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Thursday, March 19, 2026
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मुकेश अंबानी के छोटे बेटे आकाश पहुंचे काशी, बाबा विश्वनाथ को अर्पित किए इतने करोड़ रुपए

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मुकेश अंबानी के छोटे बेटे आकाश अंबानी ने हाल ही में काशी विश्वनाथ मंदिर का दौरा किया और बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर वहां 1 करोड़ रुपये का दान दिया।

अपने इस दौरे के दौरान आकाश ने मंदिर परिसर में विधिवत पूजन-अर्चन किया और मंदिर की व्यवस्थाओं की सराहना भी की।

आकाश अंबानी का यह दौरा पूरी तरह से धार्मिक रहा, जिसमें उन्होंने न केवल दर्शन किए बल्कि श्रद्धा से बड़ी धनराशि का योगदान देकर अपनी आस्था भी व्यक्त की।

वे बुधवार को वाराणसी पहुंचे थे और सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच काशी विश्वनाथ धाम पहुंचे। दर्शन के दौरान उनके साथ मंदिर प्रशासन और सुरक्षाकर्मी भी मौजूद रहे।

मेहनतश गिग श्रमिकों को कांग्रेस सरकार दे रही हैं न्याय : राहुल गांधी

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नयी दिल्ली: कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष तथा लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा है कि गिग श्रमिकों की समस्या का निदान कांग्रेस की प्राथमिकता है और इसके लिए सभी कांग्रेस शासित राज्यों में कानून बनाए जा रहे हैं।

श्री गांधी ने गुरुवार को यहां जारी बयान में कहा “ रेटिंग नहीं, हक़ चाहिए, इंसान हैं हम, ग़ुलाम नहीं-भारत जोड़ो यात्रा के दौरान जब मैं गिग वर्कर्स से मिला, तो ये शब्द मेरे दिल में उतर गए। कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने ऐतिहासिक कदम उठाया है, एक ऐसा अध्यादेश लाया है जो गिग वर्कर्स को अधिकार, सुरक्षा और सम्मान देता है। ये वर्कर्स दिन-रात हमारे लिए खाना, ज़रूरी सामान और सेवाएं पहुंचाते हैं, गर्मी, सर्दी और बारिश तक की परवाह नहीं करते लेकिन अक्सर उन्हें बिना किसी वजह ऐप से हटा दिया जाता है, बीमार होने पर छुट्टी नहीं मिलती और उनकी मेहनत की कमाई गुप्त तरीके से तय होती है।”

उन्होंने कहा “ अब यह अन्याय खत्म होगा। इस नए कानून से सुनिश्चित होगी सामाजिक सुरक्षा, न्यायसंगत कॉन्ट्रैक्ट, वेतन निर्धारण में पारदर्शिता, मनमानी ऐप ब्लॉकिंग का अंत, तकनीकी से तरक्की भी होनी चाहिए और इंसाफ़ भी मिलना चाहिए।”

उन्होंने कहा “ राजस्थान ने शुरुआत की।,कर्नाटक ने रास्ता दिखाया, अब तेलंगाना की बारी है। गिग और प्लेटफ़ॉर्म आधारित काम से नए अवसर बन रहे हैं और कामकाज के रिश्तों में बड़ा बदलाव आ रहा है। इस बदलाव के केंद्र में मज़दूरों के अधिकार होने चाहिए। यही हमारा विज़न है और हम इसे हर राज्य और पूरे देश में लेकर जाएंगे।”

अचानक अरविंद केजरीवाल ने खटखटाया कोर्ट का दरवाजा, जानें पूरा मामला

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Arvind Kejriwal
Arvind Kejriwal

नई दिल्ली। दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल ने अपने पासपोर्ट के नवीनीकरण के लिए एनओसी (NOC)की मांग करते हुए एक आवेदन दायर किया है।

राउज एवेन्यू कोर्ट ने ईडी और सीबीआई (ED-CBI)  को जवाब के लिए नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 4 जून को तय की है।

केजरीवाल के वकील ने कहा कि उनका निजी पासपोर्ट 2018 में ही एक्सपायर हो चुका है।

इंसानियत शर्मसार! लोडर ने स्कूटी को मारी टक्कर, सड़क पर तड़प -तड़प कर भाई-बहन की मौत; राहगीर बनाते रहे वीडियो

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कानपुर। उत्तर प्रदेश कानपुर जिले के कल्याणपुर में आज सुबह दर्दनाक हादसा हो गया। गलत दिशा से आ रहे लोडर ने एक स्कूटी को ठोकर मार दी। जिससे स्कूटी सवार दो लोगों की रोड में तड़प-तड़प कर मौत हो गई। वहीं तमाशबीन वीडियो बनाते रहे। स्कूटी सवार दोनों एक ही परिवार के रिश्ते के भाई बहन ​थे।

वहीं एक बार फिर इंसानियत शर्मसार होती दिखी। बतातें चले कि दोनों भाई बहन रोड पर ही घंटों तड़पते रहे और लोग वीडियो बनाने में व्यस्त रहे। किसी ने उन्हें अस्पताल पहुंचाने कि कोशिश नहीं की। जब तक पुलिस पहुंची तब तक दोनों भाई बहन की मौत हो गई। पुलिस एंबुलेंस में दोनों को सीएचसी लेगई जहां दोनों को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

मृतका नर्सिंग की छात्रा थी वह स्कूटी से अपने 15 वर्षीय भाई के साथ कल्याणपुर स्टेशन जा रही थी। जहां केस्को सब स्टेशन के पास गलत दिशा से आ रहे लोडर ने स्कूटी को टक्कर मारकर फरार हो गयी। दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए।

घायलों को लेकर 6:10 बजे कल्याणपुर सीएचसी पहुंची, जहां डॉक्टरों ने दोनो को मृत घोषित कर दिया पुलिस ने इसकी सूचना मृतकों के परिवार वालों को दी सूचना पाते ही मां खुशनुमा बानो, बहन कशिश, एलिस, मंतशा का रो रोकर बुरा हाल हो गया। एसीपी कल्याणपुर अभिषेक पांडेय के मुताबिक, पीड़ित पक्ष जो तहरीर देगा, उसके आधार पर रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई जाएगी।

बता दें कि मृतक भाई बहन के पिता मो. शकील मसवानपुर निवासी है। मरने वाली युवती का नाम अलशिफा (19) बिल्हौर के आरौल स्थित निजी कॉलेज में बीएससी नर्सिंग की छात्रा थी। गुरुवार को उसकी परीक्षा थी। सुबह 5:05 बजे भाई तौहिद (15) के साथ घर से निकली। छोटा भाई उसे कल्याणपुर स्टेशन छोड़ता, जहां से उसे सुबह 5:20 बजे आरौल के लिए ट्रेन पकड़नी थी।

भारत विकास परिषद ने माधौपुर गौशाला में किया गौ पूजन

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परिषद के सदस्यों ने गायों को अन्न-फल खिला कर की सेवा, बताया गाय को संस्कृति का आधार स्तंभ

फर्रुखाबाद। भारत विकास परिषद, सहयोग शाखा के तत्वावधान में माधौपुर स्थित गौशाला में एक विशेष गौ पूजन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में परिषद के सभी सदस्यों ने श्रद्धा और सेवा-भाव से भाग लिया। गायों को माला पहनाकर विधिपूर्वक पूजन किया गया। इसके बाद गायों को फल, सब्जियां, दाना और चारा खिलाया गया।

कार्यक्रम में विशेष रूप से उपस्थित परिषद अध्यक्ष श्रीमती रीता दुबे, जिला समन्वयक अजय शंकर तिवारी, वरिष्ठ सदस्य व मार्गदर्शक वीरेंद्र कुमार मिश्रा, राम कुमार वर्मा, संगठन सचिव श्री राजेश चंद्र शुक्ला, संजीव वर्मा, श्रीमती कुमुदिनी तिवारी और संजय दुबे ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और गौसेवा में सहयोग किया।

इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि गाय हमारी सनातन संस्कृति की संवाहक है। पुराणों के अनुसार गाय के शरीर में 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास माना जाता है। गंगा, गायत्री और गाय — ये सनातन परंपरा के तीन मुख्य स्तंभ हैं। ऐसे में कलियुग में गाय का पूजन करना सभी देवी-देवताओं के पूजन के समान माना जाता है।

वक्ताओं ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी गाय के महत्व को समझाते हुए बताया कि गाय का गोबर, मूत्र, अस्थियाँ — सभी मानव जीवन के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। आज जब पर्यावरण संकट, कृषि संकट और नैतिक मूल्यों में गिरावट जैसे मुद्दे सामने हैं, तब गाय आधारित जीवनशैली एक समाधान बन सकती है।

कार्यक्रम के अंत में सभी सदस्यों ने नियमित गौसेवा का संकल्प लिया और स्थानीय लोगों को भी इसके लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में दर्जनों सदस्य शामिल रहे।भारत विकास परिषद द्वारा समय-समय पर ऐसे सेवाभावी आयोजन किए जाते हैं।
परिषद का उद्देश्य सांस्कृतिक मूल्यों और सामाजिक सेवा को बढ़ावा देना है।

खुद की ओर लौटो: खुश रहने की असली राह

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दूसरों की मुस्कान के पीछे का सच न जानकर हम खुद को दुखी करते हैं – आत्मचिंतन ही समाधान है।

शरद कटियार

आज का इंसान तकनीक से जुड़कर पूरी दुनिया से तो जुड़ गया है, लेकिन खुद से दूर होता जा रहा है। हमारे पास हर पल दूसरों की ज़िंदगी झांकने के अनगिनत माध्यम हैं — सोशल मीडिया, टीवी, अख़बार, और आस-पास के लोग। हर कोई खुश दिखता है, संतुष्ट दिखता है, चैन से जीवन जीता हुआ दिखता है। और यही दिखावा हमारी बेचैनी, नाखुशी और असंतोष की जड़ बनता जा रहा है।

हम भूल जाते हैं कि हम सिर्फ एक “पक्ष” देख रहे हैं — सामने वाले की ज़िंदगी का उजला हिस्सा। लेकिन ज़िंदगी कभी एकपक्षीय नहीं होती। हर चमक के पीछे संघर्ष की स्याही छुपी होती है।

जब हम किसी की तस्वीरों में मुस्कान देखते हैं या उसकी सफलता की खबरें सुनते हैं, तो हम यह मान लेते हैं कि वह व्यक्ति हमसे कहीं ज़्यादा खुश, संतुष्ट और सफल है। लेकिन क्या हम वाकई उसकी ज़िंदगी की पूरी तस्वीर देख रहे होते हैं?

सोशल मीडिया पर ‘हैप्पी फेस’ के पीछे डिप्रेशन, अकेलापन या व्यक्तिगत संघर्ष हो सकता है। जो दोस्त ऑफिस में प्रमोशन की बधाइयाँ बटोर रहा है, वो शायद घर में गंभीर पारिवारिक तनाव झेल रहा हो। इसलिए दूसरों के सुखद क्षणों को देखकर अपनी ज़िंदगी को दुखद मान लेना सबसे बड़ी भूल है।

जब हम दूसरों की ज़िंदगी से अपनी तुलना करने लगते हैं, तो हम अपने सुखों की उपेक्षा करते हैं। यह तुलना हमें हमारी उपलब्धियों को छोटा महसूस कराती है, और धीरे-धीरे हमारे आत्मविश्वास को खोखला करने लगती है।
तुलना एक ऐसे दलदल की तरह है, जहां जितना ज़्यादा उतरोगे, उतनी ज़्यादा बेचैनी बढ़ेगी।

हम भूल जाते हैं कि हर इंसान का सफर अलग है, उसके हालात, उसकी ज़रूरतें, और उसका लक्ष्य — सब कुछ अलग है। तो फिर तुलना क्यों?

खुश रहने का रास्ता बाहर नहीं, भीतर से शुरू होता है। जब हम अपनी ही ज़िंदगी के प्रति जागरूक होते हैं — अपने अनुभवों, भावनाओं और कमजोरियों को स्वीकार करते हैं — तभी सच्चा संतोष मिलता है।

खुद से संवाद करो: हर दिन कुछ पल अपने साथ बिताओ।

खुद को स्वीकार करो: अपनी असफलताओं को भी उतना ही स्वीकारो जितना सफलताओं को करते हो।

खुद को निखारो: तुलना नहीं, प्रगति ज़रूरी है। हर दिन थोड़ा बेहतर बनने की कोशिश करो, किसी और से नहीं, बस खुद से।

जब हम खुद पर ध्यान देते हैं — मानसिक, भावनात्मक और शारीरिक रूप से — तो हम भीतर से मज़बूत बनते हैं। फिर बाहरी प्रभाव हमें ज़्यादा परेशान नहीं करते।

एक खुश और संतुलित इंसान की पहचान यह नहीं कि उसके पास सब कुछ है, बल्कि यह है कि वह अपने पास जो कुछ है, उसमें संतोष और कृतज्ञता महसूस करता है।

किसी और की ‘जगमगाहट’ को देखकर अपना ‘दीया’ बुझाना समझदारी नहीं है। बल्कि अपनी लौ को बचाकर, उसे और अधिक स्थिर करना सच्ची समझदारी है।

व्यवहारिक कदम: खुद पर ध्यान कैसे केंद्रित करें?

डिजिटल डिटॉक्स करें: हर हफ्ते कुछ घंटे या एक दिन मोबाइल और सोशल मीडिया से दूर रहें।

जर्नलिंग करें: हर दिन रात को 5 अच्छी चीज़ें लिखें जो उस दिन आपके साथ हुईं।

ध्यान और योग अपनाएं: इससे मन शांत होता है और आत्मनिरीक्षण की शक्ति बढ़ती है।

अपना लक्ष्य तय करें: दूसरों से नहीं, अपनी ही प्रगति से प्रेरित होकर चलें।

सकारात्मक संगति चुनें: ऐसे लोगों से जुड़ें जो आपको ऊर्जावान और ईमानदार बनाए रखें। दूसरों की ज़िंदगी का सिर्फ एक चमकता पहलू देखकर अगर आप अपने जीवन को छोटा समझने लगते हैं, तो आप न केवल अपने आत्म-सम्मान को चोट पहुँचा रहे हैं, बल्कि खुद से दूर भी हो रहे हैं।

असली सुकून तब आता है जब हम अपने भीतर झांकते हैं, अपनी अच्छाइयों को पहचानते हैं और अपने संघर्षों को स्वीकार करते हैं।

जब हम दूसरों को देखना बंद करके खुद को देखने लगते हैं — तभी जीवन सच्चे अर्थों में संतुलित, सुखद और सार्थक बनता है।

याद रखें:“जैसे पौधे को सूरज चाहिए बढ़ने के लिए, वैसे इंसान को खुद की समझ चाहिए खुश रहने के लिए।