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Saturday, March 21, 2026
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लाश उठा लो जा कर…., शक के चलते पत्नी की गला रेतकर निर्मम हत्या

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यूपी के जिले गोरखपुर से एक दिल दहलाने वाला मामला सामने आया। जहां एक युवक ने अपनी पत्नी की ह्त्या करने के बाद थाने पहुंचकर सरेंडर कर दिया। उसने थानेदार को बोला की पत्नी का गला रेतकर ह्त्या कर दी है घर जा कर लाश उठा लो। उसकी बात सुनकर पुलिसवालों के रोंगटे खड़े हो गए। आनन-फानन में जब पुलिस और फोरेंसिक टीम घटनास्थल पर पहुंची, तो कमरे में आरोपी की पत्नी की लाश बेड पर पड़ी थी। फर्श पर खून बिखरा पड़ा था।

बताया जा रहा है कि हत्यारोपी युवक ने 2 साल पहले घर के सामने रहने वाली युवती से लव मैरिज की थी। अब उसी युवती के किसी दूसरे लड़के से अफेयर के शक में बेरहमी से हत्या कर दी। हत्या करने के बाद वो एक घंटे तक लाश के पास बैठा रहा। उसके बाद थाने पर जाकर सरेंडर कर दिया।

गोरखपुर के सहजनवा थानाक्षेत्र के पिपरा वार्ड नंबर-2 (घटना स्थल) में बुधवार की सुबह सबकुछ सामान्य नहीं था। दरअसल, यहां किराए पर रहने वाला और कर्नाटक में कारपेंटर का काम करने वाला बाहिलपार गांव निवासी अंगद शर्मा थाने पहुंचा और उसने पुलिसवालों को बताया कि उसने पत्नी नेहा शर्मा की गला रेतकर हत्या कर दी है। ये सुनते ही पुलिसवालों के होश उड़ गए। अंगद ने कहा कि घर में लाश पड़ी है जाकर लाश उठा लो।

आनन-फानन में पुलिस उसे लेकर उसके घर पहुंची। वहां नेहा की लाश बेड पर खून से लथपथ पड़ी थी। पुलिस ने गहन जांच की और फोरेंसिक टीम ने मौके से सबूत जुटाए। पुलिस की शुरुआती जांच में पता चला है कि आरोपी ने 2 साल पहले नेहा से लव-मैरिज की थी। अफेयर के शक में उसने वारदात को अंजाम दिया है।

दो साल पहले की थी लव मैरिज

अंगद शर्मा कर्नाटक में बढ़ई का काम करता है। उसने दो साल पहले नेहा से लव मैरिज की थी। नेहा का घर अंगद के घर के सामने है। दोनों की जाति अलग-अलग होने के कारण परिवार वाले इस शादी के खिलाफ रहे हैं। यही वजह है कि दोनों ने मंदिर में जाकर शादी कर ली

शादी के बाद अंगद पत्नी नेहा को लेकर कर्नाटक चला गया। कुछ दिन बाद वापस गांव लेकर आया था। नेहा को सहजनवा में किराए पर कमरा दिलवाया, लेकिन नेहा की गीडा क्षेत्र में रहने वाली बड़ी बहन के घर चली गई। वहां पर एक वाहन एजेंसी में काम करने लगी।

दो महीने पहले अंगद लौटकर आया, तो उसने पत्नी को किसी से मोबाइल पर किसी से बात करते देखा। इस पर उसने पूछा- किससे बात कर रही हो। नेहा ने बताया कि कंपनी के प्रोजेक्ट के बारे में बात कर रही है। इसके बाद आए दिन दोनों में झगड़ा होने लगा।

रात में की थी लड़ाई

अंगद ने नेहा से 3 जून को रात में भी लड़ाई की थी। इसके बाद दोनों सो गए। सुबह उठकर उसने नेहा के सिर पर वार किया। फिर उसका गला रेत दिया। एक घंटे लाश के पास बैठा रहा। आखिर में खुद ही थाने पहुंचकर सरेंडर कर दिया।

मृतका नेहा की बहन सुशीला ने बताया कि उसकी बहन ने अंगद शर्मा से 2 साल पहले लव मैरिज की थी। उसने बताया कि अंगद शर्मा ने उनकी बहन की धारदार हथियार से गला रेत कर हत्या कर दी और उसके बाद थाने पर पहुंचकर सरेंडर कर दिया। सुशीला ने मांग की है कि उसकी बहन की हत्या करने वाले को फांसी की सजा दी जानी चाहिए।

फिलहाल, इस संबंध में गोरखपुर के एसपी नॉर्थ जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि एक युवक ने पत्नी की गला रेतकर हत्या कर हत्या कर दी है। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस और फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल पर जांच पड़ताल की है और साक्ष्य संकलन किया है। आरोपी को हिरासत में ले लिया गया है। आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है।

देश में 24 घंटे में कोरोना से 7 मौतें, इतने लोग हुए संक्रमित

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नयी दिल्ली: देश में बुधवार सुबह आठ बजे तक कोविड-19 के सक्रिय मामलों की संख्या बढ़कर 4,302 हो गई है, जबकि मंगलवार को यह संख्या 4,026 थी।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने रिपोर्ट जारी करके आंकड़ों की सूचना दी। पिछले 24 घंटों में करोना संक्रमण से सात लोगों की मौत हो गयी।

इस अवधि में इस कोविड-19 संक्रमण के 300 नये मामले सामने आए हैं, जिनमें सबसे ज्यादा मामले केरल में दर्ज किए गए हैं। दिल्ली, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में भी मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।

इस बीच, 3,281 मरीज ठीक हो चुके हैं और उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। हाल ही में पश्चिम बंगाल में 60, उत्तर प्रदेश में 63 और दिल्ली में 64 नए मामले सामने आए हैं। एक दिन पहले ही दिल्ली में 47 और केरल में 35 नए मामले सामने आए थे।

स्वास्थ्य अधिकारी स्थिति पर कड़ी निगरानी रख रहे हैं। अस्पताल में भर्ती होने की दर हालांकि अपेक्षाकृत कम है।

हिमाचल प्रदेश में मंगलवार को पहली बार सिरमौर जिले के नाहन में नवीनतम उछाल का पहला मामला सामने आया, जो वायरस के क्षेत्रों में निरंतर प्रसार का संकेत देता है।

जबकि कई देशों में कोविड-19 के मामलों में फिर से वृद्धि देखी जा रही है। कुल मिलाकर मृत्यु दर कम बनी हुई है तथा अधिकांश संक्रमित व्यक्तियों में हल्के लक्षण दिखाई दे रहे हैं।

दिल्ली और उत्तराखंड की सरकारों ने अस्पतालों से पर्याप्त बेड, ऑक्सीजन की आपूर्ति, दवाइयों और टीकों को सुनिश्चित करके पर्याप्त रूप से तैयार रहने का आग्रह करते हुए सलाह जारी की है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान में देश में सबसे प्रचलित वैरिएंट जेएन.1 है, जो परीक्षण किए गए नमूनों का 53 प्रतिशत है, इसके बाद बीए .2 26 प्रतिशत है तथा ओमिक्रॉन सबलाइनेज शेष 20 प्रतिशत हैं।

लखनऊ से कानपुर का सफर मात्र इतने मिनट में होगा पूरा, इस स्पीड में दौड़ेंगी ट्रेनें

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लखनऊ : अब ट्रेन से लखनऊ जाने में सवा से डेढ़ घंटे नहीं बल्कि 40 से 45 मिनट ही दूरी तय होगी। कानपुर-लखनऊ रेल मार्ग पर ट्रैक को सुधारने का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। अब इस ट्रैक पर 120 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से ट्रेनें दौड़ेंगी।

कार्य पूरा होने के बाद लखनऊ जंक्शन से स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस, चित्रकूट एक्सप्रेस, आईआरसीटीसी तेजस एक्सप्रेस समेत अन्य सुपरफास्ट ट्रेनों की गति को बढ़ाकर परीक्षण किया जा चुका है। परिचालन बेहतर मिला है। इस रूट पर जून में ही ट्रेनों की औसत रफ्तार 120 किलोमीटर प्रतिघंटा कर दी जाएगी। इसका सबसे ज्यादा फायदा दैनिक यात्रियों को होगा। रोजाना करीब 60 हजार यात्री कानपुर से लखनऊ की यात्रा करते हैं। बता दें कि दिसंबर 2024 में इस रेलखंड का अफसरों ने निरीक्षण किया था, तभी से रफ्तार बढ़ाने की तैयारी चल रही थी।

गंगा पुल से भी रफ्तार से गुजरेंगी ट्रेनें

शुक्लागंज के पुराने गंगा पुल की मरम्मत के बाद अब इस पर भी ट्रेनें रफ्तार पकड़ेंगी। अप्रैल तक इस पुल पर एच-बीम स्लीपर डालने के लिए प्रतिदिन नौ घंटे का मेगा ब्लॉक लिया गया था। मरम्मत का काम समय से पहले ही पूरा कर लिया गया था। इस पुल से अब 10 की जगह 45 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेनें गुजारी जाएंगी।

तेज गति से चलेगी गाड़ियां

कानपुर सेंट्रल निदेशक, आशुतोष सिंह ने बताया कि ट्रेनों की गति बढ़ाने का काम काफी समय से चल रहा है। अब कार्य पूरा होने के बाद इनकी रफ्तार बढ़ाई जाएगी। इससे यात्रियों को सहूलियत होगी।

संवेदनशील मन और ओवर थिंकिंग: जीवन की जटिलताओं से बाहर निकलने की कला

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– विकास कटियार

हमारे मन की दुनिया बेहद गहराई और जटिलता से भरी होती है। कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनका मन बहुत ही संवेदनशील होता है। वे हर बात को दिल से लेते हैं, दूसरों की खुशियों और दुखों को अपने अनुभव की तरह महसूस करते हैं। ऐसा मन इंसान को एक खास संवेदना और समझदारी देता है, लेकिन कभी-कभी यह संवेदनशीलता ही जीवन में उलझनों का कारण बन जाती है।

यदि संवेदनशीलता के साथ अत्यधिक सोचने की प्रवृत्ति यानी ओवर थिंकिंग जुड़ जाए, तो जीवन तनावपूर्ण और जटिल हो जाता है। ऐसे लोग अक्सर छोटे-छोटे मामलों में फंस जाते हैं, अपनी खुशियों को खो बैठते हैं और असहज महसूस करते हैं।

संवेदनशीलता एक ऐसी क्षमता है जो हमें भावनाओं को गहराई से महसूस करने, दूसरों के दर्द को समझने और उनकी मदद करने की प्रेरणा देती है। यह एक वरदान है जो हमें मानवता की गहराई तक ले जाता है। संवेदनशील लोग सामाजिक और व्यक्तिगत संबंधों में अधिक सहानुभूति और प्रेम दिखाते हैं।लेकिन जब संवेदनशील मन अत्यधिक सोचने लग जाता है, तो छोटी-छोटी बातों का बोझ इतना बढ़ जाता है कि वे अपनी ही सोच की गिरफ्त में आ जाते हैं। यह स्थिति कई बार तनाव, चिंता, और मानसिक थकान की वजह बन जाती है।ओवर थिंकिंग का अर्थ है किसी विषय या समस्या पर जरूरत से ज्यादा सोचते रहना, बिना किसी निर्णायक कदम के बार-बार उसी बात को दोहराना। यह मानसिक अवस्था बहुत हानिकारक होती है क्योंकि:यह समस्या का समाधान नहीं करती, बल्कि उलझनों को बढ़ाती है।

चिंता और डर की भावना को जन्म देती है।निर्णय लेने की क्षमता कम कर देती है।मन को थका देती है और खुशी से दूर करती है।

अक्सर हम ऐसा इसलिए करते हैं क्योंकि हमें भविष्य के अनिश्चित परिणामों का डर होता है या हम किसी परिस्थिति को लेकर बहुत अधिक परफेक्शनिस्ट होते हैं।

संवेदनशील मन भावनाओं और अनुभवों को गहराई से महसूस करता है, जबकि ओवर थिंकिंग मन की एक ऐसी आदत है जो हमें लगातार उन भावनाओं और परिस्थितियों के बारे में सोचने के लिए मजबूर करती है। संवेदनशीलता हमारे जीवन में सूक्ष्मता और गहराई लाती है, लेकिन ओवर थिंकिंग हमारे मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को कमजोर कर देती है।
ओवर थिंकिंग के नुकसान हैं जैसे बार-बार सोचने से मन में चिंता का स्तर बढ़ जाता है। सोच का अतिरेक निर्णय लेने की शक्ति को कमजोर करता है। ओवर थिंकिंग के कारण हम दूसरों की बातों को गलत समझ सकते हैं या छोटे विवादों को बड़ा बना सकते हैं। मानसिक तनाव का असर शारीरिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है, जैसे नींद की कमी, सिरदर्द, और पेट की समस्याएं।

ओवर थिंकिंग से बचने के व्यावहारिक उपाय हैं जैसे-

अक्सर हमारा मन अतीत की गलतियों या भविष्य की चिंताओं में फंसा रहता है। वर्तमान पल पर ध्यान केंद्रित करें। ध्यान और मेडिटेशन जैसी तकनीकें मन को शांत करती हैं और आपको वर्तमान में जीना सिखाती हैं।

जब भी मन में बार-बार एक ही बात आने लगे, खुद से पूछें कि क्या इसे सोचने से कोई समाधान मिलेगा? यदि नहीं, तो ध्यान अपनी ऊर्जा को सकारात्मक और रचनात्मक कामों में लगाएं।

हर समस्या में सकारात्मक पहलू खोजने की कोशिश करें। अपने विचारों को सकारात्मक दिशा में मोड़ना मानसिक तनाव कम करता है।

संवेदनशील होना अच्छा है, लेकिन खुद को दोषी ठहराना या बहुत ज्यादा उम्मीदें रखना सही नहीं। खुद को समय दें, गलती को स्वीकार करें और आगे बढ़ें।

छोटे-छोटे फैसलों को जल्दी लें। इससे मन की उलझन कम होगी और आत्मविश्वास बढ़ेगा। “परफेक्ट” निर्णय की बजाय “अच्छा” निर्णय लेना सीखें।

पर्याप्त नींद, संतुलित आहार, और नियमित व्यायाम मन को स्वस्थ और सक्रिय रखते हैं। मानसिक स्वास्थ्य का सीधा संबंध शारीरिक स्वास्थ्य से है।

जब ओवर थिंकिंग आपको पूरी तरह से घेर ले, तो किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बात करें या मनोवैज्ञानिक की मदद लें। बात करने से मन हल्का होता है और दृष्टिकोण स्पष्ट होता है।

संवेदनशीलता हमें इंसानियत की जड़ से जोड़ती है। यह हमें बेहतर इंसान बनाती है, जो दूसरों के दुख-सुख को समझ सकता है। लेकिन इसे नकारात्मक सोच और अति विश्लेषण की जगह नहीं देना चाहिए।

संवेदनशीलता और सोच का संतुलन जीवन को सार्थक और सुखमय बनाता है। जीवन में आने वाली समस्याओं का सामना धैर्य, समझदारी और सकारात्मक सोच से किया जा सकता है।

जिस इंसान का मन अत्याधिक सोचने वाला हो और हृदय बेहद संवेदनशील हो, उसका जीवन सामान्यतः कठिनाइयों से भरा होता है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि जीवन हमेशा उलझनों में ही गुजरता रहे। संवेदनशीलता की खूबसूरती को समझें, लेकिन ओवर थिंकिंग से सावधान रहें।

संवेदनशील रहिए, लेकिन सोच को नियंत्रण में रखिए। यही जीवन को आसान और खुशहाल बनाने की कुंजी है। याद रखिए, आपका मन आपके जीवन का मार्गदर्शक है, उसे सही दिशा देना आपकी जिम्मेदारी है।

यूपी में फिर बदलेगा मौसम, लखनऊ समेत इन जिलों में बारिश का अलर्ट

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लखनऊ। प्रदेश में इन दिनों नौतपा चल रहा है, लेकिन हो रही बरसात ने भीषण गर्मी से लोगों को राहत देने का काम कर रही है। यूपी में तेज हवा और बूंदाबांदी का यह दौर दो दिन और जारी रहेगा। इसके बाद गर्म हवा फिर परेशान करेगा । बता दें कि इधर दो दिन के बाद शनिवार से लू चल सकती है और अधिकतम तापमान में 5 से 6 डिग्री तक बढ़ने के अनुमान है।

इधर मौसम विभाग ने बताया है कि मंगलवार को बिजनौर, मुजफ्फरनगर, शामली और सहारनपुर समेत प्रदेश के कई स्थानों पर तेज हवा के साथ बूंदाबांदी होने से 2 से 3 डिग्री तक तापमान में गिरावट दर्ज किया है । बुधवार को भी यह सिलसिला जारी रहेगा। वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि 5 जून तक मौसम के ऐसा ही रहने के आसार हैं। इसके बाद प्रदेश में पछुआ हवा चलने के संकेत हैं। इससे अधिकतम तापमान में 6 डिग्री तक बढ़ने के आसार है ।

वहीं इन शहरों में बूंदाबांदी और वज्रपात का अलर्ट जारी किया गया है। अमेठी, सुल्तानपुर, अयोध्या, अंबेडकरनगर, सहारनपुर,हापुड़, गौतमबुद्धनगर, बुलंदशहर, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, पीलीभीत,बांदा, चित्रकूट, कौशांबी, प्रयागराज, फतेहपुर, प्रतापगढ़, सोनभद्र, मिर्जापुर,जौनपुर, गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ, बलिया, देवरिया, गोरखपुर,संतकबीरनगर, बस्ती, कुशीनगर, महाराजगंज, सिद्धार्थनगर, गोंडा, चंदौली, वाराणसी, भदोही, लखनऊ, बाराबंकी, रायबरेली, शामली, मुजफ्फरनगर, बागपत, मेरठ, गाजियाबाद, शाहजहांपुर, संभल, बदायूं, हमीरपुर, महोबा, झांसी, ललितपुर। बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, हरदोई, उन्नाव शामिल है।

संघर्ष से प्राप्त सफलता: स्वाभिमान का स्रोत, अभिमान का नहीं

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Sharad Katiyar
Sharad Katiyar

शरद कटियार

जीवन एक सतत संघर्ष की यात्रा है, जिसमें हर व्यक्ति अपने लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए कठिनाइयों से टकराता है। संघर्षों से निकली सफलता केवल मंज़िल तक पहुँचने का प्रमाण नहीं होती, बल्कि यह एक ऐसा अनुभव बन जाती है जो व्यक्ति के भीतर स्वाभिमान भर देती है, न कि अभिमान।

संघर्ष और सफलता का संबंध

संघर्ष वह प्रक्रिया है जो हमें भीतर से मज़बूत बनाती है। जब हम किसी कठिनाई, विपरीत परिस्थिति या चुनौतियों से लड़ते हुए अपने उद्देश्य तक पहुँचते हैं, तो वह सफलता हमारे लिए एक साधारण उपलब्धि नहीं रहती, बल्कि वह आत्मविश्वास और आत्मसम्मान की नींव बनती है। ऐसे में व्यक्ति अपनी मेहनत और संघर्ष को जानता है, इसलिए वह सफलता का घमंड नहीं करता, बल्कि उसकी सादगी और विनम्रता और भी बढ़ जाती है।

स्वाभिमान वह भावना है जिसमें व्यक्ति अपनी मेहनत, मूल्यों और सिद्धांतों पर गर्व करता है, लेकिन दूसरों को नीचा नहीं दिखाता। जबकि अभिमान व्यक्ति को दूसरों से श्रेष्ठ समझने का भ्रम देता है। संघर्ष से प्राप्त की गई सफलता व्यक्ति को यह सिखाती है कि वह जहाँ पहुँचा है, वहाँ तक पहुँचने में कितनी बार उसने गिरकर उठने की ताक़त दिखाई है। यही अनुभव उसे विनम्र और ज़मीन से जुड़ा बनाता है।

संघर्ष हमें सिखाता है कि जीवन में कुछ भी आसानी से नहीं मिलता। वह हमारे धैर्य, साहस और आत्मविश्वास की परीक्षा लेता है। जो लोग इन परीक्षाओं को पास करते हैं, वे न केवल अपने लक्ष्य को प्राप्त करते हैं बल्कि एक आदर्श व्यक्तित्व भी विकसित करते हैं। ऐसे लोगों की सफलता समाज के लिए प्रेरणा बनती है, घमंड का कारण नहीं।

देश-विदेश में ऐसे अनेक उदाहरण हैं जहाँ महान व्यक्तित्वों ने संघर्षों के लंबे दौर से गुज़रते हुए बड़ी सफलताएं अर्जित की हैं। डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम, महात्मा गांधी, बाबा साहेब अंबेडकर जैसे व्यक्तित्वों ने तमाम कठिनाइयों से लड़ते हुए अपने जीवन को एक मिसाल बना दिया। उनकी सफलता में कभी अहंकार नहीं दिखा, बल्कि विनम्रता और सेवा का भाव ही प्रबल रहा।

संघर्ष से टकराकर प्राप्त की गई सफलताएं हमें केवल लक्ष्यों तक नहीं पहुँचातीं, बल्कि हमारे भीतर एक सकारात्मक परिवर्तन लाती हैं। वे हमें सिखाती हैं कि सच्ची सफलता वह है जो स्वाभिमान तो पैदा करे, लेकिन अभिमान नहीं। यही भावना हमें एक बेहतर इंसान बनाती है और समाज के लिए प्रेरणा स्रोत भी।