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Wednesday, March 18, 2026
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मुख्य चौराहों पर चला यातायात पुलिस का चेकिंग अभियान

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हेलमेट व सीट बेल्ट न लगाने वालों को दी गई चेतावनी, जारी किए गए चालान

फर्रुखाबाद। नगर में सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों को लेकर पुलिस ने सख्ती दिखाई। शनिवार को यातायात पुलिस द्वारा नगर के प्रमुख तिराहों और चौराहों पर विशेष चेकिंग अभियान चलाया गया। इस दौरान नियमों का उल्लंघन करने वाले दोपहिया और चार पहिया वाहन चालकों के चालान काटे गए और उन्हें सावधानी बरतने की सलाह भी दी गई।

यातायात प्रभारी सत्येंद्र कुमार ने बताया कि अभियान का उद्देश्य लोगों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चलाना और बिना सीट बेल्ट के चार पहिया वाहन चलाना जानलेवा हो सकता है। इसलिए सभी वाहन चालकों को चाहिए कि वे सुरक्षा उपकरणों का अनिवार्य रूप से प्रयोग करें।

उन्होंने बताया कि चेकिंग अभियान के दौरान कई वाहन चालकों को नियमों की जानकारी दी गई और चेतावनी देकर छोड़ा गया, जबकि बार-बार नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई की गई।

प्रभारी सत्येंद्र कुमार ने यह भी स्पष्ट किया कि चेकिंग अभियान आगे भी नियमित रूप से जारी रहेगा। आमजन से अपील की गई कि वे यातायात नियमों का पालन करें, जिससे सड़क दुर्घटनाओं से बचा जा सके और यातायात व्यवस्था दुरुस्त रह सके।

अभियान के दौरान कुछ स्थानीय नागरिकों ने यातायात पुलिस के इस कदम की सराहना की और कहा कि इस तरह की चेकिंग से लोग सतर्क होंगे और सुरक्षित यात्रा की आदत विकसित होगी।

डॉ. नव्या दिवाकर बनीं समाजवादी महिला सभा की मोहम्मदाबाद ब्लॉक अध्यक्ष

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फर्रुखाबाद। समाजवादी पार्टी ने महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक और कदम उठाते हुए मोहम्मदाबाद ब्लॉक में महिला सभा की नई अध्यक्ष के रूप में डॉ. नव्या दिवाकर का मनोनयन किया है। पार्टी के जिला अध्यक्ष चंद्रपाल सिंह यादव ने डॉ. दिवाकर को मनोनयन पत्र सौंपते हुए उन्हें शुभकामनाएं दीं।

डॉ. नव्या दिवाकर लोहिया वाहिनी के प्रदेश सचिव संजय सिंघानिया की पत्नी हैं और सामाजिक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाती रही हैं। पार्टी नेतृत्व को उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में महिला सभा को नई दिशा और मजबूती मिलेगी।

इस अवसर पर जिला अध्यक्ष चंद्रपाल सिंह यादव ने डॉ. नव्या से अपेक्षा जताई कि वे जल्द से जल्द ब्लॉक स्तर पर कार्यकारिणी का गठन करें और पार्टी को सूचित करें। साथ ही उन्होंने आगामी एक माह के भीतर ब्लॉक स्तरीय पीडीए बैठक आयोजित कर संगठन को क्षेत्र में और अधिक सक्रिय करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में जिला महासचिव इलियास मंसूरी, समाजवादी छात्र सभा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य अखिल कठेरिया, श्रीमती वसुंधरा देवी, श्रीमती लक्ष्मी, श्रीमती राखी, मोहम्मद अकलीम, शीलू खान सहित कई कार्यकर्ता व पदाधिकारी मौजूद रहे।

सांसद की पहल पर खत्म हुई वकीलों की हड़ताल

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धरना स्थल पर अधिवक्ताओं और कातिबों से वार्ता करते सांसद मुकेश राजपूत। निबंधन मित्र योजना के विरोध में मुंडन करवाते अधिवक्ता अरविंद दिवाकर।

निबंधन मित्र योजना पर मिला लिखित आश्वासन, शुक्रवार से होंगी रजिस्ट्री

फर्रुखाबाद। निबंधन मित्रों की नियुक्ति के विरोध में बीते दस दिनों से तहसील सदर में चल रही अधिवक्ताओं व बैनामा लेखकों (कातिबों) की हड़ताल आखिरकार सांसद मुकेश राजपूत की पहल पर गुरुवार शाम समाप्त हो गई। धरना स्थल पर पहुंचे सांसद ने वकीलों को आश्वस्त किया कि सरकार उनका अहित नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार की कोई भी योजना अधिवक्ताओं की आजीविका को प्रभावित नहीं करेगी। एआईजी (पंजीयन) राजेश कुमार सिंह द्वारा दिए गए लिखित आश्वासन के बाद तहसील बार एसोसिएशन ने शुक्रवार से बैनामा रजिस्ट्री फिर से शुरू करने की घोषणा कर दी।

धरना स्थल पर सांसद ने कहा कि अधिवक्ताओं और कातिबों जैसे जागरूक बुद्धिजीवियों ने इस सरकार को बनाने में अहम भूमिका निभाई है, इसलिए सरकार उनका अहित नहीं कर सकती। उन्होंने स्पष्ट किया कि “निबंधन मित्र” नामक किसी योजना को लागू करने का अभी तक कोई निर्णय सरकार ने नहीं लिया है।

इस मौके पर बार एसोसिएशन ने सांसद को ज्ञापन सौंपकर बताया कि निबंधन मित्रों की नियुक्ति से अधिवक्ताओं, बैनामा लेखकों और उनसे जुड़े लाखों लोगों की आजीविका पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। उन्होंने सरकार से योजना को तत्काल निरस्त करने की मांग की। सांसद ने इस मांग को प्रमुखता से शासन तक पहुंचाने का भरोसा दिया।

हड़ताल समाप्ति की घोषणा बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अतर सिंह कटियार और सचिव अतुल मिश्रा ने की। उन्होंने कहा कि सांसद के आश्वासन और पंजीयन विभाग के सहायक महानिरीक्षक राजेश कुमार सिंह के लिखित बयान को देखते हुए वकीलों ने आंदोलन को समाप्त करने का निर्णय लिया है। शुक्रवार से सदर तहसील सहित अमृतपुर तहसील में भी बैनामा रजिस्ट्री का कार्य सामान्य रूप से संचालित होगा।

हड़ताल के दौरान विरोध के स्वर में अधिवक्ता अरविंद दिवाकर ने धरना स्थल पर सिर मुंडवा कर अपना विरोध दर्ज कराया। अधिवक्ताओं के इस संघर्ष को व्यापक समर्थन मिला।

धरना स्थल पर उपस्थित प्रमुख अधिवक्ताओं में संयुक्त सचिव विकास सक्सेना, पूर्व उपाध्यक्ष ओमप्रकाश दुबे ओमू, दयाशंकर तिवारी, अनुराग तिवारी, पंकज राजपूत, विपिन यादव, आशीष राजपूत, अंशुमान सिंह, राकेश कुमार सक्सेना, ऋषि श्रीवास्तव, स्वदेश दुबे, बैनामा लेखक संघ अध्यक्ष विनोद कुमार सक्सेना, महामंत्री मनोज त्रिवेदी, विशुनदयाल राजपूत, घनश्याम सक्सेना, संजीव भारद्वाज, अरुण कुमार सक्सेना, प्रदीप कुमार सक्सेना, स्टाम्प वेंडर ललित तांबा, सौरभ सक्सेना, अरुणेश सक्सेना, राजीव सक्सेना, राजीव सैनी, श्रीमती इन्द्रा अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता शामिल रहे।

इंटर्न डॉक्टरों का बढ़े मानदेय: यूपी के मेडिकल इंटर्न ने उठाई आवाज

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों (medical colleges) में एमबीबीएस इंटर्नशिप (MBBS Internship) कर रहे छात्र छात्राओं ने अपने मानदेय में वृद्धि की मांग तेज कर दी है। केजीएमयू, लोहिया संस्थान, जिम्स ग्रेटर नोएडा, यूपी आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई समेत राज्य के अन्य सरकारी और स्वशासी मेडिकल कॉलेजों (medical colleges) के इंटर्न डॉक्टरों ने स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक (Brijesh Pathak) को पत्र लिखकर अपनी कठिनाइयों से अवगत कराया है।फिलहाल, उत्तर प्रदेश में इंटर्न डॉक्टरों को मात्र 12,000 रूपये प्रतिमाह मानदेय दिया जा रहा है, जो देश में सबसे कम है।

वहीं, केंद्रीय मेडिकल कॉलेज जैसे बीएचयू और एएमयू में यह राशि 26,300 रूपये है, कर्नाटक में 32,000 रूपये पश्चिम बंगाल में 32,000 रूपये और असम में 35,000 रूपये प्रतिमाह है। यूपी के इंटर्न डॉक्टरों का कहना है कि इस मामूली राशि में भोजन, आवास, परिवहन, कोचिंग/परीक्षा शुल्क और अन्य जरूरी खर्च पूरे करना असंभव है। डॉक्टरों ने बताया कि वे ओपीडी संचालन, ऑपरेशन में सहायता, आईसीयू सेवाएं, इमरजेंसी ड्यूटी, लेबर रूम और ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में 24×7 सेवा देते हैं।

इसके बावजूद उन्हें न्यूनतम पारिश्रमिक भी नहीं मिल पा रहा। यह न केवल उनके पेशेवर सम्मान को ठेस पहुंचाता है बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से भी असुरक्षित बनाता है। इस मुद्दे पर केजीएमयू के इंटर्न डॉक्टर अनिल वर्मा ने कहा, हम दिन रात मरीजों की सेवा में लगे रहते हैं, लेकिन हमें जो मानदेय दिया जा रहा है, वह हमारी मेहनत और जिम्मेदारियों के बिल्कुल विपरीत है।

महंगाई के इस दौर में 12,000 रूपये में एक इंटर्न का जीवन चलाना बेहद कठिन है। सरकार से निवेदन है कि जल्द से जल्द मानदेय बढ़ाया जाए।इंटर्न डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र ध्यान नहीं दिया गया तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने सरकार से यह अपील की है कि उन्हें वित्तीय, पेशेवर और सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जाए ताकि वे पूरी लगन और गरिमा के साथ मरीजों की सेवा कर सकें।

“सिंदूर” और “चायवाला” से सियासत तक: मर्यादा के गिरते स्तर पर गंभीर मंथन जरूरी

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Sharad Katiyar
Sharad Katiyar

भारत की लोकतांत्रिक राजनीति में भाषा और प्रतीकों का गहरा प्रभाव रहा है। हाल ही में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेता और पश्चिम बंगाल के मंत्री उदयन गुहा द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर की गई टिप्पणी—”जो चाय बेचते थे, वो अब सिंदूर बेच रहे हैं”—ने न केवल सियासी गलियारों में हलचल मचा दी, बल्कि राजनीतिक मर्यादा पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यह बयान ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के संदर्भ में आया, जो पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्र में एक सैन्य कार्रवाई से जुड़ा है। सवाल अब बयान पर नहीं, बल्कि पूरे राजनीतिक विमर्श के गिरते स्तर और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे विषयों के राजनीतिकरण पर उठने चाहिए।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ को केंद्र सरकार ने एक सफल सैन्य मिशन बताया है, जिसे देश की सैन्य रणनीति और कूटनीतिक कौशल की बड़ी उपलब्धि के तौर पर प्रचारित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने इसे राष्ट्र की रक्षा और आतंकवाद के खिलाफ मजबूत कार्रवाई बताया, तो भाजपा नेताओं ने इसे चुनावी सभाओं में गूंजते हुए राष्ट्रभक्ति का प्रतीक बना दिया।
उदयन गुहा के बयान में ‘सिंदूर’ का प्रयोग, भाजपा द्वारा इस अभियान को महिलाओं और धार्मिक प्रतीकों से जोड़ने पर तंज के रूप में देखा गया, लेकिन जिस प्रकार से यह टिप्पणी की गई—वह असंवेदनशील, अमर्यादित और राजनीतिक शिष्टाचार के खिलाफ है।

भाजपा ने पलटवार करते हुए इसे सेना और देशभक्ति का अपमान बताया। पार्टी के प्रवक्ताओं ने टीएमसी पर देश की रक्षा से जुड़े विषयों का मज़ाक उड़ाने और राजनीति को घटिया स्तर तक ले जाने का आरोप लगाया। वहीं, टीएमसी ने बयान से किनारा करते हुए इसे व्यक्तिगत टिप्पणी बताया, लेकिन साथ ही भाजपा पर राष्ट्रीय सुरक्षा को चुनावी औजार बनाने का आरोप भी मढ़ दिया।

प्रधानमंत्री मोदी को ‘चायवाला’ कहना कोई नया व्यंग्य नहीं है। विपक्ष लंबे समय से उनके साधारण पृष्ठभूमि को नीचा दिखाने की कोशिश करता आया है, लेकिन समय ने यह दिखा दिया है कि जनता ने बार-बार मोदी की इसी छवि को पसंद किया।

अब जब ‘सिंदूर’ जैसे प्रतीक—जो भारतीय समाज में स्त्री सम्मान, श्रद्धा और पवित्रता का द्योतक हैं—का राजनीतिकरण हो रहा है, तो यह न केवल महिला भावनाओं का उपयोग है, बल्कि भारतीय संस्कृति के भावात्मक प्रतीकों को वोट पाने के हथियार में बदल देने का खतरनाक चलन भी है।

इंडियन नेशनल लोक दल (INLD) की नेत्री सुनैना चौटाला ने भी ‘एक महिला, एक सिंदूर’ का जिक्र करते हुए भाजपा के अभियान पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि सिंदूर एक स्त्री की मर्यादा और विश्वास का प्रतीक है, इसे राजनीतिक अभियानों में उपयोग करना निंदनीय है।

उदयन गुहा का बयान इस बात का उदाहरण है कि राजनीतिक विमर्श किस दिशा में जा रहा है। जब राजनीतिक बहस मुद्दों से भटककर निजी कटाक्ष और प्रतीकों के तिरस्कार तक आ जाती है, तो लोकतंत्र का मूल उद्देश्य—जनहित में विमर्श—गंभीर रूप से प्रभावित होता है।

यह पहली बार नहीं है जब नेताओं ने मर्यादा की सीमा पार की हो। लेकिन विडंबना यह है कि ऐसी टिप्पणियाँ मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से तेजी से फैलती हैं और जनता के राजनीतिक सोच पर दीर्घकालिक असर डालती हैं।
यह भी विचारणीय है कि क्या राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों को लेकर बयानबाजी केवल राजनीतिक लाभ के लिए की जानी चाहिए? क्या यह जिम्मेदारी राजनीतिक दलों की नहीं कि सेना और कूटनीतिक मिशनों को राजनीति से दूर रखें?
सवाल उठता है कि जब कोई पार्टी सैन्य ऑपरेशन का श्रेय राजनीतिक लाभ के लिए लेती है और दूसरी पार्टी उसका उपहास करती है, तो असल नुकसान किसका होता है? नुकसान सेना के मनोबल का, राष्ट्रीय एकता का और सबसे अहम, आम नागरिक के विश्वास का।

सेना कोई राजनीतिक संस्था नहीं है। वह राष्ट्र की रक्षा के लिए है। इसलिए उसका उपयोग या उपहास—दोनों ही आपत्तिजनक हैं। राजनीतिक दलों को यह समझना होगा कि वोट भले चुनाव से मिलते हों, लेकिन देश की रक्षा में किए गए बलिदान राजनीति से ऊपर होते हैं।

उदयन गुहा का यह बयान इस बात का प्रतीक बन गया है कि हम एक ऐसे दौर में प्रवेश कर चुके हैं, जहां संवेदनशील विषयों और सांस्कृतिक प्रतीकों का उपयोग राजनीतिक हथियार के रूप में हो रहा है। एक ओर जब सत्ता पक्ष राष्ट्रभक्ति की आड़ में अपनी रणनीतियों को महिमामंडित करता है, वहीं विपक्ष उसे तंज और उपहास का माध्यम बना देता है।
राजनीति में आलोचना का स्थान है, लेकिन उसमें गरिमा होनी चाहिए। प्रधानमंत्री के खिलाफ तीखी आलोचना करना किसी भी विपक्ष का लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन उसकी भाषा इतनी असंवेदनशील हो कि वह राष्ट्र या संस्कृति के प्रतीकों को ठेस पहुंचाए—यह निंदनीय है।

वक्त आ गया है जब सभी राजनीतिक दल, खासकर उनके प्रवक्ता और नेता, आत्ममंथन करें। यह समझें कि जनप्रतिनिधियों की भाषा और विचार न केवल पार्टी की छवि बनाते हैं, बल्कि लोकतंत्र की गुणवत्ता भी तय करते हैं।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर हो रही बहस इस बात की प्रतीक बन चुकी है कि भारतीय राजनीति अब प्रतीकों, भावनाओं और मीडिया नैरेटिव्स पर आधारित हो गई है। यह चिंता का विषय है। ऐसे समय में जबकि देश गंभीर सामाजिक, आर्थिक और कूटनीतिक चुनौतियों का सामना कर रहा है, नेताओं से उम्मीद की जाती है कि वे मुद्दों की बात करें—ना कि तंज और कटाक्षों से लोकतंत्र का उपहास बनाएं।

भारतीय राजनीति को नये विमर्श की जरूरत है—ऐसा विमर्श जो गरिमा, ज्ञान और जिम्मेदारी के साथ हो। जहां प्रधानमंत्री को आलोचना का सामना करना पड़े, तो वह तथ्यों और नीतियों पर हो; और जहां विपक्ष बोल रहा हो, तो वह राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर बोले।

क्योंकि लोकतंत्र का मूल्य सिर्फ चुनाव जीतने में नहीं, बल्कि जनता का विश्वास बनाए रखने में है।

रानी अहिल्याबाई की त्रि-जन्म शताब्दी स्मृति में संगोष्ठी का आयोजन, लाभार्थियों को बांटे गए मनरेगा प्रमाण पत्र

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Queen Ahilyabai
Queen Ahilyabai

            शमशाबाद विकासखंड में आयोजित कार्यक्रम में भाजपा जिलाध्यक्ष फतेहचंद वर्मा रहे मुख्य अतिथि

फर्रुखाबाद: रानी अहिल्याबाई होलकर (Queen Ahilyabai Holkar) की त्रि-जन्म शताब्दी स्मृति अभियान (Tri-birth centenary memorial campaign) के अंतर्गत गुरुवार को शमशाबाद विकासखंड ब्लॉक सभागार में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) के जिलाध्यक्ष फतेहचंद वर्मा उपस्थित रहे। इस अवसर पर मनरेगा योजना के अंतर्गत लाभ प्राप्त कर चुके पात्रों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्य महिला आयोग की पूर्व सदस्य और कायमगंज की पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष डॉ. मिथिलेश अग्रवाल ने कहा कि रानी अहिल्याबाई होलकर ने सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने और महिलाओं को सम्मान दिलाने का महत्वपूर्ण कार्य किया। उनके शासनकाल को न्यायप्रिय और जनकल्याणकारी बताते हुए उन्होंने कहा कि रानी अहिल्याबाई के जीवन से प्रेरणा लेकर नई पीढ़ी अपने गौरवशाली इतिहास से जुड़ रही है।

डॉ. अग्रवाल ने कहा, “आज की युवा पीढ़ी रानी अहिल्याबाई के जीवन संघर्ष और उपलब्धियों के बारे में जानने को उत्साहित है। उन्होंने अपने पराक्रमी, न्यायिक और जनहितैषी शासन से भारतीय इतिहास में स्वर्णिम स्थान अर्जित किया।”

इस अवसर पर शमशाबाद के पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष विजय गुप्ता, पूर्व मंडल अध्यक्ष राम लखन राजपूत, ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि राम किशोर राजपूत और मंडल अध्यक्ष अनुज शाक्य समेत कई अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में मनरेगा योजना के लाभार्थियों को सम्मानपूर्वक प्रमाण पत्र वितरित किए गए। आयोजकों ने इस प्रकार के आयोजनों को समाजिक जागरूकता और प्रेरणा का माध्यम बताया, जो इतिहास और योजनाओं के सकारात्मक प्रभाव को आमजन तक पहुंचाते हैं।