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Saturday, March 21, 2026
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एलडीए ने फर्जी शिकायतों से ब्लैकमेल करने वालों की सूची जारी, 2114 शिकायतों से आम जनता को बनाया गया था निशाना

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– वीसी की जांच में खुला राज—LDA में शिकायतों की आड़ में चल रहा था ब्लैकमेलिंग का खेल

लखनऊ। लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने एक बड़े और सनसनीखेज खुलासे में 28 ऐसे लोगों की सूची जारी की है, जो वर्षों से फर्जी शिकायतों के जरिए आम जनता और एलडीए अधिकारियों को ब्लैकमेल कर रहे थे। एलडीए के उपाध्यक्ष (वीसी) ने मामले की गंभीरता को देखते हुए खुद जांच कराई, जिसमें यह स्पष्ट हुआ कि यह पूरा नेटवर्क योजनाबद्ध तरीके से लोगों को निशाना बना रहा था।

जारी सूची के अनुसार, इन 28 लोगों ने कुल 2114 फर्जी शिकायतें दर्ज कराईं थीं। जांच में यह भी सामने आया है कि इन शिकायतों के माध्यम से ये लोग निर्माणकर्ताओं, मकान मालिकों और आम नागरिकों को डराकर पैसे की मांग करते थे। एलडीए अधिकारियों को भी दवाब में लेने की कोशिश की जाती थी।

जिन्होंने की सबसे अधिक शिकायतें (शीर्ष 5)

1 श्रीमती उर्वशी शर्मा 171 19-05-2024 से 30-05-2025
2 श्री मो० फैजान 168 24-06-2017 से 25-05-2025
3 सै. रौफ 167 19-11-2022 से 30-05-2025
4 सरदार सतनाम सिंह 154 04-01-2018 से 29-05-2025
5 श्री लक्ष्मीकांत सिंह 126 12-03-2020 से 20-05-2025

एलडीए द्वारा जारी सूची में पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में पहचान रखने वाले कुछ लोग भी शामिल हैं, जिनके नाम के आगे “पत्रकार” और “संपादक” जैसे पदनाम लिखे हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि ये लोग अपने पेशेवर प्रभाव का दुरुपयोग कर रहे थे।
एलडीए उपाध्यक्ष ने कहा,

“हमने शिकायतों की गंभीरता से जांच कराई तो पता चला कि ये एक पूरा गिरोह है जो योजनाबद्ध तरीके से फर्जी शिकायतें कर लोगों को डराता था। अब इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

उन्होंने यह भी बताया कि इस प्रकार की फर्जी शिकायतें न केवल प्रशासन का समय बर्बाद करती हैं, बल्कि ईमानदार नागरिकों को भी परेशान करती हैं।

एलडीए प्रशासन अब इन सभी 28 लोगों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई करने की तैयारी में है। फर्जीवाड़े में लिप्त पाए गए लोगों को भविष्य में किसी भी प्राधिकरणीय प्रक्रिया में भाग लेने से रोका जा सकता है, और इन पर दंडात्मक प्रावधान भी लागू किए जा सकते हैं।

इस खुलासे से एलडीए में पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। आम जनता और जिम्मेदार नागरिकों को इससे राहत मिलेगी, जबकि गलत इरादों से शिकायत करने वालों को कड़ा संदेश जाएगा।

मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन की बढी मुश्किलें, इस घोटाले में ACB ने किया तलब

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नई दिल्ली। दिल्ली के स्कूलों में कक्षा निर्माण को लेकर कथित भ्रष्टाचार के मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेताओं मनीष सिसोदिया और सत्येंद्र जैन को भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB) ने समन जारी किया है। अधिकारियों के अनुसार, सत्येंद्र जैन को 6 जून और मनीष सिसोदिया को 9 जून को पूछताछ के लिए तलब किया गया है।

2 हजार करोड़ की गड़बड़ी का आरोप

यह कार्रवाई ACB द्वारा 30 अप्रैल को दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर की गई है, जिसमें सरकारी स्कूलों में 12,000 से अधिक कक्षाओं या अर्ध-स्थायी ढांचों के निर्माण में करीब 2,000 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताओं का आरोप है। सिसोदिया उस समय दिल्ली के शिक्षा और वित्त मंत्री थे, जबकि जैन लोक निर्माण विभाग सहित कई मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। इन दोनों से केंद्रीय सतर्कता आयोग की ओर से चिन्हित गड़बड़ियों के संबंध में पूछताछ हो रही है।

तीन साल तक नहीं हुई कोई कार्रवाई

ACB के संयुक्त पुलिस आयुक्त मधुर वर्मा के अनुसार, CVC की तकनीकी रिपोर्ट में परियोजना में कई अनियमितताओं की ओर इशारा किया गया, लेकिन उस पर करीब तीन साल तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-A के तहत मंजूरी मिलने के बाद यह एफआईआर दर्ज की गई।

भाजपा नेताओं ने दर्ज कराई FIR

भाजपा नेताओं कपिल मिश्रा, हरीश खुराना और नीलकांत बख्शी ने 2019 में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें दावा किया गया था कि कक्षा निर्माण में प्रति कक्षा औसत लागत करीब 24.86 लाख रुपये रही, जो समान संरचनाओं की सामान्य लागत (लगभग 5 लाख रुपये) से कहीं अधिक थी। फिलहाल मामले की जांच जारी है।

संसद का मानसून सूत्र 21 जुलाई से चलेगा, सेशन हंगामेदार रहने के आसार

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नई दिल्ली : संसद का मानसून सत्र 21 जुलाई से 12 अगस्त तक आयोजित किया जाएगा। यह जानकारी संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने दी है। विपक्ष की ओर से ऑपरेशन सिंदूर और पहलगाम आतंकी हमले को लेकर लगातार की जा रही संसद के विशेष सत्र की मांग के बीच सरकार ने यह एलान किया है।

इस दौरान दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही चलेगी और विभिन्न विधायी व गैर-विधायी कार्यों पर चर्चा होगी। रिजिजू ने कहा कि सत्र के दौरान कई अहम विधेयकों को पेश करने और चर्चा के लिए लाने की तैयारी की जा रही है। साथ ही, देश के मौजूदा सामाजिक-आर्थिक हालातों, महंगाई, बेरोजगारी, और आंतरिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी बहस की संभावना है।

संसदीय कार्य मंत्री ने सभी दलों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि सरकार चाहती है कि यह सत्र सुचारू रूप से चले और देशहित में सकारात्मक चर्चा हो। उन्होंने कहा कि जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप संसद को कार्य करना चाहिए। विपक्ष की भागीदारी लोकतंत्र की आत्मा है, और हम सभी से रचनात्मक सहयोग की आशा करते हैं।

कल कांग्रेस समेत 16 विपक्षी दलों ने पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी थी। विपक्षी दलों ने पीएम मोदी को संयुक्त चिट्ठी लिखकर ऑपरेशन सिंदूर को लेकर संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग की थी।

मानसून सत्र में पेश किया जा सकता है बीमा संशोधन विधेयक

संसद के मानसून सत्र में बीमा संशोधन विधेयक पेश किया जा सकता है। विधेयक में बीमा क्षेत्र में एफडीआई की सीमा बढ़ाकर 100 प्रतिशत करने की तैयारी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विधेयक का मसौदा तैयार है और इसे जल्द ही मंजूरी के लिए कैबिनेट के सामने पेश किया जाएगा। कैबिनेट की मंजूरी के बाद वित्त मंत्रालय के तहत वित्तीय सेवा विभाग विधेयक को संसद में पेश करने की प्रक्रिया शुरू करेगा।

शहर कांग्रेस की बैठक में क्षेत्रीय समस्याओं के समाधान पर दिया गया बल

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– जनहित के कार्य जन-जन तक पहुंचाने का सबसे अच्छा माध्यम: अंकुर मिश्रा

फर्रुखाबाद। शहर कांग्रेस कमेटी की मासिक बैठक मंगलवार को शहर अध्यक्ष अंकुर मिश्रा के कैंप कार्यालय पर आयोजित हुई। बैठक में स्थानीय जनसमस्याओं को लेकर विस्तार से चर्चा की गई और उनके समाधान के लिए संगठित संघर्ष करने का आह्वान किया गया।

अध्यक्षता करते हुए अंकुर मिश्रा ने कहा कि कांग्रेस को जन-जन तक पहुंचाने के लिए कार्यकर्ताओं को जनहित के मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभानी होगी। उन्होंने कहा, “जन सेवा ही जनता के हृदय तक पहुंचने का माध्यम है।” उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे जनता की समस्याओं को संकलित कर संगठन के माध्यम से प्रभावी समाधान की दिशा में कदम उठाएं।

बैठक में बताया गया कि जल्द ही नेतृत्व द्वारा तय कार्यक्रमों को योजनाबद्ध तरीके से जमीन पर उतारा जाएगा। इसके लिए रूपरेखा तैयार की जा रही है।

बैठक में वरिष्ठ कांग्रेस नेता अनिल मिश्रा के साथ-साथ राकेश सारस्वत, अम्मार अली, प्रताप सिंह वाल्मीकि, संजीव शर्मा, अतीक सलमानी, आसिफ, अंजुम मुन्नेखा, वीरेंद्र कुमार मिश्रा, शुभ दीक्षित, विनोद श्रीवास्तव सहित लगभग तीन दर्जन कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

लंबे समय बाद शहर कांग्रेस की एक बड़ी बैठक इस रूप में देखने को मिली, जो कि संगठन के पुनः सक्रिय होने की दिशा में सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

इंसानियत की तौहीन: जब सिस्टम सो गया, तब 45 दिन तक शव करता रहा इंतज़ार

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प्रशांत कटियार

बिजनौर में सामने आई एक दर्दनाक और शर्मनाक घटना ने हमारे सरकारी सिस्टम की संवेदनहीनता को फिर से उजागर कर दिया है। एक अज्ञात घायल व्यक्ति की सड़क दुर्घटना में मौत के बाद उसका शव पूरे 45 दिनों तक मुर्दाघर में यूं ही पड़ा रहा न कोई परिजन आया, न ही पुलिस ने नियमानुसार उसका अंतिम संस्कार कराया। जब तक मामला जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी तक नहीं पहुंचा, तब तक सिस्टम की नींद ही नहीं टूटी।

15 अप्रैल को नूरपुर स्टेट हाईवे पर एक घायल व्यक्ति मिला, जिसे मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान 22 अप्रैल को उसकी मृत्यु हो गई। अस्पताल ने पुलिस को सूचना दी और शव को नियमानुसार पोस्टमार्टम हाउस में रखवाया गया।

यहां से शुरू हुआ उपेक्षा का सिलसिला 72 घंटे की तय सीमा बीत गई, कोई पहचान नहीं हुई, लेकिन पुलिस शव को लावारिस मानकर अंतिम संस्कार कराना ही भूल गई। नतीजतन, शव करीब डेढ़ महीने तक फ्रीजर में पड़ा रहा।45 दिन बाद, जब मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. कौशलेंद्र सिंह को इसकी जानकारी हुई, तो उन्होंने एसपी अभिषेक झा को पत्र लिखा। यह पत्र आते ही पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। जांच में लापरवाही उजागर हुई, और कोतवाली में तैनात हेड मोहर्रिर चेतन सिंह को निलंबित कर दिया गया। फिर जाकर पोस्टमार्टम हुआ और 45 दिन बाद शव का अंतिम संस्कार गंगा बैराज घाट पर कराया गया।

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि उन्होंने समय से सूचना दी थी। पुलिस ने यह जिम्मेदारी निभाने में लापरवाही की। एसपी ने भी माना कि यह गंभीर चूक थी, और भविष्य में ऐसे मामलों में सख्ती बरती जाएगी।क्या किसी शव की गरिमा इतनी कम है कि वह सिस्टम की फाइलों में गुम हो जाए?जब एक मृत देह के सम्मान में इतनी लापरवाही बरती जा सकती है, तो आम नागरिकों की सुरक्षा का क्या भरोसा?

यह घटना सिर्फ एक भूल नहीं, बल्कि उस मानवीय संवेदना की कमी है जो हमारे सिस्टम से धीरे धीरे खत्म होती जा रही है। शव का सम्मान भी उतना ही जरूरी है जितना जीवित व्यक्ति का अधिकार। अब जरूरी है कि ऐसी घटनाएं सिर्फ निलंबन और पत्राचार तक सीमित न रहें, बल्कि जवाबदेही और संवेदनशीलता को व्यवस्था का हिस्सा बनाया जाए।

बोधि यात्रा: मेकांग-गंगा सहयोग देशों के प्रतिनिधियों ने की उत्तर प्रदेश यात्रा

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– मुख्यमंत्री योगी ने कहा – यह अहिंसा, मैत्री और करुणा के संदेश को देगा नया आयाम
– मुख्यमंत्री आवास पर प्रतिनिधियों से की भेंट
– बुद्ध सर्किट को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने का संकल्प

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में मेकांग-गंगा सहयोग (एमजीसी) देशों – कम्बोडिया, लाओस, वियतनाम, म्यांमार और थाईलैंड – से आए प्रतिनिधियों का स्वागत किया। यह प्रतिनिधिमंडल ‘बोधि यात्रा’ के अंतर्गत राज्य में भगवान बुद्ध से जुड़े स्थलों की यात्रा पर आया है। इस यात्रा का उद्देश्य बौद्ध पर्यटन को प्रोत्साहन देने के साथ ही भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच सांस्कृतिक एवं कूटनीतिक संबंधों को और प्रगाढ़ बनाना है।

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि बोधि यात्रा केवल पर्यटन को बढ़ावा देने का माध्यम नहीं, बल्कि यह भगवान बुद्ध के अहिंसा, मैत्री और करुणा के संदेश को वैश्विक स्तर पर मजबूती से प्रसारित करने का एक प्रयास है। उन्होंने बताया कि आज से 25 वर्ष पूर्व आरंभ हुए मेकांग-गंगा सहयोग ने भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच मित्रवत संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल को उत्तर प्रदेश के पारंपरिक उत्पादों (ODOP) की भेंट भी दी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा भगवान बुद्ध से जुड़े स्थलों के विकास, शोध और प्रचार-प्रसार के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं।

उन्होंने कहा, “सारनाथ, कुशीनगर, श्रावस्ती, कपिलवस्तु, संकिसा, कौशांबी जैसे स्थल भगवान बुद्ध के जीवन और उपदेशों से जुड़े हुए हैं। देवदह, अहिच्छत्र और देवगढ़ जैसे स्थान भी ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इन स्थलों ने देश-दुनिया को शांति और प्रेरणा का संदेश दिया है।”

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि कुशीनगर में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा चालू हो चुका है और वहां महात्मा बुद्ध विश्वविद्यालय का निर्माण कार्य भी प्रगति पर है। लखनऊ में शांतिवन बौद्ध विहार और अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान के साथ-साथ गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय जैसी संस्थाएं बौद्ध विचारधारा के प्रसार में अहम भूमिका निभा रही हैं।

इस यात्रा के तहत प्रतिनिधिमंडल ने पहले उत्तर प्रदेश के पावन स्थलों का भ्रमण किया और अब वे सारनाथ होते हुए बिहार के बौद्ध स्थलों का दौरा करेंगे। यह यात्रा भारत सरकार के विदेश मंत्रालय और उत्तर प्रदेश तथा बिहार के पर्यटन विभाग के सहयोग से मेकांग-गंगा सहयोग कार्ययोजना (2019-2024) के अंतर्गत आयोजित की गई है।
प्रतिनिधियों की प्रतिक्रिया

एमजीसी देशों के प्रतिनिधियों ने कहा कि उन्हें भगवान बुद्ध की भूमि उत्तर प्रदेश आकर अत्यंत प्रसन्नता हुई। भारत बौद्ध धर्म का जन्मस्थान है और उनके देशों से अनेक छात्र भारत में बौद्ध अध्ययन के लिए रुचि रखते हैं। उन्होंने भारत सरकार और उत्तर प्रदेश के आतिथ्य की सराहना की।

इस अवसर पर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह, प्रमुख सचिव पर्यटन एवं संस्कृति मुकेश कुमार मेश्राम, एमजीसी देशों के प्रतिनिधि, बौद्ध भिक्षु, टूर ऑपरेटर और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर उपस्थित रहे।