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Wednesday, March 18, 2026
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न्याय का मुंह ताकती गैंगरेप पीड़िता—कब जागेगी पुलिस व्यवस्था की संवेदनशीलता?

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शरद कटियार

उत्तर प्रदेश सरकार लगातार यह दावा करती रही है कि प्रदेश में महिला सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। तमाम योजनाएं, नीतियां और महिला सशक्तिकरण के वादे इसके प्रमाण स्वरूप प्रस्तुत किए जाते हैं। लेकिन जब ज़मीनी हकीकत पर दृष्टि डालते हैं, तो कई बार इन दावों की विश्वसनीयता पर ही प्रश्नचिह्न लग जाता है। जनपद फर्रुखाबाद के शमसाबाद थाना क्षेत्र के ग्राम गदनपुर वक्स में हुई गैंगरेप की घटना और उस पर पुलिस की निष्ठुर चुप्पी उसी सच्चाई का आइना है, जो शासन-प्रशासन की संवेदनहीनता को उजागर करता है।

11 मई को शाहजहांपुर की एक युवती के साथ गैंगरेप जैसी बर्बर घटना होती है। उसका अपहरण किया जाता है, नशीला पदार्थ खिलाकर बेहोश किया जाता है, उसे बंद कमरे में कैद कर के उसके साथ तीन युवकों द्वारा दुष्कर्म किया जाता है। उसे बेल्ट से पीटा जाता है, जबरन शादी का दबाव डाला जाता है, उसकी अस्मिता और आत्मसम्मान को रौंदा जाता है। लेकिन इससे भी अधिक अमानवीय पहलू यह है कि 14 दिन बीतने के बाद भी वह न्याय से कोसों दूर खड़ी है। न मेडिकल परीक्षण हुआ, न मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान दर्ज हुआ और न ही अब तक किसी आरोपी की गिरफ्तारी हुई।
यह कोई मामूली लापरवाही नहीं है। यह वह खामोशी है जो अपराधियों के हौसले को बढ़ाती है और पीड़िता को दोबारा पीड़ित करती है। इस मामले में फर्रुखाबाद पुलिस का रवैया इस बात का प्रतीक बन गया है कि पीड़िताओं को न्याय मिलने का रास्ता कितना कठिन, पीड़ादायक और असंवेदनशील बन चुका है। शमसाबाद थाना पुलिस ने न सिर्फ अपनी कानूनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ा है, बल्कि महिला सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दे पर शासन के दावों को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है।

एक ओर जहां जीरो एफआईआर दर्ज की जा चुकी है, वहीं दूसरी ओर उस एफआईआर पर कोई ठोस कार्रवाई न होना बताता है कि पुलिस ने अपनी भूमिका महज़ खानापूर्ति तक सीमित रखी। ज़ीरो एफआईआर का मकसद यह होता है कि तत्काल कार्रवाई हो, मेडिकल परीक्षण कराया जाए, साक्ष्य जुटाए जाएं और अपराधियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित हो। लेकिन यहां इन सभी बिंदुओं की खुलेआम अवहेलना की गई है।

सरकारी नियम स्पष्ट कहते हैं कि किसी पीड़िता को स्टॉप सेंटर में अधिकतम 10 दिन तक ही रखा जा सकता है। लेकिन इस मामले में पीड़िता को 14 दिन से वही रखा गया है। यह साफ दर्शाता है कि महिला कल्याण से जुड़ी नीतियों की जानकारी तक पूरी तरह लागू नहीं हो रही है। जिला प्रोबेशन अधिकारी की स्वीकारोक्ति कि “अभी कार्रवाई अधूरी है”, अपने आप में इस बात का प्रमाण है कि प्रशासनिक स्तर पर समन्वय और संवेदनशीलता दोनों की भारी कमी है।

यह केवल एक कानूनी चूक नहीं है, यह उस युवती के आत्मसम्मान, उसके अस्तित्व, उसकी उम्मीदों और उसके जीवन के साथ क्रूर मज़ाक है। वह जिस पीड़ा और मानसिक आघात से गुज़र रही होगी, उसकी कल्पना भी किसी सामान्य व्यक्ति के लिए कठिन है।

जब कोई पीड़िता शिकायत लेकर थाने पहुंचती है, तो वह प्रशासन और न्याय प्रणाली पर अपने विश्वास को समर्पित करती है। लेकिन जब वही प्रणाली उसे 14 दिनों तक न्याय से वंचित रखती है, तो यह पूरे सिस्टम की सामूहिक विफलता बन जाती है।

यह घटना सिर्फ फर्रुखाबाद या उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है। यह पूरे देश के लिए एक चेतावनी है कि हम किस दिशा में जा रहे हैं। एक तरफ हम महिला आरक्षण की बात करते हैं, बेटियों को पढ़ाने और बढ़ाने के नारे लगाते हैं, और दूसरी तरफ हम उनकी पीड़ा के समय उन्हें अकेला छोड़ देते हैं।

बलात्कार जैसे जघन्य अपराध में मेडिकल परीक्षण का समय पर होना अत्यंत आवश्यक है। यह न केवल साक्ष्य के रूप में महत्वपूर्ण होता है, बल्कि पीड़िता के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा के लिए भी जरूरी होता है। देरी के कारण साक्ष्य समाप्त हो सकते हैं, जिससे न्यायिक प्रक्रिया कमजोर पड़ जाती है। इसी प्रकार मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान दर्ज न कराना भी न्याय में देरी का बड़ा कारण बनता है। ये चूकें न केवल कानून का उल्लंघन हैं, बल्कि यह पीड़िता के अधिकारों के साथ भी अन्याय है।

सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि इस पूरे घटनाक्रम के बाद क्या किसी पर कार्रवाई होगी? क्या शमसाबाद थानाध्यक्ष को जवाबदेह ठहराया जाएगा? क्या जिला प्रशासन अपनी भूमिका स्पष्ट करेगा? क्या पुलिस अधीक्षक इस मामले को गंभीरता से लेकर पीड़िता को न्याय दिलाने की दिशा में कोई ठोस कदम उठाएंगे?

और सबसे अहम सवाल—कब तक पीड़िताएं इस तरह सिस्टम की लापरवाही की शिकार होती रहेंगी? क्या हमारे देश की न्याय व्यवस्था इतनी बोझिल, इतनी असंवेदनशील और इतनी निर्लज्ज हो चुकी है कि एक गैंगरेप पीड़िता को न्याय के लिए भीख मांगनी पड़े?

ऐसे मामलों में स्थानीय और राष्ट्रीय मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। जब मीडिया चुप रहती है, तो अपराधी और व्यवस्था दोनों निडर हो जाते हैं। हमें ऐसे मामलों को उजागर कर, जिम्मेदारों को कठघरे में खड़ा करना होगा।

साथ ही, जनप्रतिनिधियों की भी जिम्मेदारी बनती है कि वे अपने क्षेत्र में हो रही घटनाओं पर संज्ञान लें। वे सिर्फ चुनावी वादों तक सीमित न रहें, बल्कि पीड़ित नागरिकों के लिए वास्तविक प्रयास करें।

इस मामले को महज एक पुलिसिया लापरवाही के तौर पर नहीं देखा जा सकता। यह एक मानवाधिकार हनन है, एक संविधान के मूल्यों की उपेक्षा है, और एक समाज की आत्मा पर गहरा घाव है। यह वह समय है जब हमें केवल प्रशासन से सवाल नहीं पूछना चाहिए, बल्कि समाज के रूप में अपने भीतर झांक कर देखना चाहिए कि हम कहां खड़े हैं।

जनमानस की मांग है कि—पीड़िता का तत्काल मेडिकल परीक्षण कराया जाए।मजिस्ट्रेट के समक्ष उसका बयान रिकॉर्ड कराया जाए।सभी आरोपियों को शीघ्र गिरफ्तार कर कड़ी सजा दिलाई जाए।मामले की निष्पक्ष जांच हो और लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। पीड़िता को समुचित सुरक्षा और परामर्श सहायता दी जाए।

आज अगर हम इस युवती के साथ खड़े नहीं हुए, तो कल यह अन्याय किसी और की बेटी, बहन या पत्नी के साथ दोहराया जाएगा। हमें चुप नहीं रहना चाहिए, क्योंकि चुप्पी भी अपराध का हिस्सा बन जाती है।

चालक को झपकी आने से पलटा मछली लदा ट्रक, बाल-बाल बचे कई वाहन

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  • आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर बड़ा हादसा टला, घंटों बाधित रहा यातायात

फर्रुखाबाद। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर उस समय अफरा-तफरी मच गई जब एक मछली से लदा ट्रक अचानक अनियंत्रित होकर पलट गया। बताया जा रहा है कि ट्रक चालक को झपकी आने के कारण यह हादसा हुआ। गनीमत यह रही कि कोई बड़ी जनहानि नहीं हुई, वरना ट्रक के पलटने से कई वाहन चपेट में आ सकते थे।

घटना बुधवार दोपहर 3 के बाद की है। मछली से भरा ट्रक तेज रफ्तार में लखनऊ की ओर जा रहा था, तभी अचानक चालक को नींद की झपकी आ गई और ट्र डिवाइडर से टकराते हुए पलट गया। ट्रक के पलटते ही मछलियों की बड़ी मात्रा सड़क पर फैल गई, जिससे वहां कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया।

दुर्घटना के तुरंत बाद हाईवे पेट्रोलिंग टीम और यूपीडा कर्मियों ने मौके पर पहुंचकर ट्रैफिक व्यवस्था संभाली। स्थानीय पुलिस ने क्रेन मंगवाकर ट्रक को हटवाया और सड़क को साफ कराया। करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद यातायात सामान्य हो सका।

मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि ट्रक के पलटने के बाद आसपास से गुजर रहे कई वाहन बाल-बाल बच गए। सड़क पर बिखरी मछलियों के चलते कई दुपहिया वाहन फिसलते-फिसलते बचे।

पुलिस ने ट्रक चालक को प्राथमिक उपचार दिलाकर पूछताछ शुरू कर दी है। मछली व्यापारी को भी सूचना दे दी गई है। दुर्घटना में चालक को हल्की चोटें आई हैं, जबकि ट्रक को भारी क्षति पहुंची है।

वीर सावरकर की जयंती पर श्रद्धांजलि संगोष्ठी में गूंजे राष्ट्रभक्ति के स्वर

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  • कायमगंज में कवियों ने काव्यांजलि के माध्यम से किया राष्ट्रनायक को नमन

कायमगंज (फर्रुखाबाद)। क्रांतिकारी विचारक वीर सावरकर की जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय प्रगतिशील फोरम द्वारा आयोजित संगोष्ठी में देशभक्ति की भावनाओं से ओतप्रोत काव्यांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम का आयोजन कृष्णा प्रेस परिसर, सदवाड़ा में किया गया, जिसकी अध्यक्षता पूर्व प्रधानाचार्य अहिवरन सिंह गौर ने की तथा संचालन शिक्षक नेता जेपी दुबे ने किया।

प्रोफेसर रामबाबू मिश्र ‘रत्नेश’ ने वीर सावरकर के अद्वितीय संघर्ष और त्याग को याद करते हुए कहा कि “काला पानी जैसी अमानुषिक यातनाएं भी उन्हें राष्ट्र धर्म से डिगा न सकीं।” उन्होंने अपनी कविता में वीरता का चित्रण करते हुए कहा—

“वे महाकाल की आन लिए भिड़ गए क्रूर दुःशासन से,
गोली की दम पर लौट दिए कुख्यात दरिंदे आसन से।
आजादी मिलती नहीं विनय से, मनुहारों से,
धरती हो जाती लाल वरण जब रण होता अंगारों से।”

प्रख्यात गीतकार पवन बाथम ने समकालीन सच्चाइयों पर आधारित देशभक्ति गीत प्रस्तुत किया—

“पर्दे के पीछे से यह नापाक इरादे साफ हैं,
भूल न जाना यहां पर केवल सौ गाली ही माफ है।
आओ मिलकर गाएं वंदे मातरम… वंदे मातरम।”

हंसा मिश्रा ने एकता का संदेश देते हुए गीत सुनाया—

“मांगता देश बलिदान, बलिदान कर।
जिंदगी वक्फ कर देश की शान पर।
खिल रहा देश में एकता का कमल,
व्यर्थ में अब न हिंदू मुसलमान कर।”

प्रो. कुलदीप आर्य की पंक्तियाँ थीं—

“अमृत पुत्र हम परहित में विषपान किया करते हैं,
भुवन विजय करते जब मन में ठान लिया करते हैं।”

डॉ. सुनीत सिद्धार्थ ने कहा—

“जब-जब भीर पड़ी,
एक साथ भारत की जनता उठकर हुई खड़ी।”

छात्र यशवर्धन ने तीखा व्यंग्य करते हुए कहा—

“सावरकर जैसे वीरों का जो अपमान किया करते हैं,
वे सच में पशु हैं, मानव दिखते हैं, व्यर्थ जिया करते हैं।”

व्यंग्यकार मनीष गौड़ ने पाकिस्तान के फील्ड मार्शल जनरल मुनीर पर कटाक्ष करते हुए कहा—

“मियां मुनीर तुम्हारे कारनामे हम नहीं समझे,
अमा तुम आदमी हो या पजामे, हम नहीं समझे।”

प्रधानाचार्य शिवकांत शुक्ला ने राजनीति और सेना पर चेतावनी भरे स्वर में कहा—

“राजनीति करनी है, करो कहीं भी जाकर,
नहीं सियासत करें आप सेना को लेकर।”

वीएस तिवारी ने कहा—

“वीर पुत्र हम असिधारों पर धरकर चरण में मचलते हैं,
तेरे जैसे विषधर के फन हम तो रोज कुचलते हैं।”

कार्यक्रम में मौजूद साहित्यप्रेमियों और गणमान्य नागरिकों ने कवियों की प्रस्तुतियों की जमकर सराहना की और वीर सावरकर को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। आयोजन ने राष्ट्रप्रेम की भावना को नई ऊर्जा दी और युवाओं में देश के प्रति समर्पण की भावना को प्रबल किया।

खंड विकास कार्यालय में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी का भव्य स्वागत

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  • सरकारी योजनाओं की समीक्षा के साथ कार्यकर्ताओं को संगठन विस्तार का मंत्र

कमालगंज (फर्रुखाबाद)। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी के कमालगंज आगमन पर खंड विकास कार्यालय में उनका जोरदार स्वागत किया गया। इस मौके पर फर्रुखाबाद सांसद मुकेश राजपूत, ब्लॉक प्रमुख पति शील चंद्र राजपूत, भाजपा जिलाध्यक्ष फतेह चंद्र राजपूत और वरिष्ठ भाजपा नेता विश्वास गुप्ता सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी ने प्रदेश अध्यक्ष को प्रतीक चिन्ह भेंट कर उनका अभिनंदन किया।

प्रदेश अध्यक्ष ने खंड विकास अधिकारी त्रिलोक चंद्र शर्मा से विभिन्न सरकारी योजनाओं की प्रगति के बारे में जानकारी ली। उन्होंने कार्यालय में मौजूद पत्रावलियों का अवलोकन किया और स्वयं सहायता समूहों द्वारा किए जा रहे कार्यों की विस्तार से समीक्षा की।

इसके बाद उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं से भेंट की और संगठन की मजबूती पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार सभी वर्गों के हित में योजनाएं संचालित कर रही है और इनका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना हम सबकी जिम्मेदारी है।

प्रदेश अध्यक्ष ने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों और उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचाएं ताकि जनता को यह समझ में आए कि भाजपा सरकार सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास की नीति पर कार्य कर रही है।

इस दौरान भारी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता और स्थानीय लोग भी उपस्थित रहे, जिन्होंने प्रदेश अध्यक्ष के संबोधन को ध्यानपूर्वक सुना और संगठन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

श्री राधा श्याम शक्ति मंदिर में आध्यात्मिक कवि गोष्ठी में गूंजे स्वच्छता और भक्ति के स्वर

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फर्रुखाबाद। नगर के लोहाई रोड स्थित श्री राधा श्याम शक्ति मंदिर में आयोजित आध्यात्मिक कवि गोष्ठी में देर रात तक भक्ति और सामाजिक जागरूकता के स्वर गूंजते रहे। राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त कवि डॉ. शिव ओम अंबर की अध्यक्षता और युवा कवि उत्कर्ष अग्निहोत्री के संचालन में सम्पन्न इस गोष्ठी का शुभारंभ डॉक्टर गरिमा पांडेय की सुमधुर वाणी वंदना से हुआ।

गोष्ठी में शहर के चयनित कवियों ने भक्ति रस में डूबी रचनाओं से ठाकुर श्री राधा श्याम को शब्द सुमन अर्पित किए। गीत, ग़ज़ल और मुक्तकों के माध्यम से कवियों ने श्रद्धालु श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। ठाकुर जी के दरबार में जयकारों के बीच बड़ी संख्या में मौजूद भक्तों ने श्रद्धापूर्वक माथा टेका।

इस अवसर पर सामाजिक संस्था समर्थ के अध्यक्ष रोहित सफ्फड़ ने मंच से शहर में स्वच्छता अभियान की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए लोगों से इसके लिए जागरूक होने का आह्वान किया।

काव्यपाठ करने वाले प्रमुख रचनाकारों में स्मृति अग्निहोत्री, प्रीति पवन तिवारी, महेश पाल सिंह उपकारी, कवि एवं पत्रकार उपकार मणि “उपकार”, वरिष्ठ गीतकार रामशंकर अवस्थी ‘अबोध’, डॉ. संतोष पांडेय, बृज किशोर सिंह ‘किशोर’, उत्कर्ष अग्निहोत्री और अध्यक्षीय काव्यपाठ में डॉ. शिव ओम अंबर शामिल रहे। सभी ने भक्ति, जीवन मूल्य और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी प्रभावशाली रचनाएं प्रस्तुत कीं।

मंदिर प्रबंधक सुरेंद्र सफ्फड़ ने सभी आगंतुकों व कवियों के प्रति आभार जताया और कार्यक्रम को सफल बनाने में योगदान देने वालों का धन्यवाद किया। कार्यक्रम में व्यावसायिक क्षेत्र से जुड़े प्रवीण कुमार सफ्फड़ ने भी विचार रखे और कवियों को बधाई दी।

कार्यक्रम में अशोक मिश्रा, हर्षित सिकतिया, अरुण जलान, रोहित गोयल, व्यापारी नेता संजय गर्ग, भारत सिंह, पुरुषोत्तम शुक्ला सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

पुलिस हिरासत में महिला की तबीयत बिगड़ी, लोहिया अस्पताल में भर्ती

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फर्रुखाबाद। थाना कादरीगेट क्षेत्र के गांव खानपुर की एक महिला की पुलिस हिरासत में तबीयत अचानक बिगड़ने से हड़कंप मच गया। आनन-फानन में पुलिस ने महिला को लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसका इलाज जारी है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, महिला अपने पति लज्जाराम को छोड़कर किसी अन्य व्यक्ति के साथ चली गई थी। इस मामले में पुलिस ने उसे बरामद कर हिरासत में लिया था। बताया जा रहा है कि महिला बीते तीन-चार दिनों से भोजन नहीं कर रही थी, जिससे उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई।

महिला की बिगड़ती हालत को देख पुलिस कर्मियों के हाथ-पांव फूल गए और तत्काल उसे लोहिया अस्पताल पहुंचाया गया। डॉक्टरों की निगरानी में उसका उपचार चल रहा है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि महिला को मेडिकल देखरेख में रखा गया है और मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी जरूरी कार्रवाई की जा रही है। वहीं, इस घटना के बाद महिला की हिरासत को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।