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Tuesday, April 7, 2026
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महिला सुरक्षा के लिए जागरूकता अभियान

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  • मऊदरवाजा पुलिस का सराहनीय प्रयास

फर्रुखाबाद: पुलिस अधीक्षक आरती सिंह के निर्देशन में महिला सुरक्षा को लेकर विशेष जागरूकता अभियान चलाया गया। थाना मऊदरवाजा की महिला सुरक्षा विशेष दल टीम ने क्षेत्र में महिलाओं और बालिकाओं को संबोधित करते हुए उन्हें महिला हेल्पलाइन नंबर 1098, 181, 112, 1090 और 1076 की जानकारी दी।

इस दौरान पुलिस टीम ने नारी सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन को लेकर संवाद किया और बताया कि किसी भी आपात स्थिति में ये हेल्पलाइन नंबर तत्काल मदद के लिए सक्रिय रहते हैं।

टीम ने छात्राओं व महिलाओं को महिला संबंधी अपराधों की पहचान, उनसे बचाव और रिपोर्टिंग की प्रक्रिया के बारे में भी विस्तार से बताया।

अभियान का उद्देश्य महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ाना और कानून के प्रति जागरूकता फैलाना रहा।स्थानीय लोगों ने पुलिस के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रम समय-समय पर होने चाहिए ताकि महिलाएं अपने अधिकारों और सुरक्षा साधनों को बेहतर ढंग से समझ सकें।

नियम बनाम दबाव: बीडीओ ने सीडीओ को लिखा पत्र, बोले– नियमों से समझौता नहीं संभव

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– बढ़पुर ब्लॉक में प्रधानों के बहिष्कार पर गरमाई राजनीति, मनरेगा भुगतान पर उठा विवाद

फर्रुखाबाद। बढ़पुर ब्लॉक में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की वर्चुअल उन्मुखीकरण बैठक का ग्राम प्रधानों द्वारा सामूहिक बहिष्कार अब एक बड़ी प्रशासनिक बहस का विषय बन गया है। मंडलायुक्त की अध्यक्षता में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में एक भी ग्राम प्रधान के न जुड़ने से हड़कंप मच गया है। जब इस बहिष्कार के कारणों की तह में जांच हुई, तो मामला मनरेगा के तहत पक्के कार्यों के भुगतान से जुड़ा निकला।

ग्राम प्रधानों का आरोप है कि खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) अमरेश चौहान जानबूझकर योजनाओं की फीडिंग रोक रहे हैं, जिससे विकास कार्यों में बाधा उत्पन्न हो रही है। लेकिन बीडीओ चौहान ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए नियमों और तकनीकी प्रावधानों का हवाला देकर अपना पक्ष मजबूती से सामने रखा है।

बीडीओ चौहान के अनुसार, मनरेगा के अंतर्गत 60% राशि कच्चे कार्यों और 40% राशि पक्के कार्यों पर खर्च करने का अनुपात सुनिश्चित किया जाना अनिवार्य है। वर्तमान में ब्लॉक स्तर पर यह अनुपात असंतुलित हो गया है। ऐसे में फीडिंग रोकना नियमानुसार आवश्यक है जब तक कि जिला स्तर से विशेष अनुमति प्राप्त न हो।

खंड विकास अधिकारी ने इस स्थिति को लेकर मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) को एक औपचारिक पत्र भेजा है, जिसमें ब्लॉक की वास्तविक स्थिति और भुगतान में आई तकनीकी बाध्यता का उल्लेख करते हुए विशेष स्वीकृति की मांग की गई है। उन्होंने कहा कि नियमों की अनदेखी कर कोई कार्य करना न केवल अनुचित होगा बल्कि इससे पारदर्शिता और जवाबदेही की भावना पर भी प्रश्नचिह्न लगेगा।

बीडीओ चौहान ने यह भी कहा कि उन्हें एक राजनीतिक मोहरा बनाकर निशाना बनाया जा रहा है। “मैं ग्राम प्रधानों का सम्मान करता हूं, लेकिन सरकारी धनराशि के भुगतान में नियम सर्वोपरि हैं। दुर्भाग्यवश मुझे बिना कारण राजनीति का शिकार बनाया जा रहा है।

इस विवाद में एक और चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि कमालगंज क्षेत्र के एक मनरेगा कार्मिक ने प्रधानों को यह कहकर भ्रमित किया कि 60:40 अनुपात केवल ज़िला स्तर पर लागू होता है, और बीडीओ द्वारा भुगतान रोकना गलत है। इसी आधार पर प्रधानों ने बैठक का बहिष्कार किया।

बाद में कुछ ग्राम प्रधानों ने गोपनीयता की शर्त पर यह स्वीकार किया कि उन्हें इस तकनीकी जानकारी की पहले जानकारी नहीं थी और वे गलतफहमी के शिकार हो गए थे। “शुरुआत में लगा कि बीडीओ जानबूझकर भुगतान रोक रहे हैं, लेकिन अब समझ आया कि मामला नियमों और अनुपात की बाध्यता का है,” एक प्रधान ने कहा।

इस पूरे घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि विकास कार्यों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के बीच संतुलन बनाना कितना चुनौतीपूर्ण है। जहां जनप्रतिनिधि विकास की गति चाहते हैं, वहीं अधिकारियों पर नियमों और जवाबदेही का बोझ होता है। इस टकराव में संवाद और समझदारी ही समाधान का रास्ता है।

गंगा का जलस्तर बढ़ा, खतरे के निशान के करीब पहुंचा

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– नरौरा से 71 हजार क्यूसैक पानी छोड़ा गया, प्रशासन अलर्ट मोड पर

फर्रुखाबाद। जिले के पांचाल घाट स्थित गंगा नदी में जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। शुक्रवार सुबह 8:00 बजे तक गंगा का जलस्तर 136.55 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान के बेहद करीब है। वहीं, नरौरा बैराज से 71,077 क्यूसैक जल प्रवाह किए जाने की जानकारी सामने आई है, जिससे अगले 24 से 48 घंटे में जलस्तर में और वृद्धि की आशंका जताई जा रही है।

बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन सतर्क हो गया है। संभावित बाढ़ प्रभावित इलाकों में निगरानी तेज कर दी गई है और तटवर्ती गांवों को अलर्ट किया जा रहा है। बाढ़ चौकियों को सक्रिय किया जा रहा है और राहत एवं बचाव की तैयारियों की समीक्षा भी तेज कर दी गई है।

गौरतलब है कि बीते कुछ दिनों से पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही भारी बारिश के कारण नदियों में जलस्तर बढ़ रहा है। नरौरा से छोड़े गए पानी का असर फर्रुखाबाद में दो दिन बाद और अधिक देखने को मिल सकता है।

प्रशासन की अपील: प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि वे गंगा नदी के किनारे न जाएं और अफवाहों पर ध्यान न दें। आपात स्थिति में बाढ़ नियंत्रण कक्ष या स्थानीय प्रशासन से संपर्क करें।

रेल हादसा टला: कानपुर में भारी बारिश से धंसी रेलवे पटरी, कालिंदी एक्सप्रेस को बीच रास्ते में रोका गया

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कानपुर/ फर्रुखाबाद। कानपुर जिले में पिछले दो दिनों से हो रही लगातार मूसलधार बारिश के चलते एक बड़ा रेल हादसा होते-होते टल गया। चौबेपुर थाना क्षेत्र के मरियानी गांव के पास रेलवे ट्रैक अचानक धंस गया, जिससे फर्रुखाबाद से प्रयागराज जा रही कालिंदी एक्सप्रेस (Train No. 14122) को समय रहते रोक दिया गया। गनीमत रही कि समय पर सावधानी बरती गई और किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।

घटना शनिवार सुबह लगभग 5:20 बजे की है, जब कालिंदी एक्सप्रेस मरियानी गांव के पास पहुंची ही थी, तभी लोको पायलट को ट्रैक में असमानता महसूस हुई। उन्होंने तुरंत इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेन को रोक दिया। जांच में पाया गया कि भारी बारिश के कारण करीब 15 मीटर लंबा ट्रैक धंस चुका था, जिससे ट्रेन आगे नहीं बढ़ाई जा सकती थी।

ट्रेन के अचानक रुक जाने से डिब्बों में बैठे करीब 1,200 यात्री घबरा गए। कुछ देर के लिए डिब्बों में हड़कंप मच गया। हालांकि रेलवे अधिकारियों की त्वरित कार्रवाई से स्थिति को जल्द ही नियंत्रण में ले लिया गया। यात्रियों को अन्य ट्रेनों व वाहनों के माध्यम से वैकल्पिक मार्ग से गंतव्य की ओर रवाना किया गया।

रेलवे के वरिष्ठ खंड अभियंता एवं तकनीकी टीम मौके पर पहुंच गई और धंसे हुए ट्रैक की मरम्मत कार्य में जुट गई है। पूर्वोत्तर रेलवे के प्रवक्ता के अनुसार, ट्रैक को पूरी तरह दुरुस्त करने में 6 से 8 घंटे का समय लग सकता है। इस मार्ग पर फिलहाल सभी ट्रेनों का संचालन अस्थाई रूप से रोका गया है।

मौसम विभाग की जानकारी: पिछले 48 घंटे में कानपुर में 210 मिमी से अधिक वर्षा दर्ज की गई है।

रेलवे अधिकारी ने कहा –

 “अगर ट्रेन कुछ सेकेंड और आगे बढ़ जाती, तो बड़ा हादसा हो सकता था। ड्राइवर की सतर्कता से सैकड़ों लोगों की जान बचाई जा सकी।

किसी यात्री को कोई चोट नहीं आई है और सभी सुरक्षित हैं। रेलवे द्वारा सभी यात्रियों को पानी, नाश्ता और मदद उपलब्ध कराई गई।

एसपी के आदेशों की खुली अवहेलना: मोहम्मदाबाद कोतवाल का ‘कारखास’ अमरदीप अब तक लाइन हाजिर नहीं

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फर्रुखाबाद। पुलिस अधीक्षक आरती सिंह द्वारा हाल ही में लिए गए कड़े प्रशासनिक निर्णय के तहत थानों में तैनात दागी थानेदारों के 19 कारखास आरक्षियों और चालकों को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर करने के आदेश दिए गए थे। इस कार्रवाई के पीछे उद्देश्य था थानों में पनपते “अवैध गठजोड़” और अनुशासनहीनता पर नकेल कसना।

पुलिस अधीक्षक आरती सिंह ने स्पष्ट निर्देश दिया था कि सभी चिन्हित पुलिसकर्मियों को शाम तक पुलिस लाइन में रिपोर्ट करना अनिवार्य है।

उन्होंने यह भी दोहराया था कि आदेश की अवहेलना करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। लेकिन मोहम्मदाबाद कोतवाली से चौंकाने वाली जानकारी सामने आ रही है कि वहां के कोतवाल के कारखास आरक्षी अमरदीप अब तक डटे हुए हैं और लाइन हाजिर नहीं हुए हैं।

इस तरह पुलिस अधीक्षक के सख्त निर्देशों की खुलेआम अनदेखी किए जाने से विभागीय अनुशासन पर सवाल खड़े हो रहे हैं। आम चर्चा है कि या तो आदेश की अनदेखी जानबूझकर की जा रही है या फिर स्थानीय स्तर पर कोई ‘संबंधों की परत’ इस ढिलाई को संरक्षण दे रही है।

इस पूरे मामले पर अब जिले भर के थानों में सुगबुगाहट तेज है और अन्य आरक्षियों में यह सवाल गूंज रहा है कि क्या आदेश सभी के लिए समान हैं या कुछ को विशेष छूट मिली हुई है? पुलिस अधीक्षक आरती सिंह इस तरह की लापरवाही को किस रूप में लेंगी, यह देखना दिलचस्प होगा।

अवैध निर्माण पर एलडीए की बड़ी कार्रवाई, 9 प्लॉटिंग ध्वस्त, 4 व्यवसायिक भवन सील

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– गोसाईगंज, बीकेटी, काकोरी और अलीगंज सहित कई क्षेत्रों में चला बुलडोजर

लखनऊ। राजधानी लखनऊ में एलडीए (लखनऊ विकास प्राधिकरण) ने अवैध निर्माण के खिलाफ शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई की। एलडीए वीसी के निर्देश पर गठित विशेष टीमों ने गोसाईगंज, बीकेटी, काकोरी, अलीगंज और कृष्णनगर क्षेत्रों में दबिश देकर 9 अवैध प्लॉटिंग ध्वस्त कर दीं, साथ ही चार बड़े अवैध व्यवसायिक निर्माणों को सील कर दिया गया।
प्राधिकरण की टीम ने चेतावनी के बावजूद नियमों की अनदेखी कर विकसित की जा रही अवैध कॉलोनियों को चिन्हित कर बुलडोजर चलाया और मौके पर मौजूद लोगों को हटाकर निर्माण तोड़ा।

एलडीए के अधिकारियों के अनुसार, ये निर्माण बिना जरूरी अनुमति और ले-आउट पास कराए किए जा रहे थे, जो प्राधिकरण की नीतियों और नगर नियोजन मानकों का उल्लंघन है।

वहीं, अलीगंज और कृष्णनगर क्षेत्र में बिना नक्शा पास कर बनाए जा रहे व्यवसायिक निर्माणों को सील किया गया।

एलडीए ने कहा है कि भविष्य में भी इस तरह की कार्रवाई जारी रहेगी और आमजन से अपील की कि किसी भी जमीन या निर्माण से पहले पूरी वैधता की जानकारी जरूर लें।

एलडीए उपाध्यक्ष ने स्पष्ट कहा है कि अवैध निर्माण किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे और इसके लिए क्षेत्रीय अभियंताओं और प्रवर्तन दलों को लगातार निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।