22 C
Lucknow
Wednesday, March 18, 2026
Home Blog Page 3160

पीडीए चर्चा से सपा ने तेज किया जनसंपर्क अभियान

0
PDA
PDA

                     भोजपुर विधानसभा क्षेत्र के कई गांवों में हुईं बैठकें, जनसरोकारों पर हुआ संवाद

फर्रुखाबाद: समाजवादी पार्टी (SP) ने भोजपुर विधानसभा (Bhojpur Assembly) क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में “पीडीए चर्चा” (PDA discussion) और “पीडीए पंचायतों” के माध्यम से जनसंपर्क अभियान को गति दी है। पार्टी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने गांव-गांव जाकर जनता से संवाद कर समाजवादी नीतियों और योजनाओं की जानकारी दी।

गुरुवार को ग्राम खेरे नगला के बूथ संख्या 310 पर आयोजित पीडीए चर्चा कार्यक्रम की अध्यक्षता दीपक राजपूत ने की। बैठक में समाजवादी पार्टी के जिला उपाध्यक्ष सिराजुल अफाक मुन्ना, प्रदेश सचिव (अनुसूचित प्रकोष्ठ) राकेश दिवाकर ‘राका’ तथा पूर्व विधायक उर्मिला राजपूत ने भाग लिया। कार्यक्रम में जनसरोकार से जुड़े मुद्दों जैसे शिक्षा, रोजगार, महंगाई और सामाजिक न्याय पर चर्चा की गई।

बैठक में पवन, आर्यन, सूरज वर्मा, मोहर्रम सिंह, शक्तिमान वर्मा, दफेदार सिंह, अतुल सिंह, श्याम सिंह, नरेंद्र राजपूत, सावधान सिंह, अमित कुमार, विनीत कुमार सहित कई कार्यकर्ता उपस्थित रहे। इसी क्रम में ग्राम कतरौली के बूथ संख्या 309 पर हाकिम सिंह की अध्यक्षता में “पीडीए चर्चा” संपन्न हुई। बैठक में अमर सिंह, रामप्रकाश राजपूत, अमित कुमार, राजाराम वर्मा, जगपाल सिंह, वीरेंद्र सिंह सहित कई कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी रही।

ग्राम ककरैया के बूथ संख्या 315 पर लाखन सिंह की अध्यक्षता में पीडीए पंचायत का आयोजन हुआ। इस अवसर पर मेघनाथ वर्मा, अनिल कुमार, अशोक कुमार, राजकुमार वर्मा, संजय राजपूत, विक्रम राजपूत सहित अन्य कार्यकर्ता शामिल हुए। सभी बैठकों में जिला उपाध्यक्ष सिराजुल अफाक मुन्ना और प्रदेश सचिव राकेश दिवाकर की सहभागिता रही। पूर्व विधायक उर्मिला राजपूत ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए संगठन की मजबूती और जनता से सतत संपर्क बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने कहा कि समाजवादी विचारधारा ही आम जनता के हक की आवाज है और “पीडीए चर्चा” इसके प्रचार-प्रसार का एक सशक्त माध्यम बन रही है। पार्टी नेताओं ने बताया कि इस अभियान का उद्देश्य पंचायत स्तर तक जनता को जोड़ना और समाजवादी पार्टी के ‘पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक’ (पीडीए) के मूल एजेंडे को मजबूत करना है। आने वाले दिनों में अन्य गांवों में भी इसी प्रकार की पंचायतें आयोजित की जाएंगी।

यमुना एक्सप्रेसवे पर कारोबारी पर शिकंजा, कार से बरामद हुए 40 लाख के कैश और सोना

0
Expressway
Expressway

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मथुरा (Mathura) जिले में स्थित मांट थाना क्षेत्र के यमुना एक्सप्रेस वे (Yamuna Expressway) पर जाबरा टोल प्लाजा पर बुधवार शाम सात बजे के लगभग पुलिस ने वाहन चेकिंग (vehicle checking) शुरू की जिसमे से एक संदिग्ध कार को रोका और तलाशी ली। तलाशी के दौरान आयकर विभाग की टीम ने एक चांदी व्यवसायी की कार से 40 लाख रुपये से अधिक की नकदी बरामद की। फिलहाल कार चालक को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है, और आयकर विभाग की टीम भी जांच में जुट गई है।

जानकारी के मुताबिक, मांट थाना क्षेत्र के यमुना एक्सप्रेस वे पर जाबरा टोल प्लाजा पर बीते बुधवार शाम सात बजे के लगभग वाहनों की सघन चेकिंग अभियान शुरू हुआ था। इस दौरान आगरा से नोएडा जा रहे मथुरा के चांदी कारोबारी दीपक खंडेलवाल की स्विफ्ट डिजायर कार को पुलिस ने चेकिंग के लिए रोका। सफेद रंग की स्विफ्ट डिजायर कार (UP85 CS 5864) को रोककर तलाशी ली। कार की तलाशी के दौरान सीटों के नीचे और बैग में रखी 40 लाख से अधिक नकदी सामने आई।

पुलिस ने वरिष्ठ अधिकारियों को मामले की जानकारी दी और कार चालक को हिरासत में लेकर थाने भेज दिया। कार में भारी मात्रा में नकदी देखकर टीम ने तुरंत नकदी गिनना शुरू किया। प्राथमिक पूछताछ में दीपक इस नकदी का संतोषजनक हिसाब नहीं दे सके। जांच में खुलासा हुआ कि यह नकदी और सोना मथुरा के गोविंद नगर निवासी दीपक खंडेलवाल का है, जो पेशे से चांदी के कारोबारी हैं। चांदी बेचने के बाद उन्हें करीब 1.49 करोड़ रुपये नगद और कुछ सोना मिला था, जिसे लेकर वह दिल्ली जा रहे थे। इस दौरान कार की चेकिंग हुई और सारा माल जब्त कर लिया गया।

राज्य कर्मचारी साहित्य संस्थान की कार्यकारिणी का चुनाव संपन्न

0
Election
Election

लखनऊ: राज्य निर्वाचन आयोग (State Election Commission) यूपी कार्यालय में राज्य कर्मचारी साहित्य संस्थान की कार्यकारिणी का चुनाव निर्वाचन अधिकारी (election election officer), जी.के. त्रिवेदी की देख-रेख में सम्पन्न हुआ। चुनाव के लिए निर्वाचन अधिकारी द्वारा निम्नलिखित पदाधिकारी एवं कार्यकारिणी सदस्यों को निर्वाचित घोषित किया गया।

नवनिर्वाचित कार्यकारिणी के समस्त पदाधिकारी एवं सदस्यों को बहुत बहुत बधाई।

1. अध्यक्ष, डॉ0 अखिलेश कुमार मिश्रा
2. उपाध्यक्ष, डॉ0 शोभा दीक्षित ‘भावना’
3. उपाध्यक्ष, डॉ0 उमेश चन्द्र वर्मा आदित्य
4. महामंत्री, डॉ0 सीमा गुप्ता
5. संगठन मंत्री, डॉ0 रेनू वर्मा
6. प्रचार मंत्री, विपुल कुमार मिश्र
7. साहित्य मंत्री, श्रवण कुमार
8. संयुक्त मंत्री, पूर्णिमा बेदार
9. संयुक्त मंत्री, अभिषेक पाण्डेय
10. संयुक्त मंत्री, चन्द्रदेव दीक्षित ‘चन्द्र’
11. कोषाध्यक्ष, डॉ0 हरीप्रकाष अग्रवाल ‘हरि’
12. अंकेक्षक, अमरेन्द्र ़िद्ववेदी
13. कार्यकारिणी सदस्य, डॉ0 अम्बरीष कुमार सिंह
14. कार्यकारिणी सदस्य, नरेन्द्र भूषण
15. कार्यकारिणी सदस्य, सुरेन्द्र गौतम
16. कार्यकारिणी सदस्य, जयेन्द्र चतुर्वेदी
17. कार्यकारिणी सदस्य, विवेक
18. कार्यकारिणी सदस्य, अनुपम आनन्द
19. कार्यकारिणी सदस्य, मीना गौतम
20. कार्यकारिणी सदस्य, रामराज भारती
21. कार्यकारिणी सदस्य, सुरेन्द्र शर्मा
22. कार्यकारिणी सदस्य, नीलू सिंह

 

पत्रकार दंपति ने प्रताड़ना से तंग आकर खाया जहर, प्रशासन पर आरोप

0
poison
poison

पीलीभीत: यूपी के पीलीभीत (pilibhit) में पत्रकार दंपति (journalist couple) इसरार और पत्नी मिराज ने आत्महत्या करने की कोशिश की। इन दोनों ने अधिकारियों द्वारा प्रताड़ित किए जाने का आरोप लगाते हुए जहर (poison) खा लिया है। ज़हर खाने से पहले से उन्होंने एक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया। इस वायरल वीडियो में उन्होंने बीसलपुर के एसडीएम नागेंद्र पांडे, बरखेड़ा नगर पंचायत चेयरमैन श्याम बिहारी भोजवाल और ठेकेदार मोईन पर उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। घटना के बाद दोनों को गंभीर हालत में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है।

जानकारी के मुताबिक, बरखेड़ा थाना क्षेत्र में इसरार अहमद पेशे से पत्रकार हैं। पत्रकार दंपति ने आरोप लगाते हुए बताया कि, सड़क निर्माण में भ्रष्टाचार उजागर करने व बीसलपुर एसडीएम खबर छापने के बाद उन पर फर्जी मुकदमा दर्ज कराया गया। शिकायत पर आई पुलिस ने भी उनके परिवार को परेशान किया। दोनों ने बरखेड़ा नगर पंचायत अध्यक्ष, ठेकेदार और बरखेड़ा पुलिस पर भी लगाए गंभीर आरोप लगाए हैं।

 Pilibhit: झूठे केस से परेशान पत्रकार इसरार ने खाया जहर, प्रशासन पर लगाए गंभीर इल्जाम

बताया जा रहा है कि, मुकदमा दर्ज होने के बाद डर की वजह से इसरार और उनकी पत्नी फरार चल रहे थे। गुरुवार को दोनों ने मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या की कोशिश से पहले लाइव वीडियो आकर एसडीएम नागेंद्र पांडे और नगर पंचायत अध्यक्ष श्याम बिहारी भोजवाल को अपनी हालत के लिए ज़िम्मेदार ठहराया। फिलहाल दोनों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है और हालत गंभीर है। दोनों का इलाज जिला अस्पताल में जारी है।

शादी वाले घर में लगी आग, चपेट में आया दूल्हे का भाई

0
Fire
Fire

संभल: गर्मी के समय में आग लगने का सिलसिला जारी है, इसी बीच में खबर आ रही है कि, यूपी के संभल (Sambhal) में चंदोसी (Chandosi) थाना क्षेत्र के मौलागढ़ गांव में एक घर में अचानक भीषण आग (Fire) लग गई। आग इतनी भयंकर थी कि परिवार के कई सदस्य और रिश्तेदार मकान के अंदर ही फंस गए। घटना की खबर लगते ही आग बुझाने मौके पर पहुंचे CO अनुज चौधरी और अन्य पुलिसकर्मी उस समय बाल-बाल बच गये, जब पेट्रोलियम पदार्थ के कारण आग का बवंडर उठ खड़ा हुआ। दमकल कर्मियों ने कड़ी मशक्कत कर आग पर पाया काबू। राहत की बात ये रही कि हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ

जानकारी के मुताबिक, चंदोसी थाना क्षेत्र के मौलागढ़ गांव में बीते गुरुवार सुबह करीब 9:30 बजे मौलागढ़ में एक शादी के घर में अचानक भीषण आग लग गई, जिससे अफरा-तफरी मच गई। इस घर में शादी की तैयारी चल रही थी और मेहमान व रिश्तेदार एकत्रित थे। बताया जा रहा है कि सिलेंडर से लीक हुई गैस में लगी चिंगारी से भड़की, जिसने पास में रखे डीजल के ड्रमों को भी चपेट में ले लिया। आग लगते ही मकान में अफरा-तफरी मच गई और लोग मदद के लिए चिल्लाने लगे।

घटना की खबर लगते ही फायर ब्रिगेड की गाड़ियां तुरंत मौके पर पहुंचीं, लेकिन कई घंटे की कड़ी मशक्कत के बावजूद अभी तक आग पर पूरी तरह से काबू नहीं पाया जा सका है। घटना के समय घर में शादी की तैयारियां चल रही थीं। आग बुझाने की कोशिश में दूल्हे का छोटा भाई झुलस गया, जिसे स्थानीय लोगों की मदद से उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया है। पड़ोस के लोगो ने आग को विकराल रूप लेने का कारण बताया है कि, यहां पर लंबे समय से पेट्रोल और डीजल की अवैध बिक्री का कारोबार चल रहा था। गनीमत रही कि समय रहते सभी लोगों को बाहर निकाल लिया गया, नहीं तो बड़ी जनहानि हो सकती थी। घटना से शादी की खुशियां मातम में बदल गईं। प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं।

घरेलू कपड़ा उद्योग में वृद्धि की उम्मीद

0

विजय गर्ग

पर्यटन और प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने के बाद प्रधानमंत्री ने अब भारतीय वस्त्र उद्योग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प लिया है। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित निवेशकों के सम्मेलन में उन्होंने मध्य प्रदेश को कपड़ा उद्योग क्षेत्र में ‘कपास राजधानी’ बताया। इसका कारण यह है कि देश के कुल जैविक कपास उत्पादन का 25 प्रतिशत यहीं से आता है। चंदेरी, माहेश्वरी और खजुराहो जैसे क्षेत्रों में स्वदेशी साड़ियों का बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जाता है। यह उद्योग ज्ञान परंपरा और स्वदेशी उपकरणों की मदद से सदियों से चल रहा है। यदि इसमें पर्याप्त पूंजी निवेश के साथ प्रौद्योगिकी आधारित आधुनिकीकरण किया जाए तो न केवल उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि इन उत्पादों के लिए वैश्विक बाजार भी उपलब्ध होगा।

ऋग्वेद सहित धार्मिक और ऐतिहासिक ग्रंथों के अध्ययन से पता चलता है कि भारत प्राचीन काल से ही कपास उत्पादन, कपड़ा बनाने और रंगाई में अग्रणी रहा है और इसलिए यहां कपड़े पहनने और लपेटने के कई तरीके प्रचलित रहे हैं। ऋग्वेद तथा अन्य संस्कृत ग्रंथों में भी वस्त्रों का विस्तृत वर्णन मिलता है। इन ग्रंथों में विभिन्न प्रकार की वेशभूषा का वर्णन है। भारत में भूगोल, जलवायु, ऋतु, राशि, जाति और धर्म के आधार पर वस्त्र शैलियों में विविधता है। उत्सवों, खेलों, नृत्यों और युद्ध के दौरान अलग-अलग वेशभूषा पहनी जाती थी। भारत में कपास उत्पादन और उससे वस्त्र बनाने की परंपरा पांच हजार वर्ष से भी अधिक पुरानी है।

कारीगर कपड़े बनाने के लिए चरखे पर कपास कातते थे। वे धागे और कपड़े को रंगने की तकनीक में भी कुशल थे। यह स्पष्ट है कि भारत प्राचीन काल से ही विभिन्न प्रकार के वस्त्र बनाने और पहनने में माहिर रहा है। इसीलिए इसे सूती वस्त्र उद्योग का नाम मिला। यह उद्योग अपनी विस्तृत मूल्य श्रृंखला, स्थानीय कच्चे माल की उपलब्धता और विनिर्माण कला में विशेषज्ञता के कारण विश्व के प्रमुख वस्त्र उद्योगों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। एक ओर, छोटे कारीगर वस्त्र निर्माण में लगे हुए हैं। दूसरी ओर आधुनिक मशीनों से कपड़े बनाने वाले बड़े उद्यमी भी सक्रिय हैं। जब अंग्रेजों ने व्यापार के बहाने इस उद्योग पर अपनी नजरें गड़ाईं तो उन्होंने इस पारंपरिक हस्तकला को नष्ट कर दिया और ब्रिटेन से लाई गई मशीनों से कपड़े का उत्पादन शुरू कर दिया। 1818 में कोलकाता के पास फोर्ट ग्लूसेस्टर में पहला सूती वस्त्र उद्योग स्थापित किया गया था। इसके बाद 1854 में मुंबई में बॉम्बे स्पिनिंग मिल की नींव रखी गई। आज देश में करीब 3400 कपड़ा उद्योगों के जरिए 10 करोड़ लोग अपनी आजीविका कमा रहे हैं। इसके अलावा बड़े पैमाने पर कपड़ा उत्पादन हथकरघा, हस्तशिल्प, लघु विद्युत करघे और पारंपरिक तरीकों से भी किया जाता है।

ये लघु एवं कुटीर उद्योग स्थानीय स्तर पर लाखों लोगों को रोजगार प्रदान करते हैं। इस उद्योग में कपास, प्राकृतिक और मानव निर्मित रेशे, रेशम आधारित कपड़े और बुने हुए कपड़े शामिल हैं। भारत के कुल निर्यात में वस्त्र उद्योग का योगदान 4.5 प्रतिशत है तथा निर्यात आय में इसका योगदान 15 प्रतिशत है। हालाँकि, विदेशी वस्त्रों के आयात ने इस घरेलू उद्योग को कमजोर कर दिया है। निर्यात में भी गिरावट आई है। बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देश कपड़ा निर्यात में भारत से आगे निकल गए हैं। मध्य प्रदेश पहले से ही वस्त्र निर्माण में अग्रणी रहा है। ग्वालियर में जे.सी. मिल्स, इंदौर में हुकमचंद मिल्स और उज्जैन में विनोद मिल्स जैसे बड़े कपड़ा उद्योग सत्तर के दशक तक सक्रिय थे। लेकिन कर्मचारी संगठनों की हड़तालों ने उन्हें लगभग नष्ट कर दिया।

बिड़ला का कपड़ा उद्योग आज भी नागदा में मौजूद है। इसके अलावा चंदेरी और महेश्वर में हाथ से चरखे चलाकर बड़े पैमाने पर साड़ियों का उत्पादन जारी है। असली चंदेरी साड़ी को जीआई टैग प्राप्त होता है, जो इसकी प्रामाणिकता और गुणवत्ता को प्रमाणित करता है। इससे ग्राहकों को नकली साड़ियों से सुरक्षा मिलती है। हाल ही में ग्वालियर में आर्यप्रताप सिंह ने वैदिक विज्ञान पर आधारित वस्त्र निर्माण का कार्य शुरू किया है। आजकल युवाओं में वास्तु और ज्योतिष के प्रति रुचि बढ़ रही है। इसे ध्यान में रखते हुए वैदिक ज्योतिष, ग्रह-नक्षत्रों के प्रतीक चिन्हों वाले वस्त्रों का उत्पादन शुरू किया गया है।

इनकी कीमत 80,000 रुपये से लेकर 4 लाख रुपये तक है। कंप्यूटर साइंस इंजीनियर और गॉड कंपनी के सीईओ आर्य प्रकाश सिंह बताते हैं कि वह ग्राहकों की जन्मतिथि, स्थान, समय और हस्तरेखा के आधार पर कपड़े बनाते हैं। इन्हें राशि पर रंग, रत्न और धातु के प्रभाव के अनुसार डिज़ाइन किया गया है। इन कपड़ों की ब्रांडिंग और मार्केटिंग सोशल मीडिया, वेबसाइट और इंस्टाग्राम के जरिए की जा रही है। आर्यप्रताप को यह प्रेरणा रामायण और उस पर बनी फिल्मों और धारावाहिकों को पढ़ने से मिली। यह हमारी अज्ञानता है कि हम पश्चिमी देशों को विज्ञान और प्रौद्योगिकी में अग्रणी मानते हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि भारत, विशेषकर ब्रिटेन, उस समय बहुत आगे था, जब ब्रिटेन ने हमारे कपड़ा उद्योग पर कब्जा कर लिया था।

उस समय हमारे कारीगर 2400 से 2500 काउंट तक के महीन धागे बनाने में माहिर थे। वे एक दाने के वजन में 29 गज लम्बा सूत तैयार कर सकते थे। आज की सबसे आधुनिक तकनीक के साथ भी केवल 400 से 600 काउंट का धागा ही उत्पादित किया जा सकता है। मुर्शिदाबाद में 2400 से 2500 काउंट के धागे बनाए जाते थे। अंग्रेजों ने इस कला को खत्म करने के लिए कारीगरों के अंगूठे काट दिए, जिसके बाद भारत में ब्रिटिश कपड़ा उद्योग की स्थापना हुई। यह तकनीक किताबों में दर्ज नहीं थी, बल्कि ज्ञान-परंपरा और घरेलू प्रशिक्षण के माध्यम से कारीगरों के दिमाग में समा गई थी।

भारतीय वस्त्र उद्योग की यह समृद्ध परंपरा अंग्रेजों के दमन से प्रभावित हुई। उनकी क्रूरता का सबूत उनकी डायरियों में मिलता है। सूरत से जो कपड़ा ब्रिटेन भेजा जाता था, वह कारीगरों द्वारा जबरन बनवाया जाता था। समय पर काम पूरा न करने पर भारी जुर्माना लगाया गया। कंपनी कारीगरों को इतना कम भुगतान करती थी कि वे वही माल डच, पुर्तगाली या अरब व्यापारियों को बेच देते।

इसलिए उन्हें बहुत ऊंची कीमत मिलती है। कारीगरों को इस हद तक मजबूर किया गया कि वे इस पेशे को छोड़ भी नहीं सके। उनकी स्वतंत्रता पर कई प्रतिबन्ध लगाये गये। इस उद्योग में निवेश से न केवल इसका पुनरुद्धार होगा बल्कि लाखों लोगों को रोजगार भी मिलेगा। यह भारत की प्राचीन समृद्धि को पुनर्जीवित करने का अवसर है।

विजय गर्ग सेवानिवृत्त प्रिंसिपल शैक्षिक स्तंभकार मलोट पंजाब