।
5. पेपर- 2 में निबंध लिखने की भाषा वही होगी, जो उम्मीदवार ने चुनी होगी और जो आयोग द्वारा मान्य है।

केशव मौर्य ने अखिलेश को दिया करारा जवाब, बोले- सपा को समाप्त होने से बचाने पर ध्यान दें

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akhilesh yadav
akhilesh yadav, Keshav Prasad Maurya

लखनऊ। यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य (Keshav Prasad Maurya) ने शुक्रवार को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) पर बड़ा हमला बोला है।

केशव प्रसाद मौर्य (Keshav Prasad Maurya)ने एक्स पोस्ट पर लिखा कि कांग्रेस का मोहरा बन चुके सपा बहादुर अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) भाजपा को लेकर ग़लतफ़हमी पालने, अति पिछड़ों को निशाना बनाने,अपमान करने की जगह सपा को समाप्त होने से बचाने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि भाजपा 2027 में 2017 दोहरायेगी, कमल खिला है खिलेगा, खिलता रहेगा।

 बता दें कि यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य (Keshav Prasad Maurya) ने समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) द्वारा लगातार निशाना साधे जाने के बाद शुक्रवार को करारा पलटवार किया है। अपने ताजा बयान में अखिलेश ने कहा था, ‘कहा जा रहा है कि केशव प्रसाद मौर्य मोहरा हैं। यूपी में वाई-फाई के दो पासवर्ड हैं। आप खेल देखिए दिल्ली के वाई-फाई के पासवर्ड का।

पठानकोट में फिर दिखी संदिग्धों की मूवमेंट, सैन्य क्षेत्र से समीप घर में दिखे तीन संदिग्ध

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Movement of suspects seen again in Pathankot
Movement of suspects seen again in Pathankot

पठानकोट। पठानकोट में संदिग्धों (Suspects) के दिखने का सिलसिला नहीं थम रहा। गुरुवार देर रात गांव फंगतोली में तीन संदिग्ध देखे गए है। इससे पहले इसी गांव में एक महिला ने सात संदिग्ध (Suspects) देखे थे जिनका अभी तक सुरक्षा एजेंसियां कोई पता नहीं लगा पाई है।

फंगतोली के पास ही मामून सैन्य क्षेत्र है। 26 जून से अब तक पठानकोट में 17 संदिग्धों को देखा जा चुका है। हालांकि पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को अभी तक इस बारे में कोई सफलता नहीं मिली है।

जानकारी के अनुसार, गुरुवार देर रात गांव फंगतोली में तीन संदिग्ध (Suspects) एक घर में दीवार फांद कर घुसे और रोटी मांगने लगे। डरे परिवार ने दरवाजा नहीं खोला। बलराम सिंह ने बताया कि इस पूरे मामले की जानकारी पुलिस को दी गई। सूचना मिलने के बाद पुलिस और घातक कमांडो फोर्स ने चप्पे-चप्पे को खंगाला।

पठानकोट में दिखे सात संदिग्ध, स्केच जारी

इस गांव में जब सात संदिग्ध (Suspects) दिखे थे तभी से पुलिस और सेना सर्च चला रही है, लेकिन अभी तक उनके हाथ कुछ भी नहीं लगा है। बलराम सिंह ने बताया कि तीन लोग उनके घर दीवार फांद कर आए और कमरे का दरवाजा खटखटाने लगे। उन्होंने डर के कारण दरवाजा नहीं खोला। तीनों रोटी की मांग कर रहे थे। जब उनको कोई जवाब नहीं दिया गया तो वे वापस लौट गए। इन संदिग्धों की मूवमेंट के चलते जिले में दहशत का माहौल बना हुआ है। पुलिस और सेना सुबह से ही सर्च ऑपरेशन चला रही है।

Nameplate Controversy: नेमप्लेट लगाने पर रोक जारी रहेगी, सुप्रीम कोर्ट का आदेश

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Nameplate Controversy
Nameplate Controversy

नई दिल्ली। कांवड़ यात्रा रूट पर दुकानों, ढाबों और ठेलों पर नेम प्लेट (Nameplate) लगाने पर सुप्रीम कोर्ट की रोक बरकरार रहेगी। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार के हलफनामे के बाद भी आदेश पर रोक जारी रखी है। इससे पहले उत्तर प्रदेश (यूपी) सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर किया, जिसमें सरकार ने कांवड़ यात्रा के दौरान दुकानों पर नामपट्टिका (Nameplate)  लगाने के अपने आदेश का बचाव किया है। यूपी सरकार ने अपने हलफनामे में कहा है कि उसके दिशा-निर्देश कांवड़ यात्रा के शांतिपूर्ण समापन और पारदर्शिता कायम करने के लिए उद्देश्य से दिए गए थे।

कोर्ट में योगी सरकार का जवाब

इससे पहले यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने जवाब में अपनी दलीलों के समर्थन में कावंड़ मार्ग रूट के कुछ खाने पीने की दुकानों की तस्वीरें पेश की थी। मसलन राजा राम भोज फैमिली टूरिस्ट ढाबा के नाम से ढाबा चलाने वाले दुकानदार का नाम वसीम है। राजस्थानी खालसा ढाबे के मालिक का नाम फुरकान है। पंडित जी वैष्णो ढाबे के मालिक सनव्वर राठौड़ हैं।

सरकार का कहना है कि कावंड़ रूट पर खाने पीने को लेकर गलतफहमी पहले भी झगड़े और तनाव की वजह बनती रही है। ऐसी कोई अप्रिय स्थिति न बने, नंगे पैर पवित्र जल ले जा रहे करोड़ो कावंड़ियों की धार्मिक भावना गलती से भी आहत न हो इसलिए दुकान के बाहर नाम (Nameplate) लिखने के निर्देश जारी किए गए थे। कोर्ट में दाखिल अपने जवाब में योगी सरकार ने कहा कि कानून व्यवस्था के लिए एहतियाती कदम उठाया। अनुच्छेद 71 के तहत सौहार्द कायम रखने के लिए यह फैसला लिया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी राज्य सरकार के आदेश पर रोक

उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने कांवड़ यात्रा मार्ग पर पड़ने वाली दुकानदारों को दुकान पर नामपट्टिका (Nameplate) लगाने और मोबाइल नंबर लिखने के दिशा निर्देश जारी किए थे। सरकार के इन दिशा-निर्देशों की खूब आलोचना हुई और इसे सांप्रदायिकता से प्रेरित दिशा निर्देश बताया गया।

‘गलती से भी कांवड़ियों की धार्मिक भावनाएं आहत न हो’, ‘नेमप्लेट’ वाले फैसले पर योगी सरकार का SC में जवाब

सरकार के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर हुईं, जिन पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार के आदेश पर रोक लगा दी थी। अब राज्य सरकार ने इस मामले में हलफनामा देकर अपना पक्ष रखा है।

दरिया बनी दिल्ली, जलभराव ने ट्रैफिक पर लगाई ब्रेक; पुलिस ने जारी की एडवाइजरी

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Rain in Delhi
Rain in Delhi

नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों में शुक्रवार सुबह में बारिश (Rain) देखने को मिल रही है। जिससे मौसम सुहाना हो गया है। लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिली है। लेकिन सड़कों पर पानी भरने से सुबह सुबह ही जाम लग गया है। नई दिल्ली, पुरानी दिल्ली और उत्तर पूर्वी दिल्ली के कई इलाकों में जमकर बारिश (Rain)  हुई। इससे पहले गुरुवार को दिल्ली में हल्की बूंदाबांदी हुई थी। जिससे उमस बढ़ गई, इससे लोग चिपचिपी गर्मी के साथ उमस भरी गर्मी से दिनभर परेशान रहे।

मौसम विभाग ने शुक्रवार के लिए बारिश (Rain) का यलो अलर्ट जारी किया है। इस दौरान आसमान में हल्के बादल छाए रहेंगे। इससे अधिकतम तापमान 35 और न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया जा सकता है। हालांकि, मौसम विभाग का बारिश का पूर्वानुमान कमजोर साबित हो रहा है। गुरुवार के लिए भी मौसम विभाग ने बारिश का यलो अलर्ट जारी किया था, लेकिन उसके मुताबिक बारिश नहीं हुई।

दिल्ली पुलिस ने जारी की ट्रैफिक एडवाइजरी

दिल्ली में आज सुबह हुई बारिश (Rain)  के बाद ट्रैफिक पुलिस ने एडवाइजरी जारी कर दी है। कई रास्तों पर पानी भरने के बाद लोगों को जाम की समस्या से जुझना पड़ रहा है। ट्रैफिक पुलिस ने अपनी एडवाइजरी में कहा कि निगम बोध घाट पर जलभराव के कारण मजनूं का टीला से आईएसबीटी कश्मीरी गेट की ओर जाने वाले मार्ग पर रिंग रोड पर यातायात प्रभावित है। यातायात को चंदगी राम अखाड़ा से शास्त्री पार्क की ओर मोड़ दिया गया है। जलभराव के कारण जखीरा अंडरपास पर यातायात प्रतिबंधित है।

मायानगरी में आफत की बारिश…, सड़कें-ब्रिज जलमग्न, स्कूल-कॉलेज बंद; बचाव में उतरी सेना

गुरुवार सुबह से ही आसमान में हल्के बादल छाए रहे। इसके बाद बूंदाबांदी हुई। वहीं, दोपहर में बादल व सूरज की लुकाछिपी का खेल चला। इसके साथ ही तेज धूप निकल आई। इससे उमस और बढ़ गई। सफदरजंग में 1.4 एमएम, मयूर विहार में 2.5 एमएम, लोदी रोड में 1.2, पूसा व पीतमपुरा में 0.5 एमएम बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग के मुताबिक अधिकतम तापमान सामान्य से एक डिग्री अधिक 36.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। न्यूनतम तापमान सामान्य से एक डिग्री कम 26.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। शाम को भी तेज हवा चली। इससे तापमान में कमी देखने को मिली। नमी का स्तर 100 से 67 फीसदी रहा।

बारिश (Rain) से कई जगह हुआ जलभराव व पेड़ गिरे

राजधानी में गुरुवार को बारिश के बाद कई जगह जलभराव हुआ। रामपुरा रेलवे अंडरपास पूरी तरह डूब गया। ऐसे में इसे बंद करना पड़ा। यहां काफी बच्चे नहाते भी दिखे, लेकिन इन्हें रोकने वाला कोई नहीं था। एमसीडी के अनुसार, आरकेपुरम स्थित सेक्टर-12, ईस्ट पटेल नगर, रोहिणी सेक्टर-28, बहादुर शाह जफर मार्ग, राणा जी एंक्लेव नजफगढ़, बुराड़ी, ओखला गांव, करोल बाग, सरिता विहार, फतेहपुर बेरी, पुल पहलाद पुर, जोंती आदि जगह जलभराव हुआ। इसके अलावा रामपुरा, रणहोला, त्रीनगर, कृष्णा नगर, अंबेडकर नगर, कालकाजी व डाबड़ी में पेड़ गिर गए। सभी जगह पानी निकालने की कार्रवाई तत्काल की गई। सड़कों व गलियों में गिरे पेड़ों को भी हटा दिया गया।

‘गलती से भी कांवड़ियों की धार्मिक भावनाएं आहत न हो’, ‘नेमप्लेट’ वाले फैसले पर योगी सरकार का SC में जवाब

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Yogi government's reply in SC on nameplate controversy
Yogi government's reply in SC on nameplate controversy

नई दिल्ली। कांवड़ रूट (Kanwar Route) पर दुकानदारों के नेमप्लेट (Nameplate) लगाने वाले आदेश पर यूपी की योगी सरकार (Yogi Government)  ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में जवाब दाखिल किया है। योगी सरकार (Yogi Government) ने अपने जवाब में कहा कि कांवड़ यात्रा (Kanwar Yatra) के दौरान खाने-पीने के सामान में भ्रम के चलते पहले कई झगड़े हो चुके हैं। कांवड़ियों ने कई बार इसकी शिकायतें की हैं। इन्हीं शिकायतों के आधार पर ऐसे निर्देश दिए गए। हालांकि, कोर्ट इस आदेश पर रोक लगा चुकी है।

योगी सरकार (Yogi Government) की तरफ से शुक्रवार को कोर्ट में बताया गया कि यह आदेश इसलिए दिया गया ताकि कांवड़ियों की भावनाएं न भड़कें। इसके साथ ही इस आदेश का मकसद क्षेत्र में शांति और भाईचारा बनाए रखना भी था। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने यूपी, उत्तराखंड समेत कुछ अन्य राज्य सरकारों के ऑर्डर पर स्टे जारी कर दिया था। राज्य सरकारों ने कांवड़ रूट को लेकर आदेश जारी किया था। इसमें कहा गया था कि रूट पर पड़ने वाली दुकानों और स्ट्रीट वेंडर्स को नाम के साथ स्टाफ मेंबर्स की डिटेल भी देनी होगी। साथ ही उन्हें यह भी बताना होगा कि वह किस तरह का खाना देते हैं।

यूपी सरकार ने कोर्ट में बताया कि कांवड़ियों को परोसे गए खाने को लेकर छोटा सा कंफ्यूजन भी बड़े विवाद का विषय बन जाता है। यूपी सरकार की तरफ से यह भी कहा गया कि यह निर्देश अलगाव करने वाले नहीं हैं। यह सभी जाति-धर्म के दुकानदारों पर समान रूप से लागू होते हैं। लाइव लॉ के मुताबिक यूपी सरकार ने बताया है कि खासतौर पर सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील इलाकों जैसे मुजफ्फरनगर में ऐसी समस्याएं देखने को मिली हैं। आगे कहा गया कि पूर्व में देखा गया है कि बेचे जा रहे खाने के प्रकार को लेकर विवाद हुए हैं। यह निर्देश पहले ही जारी कर दिए गए थे, ताकि स्थिति तनावपूर्ण न होने पाए।

यूपी सरकार ने अपनी दलील में कहा है कि लाखों-करोड़ों लोग नंगे पांव गंगाजल लेकर यात्रा कर रहे हैं। ऐसे में किसी भी तरह का कंफ्यूजन बड़े पैमाने पर हालात खराब कर सकता है। सरकार ने कहा कि अगर कांवड़ियों को मन-मुताबिक खाना नहीं मिला तो पूरी यात्रा पर इसका खराब असर दिख सकता है। इसके अलावा क्षेत्र का शांति और सौहार्द भी प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा यूपी सरकार की दलील में उस घटना का भी जिक्र किया गया है, जिसमें खाने में प्याज और लहसुन पड़े होने के चलते कांवड़िए भड़क गए थे और तोड़-फोड़ कर डाली थी।

सीएम योगी से पल्लवी पटेल ने की मुलाकात, अटकलों का दौर शुरू

बता दें कि कोर्ट ने स्टे लगाते हुए उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और दिल्ली प्रदेश सरकार से 26 जुलाई को जवाब मांगा था। कोर्ट ने तब कहा था कि ढाबा-रेस्टोरेंट मालिकों और फल-सब्जी विक्रेताओं से यह तो कहा जा सकता है कि वह कांवड़ियों को बेच रहे खाद्य पदार्थों का नाम लिखकर लगाएं। लेकिन उन्हें इस बात के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता कि वह मालिकों या कर्मचारियों की नाम और पहचान जाहिर करें।