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Thursday, March 26, 2026
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मोहन लाल गौड़ बने प्रिंट एवं इलेक्ट्रोनिक मीडिया एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष, इंदु को सौंपी गई जिले की जिम्मेदारी

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Media Association
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जिले में वरिष्ठ पत्रकारों को मिली अहम भूमिका, संगठन को मजबूत बनाने पर जोर

फर्रुखाबाद: प्रिंट एवं इलेक्ट्रोनिक मीडिया एसोसिएशन (Print and Electronic Media Association) की एक अहम बैठक शहर के लाल सराय स्थित प्रेस क्लब (press club) भवन में संपन्न हुई, जिसमें संगठन को सशक्त बनाने को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इस बैठक में संगठन के नव-निर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहन लाल गौड़ (Mohan Lal Gaur) एवं राष्ट्रीय महासचिव संजय शर्मा विशेष रूप से उपस्थित रहे। बैठक का संचालन वरिष्ठ पत्रकार इरशाद अली ने किया।

बैठक की शुरुआत पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष विनय सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित कर की गई। उपस्थित पत्रकारों ने दो मिनट का मौन रखकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। बैठक के दौरान इंदु को जनपद की प्रभारी नियुक्त किया गया, वहीं वरिष्ठ पत्रकार सर्वेन्द्र कुमार अवस्थी को जिलाध्यक्ष तथा वरिष्ठ पत्रकार इरशाद अली को जिला महामंत्री का दायित्व सौंपा गया। दोनों ही पत्रकारों के अनुभव और पत्रकारिता क्षेत्र में योगदान को देखते हुए यह जिम्मेदारी सौंपी गई, जिससे संगठन को निचले स्तर पर मजबूती मिलने की उम्मीद है।

इसी क्रम में जयपुर से आए वरिष्ठ पत्रकार अरशद वारसी को राजस्थान प्रभारी के रूप में नियुक्त किया गया। उन्हें इस मौके पर शॉल ओढ़ाकर सम्मानित भी किया गया, जिससे आयोजन स्थल पर उल्लास और सम्मान का वातावरण बना रहा। बैठक के समापन पर संगठन की आगामी योजनाओं पर विस्तृत चर्चा की गई। पत्रकारों ने संकल्प लिया कि संगठन को और अधिक प्रभावी और सशक्त बनाने के लिए हर स्तर पर कार्य किया जाएगा।

इस अवसर पर राष्ट्रीय कार्यकारिणी के उपाध्यक्ष अनिल प्रजापति, कोषाध्यक्ष दीपक तिवारी, राष्ट्रीय सदस्य विनय सक्सेना, सदस्य ताहिर खा बज्जू, स्थानीय पत्रकार रविंद्र भदौरिया, अरविंद शर्मा, मनोज जौहरी, महेश गुप्ता, ओम प्रकाश शुक्ला, सुरेश गुप्ता सहित जिले के विभिन्न क्षेत्रों — कायमगंज, शमशाबाद, जहानगंज, कमालगंज, राजेपुर आदि से लगभग तीन दर्जन से अधिक पत्रकार बंधु मौजूद रहे और बैठक को सफल बनाया। बैठक के अंत में सभी पत्रकारों ने नव-निर्वाचित पदाधिकारियों को बधाई दी और संगठन को मजबूती से आगे बढ़ाने का भरोसा दिलाया।

लखनऊ आगमन पर गृहमंत्री अमित शाह का भव्य स्वागत

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Amit Shah
Amit Shah

अमौसी एयरपोर्ट पर कैबिनेट मंत्री राकेश सचान ने किया आत्मीय स्वागत, सहकारिता क्षेत्र में नई योजनाओं पर चर्चा की संभावना

हृदेश कुमार

लखनऊ: देश के यशस्वी गृहमंत्री (Home Minister) एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह (Amit Shah) का आज लखनऊ (Lucknow) आगमन हुआ। उनके उत्तर प्रदेश पहुंचते ही अमौसी एयरपोर्ट पर राज्य सरकार के कैबिनेट मंत्री राकेश सचान ने पुष्पगुच्छ भेंट कर आत्मीय स्वागत किया। अमित शाह के साथ मौजूद केंद्रीय अधिकारियों व बीजेपी के वरिष्ठ पदाधिकारियों की उपस्थिति से यह स्वागत समारोह विशेष भव्यता लिए रहा।

गृहमंत्री के इस दौरे को सहकारिता मंत्रालय की योजनाओं को उत्तर प्रदेश में गति देने की दृष्टि से अहम माना जा रहा है। केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश में 8.5 लाख सहकारी समितियाँ कार्यरत हैं, जिनमें से उत्तर प्रदेश में लगभग 95,000 समितियाँ सक्रिय हैं। इनमें से करीब 70% समितियाँ कृषि से जुड़ी हैं, जो किसानों को बीज, खाद, और ऋण की सुविधा देती हैं।

अमित शाह द्वारा सहकारिता क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए हाल ही में प्रधानमंत्री सहकारिता योजना, डिजिटल सहकारिता पोर्टल, और राष्ट्रीय सहकारी निर्यात नीति जैसे कार्यक्रमों की घोषणा की गई है। उम्मीद है कि इस दौरे के दौरान इन योजनाओं के प्रदेश में क्रियान्वयन की समीक्षा और विस्तार पर भी चर्चा होगी।

सूत्रों के मुताबिक, अमित शाह लखनऊ प्रवास के दौरान राज्य के कानून-व्यवस्था, बॉर्डर सिक्योरिटी, और आंतरिक सुरक्षा तंत्र को लेकर उच्चस्तरीय बैठकें कर सकते हैं। गृह मंत्रालय के अनुसार, 2024 में उत्तर प्रदेश में दर्ज कुल 3.9 लाख आपराधिक मामलों में से 60% मामलों में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की है, जो एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन अपराध नियंत्रण के मोर्चे पर अब भी कई चुनौतियां बाकी हैं।

गृहमंत्री के आगमन से राजधानी लखनऊ में बीजेपी कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह देखा गया। एयरपोर्ट के बाहर बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी, संगठन मंत्री धर्मपाल सिंह, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक समेत कई वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी ने कार्यक्रम को गरिमा प्रदान की।

राज्य मंत्री राकेश सचान ने अपने स्वागत संदेश में कहा,

“देश के लोकप्रिय गृहमंत्री व सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह जी का उत्तर प्रदेश की पुण्यभूमि पर हार्दिक अभिनंदन करता हूँ। उनके नेतृत्व में सहकारिता क्षेत्र को नई दिशा और ऊर्जा मिली है, जिससे किसानों, ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में ऐतिहासिक पहल हुई है।”

अमित शाह का यह दौरा जहां एक ओर सहकारिता क्षेत्र के लिए नीति निर्धारण और समीक्षा का माध्यम बनेगा, वहीं दूसरी ओर आगामी योजनाओं और बीजेपी की रणनीति के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि उनके दौरे से उत्तर प्रदेश को किन-किन क्षेत्रों में नई गति मिलती है।

पुणे हादसा : इंद्रायणी नदी पर बना पुल टूटा, कई पर्यटकों के बहने की आशंका

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Pune
Pune

पुणे: जून के महीने में अलग-अलग राज्य से एक के बाद एक बड़े हादसे की खबर से सभी सदमे में है। अब महाराष्ट्र के पुणे (Pune) से हादसे की बड़ी खबर सामने आ रही है। पुणे के मावल के पास इंद्रायणी नदी (Indrayani river) पर बना पुल अचानक टूट गया। हादसे के दौरान बड़ी संख्या में पर्यटक (tourists) लोग मौजूद थे। कई लोगों के इस हादसे की चपेट में आने की आशंका जताई जा रही है। बताया जाता है कि, पुल टूटने के बाद पुल से नीचे गिरे पर्यटक नदी के तेज बहाव में बह गए। पानी में बहाव में सात लोगों मौत हो गई है वहीं पैंतीस से अधिक लोग जल तांडव के प्रयलय में बह गए मौके पर बचाव दल रेस्क्यू करने में जुटे।

जानकारी के मुताबिक, रविवार को छुट्टी के कारण पर्यटकों की भीड़ अधिक थी। सभी नदी का बढ़ा हुआ जलस्तर देखने के लिए आए हुए थे तभी अचानक से पुल ढह गया और कई पर्यटक इंद्रायणी में डूब गए। वहीं हादसे की सूचना मिलते ही मौके पर स्थानीय प्रशासन और पुलिस के आलाधिकारी और टीमें पहुंची हुईं हैं। रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया गया है।

खबरों के मुताबिक, इस हादसे में 10 से 15 लोगों के बहने की सभावना जताई गई है। जिनमें से 5 कि मौत हो गई है। जबकि 5 से 6 लोगों को बचा लिया गया है। मौके पर 15 से अधिक एम्बुलेंस पहुँच चुकी है। ग्रामीण और आपदा राहत कर्मी मौके पर पहुंचे और बचाव कार्य शुरू कर दिया गया है।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने हादसे को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों को दिशा-निर्देशित किया है। मुख्यमंत्री ने कहा, “मावल में पुल ढहने की घटना हुई है। मैंने डिविजनल कमिश्नर, तहसीलदार और पुलिस कमिश्नर से बात की है। कुछ लोग घायल हुए हैं, जिन्हें अस्पताल ले जाया गया है। अभी प्रशासन लोगों को राहत पहुंचाने की पूरी कोशिश कर रहा है।

 

 

बुल्डोजर से खुदाई के दौरान जमींदोज हुए 6 मकान, तीन की मौत, कई घायल

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Mathura
Mathura

मथुरा: मथुरा (Mathura) के थाना गोविंद नगर इलाके के माया टीला शाहगंज (Maya Tila Shahganj) के पास खुदाई के दौरान बड़ा हादसा हो गया। मकान की खुदाई में चल रहे बुल्डोजर (bulldozer) में एक साथ तीन जिंदगी चली गई। खबरों के मुताबिक, खुदाई के दौरान एक साथ छह मकान (houses) जमीदोज एक ही पिता के तीन बच्चों की मौत आठ से अधिक लोग मलबे में दबे होने की आशंका है। घटना की खबर लगते ही मौके पर राहत बचाव की टीमें रेस्क्यू में जुटी हुई है। इसके साथ ही घटनास्थल पर भारी पुलिस बल, एसडी आर एफ एन डी आर एफ की टीमें बचाव में जुटी है। हादसे में सभी घायलों को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया है।

जानकारी के मुताबिक, रविवार को करीब एक बजे थाना गोविंद नगर इलाके के माया टीला शाहगंज के पास बुल्डोजर से एक माकन की खुदाई की जा रही थी। इस दौरान उसके जद में आए आस-पास के छह माकन अचानक से जमींदोज हो गए। माकन गिरते ही जोरदार धमाके की आवाज सुनते ही पास के लोग पहुंच कर देखे बड़ा हादसा हो गया जिसमे माकन से बने मलबे में कई लोग दब गए। मलबे में दबे कई लोगों को बाहर निकाला गया। वहीं घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस और नगर निगम की टीम मौके पर पहुंचकर घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया।

पुलिस ने बताया घटनास्थल पर स्थानीय पुलिस, फायर सर्विस, नगर निगम और सिविल डिफेंस की टीमें रेस्क्यू अभियान में जुटी हुई है। जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक भी मौके पर पहुंच कर हालात पर नजर बनाए हुए हैं। प्रशासन की ओर से हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। पुलिस ने बताया मिट्टी का टीला खिसकने से 6 मकान गिर गए। इस हादसे में 3 की मौत हो गई और कई लोगों के दबे होने की आशंका है। फिलहाल रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।

 

एक्सईएन ने लगाया पिटाई का आरोप, डीएम ने कहा-जिम्मेदारी से भागने के लिए गढ़ी कहानी

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XEN
XEN

आजमगढ़: ये उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) है यहां पर कुछ भी हो सकता है। अगर आप वरिष्ठ अधिकारी है और दूसरे किसी अधिकारी से उसके किसी काम को लेकर जानकरी लेना चाहता है तो वो आप डर के रहिए नहीं तो कुछ भी आरोप लग सकता है। ऐसा ताजा मामला यूपी के आजमगढ़ (Azamgarh) जिले से सामने आया है। सिंचाई विभाग के बाढ़ खंड के एक्सईएन (XEN) अरुण सचदेव ने जिलाधिकारी (DM) रविंद्र कुमार पर कैंप कार्यालय में बुलाकर अभद्रता और डंडे से पिटाई करने का आरोप लगा है।

जिलाधिकारी रविंद्र कुमार द्वारा पीटे जाने की जानकारी पत्र के माध्‍यम से एक्‍सईएन अरुण सचदेवा ने सिंचाई विभाग के मुख्‍य अभियंता के साथ ही आजमगढ़ मंडल के कमिश्‍नर, डीआईजी, पुलिस अधीक्षक और उत्तर प्रदेश इंजिनियर्स असोसिएशन को दी है। उन्होंने पत्र में लिखा है कि, इस डीएम के इस हरकत से मेरा पूरा परिवार स्‍तब्‍ध है और डरा हुआ है। इस तनाव की हालत में मेरा आजमगढ़ में कार्य करना संभव नहीं है।

पत्र में उन्होंने लिखा, आजमगढ़ जिलाधिकारी ने बीते 13 जून की शाम को एक्‍सईएन को अपने कैंप कार्यालय में बाढ़ प्रभावित विस्‍थापितों के बारे में जानकारी के लिए बुलवाया। अंदर जाते ही बिना कुछ पूछे चिलाने लगे और कहने लगे खुद को क्या तुम हीरो समझते हो, बड़े हीरो बनते फिरते हो, तुमसे बड़ा हीरो मैं हूं।इसके बाद वे डंडा उठा लिए और दो-तीन डंडे मारकर कहा कि ‘जिस बाप को बताना है, बता दो। मेरा कोई कुछ नहीं कर पाएगा।

उधर, इस मामले के सामने आने के बाद जब जिलाधिकारी रविंद्र कुमार से पूछा गया तब आजमगढ़ जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने इन आरोपों को ख़ारिज कर दिया। रविंद्र कुमार ने अपने बयान में इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि कई बार बाढ़ के दौरान पानी आने वाले गांवों की सूची जब एक्सईएन अरुण सचदेव से मांगने के लिए कार्यालय बुलाया गया तब उनके पास कोई सूची नहीं थी। एक्सईएन अपने जवाब से बचने के लिए हम पर मनगढ़ंत आरोप लगाए है।

कानपुर में डीएम बनाम सीएमओ का घमासान – जवाबदेही बनाम अधिकारों की जंग?

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Sharad Katiyar
Sharad Katiyar

कानपुर—उत्तर प्रदेश का औद्योगिक और शैक्षणिक हब—इन दिनों एक अभूतपूर्व प्रशासनिक संकट का सामना कर रहा है। यह संकट किसी बाहरी आपदा का परिणाम नहीं, बल्कि जिले के दो शीर्ष अधिकारियों—जिलाधिकारी (डीएम) जितेंद्र प्रताप सिंह और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. हरिदत्त नेमी—के बीच उपजे टकराव का नतीजा है। जहां एक ओर डीएम ने सीएमओ पर भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं दूसरी ओर सीएमओ खुद को एक ‘ईमानदार और पारदर्शी अधिकारी’ के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं जिनके खिलाफ षड्यंत्र किया जा रहा है।
यह पूरा प्रकरण सिर्फ एक व्यक्ति विशेष की छवि धूमिल करने या उसे बचाने की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह मामला हमारे प्रशासनिक ढांचे, जवाबदेही, और राजनीतिक हस्तक्षेप के जटिल समीकरणों को उजागर करता है। इससे स्वास्थ्य व्यवस्था और जनहित से जुड़े सवाल भी खड़े हो रहे हैं।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने प्रमुख सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखकर सीएमओ को तत्काल हटाने की सिफारिश की। डीएम के अनुसार, सीएमओ ने कई मोर्चों पर लापरवाही बरती:

डीएम का आरोप है कि सीएमओ को जिले के स्वास्थ्य केंद्रों की बदहाली के संबंध में निर्देश दिए गए थे, मगर उन्होंने न तो उन पर कोई कार्रवाई की और न ही फॉलोअप किया।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत खाली पदों का विज्ञापन सार्वजनिक नहीं किया गया। साक्षात्कार के बाद परिणाम नहीं जारी किए गए।

सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि सिर्फ 10 दिनों के भीतर एक ही डॉक्टर का नौ बार तबादला किया गया। यह अपने आप में प्रशासनिक अनियमितता और कार्यदक्षता पर सवाल खड़े करता है।

वित्तीय कार्यों में गड़बड़ी

वित्तीय कार्यों की ज़िम्मेदारी डॉ. वंदना सिंह से हटाकर ऐसे व्यक्ति को दी गई जिसकी पृष्ठभूमि गैर-आर्थिक थी।
डीएम ने सीधे-सीधे सीएमओ की कार्यशैली को ‘भ्रष्ट और दिशाहीन’ करार दिया।

इस प्रकरण ने एक नया मोड़ तब लिया जब सोशल मीडिया पर एक कथित ऑडियो वायरल हुआ, जिसमें सीएमओ के चालक सूरज द्वारा डीएम के खिलाफ अपशब्द कहे जा रहे हैं। सीएमओ का कहना है कि यह ऑडियो ‘एआई जेनरेटेड’ है—यानी किसी कृत्रिम बुद्धिमत्ता तकनीक से छेड़छाड़ कर तैयार किया गया है।

हालांकि, इस दावे की तकनीकी पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है। और न ही पुलिस को इस संबंध में कोई आधिकारिक तहरीर मिली है। यह सवाल उठता है कि यदि यह क्लिप वास्तव में नकली है, तो सीएमओ प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर तुरंत कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे?

इस मुद्दे ने न सिर्फ अधिकारियों के बीच अविश्वास की खाई को और गहरा किया है, बल्कि प्रशासन की साइबर सुरक्षा और तकनीकी जवाबदेही पर भी सवाल खड़े किए हैं।

विवाद को राजनीतिक हवा उस समय मिली जब विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक को पत्र लिखकर सीएमओ के पक्ष में हस्तक्षेप की मांग की। उनका कहना है कि डॉ. नेमी एक सख्त और ईमानदार अधिकारी हैं, जिनके खिलाफ दुर्भावनावश अभियान चलाया जा रहा है।

यह पहली बार नहीं है जब उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में राजनीतिक ताकतें प्रशासनिक निर्णयों पर प्रभाव डालने की कोशिश कर रही हों। लेकिन जब यह हस्तक्षेप विधानसभा अध्यक्ष के स्तर से हो, तब यह तटस्थ प्रशासन की परिकल्पना को गहरा धक्का पहुंचाता है।

एक ओर डीएम का कर्तव्य है कि वह जिले में सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करे। दूसरी ओर, सीएमओ की भूमिका स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन और संवेदनशील फैसलों को निष्पक्षता से लागू करने की होती है।

लेकिन जब दो वरिष्ठ अधिकारी सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे पर कीचड़ उछालें, तो यह न सिर्फ जनमानस में अविश्वास पैदा करता है बल्कि नीचे तक के प्रशासनिक अधिकारियों के मनोबल को भी प्रभावित करता है।

यह घटना बताती है कि यदि नियमन और अधिकारों के बीच स्पष्ट रेखा खींची न जाए, तो टकराव अपरिहार्य हो जाते हैं।
यह विवाद कानपुर जैसे बड़े शहर में चल रही स्वास्थ्य योजनाओं और सेवाओं पर सीधा असर डाल रहा।

आम आदमी यह तय नहीं कर पा रहा कि दोषी कौन है—डीएम जो जवाबदेही की बात कर रहे हैं या सीएमओ जो भ्रष्टाचार के खिलाफ कदम उठाने का दावा कर रहे हैं।

स्वास्थ्य कर्मियों में असमंजस

कई डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के बार-बार तबादले से न सिर्फ सेवाएं प्रभावित हो रही हैं, बल्कि उनमें भविष्य को लेकर असुरक्षा का भाव भी पनप रहा है।

जब शीर्ष अधिकारी ही टकराव में उलझे हों, तो राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन जैसी जनहित योजनाओं की प्रगति में रुकावट आना तय है।

स्वतंत्र जांच समिति का गठन

मुख्यमंत्री को चाहिए कि इस पूरे प्रकरण की जांच के लिए स्वतंत्र और तटस्थ समिति गठित करें जिसमें प्रशासनिक, विधिक और तकनीकी विशेषज्ञ हों।

वायरल ऑडियो की AI जेनरेशन के दावे की तकनीकी सत्यता प्रमाणित करने हेतु साइबर फॉरेंसिक जांच होनी चाहिए।
डीएम और सीएमओ जैसे पदों पर आसीन अधिकारियों के लिए एक ‘संवाद प्रक्रिया’ या ‘मध्यस्थ तंत्र’ की स्थापना की जानी चाहिए, ताकि विवाद सार्वजनिक होने से पहले हल हो सकें।

शासन स्तर पर स्पष्ट गाइडलाइन बनाई जाए कि प्रशासनिक मामलों में राजनीतिक दबाव कैसे और कब स्वीकार्य है—और कब नहीं।

कानपुर में डीएम और सीएमओ के बीच चल रही यह जंग केवल दो अधिकारियों का आपसी विवाद नहीं है, बल्कि यह पूरे प्रशासनिक तंत्र के सामने एक सवालिया निशान है। क्या हमारे अफसरशाही में संवाद की कमी इतनी गहरी है कि हर असहमति विवाद में बदल जाती है? क्या तकनीक और राजनीतिक हस्तक्षेप प्रशासनिक जवाबदेही को निगल रहे हैं?
इस प्रकरण का हल केवल एक अधिकारी को हटाने या बचाने से नहीं निकलेगा। इसका समाधान एक ऐसी प्रशासनिक संस्कृति के निर्माण में है जिसमें पारदर्शिता, संवाद, और नियमों की सर्वोच्चता हो। वरना, अगली बार यह लड़ाई किसी और जिले में होगी, मगर असर हमेशा जनता पर ही पड़ेगा।