34 C
Lucknow
Wednesday, March 18, 2026
Home Blog Page 3152

श्री राधा श्याम शक्ति मंदिर में आध्यात्मिक कवि गोष्ठी में गूंजे स्वच्छता और भक्ति के स्वर

0

फर्रुखाबाद। नगर के लोहाई रोड स्थित श्री राधा श्याम शक्ति मंदिर में आयोजित आध्यात्मिक कवि गोष्ठी में देर रात तक भक्ति और सामाजिक जागरूकता के स्वर गूंजते रहे। राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त कवि डॉ. शिव ओम अंबर की अध्यक्षता और युवा कवि उत्कर्ष अग्निहोत्री के संचालन में सम्पन्न इस गोष्ठी का शुभारंभ डॉक्टर गरिमा पांडेय की सुमधुर वाणी वंदना से हुआ।

गोष्ठी में शहर के चयनित कवियों ने भक्ति रस में डूबी रचनाओं से ठाकुर श्री राधा श्याम को शब्द सुमन अर्पित किए। गीत, ग़ज़ल और मुक्तकों के माध्यम से कवियों ने श्रद्धालु श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। ठाकुर जी के दरबार में जयकारों के बीच बड़ी संख्या में मौजूद भक्तों ने श्रद्धापूर्वक माथा टेका।

इस अवसर पर सामाजिक संस्था समर्थ के अध्यक्ष रोहित सफ्फड़ ने मंच से शहर में स्वच्छता अभियान की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए लोगों से इसके लिए जागरूक होने का आह्वान किया।

काव्यपाठ करने वाले प्रमुख रचनाकारों में स्मृति अग्निहोत्री, प्रीति पवन तिवारी, महेश पाल सिंह उपकारी, कवि एवं पत्रकार उपकार मणि “उपकार”, वरिष्ठ गीतकार रामशंकर अवस्थी ‘अबोध’, डॉ. संतोष पांडेय, बृज किशोर सिंह ‘किशोर’, उत्कर्ष अग्निहोत्री और अध्यक्षीय काव्यपाठ में डॉ. शिव ओम अंबर शामिल रहे। सभी ने भक्ति, जीवन मूल्य और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी प्रभावशाली रचनाएं प्रस्तुत कीं।

मंदिर प्रबंधक सुरेंद्र सफ्फड़ ने सभी आगंतुकों व कवियों के प्रति आभार जताया और कार्यक्रम को सफल बनाने में योगदान देने वालों का धन्यवाद किया। कार्यक्रम में व्यावसायिक क्षेत्र से जुड़े प्रवीण कुमार सफ्फड़ ने भी विचार रखे और कवियों को बधाई दी।

कार्यक्रम में अशोक मिश्रा, हर्षित सिकतिया, अरुण जलान, रोहित गोयल, व्यापारी नेता संजय गर्ग, भारत सिंह, पुरुषोत्तम शुक्ला सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

पुलिस हिरासत में महिला की तबीयत बिगड़ी, लोहिया अस्पताल में भर्ती

0

फर्रुखाबाद। थाना कादरीगेट क्षेत्र के गांव खानपुर की एक महिला की पुलिस हिरासत में तबीयत अचानक बिगड़ने से हड़कंप मच गया। आनन-फानन में पुलिस ने महिला को लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसका इलाज जारी है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, महिला अपने पति लज्जाराम को छोड़कर किसी अन्य व्यक्ति के साथ चली गई थी। इस मामले में पुलिस ने उसे बरामद कर हिरासत में लिया था। बताया जा रहा है कि महिला बीते तीन-चार दिनों से भोजन नहीं कर रही थी, जिससे उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई।

महिला की बिगड़ती हालत को देख पुलिस कर्मियों के हाथ-पांव फूल गए और तत्काल उसे लोहिया अस्पताल पहुंचाया गया। डॉक्टरों की निगरानी में उसका उपचार चल रहा है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि महिला को मेडिकल देखरेख में रखा गया है और मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी जरूरी कार्रवाई की जा रही है। वहीं, इस घटना के बाद महिला की हिरासत को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।

मुकदमा दर्ज, फिर भी नहीं हुआ निलंबन! अधिकारियों के बढ़ते हौसले

0

लखनऊ। हिन्दुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड के तीन अधिकारियों अरुणी कुमार, धीरेज मिश्रा और अवधेश सिंह के खिलाफ बीएनएस की धारा 318(4), 316(2), 115(2), 352, 351(2) जैसी गंभीर धाराओं में मामला दर्ज होने के बावजूद अब तक न तो इन्हें निलंबित किया गया है और न ही किसी प्रकार की प्रारंभिक विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है।

जानकारी के अनुसार, ये तीनों अधिकारी एक गंभीर मामले में जांच के घेरे में हैं। पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी में आरोप है कि इन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए संगठित रूप से धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश को अंजाम दिया। ये धाराएं न केवल सेवा नियमों के विरुद्ध हैं बल्कि सार्वजनिक संस्थानों की साख पर भी सीधा प्रहार करती हैं।

सबसे चिंताजनक बात यह है कि निलंबन न होने से इन अधिकारियों के हौसले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, वे अब पीड़ित पक्ष पर दबाव बना रहे हैं, गवाहों को डराया जा रहा है, और पुलिस जांच को भी प्रभावित करने की कोशिशें हो रही हैं।

एचयूआरएल जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम में, जहाँ पारदर्शिता और जवाबदेही की बात की जाती है, वहां ऐसे मामलों में ऊपरी स्तर पर चुप्पी और निष्क्रियता कई सवाल खड़े कर रही है। जब छोटे कर्मचारियों को मामूली गलती पर सस्पेंड कर दिया जाता है, तब ऐसे गंभीर आरोपों के बावजूद बड़े अधिकारियों को संरक्षित किया जाना ‘दोहरी नीति’ का उदाहरण बन चुका है।

फर्रुखाबाद पुलिस की लापरवाही: 14 दिन से गैंगरेप पीड़िता न्याय को तरस रही, न मेडिकल हुआ, न बयान, न गिरफ्तारी

0

फर्रुखाबाद। एक ओर सरकार महिला सुरक्षा को लेकर तमाम दावे करती है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। जनपद के थाना शमसाबाद क्षेत्र के ग्राम गदनपुर वक्स में गैंगरेप की शिकार एक युवती 14 दिन से न्याय की बाट जोह रही है, लेकिन पुलिस की निष्क्रियता और संवेदनहीनता ने उसकी पीड़ा को और गहरा कर दिया है। न तो अभी तक मेडिकल परीक्षण कराया गया है, न मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान दर्ज हुए हैं और न ही आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है। ग्राम खकुड़ी, थाना कांट, जनपद शाहजहांपुर की रहने वाली युवती ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि 11 मई को गदनपुर वक्स गांव के निवासी संदीप ने उसे अपने घर बुलाया। वहां उसे नशीला पदार्थ खिलाकर बेहोश कर दिया गया। जब होश आया तो उसने खुद को एक बंद कमरे में पाया, जहां संदीप, राहुल और विशाल ने उसे कैद कर लिया।

पीड़िता के अनुसार, संदीप ने उसे बेल्ट से पीटा और बलात्कार किया। इसके बाद राहुल ने जबरन शादी का दबाव बनाया। आरोप है कि राहुल ने उसे धमकी दी कि वह पैसे देकर उसे खरीद चुका है और अब वह उसी के साथ पत्नी बनकर रहेगी। जब युवती ने इसका विरोध किया तो उसे जान से मारने की धमकी दी गई।कई दिन तक बंद कमरे में रहने के बाद एक दिन आरोपियों ने उसे कपड़े दिलाने के बहाने बाहर निकाला। मौका पाकर युवती वहां से भाग निकली और किसी महिला की मदद से थाना मऊदरवाजा पहुंची। पुलिस ने मामले को चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 के सुपुर्द किया, जिसके बाद टीम ने गांव की पुष्टि की और युवती को स्टॉप सेंटर भेज दिया।

14 मई को थाना शमसाबाद में ज़ीरो एफआईआर दर्ज की गई, लेकिन उसके बाद से अब तक पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। पीड़िता का मेडिकल परीक्षण तक नहीं कराया गया है, जो कि बलात्कार जैसे गंभीर अपराध में सबसे जरूरी प्रक्रिया होती है। न ही मजिस्ट्रेट के समक्ष पीड़िता का बयान दर्ज किया गया है।

इस पूरे मामले में जिला प्रोबेशन अधिकारी अनिल चंद्रा ने स्वीकार किया कि उन्होंने शमसाबाद थानाध्यक्ष को निर्देश दे दिया है, लेकिन वह भी मानते हैं कि अब तक कार्रवाई अधूरी है।सरकारी नियमों के मुताबिक किसी पीड़िता को स्टॉप सेंटर में अधिकतम 10 दिन तक ही रखा जा सकता है, लेकिन यह युवती बीते 14 दिन से वहीं है। इससे भी ज़्यादा गंभीर बात यह है कि इतने दिन बीत जाने के बावजूद न तो पीड़िता को न्याय की दिशा में कोई ठोस भरोसा मिला और न ही उसकी रिपोर्ट पर अमल हुआ।गैंगरेप जैसा जघन्य अपराध, पीड़िता के बयान और मेडिकल की अनदेखी, ज़ीरो एफआईआर के बावजूद कोई गिरफ्तारी नहीं, ये सब दर्शाता है कि फर्रुखाबाद पुलिस संवेदनहीनता और लापरवाही की मिसाल बन चुकी है।

दो सप्ताह बीत जाने का बाद मेडिकल रिपोर्ट मे क्या ही निकलेगा यह भी अपने आप मे बड़ा सवाल है। सबसे अहम बात यह कि इस प्रदेश में पीड़ितों को न्याय सिर्फ फाइलों और वादों में ही मिलेगा? अब सवाल ये है कि क्या 14 दिन तक गैंगरेप पीड़िता को न्याय से वंचित रखने वालों पर कोई कार्रवाई होगी? क्या फर्रुखाबाद पुलिस को जवाबदेह बनाया जाएगा?

ताइक्वांडो का प्रशिक्षण देंगे दक्षिण कोरिया के ग्रेडमास्टर ली वांग यांग क्रासर

0

शिविर 5 से 12 जून तक ब्रह्मदत्त स्टेडियम में आयोजित होगा

फर्रुखाबाद। डिस्ट्रिक्ट ताइक्वांडो एसोसिएशन ने खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण देने के उद्देश्य से एक विशेष प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया है। यह शिविर 5 जून से 12 जून तक ब्रह्मदत्त स्टेडियम में चलेगा, जिसमें सिर्फ जनपद फर्रुखाबाद के खिलाड़ी ही भाग लेंगे।

एसोसिएशन की अध्यक्ष डॉ. रजनी सरीन ने बताया कि यह शिविर अंतरराष्ट्रीय मानकों को ध्यान में रखकर आयोजित किया जा रहा है। खास बात यह है कि प्रशिक्षण दक्षिण कोरिया के प्रसिद्ध ग्रेडमास्टर ली वांग यांग देंगे, जो ब्लैक बेल्ट धारक एवं विश्वस्तरीय प्रशिक्षक हैं।

डॉ. सरीन ने कहा कि जनपद के ब्लैक बेल्ट खिलाड़ियों को भविष्य के प्रशिक्षक के रूप में तैयार करना तथा मार्शल आर्ट्स और आत्मरक्षा के माध्यम से विशेषकर बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना इस शिविर का मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने बताया कि जिला विद्यालय निरीक्षक एवं जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से अनुरोध किया गया है कि आत्मरक्षा को विद्यालयों में बढ़ावा दिया जाए।

अब तक जनपद के खिलाड़ी केवल ख्योरगी (फाइट) श्रेणी में ही प्रतिभाग करते थे, लेकिन ग्रेडमास्टर ली वांग यांग के मार्गदर्शन में वे अब पूमसे (Forms) कैटेगरी में भी दक्षता प्राप्त कर सकेंगे।

गर्मी को देखते हुए प्रशिक्षण हॉल में सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं – जिसमें ग्लूकोज, इनरजोल, नींबू पानी, कूलर, पंखे आदि शामिल हैं। साथ ही प्रशिक्षण के दौरान स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थितियों से निपटने के लिए एंबुलेंस और डॉक्टर की व्यवस्था भी की गई है। इसके लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी को पत्र भेजकर सहयोग का अनुरोध किया गया है।

डॉ. सरीन ने कहा कि इस प्रशिक्षण का उद्देश्य जनपद के खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की निपुणता प्रदान कर उन्हें प्रदेश और देश का नाम रोशन करने में सक्षम बनाना है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि भविष्य में जनपद के खिलाड़ी भी ग्रेडमास्टर की उपाधि प्राप्त कर देश-विदेश में प्रशिक्षण देंगे।

प्रशिक्षण के दौरान ग्रेडमास्टर ली वांग यांग जिले के ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण भी करेंगे। इस अवसर पर उदय बाथम, शीश मल्होत्रा, अजय प्रताप सिंह सहित कई अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।

मानव जीवन में कला का महत्व

0

विजय गर्ग

कला एक सर्वग्राही धारणा है जो मानव जाति के विकास में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कला मानव गतिविधियों और उन गतिविधियों के उत्पादों की एक विविध श्रृंखला है। कला एक विविध क्षेत्र है और इसमें कई रूपों में कलात्मक छाप शामिल हैं जिसमें पेंटिंग, मूर्तिकला, प्रिंटमेकिंग, फोटोग्राफी और अन्य दृश्य मीडिया सहित क्षेत्रों में छवियों या वस्तुओं का निर्माण शामिल हो सकता है। वास्तुकला को अक्सर दृश्य कला में से एक के रूप में शामिल किया जाता है; हालाँकि, सजावटी कला की तरह। कला के पहले रूप प्राचीन गुफाओं की दीवारों पर पत्थर के कामों के साथ-साथ पेंटिंग के रूप में पाए गए थे। तो हम अनुमान लगा सकते हैं कि पेंटिंग कला का पहला तरीका था। पेंटिंग कला का सबसे समझने योग्य तरीका है क्योंकि यह हमें सबसे पूर्ण और ज्वलंत छाप देता है। संगीत, थिएटर, फिल्म, नृत्य, और अन्य प्रदर्शन कला, साथ ही साहित्य, और अन्य मीडिया जैसे इंटरैक्टिव मीडिया कला की व्यापक परिभाषा में शामिल हैं। एक कविता, एक पेंटिंग, कलाकार द्वारा बनाई गई एक मूर्तिकला उसे खुशी देती है जबकि वह निर्माण के कार्य में है; यह समय की चूक के बाद उसे फिर से खुशी देता है, जब वह कल्पनाशीलता से सृजन के मूल क्षण को फिर से बनाता है या फिर से जीवित करता है और उस कला को ध्यान से देखने वाले व्यक्ति को खुशी की एक बड़ी भावना भी देता है। ऑनलाइन आर्ट कोर्सबेस्ट हेडफोन डील करता है

कला कई चीजों को व्यक्त करने का एक तरीका है। यह भावनाओं से निपटने का एक तरीका है जिसे बातचीत या शब्दों जैसे विशिष्ट साधनों के माध्यम से व्यक्त नहीं किया जा सकता है। कला आपकी भावनाओं को व्यक्त करने का एक तरीका देती है। 17 वीं शताब्दी तक, कला को किसी भी कौशल या महारत के लिए संदर्भित किया जाता है और शिल्प या विज्ञान से अलग नहीं किया जाता था, लेकिन आधुनिक उपयोग में, ललित कला, जहां सौंदर्य विचार सर्वोपरि हैं, सामान्य रूप से अधिग्रहीत कौशल और सजावटी या लागू कला से अलग हैं। आज 21 वीं शताब्दी में अतीत की तुलना में कला के आयाम बहुत बदल गए हैं। इन दिनों कला न केवल आपके विचारों को व्यक्त करने का एक तरीका है, बल्कि इसका उपयोग जनता को किसी प्रकार की जानकारी या संदेश भेजने के लिए भी किया गया है। कला का उपयोग राजनीति और सामाजिक एजेंडा जैसे संपादकीय कार्टून और राजनीतिक या धार्मिक आंकड़ों पर निर्देशित चित्रों के लिए किया जा सकता है। कला लोगों को विभिन्न दृष्टिकोणों से चीजों को देखने के लिए प्रेरित और अनुमति दे सकती है। ऑनलाइन फिल्म स्ट्रीमिंग सेवाएँऑनलाइन कला पाठ्यक्रम

कविता, साहित्य, गीत, नाटक और सिनेमा के माध्यम से कला मनुष्य को सुकून देती है। कला प्रेमी अपना पूरा जीवन कला के लिए काम करने में बिता सकते हैं। कला मृत्यु और क्षय को पार करने के लिए मनुष्य की इच्छा को पूरा करने का कार्य करती है जिसके लिए सभी सांसारिक चीजें विषय हैं। कला मनुष्य को यह कल्पना करने में मदद करती है कि वांछित क्या है लेकिन उपयोग के लिए तुरंत उपलब्ध नहीं है। कला आपको दूसरी दुनिया में ले जाती है जहाँ आप अपनी भावनाओं द्वारा सब कुछ व्याख्या करते हैं। यह उसे सिज़ोफ्रेनिया की यातना और रुग्णता के बिना एक दोहरा जीवन जीने में सक्षम बनाता है। कला का महत्व हमारे मानव निर्मित पर्यावरण की प्रकृति से संबंधित है, और चाहे हम इसे एक आराम या पीड़ा के लिए बनाते हैं। समकालीन संस्कृति में कला और सुंदरता के स्थान को समझने के लिए, आपको कला के ऐतिहासिक रूपों की ओर मुड़ने की आवश्यकता है।
कला ऑनलाइन कला पाठ्यक्रमों का इतिहास कला के सही अर्थ को समझने के लिए हमें उस ऐतिहासिक अवधि से शुरू करना होगा जहां से वास्तविक कला की अवधारणा शुरू हुई थी, हालांकि आधुनिक शताब्दी में कला ने एक वाणिज्यिक मोड़ लिया है फिर भी कभी भी कम नहीं हैं जो अभी भी अपने मूल रूप में कला का सम्मान करते हैं। मानव जाति की सबसे कीमती उपलब्धियां और स्मारक, चाहे वह पिरामिड हो या ऐतिहासिक दृष्टिकोण से कोई इमारत, मनुष्य के कुछ महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटना की यादों को वापस लाने के प्रयास हैं या निकट और प्रिय लोगों के नुकसान का प्रतीक हैं जो शुरू में हमेशा के लिए खो गए थे। हम सुरक्षित रूप से कह सकते हैं कि कला मनुष्य के आत्म-प्रेम का एक उप-उत्पाद है और इस दुनिया से परे एक दुनिया में हमेशा के लिए रहने की एक शौकीन आशा है। यह कहना गलत नहीं होगा कि कला एक साधन के साथ-साथ एक अंत भी है। यह कलाकार के लिए समय और स्थान की सीमाओं को पार करने और कला के निर्माण के लिए दिन में नहीं पाए जाने वाले सुखों का हिस्सा लेने का एक साधन है, जिसकी तुलना अक्सर जन्म और मृत्यु की प्रक्रिया से की जाती है। ऑनलाइन कला पाठ्यक्रम

मूर्तियां, गुफा चित्र, रॉक पेंटिंग आदि। ऊपरी पुरापाषाण डेटिंग से लगभग 40,000 साल पहले तक पाया गया है, लेकिन ऐसी कला का सटीक अर्थ अक्सर विवादित होता है क्योंकि उन संस्कृतियों के बारे में बहुत कम जाना जाता है जिन्होंने उन्हें उत्पादित किया था। इसके अलावा, पुराने समय के दौरान किए गए सभी कार्यों की व्याख्या करना वास्तव में मुश्किल हो जाता है। कला में कई महान परंपराओं की एक महान प्राचीन सभ्यताओं में से एक की कला में एक नींव है: प्राचीन मिस्र, मेसोपोटामिया, फारस, भारत, चीन, प्राचीन ग्रीस, रोम, साथ ही इंका, माया और ओल्मेक। प्रारंभिक सभ्यता के इन केंद्रों में से प्रत्येक ने अपनी कला में एक अनूठी और विशिष्ट शैली विकसित की। इन सभ्यताओं के आकार और अवधि के कारण, उनके अधिक कला कार्य बच गए हैं और उनका अधिक प्रभाव अन्य संस्कृतियों और बाद के समय में प्रेषित किया गया है। कुछ ने कलाकारों के काम करने के पहले रिकॉर्ड भी उपलब्ध कराए हैं. ऑनलाइन कला पाठ्यक्रम

पूर्व में, इस्लामी कला के आइकॉनोग्राफी को अस्वीकार करने से ज्यामितीय पैटर्न, सुलेख और वास्तुकला पर जोर दिया गया। इसके अलावा पूर्व में, धर्म कलात्मक शैलियों और रूपों पर भी हावी था। यह धार्मिक कला विकास का एक महत्वपूर्ण चरण था। भारत और तिब्बत ने चित्रित मूर्तियों और नृत्य पर जोर दिया, जबकि धार्मिक चित्रकला ने मूर्तिकला से कई सम्मेलनों को उधार लिया और रूपरेखा पर जोर देने के साथ उज्ज्वल विषम रंगों का रुख किया। इस अवधि के दौरान संगीत के क्षेत्र में विभिन्न नृत्य रूपों और काफी विकास देखा गया। 17वीं सदी के बाद जापान में वुडब्लॉक प्रिंटिंग अहम हो गई. 18 वीं शताब्दी में आत्मज्ञान के पश्चिमी युग ने घड़ी के ब्रह्मांड के भौतिक और तर्कसंगत निश्चितताओं के कलात्मक चित्रण के साथ-साथ एक राजशाही दुनिया के राजनीतिक रूप से क्रांतिकारी दर्शन देखे। ऑनलाइन कला पाठ्यक्रम

कला ऑनलाइन कला पाठ्यक्रमों का इतिहास कला के सही अर्थ को समझने के लिए हमें उस ऐतिहासिक अवधि से शुरू करना होगा जहां से वास्तविक कला की अवधारणा शुरू हुई थी, हालांकि आधुनिक शताब्दी में कला ने एक वाणिज्यिक मोड़ लिया है फिर भी कभी भी कम नहीं हैं जो अभी भी अपने मूल रूप में कला का सम्मान करते हैं। मानव जाति की सबसे कीमती उपलब्धियां और स्मारक, चाहे वह पिरामिड हो या ऐतिहासिक दृष्टिकोण से कोई इमारत, मनुष्य के कुछ महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटना की यादों को वापस लाने के प्रयास हैं या निकट और प्रिय लोगों के नुकसान का प्रतीक हैं जो शुरू में हमेशा के लिए खो गए थे। हम सुरक्षित रूप से कह सकते हैं कि कला मनुष्य के आत्म-प्रेम का एक उप-उत्पाद है और इस दुनिया से परे एक दुनिया में हमेशा के लिए रहने की एक शौकीन आशा है। यह कहना गलत नहीं होगा कि कला एक साधन के साथ-साथ एक अंत भी है। यह कलाकार के लिए समय और स्थान की सीमाओं को पार करने और कला के निर्माण के लिए दिन में नहीं पाए जाने वाले सुखों का हिस्सा लेने का एक साधन है, जिसकी तुलना अक्सर जन्म और मृत्यु की प्रक्रिया से की जाती है। ऑनलाइन कला पाठ्यक्रम

मूर्तियां, गुफा चित्र, रॉक पेंटिंग आदि। ऊपरी पुरापाषाण डेटिंग से लगभग 40,000 साल पहले तक पाया गया है, लेकिन ऐसी कला का सटीक अर्थ अक्सर विवादित होता है क्योंकि उन संस्कृतियों के बारे में बहुत कम जाना जाता है जिन्होंने उन्हें उत्पादित किया था। इसके अलावा, पुराने समय के दौरान किए गए सभी कार्यों की व्याख्या करना वास्तव में मुश्किल हो जाता है।

कला में कई महान परंपराओं की एक महान प्राचीन सभ्यताओं में से एक की कला में एक नींव है: प्राचीन मिस्र, मेसोपोटामिया, फारस, भारत, चीन, प्राचीन ग्रीस, रोम, साथ ही इंका, माया और ओल्मेक। प्रारंभिक सभ्यता के इन केंद्रों में से प्रत्येक ने अपनी कला में एक अनूठी और विशिष्ट शैली विकसित की। इन सभ्यताओं के आकार और अवधि के कारण, उनके अधिक कला कार्य बच गए हैं और उनका अधिक प्रभाव अन्य संस्कृतियों और बाद के समय में प्रेषित किया गया है। कुछ ने कलाकारों के काम करने के पहले रिकॉर्ड भी उपलब्ध कराए हैं. ऑनलाइन कला पाठ्यक्रम

पूर्व में, इस्लामी कला के आइकॉनोग्राफी को अस्वीकार करने से ज्यामितीय पैटर्न, सुलेख और वास्तुकला पर जोर दिया गया। इसके अलावा पूर्व में, धर्म कलात्मक शैलियों और रूपों पर भी हावी था। यह धार्मिक कला विकास का एक महत्वपूर्ण चरण था। भारत और तिब्बत ने चित्रित मूर्तियों और नृत्य पर जोर दिया, जबकि धार्मिक चित्रकला ने मूर्तिकला से कई सम्मेलनों को उधार लिया और रूपरेखा पर जोर देने के साथ उज्ज्वल विषम रंगों का रुख किया। इस अवधि के दौरान संगीत के क्षेत्र में विभिन्न नृत्य रूपों और काफी विकास देखा गया। 17वीं सदी के बाद जापान में वुडब्लॉक प्रिंटिंग अहम हो गई. 18 वीं शताब्दी में आत्मज्ञान के पश्चिमी युग ने घड़ी के ब्रह्मांड के भौतिक और तर्कसंगत निश्चितताओं के कलात्मक चित्रण के साथ-साथ एक राजशाही दुनिया के राजनीतिक रूप से क्रांतिकारी दर्शन देखे। ऑनलाइन कला पाठ्यक्रम

कला और संगीत: कला हमारे जीवन में एक महान भूमिका निभाती है जिसे इस तथ्य से आसानी से समझा जा सकता है कि हम में से हर एक के पास हमारे घर में एक टेलीविजन और एक संगीत प्रणाली है और हर रोज दोनों का उपयोग करते हैं, और जो काम का एक शानदार अनुप्रयोग है कला। हम रोजाना विभिन्न कलाकारों द्वारा संगीत सुनते हैं और विभिन्न फिल्मों और टेलीविजन शो देखते हैं जहां विभिन्न कलाकार प्रदर्शन करते हैं। संगीत कला का वह रूप है जो जीवन को अत्यंत आनंदमय बना सकता है और हमारे मूड पर बहुत बड़ा प्रभाव डाल सकता है। कई बार संगीत का एक सुखदायक प्रभाव हो सकता है जो आपको अपने सभी तनावों और चिंताओं को भूलने में मदद कर सकता है। कार्यस्थल में, विशेष रूप से, संगीत एक ऐसी चीज है जो लोगों को मूड सेट करने में मदद कर सकती है कि वे क्या करने वाले हैं। यदि आपके पास काम करने के लिए कुछ कठिन या कठिन है या थका हुआ महसूस कर रहे हैं, तो एक ऊर्जावान गीत संभवतः आपको जगाएगा और स्थिति में कुछ उत्साह जोड़ेगा। दूसरी ओर, हम जो फिल्में और दैनिक साबुन देखते हैं, वे भी कला का काम हैं।

संस्कृति को संरक्षित करना: कला का एक और महत्व यह है कि यह हमारी संस्कृति को संरक्षित करता है। प्राचीन स्मारकों और लिपियों, संगीत रूपों, नृत्य रूपों और डिजाइनिंग पैटर्न सहित अन्य कलात्मक दावे सभी हमारी सांस्कृतिक विरासत में शामिल हैं। जब हम इन सांस्कृतिक संरक्षण को देखते हैं तो हमें अपने गर्वित अतीत के बारे में पता चलता है और आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों को महसूस करने में भी मदद मिलेगी। इसलिए कला हमारे सांस्कृतिक संदेशों को पीढ़ियों तक ले जाने का भी काम करती है।

द जॉय ऑफ आर्ट: कई बार हमें आश्चर्य हो सकता है कि ये सभी चीजें हमारे दैनिक जीवन के लिए इतनी महत्वपूर्ण क्यों हैं और हम आसानी से आवश्यक वस्तुओं के साथ ठीक बच सकते थे जो गैर-कलात्मक थे। आप सोच सकते हैं कि हम आसानी से एक विकल्प का पता लगा सकते थे। यही कारण है कि कला इतनी मूल्यवान है! जबकि कला हमारी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण नहीं हो सकती है, यह जीवन को खुशहाल बनाती है। जब भी आप किसी हिल-स्टेशन पर जाते हैं और जबरदस्त प्राकृतिक सुंदरता को देखते हैं तो आप उस अनुभव को कई दिनों तक नहीं भूल पाते हैं। जब आप किसी पेंटिंग या पोस्टर को देखते हैं जिसे आपने अपने लिविंग रूम की दीवार पर लटकाने के लिए चुना है, तो आप खुश महसूस करते हैं। रसोई की खिड़की पर मूर्तिकला या मूर्तियाँ खुशी की भावना पैदा करती हैं। कला रूपों की ये किस्में जो हम सभी से घिरी हुई हैं, वे वातावरण बनाने के लिए एक साथ आती हैं, जिसमें हम रहना चाहते हैं, जो हमारे लिए व्यक्तिगत है।

प्रेरणादायक कला: न केवल मनोरंजन और सांस्कृतिक दृढ़ता, कला भी प्रेरणा का एक बड़ा स्रोत हो सकती है। आप आसानी से प्रेरणादायक कला पा सकते हैं, जैसे पोस्टर जो अक्सर कर्मचारियों को उत्पादक बने रहने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए कार्यस्थलों में पाए जाते हैं। अब उनके कार्यालयों में कला का उपयोग करने वाली कंपनियों की बढ़ती मात्रा के साथ-साथ पृष्ठभूमि संगीत भी चल रहा है, क्योंकि यह वास्तव में अंतिम परिणामों को बेहतर गुणवत्ता बनाने में काम करने के लिए सिद्ध होता है। इसके अलावा, आपको प्रेरणादायक गाने मिल सकते हैं जो एक उच्च वोल्टेज मैच में भाग लेने वाली टीमों के लिए बनाए जा रहे हैं, जो प्रेरणादायक कला का एक रूप भी है। कला का एक टुकड़ा हो सकता है जो आपके पास है कि आप व्यक्तिगत रूप से प्रेरक पाते हैं। बहुत से लोग जिम में संगीत पाते हैं ताकि उनके लिए काम करना प्रेरणादायक हो।

निष्कर्ष यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि हमारे जीवन में कला का महत्व काफी अधिक स्तर पर पहचाना जाता है। कला हर जगह है, हमें दैनिक आधार पर प्रभावित करती है, चाहे हमें इसका एहसास हो या न हो। जिस कला से हम घिरे हैं, चाहे वह पेंटिंग हो, संगीत हो या यहां तक कि वीडियो भी हमारे मूड और भावनाओं पर भारी प्रभाव डाल सकते हैं। कला के प्रति हमारी एकाग्रता दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है और लोगों ने गंभीर तरीके से कला की सराहना करना शुरू कर दिया है। आजकल आर्ट एंड क्राफ्ट एजुकेशन को बच्चों के लिए स्कूलों में प्रोत्साहित किया जाता है क्योंकि यह युवाओं को अपनी कल्पना को व्यक्त करने और तलाशने के लिए एक मंच प्रदान करता है। हर जगह आप जाते हैं कला स्पष्ट है। अनुसंधान और सांख्यिकी पुष्टि करते हैं कि यह शिक्षा बहुत सारी समस्याओं को हल करने में मदद करती है और महत्वपूर्ण सोच कौशल को बढ़ाती है। सभी बच्चे अकादमिक रूप से अच्छे नहीं हैं, इसलिए उन्हें अपने आप में कलाकार की खोज करने के लिए प्रोत्साहित करने से उन्हें जीवन में बढ़ने और कई अन्य क्षेत्रों में उत्कृष्टता प्राप्त करने में मदद मिल सकती है और उनके लिए एक उत्कृष्ट कैरियर अवसर साबित हो सकता है।

विजय गर्ग सेवानिवृत्त प्राचार्य शैक्षिक स्तंभकार प्रख्यात शिक्षाविद् स्ट्रीट कौर चंद एमएचआर मलोट पंजाब