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Saturday, March 21, 2026
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संघर्ष से प्राप्त सफलता: स्वाभिमान का स्रोत, अभिमान का नहीं

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Sharad Katiyar
Sharad Katiyar

शरद कटियार

जीवन एक सतत संघर्ष की यात्रा है, जिसमें हर व्यक्ति अपने लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए कठिनाइयों से टकराता है। संघर्षों से निकली सफलता केवल मंज़िल तक पहुँचने का प्रमाण नहीं होती, बल्कि यह एक ऐसा अनुभव बन जाती है जो व्यक्ति के भीतर स्वाभिमान भर देती है, न कि अभिमान।

संघर्ष और सफलता का संबंध

संघर्ष वह प्रक्रिया है जो हमें भीतर से मज़बूत बनाती है। जब हम किसी कठिनाई, विपरीत परिस्थिति या चुनौतियों से लड़ते हुए अपने उद्देश्य तक पहुँचते हैं, तो वह सफलता हमारे लिए एक साधारण उपलब्धि नहीं रहती, बल्कि वह आत्मविश्वास और आत्मसम्मान की नींव बनती है। ऐसे में व्यक्ति अपनी मेहनत और संघर्ष को जानता है, इसलिए वह सफलता का घमंड नहीं करता, बल्कि उसकी सादगी और विनम्रता और भी बढ़ जाती है।

स्वाभिमान वह भावना है जिसमें व्यक्ति अपनी मेहनत, मूल्यों और सिद्धांतों पर गर्व करता है, लेकिन दूसरों को नीचा नहीं दिखाता। जबकि अभिमान व्यक्ति को दूसरों से श्रेष्ठ समझने का भ्रम देता है। संघर्ष से प्राप्त की गई सफलता व्यक्ति को यह सिखाती है कि वह जहाँ पहुँचा है, वहाँ तक पहुँचने में कितनी बार उसने गिरकर उठने की ताक़त दिखाई है। यही अनुभव उसे विनम्र और ज़मीन से जुड़ा बनाता है।

संघर्ष हमें सिखाता है कि जीवन में कुछ भी आसानी से नहीं मिलता। वह हमारे धैर्य, साहस और आत्मविश्वास की परीक्षा लेता है। जो लोग इन परीक्षाओं को पास करते हैं, वे न केवल अपने लक्ष्य को प्राप्त करते हैं बल्कि एक आदर्श व्यक्तित्व भी विकसित करते हैं। ऐसे लोगों की सफलता समाज के लिए प्रेरणा बनती है, घमंड का कारण नहीं।

देश-विदेश में ऐसे अनेक उदाहरण हैं जहाँ महान व्यक्तित्वों ने संघर्षों के लंबे दौर से गुज़रते हुए बड़ी सफलताएं अर्जित की हैं। डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम, महात्मा गांधी, बाबा साहेब अंबेडकर जैसे व्यक्तित्वों ने तमाम कठिनाइयों से लड़ते हुए अपने जीवन को एक मिसाल बना दिया। उनकी सफलता में कभी अहंकार नहीं दिखा, बल्कि विनम्रता और सेवा का भाव ही प्रबल रहा।

संघर्ष से टकराकर प्राप्त की गई सफलताएं हमें केवल लक्ष्यों तक नहीं पहुँचातीं, बल्कि हमारे भीतर एक सकारात्मक परिवर्तन लाती हैं। वे हमें सिखाती हैं कि सच्ची सफलता वह है जो स्वाभिमान तो पैदा करे, लेकिन अभिमान नहीं। यही भावना हमें एक बेहतर इंसान बनाती है और समाज के लिए प्रेरणा स्रोत भी।

पुलिस के खिलाफ बार एसोसिएशन का उबाल, वकीलों ने किया न्यायिक कार्य बहिष्कार का ऐलान

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Farrukhabad Bar Association
Farrukhabad Bar Association

– सचिव समेत अधिवक्ता पर फर्जी मुकदमा दर्ज करने से भड़के वकील, पुलिस पर गंभीर आरोप

फर्रुखाबाद। जिले की कानून व्यवस्था को लेकर एक बार फिर पुलिस कटघरे में खड़ी हो गई है। कोतवाली फतेहगढ़ क्षेत्र मे पुलिसकर्मियों द्वारा बार एसोसिएशन फर्रुखाबाद के वकील देवेंद्र सिंह यादव व सचिव कुंवर सिंह यादव के मामले में उनके विरुद्ध संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज किए जाने से अधिवक्ताओं में जबरदस्त आक्रोश फैल गया है। इस घटनाक्रम को लेकर बार एसोसिएशन ने आपात आम सभा की बैठक बुलाकर बड़ा निर्णय लिया है।

आरोप है कि बीती 2 जून 2025 को अधिवक्ताओं के साथ पुलिस द्वारा दुर्व्यवहार किया गया, और उसके बाद कोतवाली फतेहगढ़ में मुकदमा दर्ज कर दिया गया।

बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं ने पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा है कि यह कार्यवाही निहायत ही दुर्भावनापूर्ण है और इससे साफ प्रतीत होता है कि पुलिस अपनी सत्ता का दुरुपयोग कर अधिवक्ताओं को भयभीत करने का प्रयास कर रही है।

इस प्रकरण से क्षुब्ध होकर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष शशिभूषण दीक्षित की अध्यक्षता में एक आपात बैठक आयोजित की गई, जिसमें सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि अधिवक्ता 4 जून 2025 से 5 जून 2025 तक न्यायिक कार्य से पूर्ण रूप से विरत रहेंगे। यह बहिष्कार पुलिस की तानाशाही, अभद्रता एवं फर्जी मुकदमे के विरोध में एक सशक्त कदम है।

सचिव कुंवर सिंह यादव और वरिष्ठ उपाध्यक्ष अजय सिंह शाक्य द्वारा जारी किए गए संयुक्त पत्र में इस निर्णय की जानकारी दी गई है। पत्र में पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं और मांग की गई है कि इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच हो तथा दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जाए।
बार एसोसिएशन से जुड़े वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने कहा है कि यह पहली बार नहीं है जब पुलिस द्वारा वकीलों को प्रताड़ित किया गया हो। बीते कुछ समय से पुलिस अधिवक्ताओं को निशाना बना रही है, जो न्याय के मंदिर में अहम भूमिका निभाते हैं। यदि अधिवक्ताओं को ही भय और फर्जी मुकदमों में उलझाकर दबाया जाएगा, तो आम जनता को न्याय कैसे मिलेगा?

प्रशासन की चुप्पी पर भी उठे सवाल

वकीलों ने जिला प्रशासन की चुप्पी पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जब अधिवक्ताओं को ही न्याय नहीं मिलेगा, तो फिर आमजन को न्याय दिलाने की उम्मीद कैसे की जा सकती है? प्रशासन को तत्काल हस्तक्षेप कर निष्पक्ष जांच करानी चाहिए।

संघर्ष आगे भी रहेगा जारी

बार एसोसिएशन ने यह स्पष्ट किया है कि यदि पुलिस की मनमानी और प्रताड़ना बंद नहीं हुई तो संघर्ष को और व्यापक रूप दिया जाएगा। आगामी रणनीति के लिए एक विशेष अधिवेशन जल्द ही बुलाया जाएगा।

सीमेंट से भरा ट्राला अनियंत्रित होकर वैन पर पलटा, 9 की मौत

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झाबुआ। मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले के मेघनगर थाना क्षेत्र में सीमेंट से भरा एक ट्राला अनियंत्रित होकर वैन पर पलट गया, जिससे वैन सवार 11 लोगों में 09 की मौत हो गयी, जबकि दो घायल हो गए। घायलों को समीप के अस्पताल ले जाया गया है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार कल देर रात्रि राजस्थान से सीमेंट लेकर आ रहा ट्राला (ट्रक) जिले के मेघनगर थाना क्षेत्र में अनियंत्रित होकर एक वैन के ऊपर पलट गया। दुर्घटना में वैन चकनाचूर हो गयी। हादसे में वैन सवार 11 लोगों में 09 की मौत हो गयी, जबकि दो अन्य घायल हो गए।

घायलों को समीप के अस्पताल ले जाया गया, जहां के एक को गंभीर हालत में गुजराज के दाहोद ले जाया गया है। वैन सवार सभी लोग मेघनगर के निवासी हैं, जो एक शादी समारोह से लौट रहे थे।

मृतकों में छह महिलाए और तीन पुरुष शामिल हैं, जिनकी पहचान मुकेश खपेड़ (40) अकली परमार (35), विनोद खपेड़ (16), कुमारी पायल (12), मडीबाई बामनिया (38), विजय (14), कुमारी कान्ता (14), रागनी बामनिया (09), शवलीबाई खपेड़ (35) के रूप में हुई है।

महसी क्षेत्र में भू-माफियाओं का बोलबाला

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– हरदी थाना पुलिस पर गंभीर आरोप
– पत्रकार की जमीन पर दबंगों ने किया अवैध कब्जा
– न्यायालय के आदेशों की उड़ी धज्जियां

घनश्याम वर्मा

बहराइच (महसी)। जनपद के महसी तहसील अंतर्गत हरदी थाना क्षेत्र में इन दिनों भू-माफियाओं का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि अब पत्रकारों की जमीन पर भी दबंगई से कब्जा किया जा रहा है। केदार पुरवा उदवापुर गांव में पत्रकार रोहित कुमार की जमीन पर दबंगों द्वारा अवैध कब्जा किए जाने का मामला सामने आया है, वहीं पीड़ित पत्रकार की शिकायत के बावजूद स्थानीय पुलिस मूकदर्शक बनी हुई है।

सूत्रों के अनुसार, पीड़ित पत्रकार रोहित कुमार ने कई बार थाने से लेकर जिला प्रशासन तक गुहार लगाई, मगर हर बार उसे गुमराह किया गया। यहां तक कि न्यायालय द्वारा दिए गए स्पष्ट आदेशों का भी पालन नहीं किया गया। दबंग तत्वों को राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त होने की आशंका जताई जा रही है।

इस प्रकरण में क्रांतिकारी पत्रकार परिषद संगठन ने खुलकर रोहित कुमार का समर्थन किया है। संगठन के पदाधिकारियों ने जिला अधिकारी से मिलकर इस पूरे मामले की शिकायत की थी, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई। संगठन का कहना है कि यदि जल्द ही आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही नहीं की गई, तो वे भू-माफियाओं और उनके साथ संलिप्त अधिकारियों के खिलाफ सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे।

क्रांतिकारी पत्रकार परिषद के सदस्यों ने चेतावनी दी है कि यह सिर्फ एक पत्रकार पर अन्याय नहीं है, बल्कि अभिव्यक्ति की आज़ादी और कानून के शासन की अवहेलना है। संगठन जल्द ही इस मामले को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस और धरना प्रदर्शन करेगा।

प्रशासन की चुप्पी सवालों के घेरे में:

हरदी थाना पुलिस की निष्क्रियता और न्यायालय के आदेशों की अनदेखी से आमजन में रोष व्याप्त है। लोगों का कहना है कि अगर पत्रकार तक सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिकों की सुरक्षा की गारंटी कौन देगा?

महसी के लौहपुरुष स्व. पं. बाबूराम बाजपेई की 23वीं पुण्यतिथि पर सैकड़ों श्रद्धालुओं ने अर्पित की भावभीनी श्रद्धांजलि

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महसी (बहराइच)। महसी क्षेत्र के प्रसिद्ध समाजसेवी, जमींदार और ब्राह्मण समाज के प्रेरणास्रोत स्वर्गीय पं. बाबूराम बाजपेई जी की 23वीं पुण्यतिथि उनके पैतृक निवास रामनिधि नगर, बहोरिकपुर (निकट तहसील मुख्यालय महसी) में श्रद्धा और भावनाओं के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में अधिवक्ता संघ बहराइच के अध्यक्ष एवं उनके सुपुत्र पं. रामजी बाजपेई एडवोकेट सपरिवार मौजूद रहे।

प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी पुण्यतिथि पर क्षेत्र के सैकड़ों जनप्रतिनिधि, अधिवक्ता, विद्वान, ब्राह्मण समाज के प्रमुखजन और ग्रामवासी एकत्र हुए। सभी ने सामूहिक रूप से श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए उन्हें शत् शत् नमन किया और सामूहिक भोज में भाग लिया।

सभा में वक्ताओं ने स्व. पं. बाबूराम बाजपेई को महसी का “लौहपुरुष” बताते हुए उनके अनुशासित जीवन, दृढ़ निश्चय, त्याग और समाजसेवा की भावना की सराहना की। उन्होंने बताया कि बाबूराम बाजपेई न केवल एक सफल जमींदार थे, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों की मदद और न्याय के पक्षधर भी थे।

इस अवसर पर लोकप्रिय विप्रशिरोमणि पं. देवेश चंद्र मिश्र मंजनू, पूर्व जिला पंचायत सदस्य पं. केदारनाथ अवस्थी, शिक्षाविद् पं. रामसागर पांडेय, अधिवक्ता श्री जयप्रकाश सिंह, पं. गिरिजेश दत्त बाजपेई, पं. पुण्डरीक पांडेय, पं. चंचरीक पांडेय, पं. कृष्ण मुरारी त्रिपाठी, पं. शिवशंकर बाजपेई, पं. मोहित बाजपेई, पं. बेचे लाल बाजपेई, पं. बराती लाल बाजपेई, पं. परमानंद बाजपेई, पं. तीरथराम शुक्ल, पं. रामानंद बाजपेई, पं. शिवशरण बाजपेई, पं. राजेश दत्त बाजपेई, पं. धर्मेंद्र मिश्र सोनू, लोकनाथ त्रिवेदी, रामगोपाल बाजपेई, संतशरण बाजपेई, पं. माधव दीन मिश्र, प्रमोद कुमार, पूर्व प्रधान रेहुआ मंसूर ज्ञानी बाबा सहित सैकड़ों क्षेत्रीय सम्भ्रांतजन एवं ग्रामवासी मौजूद रहे।

कार्यक्रम का समापन सामूहिक भोज और स्व. पं. बाबूराम बाजपेई के जीवन दर्शन पर आधारित विचार गोष्ठी के साथ हुआ, जिसमें उन्हें सच्चे अर्थों में ‘पितृ देवो भव’ की संज्ञा दी गई।

ली जे-म्यांग ने दक्षिण कोरिया के नए राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली

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Lee Jae-myung
Lee Jae-myung

सोल: दक्षिण कोरिया के नये राष्ट्रपति ली जे-म्यांग ने बुधवार को औपचारिक रूप से पद एवं गोपनीयता की शपथ ली।

देश के 21वें राष्ट्रपति ने नेशनल असेंबली बिल्डिंग में पद और गोपनीयता की शपथ ली। श्री जे-म्यांग ने शपथ लेने के बाद कहा कि उनको राष्ट्रपति चुनाव में जिन लोगों का समर्थन प्राप्त हुआ है वह उनके सदा आभारी रहेंगे।

बहुमत वाली उदारवादी डेमोक्रेटिक पार्टी के श्री जे-म्यांग ने 49.42 प्रतिशत समर्थन हासिल किया और रूढ़िवादी पीपुल पावर पार्टी के अपने कट्टर प्रतिद्वंद्वी किम मून-सू को 8.27 प्रतिशत अंकों के बड़े अंतर से हराया।

गौरतलब है कि यह चुनाव उस असाधारण राजनीतिक संकट के बाद हुआ है, जिसमें पूर्व राष्ट्रपति यून सुक योल को दिसंबर 2024 में मार्शल लॉ लगाने की कोशिश की थी, जिन्हें बाद में महाभियोग का सामना करना पड़ा था।

श्री यून ने अपने पांच वर्षीय कार्यकाल के बीच 03 दिसंबर 2024 को मार्शल लॉ का एलान किया था, जिससे दक्षिण कोरिया ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया चौंक गई थी। यह 1987 में लोकतंत्र की बहाली के बाद पहली बार था जब किसी राष्ट्रपति ने ऐसा कदम उठाया था।

शपथ ग्रहण समारोह में पार्लियामेंट, सुप्रीम कोर्ट, संवैधानिक न्यायालय और चुनाव निगरानी संस्था के प्रमुखों के साथ-साथ सांसदों और कैबिनेट सदस्यों ने भी भाग लिया। कार्यक्रम से पहले नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जे-म्यांग ने सोल राष्ट्रीय कब्रिस्तान में श्रद्धांजलि अर्पित की, जहां देश के लिए बलिदान देने वालों को दफनाया गया है।