31 C
Lucknow
Thursday, March 19, 2026
Home Blog Page 3164

इंसानियत शर्मसार! लोडर ने स्कूटी को मारी टक्कर, सड़क पर तड़प -तड़प कर भाई-बहन की मौत; राहगीर बनाते रहे वीडियो

0

कानपुर। उत्तर प्रदेश कानपुर जिले के कल्याणपुर में आज सुबह दर्दनाक हादसा हो गया। गलत दिशा से आ रहे लोडर ने एक स्कूटी को ठोकर मार दी। जिससे स्कूटी सवार दो लोगों की रोड में तड़प-तड़प कर मौत हो गई। वहीं तमाशबीन वीडियो बनाते रहे। स्कूटी सवार दोनों एक ही परिवार के रिश्ते के भाई बहन ​थे।

वहीं एक बार फिर इंसानियत शर्मसार होती दिखी। बतातें चले कि दोनों भाई बहन रोड पर ही घंटों तड़पते रहे और लोग वीडियो बनाने में व्यस्त रहे। किसी ने उन्हें अस्पताल पहुंचाने कि कोशिश नहीं की। जब तक पुलिस पहुंची तब तक दोनों भाई बहन की मौत हो गई। पुलिस एंबुलेंस में दोनों को सीएचसी लेगई जहां दोनों को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

मृतका नर्सिंग की छात्रा थी वह स्कूटी से अपने 15 वर्षीय भाई के साथ कल्याणपुर स्टेशन जा रही थी। जहां केस्को सब स्टेशन के पास गलत दिशा से आ रहे लोडर ने स्कूटी को टक्कर मारकर फरार हो गयी। दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए।

घायलों को लेकर 6:10 बजे कल्याणपुर सीएचसी पहुंची, जहां डॉक्टरों ने दोनो को मृत घोषित कर दिया पुलिस ने इसकी सूचना मृतकों के परिवार वालों को दी सूचना पाते ही मां खुशनुमा बानो, बहन कशिश, एलिस, मंतशा का रो रोकर बुरा हाल हो गया। एसीपी कल्याणपुर अभिषेक पांडेय के मुताबिक, पीड़ित पक्ष जो तहरीर देगा, उसके आधार पर रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई जाएगी।

बता दें कि मृतक भाई बहन के पिता मो. शकील मसवानपुर निवासी है। मरने वाली युवती का नाम अलशिफा (19) बिल्हौर के आरौल स्थित निजी कॉलेज में बीएससी नर्सिंग की छात्रा थी। गुरुवार को उसकी परीक्षा थी। सुबह 5:05 बजे भाई तौहिद (15) के साथ घर से निकली। छोटा भाई उसे कल्याणपुर स्टेशन छोड़ता, जहां से उसे सुबह 5:20 बजे आरौल के लिए ट्रेन पकड़नी थी।

भारत विकास परिषद ने माधौपुर गौशाला में किया गौ पूजन

0

परिषद के सदस्यों ने गायों को अन्न-फल खिला कर की सेवा, बताया गाय को संस्कृति का आधार स्तंभ

फर्रुखाबाद। भारत विकास परिषद, सहयोग शाखा के तत्वावधान में माधौपुर स्थित गौशाला में एक विशेष गौ पूजन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में परिषद के सभी सदस्यों ने श्रद्धा और सेवा-भाव से भाग लिया। गायों को माला पहनाकर विधिपूर्वक पूजन किया गया। इसके बाद गायों को फल, सब्जियां, दाना और चारा खिलाया गया।

कार्यक्रम में विशेष रूप से उपस्थित परिषद अध्यक्ष श्रीमती रीता दुबे, जिला समन्वयक अजय शंकर तिवारी, वरिष्ठ सदस्य व मार्गदर्शक वीरेंद्र कुमार मिश्रा, राम कुमार वर्मा, संगठन सचिव श्री राजेश चंद्र शुक्ला, संजीव वर्मा, श्रीमती कुमुदिनी तिवारी और संजय दुबे ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और गौसेवा में सहयोग किया।

इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि गाय हमारी सनातन संस्कृति की संवाहक है। पुराणों के अनुसार गाय के शरीर में 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास माना जाता है। गंगा, गायत्री और गाय — ये सनातन परंपरा के तीन मुख्य स्तंभ हैं। ऐसे में कलियुग में गाय का पूजन करना सभी देवी-देवताओं के पूजन के समान माना जाता है।

वक्ताओं ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी गाय के महत्व को समझाते हुए बताया कि गाय का गोबर, मूत्र, अस्थियाँ — सभी मानव जीवन के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। आज जब पर्यावरण संकट, कृषि संकट और नैतिक मूल्यों में गिरावट जैसे मुद्दे सामने हैं, तब गाय आधारित जीवनशैली एक समाधान बन सकती है।

कार्यक्रम के अंत में सभी सदस्यों ने नियमित गौसेवा का संकल्प लिया और स्थानीय लोगों को भी इसके लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में दर्जनों सदस्य शामिल रहे।भारत विकास परिषद द्वारा समय-समय पर ऐसे सेवाभावी आयोजन किए जाते हैं।
परिषद का उद्देश्य सांस्कृतिक मूल्यों और सामाजिक सेवा को बढ़ावा देना है।

खुद की ओर लौटो: खुश रहने की असली राह

0

दूसरों की मुस्कान के पीछे का सच न जानकर हम खुद को दुखी करते हैं – आत्मचिंतन ही समाधान है।

शरद कटियार

आज का इंसान तकनीक से जुड़कर पूरी दुनिया से तो जुड़ गया है, लेकिन खुद से दूर होता जा रहा है। हमारे पास हर पल दूसरों की ज़िंदगी झांकने के अनगिनत माध्यम हैं — सोशल मीडिया, टीवी, अख़बार, और आस-पास के लोग। हर कोई खुश दिखता है, संतुष्ट दिखता है, चैन से जीवन जीता हुआ दिखता है। और यही दिखावा हमारी बेचैनी, नाखुशी और असंतोष की जड़ बनता जा रहा है।

हम भूल जाते हैं कि हम सिर्फ एक “पक्ष” देख रहे हैं — सामने वाले की ज़िंदगी का उजला हिस्सा। लेकिन ज़िंदगी कभी एकपक्षीय नहीं होती। हर चमक के पीछे संघर्ष की स्याही छुपी होती है।

जब हम किसी की तस्वीरों में मुस्कान देखते हैं या उसकी सफलता की खबरें सुनते हैं, तो हम यह मान लेते हैं कि वह व्यक्ति हमसे कहीं ज़्यादा खुश, संतुष्ट और सफल है। लेकिन क्या हम वाकई उसकी ज़िंदगी की पूरी तस्वीर देख रहे होते हैं?

सोशल मीडिया पर ‘हैप्पी फेस’ के पीछे डिप्रेशन, अकेलापन या व्यक्तिगत संघर्ष हो सकता है। जो दोस्त ऑफिस में प्रमोशन की बधाइयाँ बटोर रहा है, वो शायद घर में गंभीर पारिवारिक तनाव झेल रहा हो। इसलिए दूसरों के सुखद क्षणों को देखकर अपनी ज़िंदगी को दुखद मान लेना सबसे बड़ी भूल है।

जब हम दूसरों की ज़िंदगी से अपनी तुलना करने लगते हैं, तो हम अपने सुखों की उपेक्षा करते हैं। यह तुलना हमें हमारी उपलब्धियों को छोटा महसूस कराती है, और धीरे-धीरे हमारे आत्मविश्वास को खोखला करने लगती है।
तुलना एक ऐसे दलदल की तरह है, जहां जितना ज़्यादा उतरोगे, उतनी ज़्यादा बेचैनी बढ़ेगी।

हम भूल जाते हैं कि हर इंसान का सफर अलग है, उसके हालात, उसकी ज़रूरतें, और उसका लक्ष्य — सब कुछ अलग है। तो फिर तुलना क्यों?

खुश रहने का रास्ता बाहर नहीं, भीतर से शुरू होता है। जब हम अपनी ही ज़िंदगी के प्रति जागरूक होते हैं — अपने अनुभवों, भावनाओं और कमजोरियों को स्वीकार करते हैं — तभी सच्चा संतोष मिलता है।

खुद से संवाद करो: हर दिन कुछ पल अपने साथ बिताओ।

खुद को स्वीकार करो: अपनी असफलताओं को भी उतना ही स्वीकारो जितना सफलताओं को करते हो।

खुद को निखारो: तुलना नहीं, प्रगति ज़रूरी है। हर दिन थोड़ा बेहतर बनने की कोशिश करो, किसी और से नहीं, बस खुद से।

जब हम खुद पर ध्यान देते हैं — मानसिक, भावनात्मक और शारीरिक रूप से — तो हम भीतर से मज़बूत बनते हैं। फिर बाहरी प्रभाव हमें ज़्यादा परेशान नहीं करते।

एक खुश और संतुलित इंसान की पहचान यह नहीं कि उसके पास सब कुछ है, बल्कि यह है कि वह अपने पास जो कुछ है, उसमें संतोष और कृतज्ञता महसूस करता है।

किसी और की ‘जगमगाहट’ को देखकर अपना ‘दीया’ बुझाना समझदारी नहीं है। बल्कि अपनी लौ को बचाकर, उसे और अधिक स्थिर करना सच्ची समझदारी है।

व्यवहारिक कदम: खुद पर ध्यान कैसे केंद्रित करें?

डिजिटल डिटॉक्स करें: हर हफ्ते कुछ घंटे या एक दिन मोबाइल और सोशल मीडिया से दूर रहें।

जर्नलिंग करें: हर दिन रात को 5 अच्छी चीज़ें लिखें जो उस दिन आपके साथ हुईं।

ध्यान और योग अपनाएं: इससे मन शांत होता है और आत्मनिरीक्षण की शक्ति बढ़ती है।

अपना लक्ष्य तय करें: दूसरों से नहीं, अपनी ही प्रगति से प्रेरित होकर चलें।

सकारात्मक संगति चुनें: ऐसे लोगों से जुड़ें जो आपको ऊर्जावान और ईमानदार बनाए रखें। दूसरों की ज़िंदगी का सिर्फ एक चमकता पहलू देखकर अगर आप अपने जीवन को छोटा समझने लगते हैं, तो आप न केवल अपने आत्म-सम्मान को चोट पहुँचा रहे हैं, बल्कि खुद से दूर भी हो रहे हैं।

असली सुकून तब आता है जब हम अपने भीतर झांकते हैं, अपनी अच्छाइयों को पहचानते हैं और अपने संघर्षों को स्वीकार करते हैं।

जब हम दूसरों को देखना बंद करके खुद को देखने लगते हैं — तभी जीवन सच्चे अर्थों में संतुलित, सुखद और सार्थक बनता है।

याद रखें:“जैसे पौधे को सूरज चाहिए बढ़ने के लिए, वैसे इंसान को खुद की समझ चाहिए खुश रहने के लिए।

पूर्व प्रधान अशोक कटियार पर हमले के मामले में कुख्यात ननकू गैंग पर पुलिस सख्त, गुंडा एक्ट में होगी कार्रवाई

0

– क्षेत्र में वर्षों से आतंक फैलाने वाले ननकू के खिलाफ प्रशासन सक्रिय
– कुर्मी क्षत्रिय महासभा और मंत्री आशीष पटेल ने उठाई आवाज

कानपुर नगर (बिल्हौर)। खासपुर गांव में बीते दिनों पूर्व प्रधान अशोक कटियार पर जानलेवा हमला करने वाले कुख्यात अपराधी ननकू और उसके गैंग के खिलाफ प्रशासन अब सख्त कार्रवाई की तैयारी में है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, गुंडा एक्ट के तहत ननकू और उसके सहयोगियों पर जल्द कार्रवाई की जाएगी।

ननकू और उसका पूरा परिवार पिछले कई वर्षों से क्षेत्र में दहशत और आतंक का प्रतीक रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, बसपा शासनकाल में एक पूर्व विधायक के संरक्षण में ननकू ने अपनी पकड़ मजबूत की और गांव की बहन-बेटियों तक के साथ अश्लील हरकतें करने से भी नहीं चूका।

पूर्व प्रधान अशोक कटियार पर हमले की घटना ने क्षेत्रीय जनता को झकझोर कर रख दिया है। अखिल भारतीय कुर्मी क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डीएम कटियार ने इस घटना को लेकर खुलकर आवाज उठाई है और अशोक कटियार को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष का ऐलान किया है।

वहीं, अपना दल (एस) के मुखिया, वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री आशीष पटेल ने भी इस मामले में रुचि लेते हुए राज्य के उच्च अधिकारियों से संपर्क कर पूर्व प्रधान के सम्मान की रक्षा और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

खासपुर ही नहीं, बल्कि आसपास के गांवों में भी ननकू गैंग के आतंक को लेकर लोगों में लंबे समय से नाराजगी रही है। अब जब हमला पूर्व प्रधान पर हुआ है, तो समाज के सभी वर्गों के लोग ननकू जैसे अपराधियों के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठा रहे हैं।

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि न केवल ननकू बल्कि उसके पूरे गैंग पर एनएसए या गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की जाए ताकि क्षेत्र में पुनः शांति और कानून का राज स्थापित हो सके।

इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि जब समाज संगठित होकर अन्याय के खिलाफ खड़ा होता है, तब शासन-प्रशासन को भी कदम उठाने पड़ते हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन कितनी तत्परता से कार्रवाई करता है और अशोक कटियार जैसे जनप्रतिनिधि को न्याय मिल पाता है या नहीं।

भाकियू टिकैत की बैठक में खरीफ बुवाई से पहले खाद की उपलब्धता की मांग

0
  • 30 मई तक समितियों पर खाद न मिलने पर प्रदर्शन की चेतावनी, एआर कार्यालय में सौंपा गया ज्ञापन

फर्रुखाबाद। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) की जिला इकाई की बैठक नेकपुर चौरासी स्थित जिला कार्यालय में आयोजित की गई, जिसमें खरीफ की बुवाई से पूर्व सभी सरकारी समितियों पर खाद की सुनिश्चित उपलब्धता की मांग को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि 30 मई तक खाद उपलब्ध नहीं कराई गई, तो जिलेभर में प्रदर्शन किया जाएगा।

बैठक में पूर्व पदाधिकारी और ब्लॉक अध्यक्षों को निर्देशित किया गया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में सदस्यता अभियान सक्रिय रूप से चलाएं और किसानों की समस्याओं को लगातार प्रशासन के संज्ञान में लाते रहें।

राष्ट्रीय नेतृत्व के आह्वान पर भाकियू प्रतिनिधिमंडल सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता अजय पालीवाल के कार्यालय पहुंचा। हालांकि पालीवाल उस समय सरकारी कार्य से झांसी गए हुए थे, इसलिए किसानों ने जूनियर सहायक आयुक्त विनोद कटियार को अपनी मांगों से अवगत कराया।

जिला अध्यक्ष अजय कटियार ने कहा कि वर्तमान समय में 60 से 70 प्रतिशत समितियों पर खाद उपलब्ध नहीं है, जबकि किसान खरीफ की बुवाई के लिए खेतों की जुताई शुरू कर चुके हैं। सरकारी रिकॉर्ड में भले ही खाद का भंडारण दिखाया गया हो, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग है।

कटियार ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि 30 मई तक सभी समितियों पर खाद की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं हुई, तो संबंधित क्षेत्र की समितियों में अनियमितताओं को लेकर ब्लॉक अध्यक्ष, कमेटी सदस्य, और जिला अध्यक्ष सहित जिला कमेटी द्वारा विकास भवन व एआर कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।

इस अवसर पर कई वरिष्ठ किसान नेता मौजूद रहे, जिनमें प्रमुख रूप से छविनाथ शाक्य, गोपी शाक्य, बृजेश गंगवार, कृष्ण गोपाल मिश्रा, अभय यादव, संजीव सिंह सोमवंशी, शीशराम शर्मा, सुशील दीक्षित बाबा जी, अनीस सिंह सोनू, शिवराम शाक्य, संजय यादव, विमलेश शाक्य, विजय सिंह शाक्य, संजय सिंह, प्रेमचंद यादव, सत्यराम राजपूत, कमलेश शाक्य आदि शामिल रहे।

भाकियू टिकैत की यह सक्रियता दिखाती है कि किसानों की मूलभूत आवश्यकताओं को लेकर संगठन पूरी तरह प्रतिबद्ध है। समय रहते प्रशासन ने अगर किसानों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो जिले में खाद संकट गहराने की आशंका है।

‘सिंदूर’ होगा इस मेट्रो स्टेशन का नाम, जानें कब होगा कमर्शियल रन

0

भोपाल। सूबे के प्रमुख इंदौर शहर में मेट्रो स्टेशन का नाम सिंदूर होगा। हालांकि अन्य स्टेशनों के नाम भी वीरांगनाओं के नाम पर रखे जाएंगे। बता दें कि प्रदेश की पहली इंदौर मेट्रो का कमर्शियल रन 31 मई को होगा और इसकी शुरूआत पीएम नरेन्द्र मोदी द्वारा वर्चुअल रूप से किया जाएगा। गौरतलब है कि पीएम नरेन्द्र मोदी राजधानी भोपाल में महिला सशक्तिकरण सम्मेलन में हिस्सा लेने आएंगे।

मेट्रो में सर्वप्रथम सफर शहर की महिलाएं ही करेंगी

देवी अहिल्या की 300वीं जयंती पर शुरू होने वाले मेट्रो में सर्वप्रथम सफर शहर की महिलाएं ही करेंगी। इसमें महिला सफाईकर्मियों के अलावा सुपर प्रायोरिटी कॉरिडोर पर टीसीएस, इंफोसिस जैसे संस्थानों में काम करने वाली महिला कर्मचारी भी शामिल होंगी।

स्टेशनों का नाम वीरांगनाओं के नाम पर

सुपर प्रायोरिटी कारिडोर के 5.9 किलोमीटर पर बने पांच मेट्रो स्टेशन के नाम वीरांगनाओं के नाम पर रखने का निर्णय लिया गया है। इनमें एक स्टेशन का नाम ऑपरेशन सिंदूर की वजह से सिंदूर होगा। वहीं, अन्य स्टेशन देवी अहिल्या, दुर्गावती, अवंतिका बाई, झलकारीबाई के नाम पर होंगे।

प्रदेश के नगरीय आवास व विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मेट्रो डिपो व स्टेशन के निरीक्षण के दौरान इसकी घोषणा की। विजयवर्गीय ने कहा कि गांधी नगर स्टेशन पर देवी अहिल्याबाई की प्रतिमा भी लगेगी। शेष चार स्टेशनों पर फिलहाल वीरांगनाओं के फोटो लगाए जाएंगे और बाद में स्टेशन परिसर में मूर्तियां भी लगाई जाएंगी।