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Wednesday, March 18, 2026
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राजस्थान में गर्मी का कहर, मौसम में उतार-चढ़ाव के साथ अलर्ट

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Rajasthan
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जयपुर: राजस्थान (Rajasthan) में गर्मी चरम (Heat wave) पर पहुंच चुकी है और मौसम में उतार-चढ़ाव जारी है। राज्य के कुछ इलाकों में हल्की बारिश (Rain) तो कहीं तेज गर्मी और उमस का दौर देखा गया। दक्षिण-पश्चिमी राजस्थान के कुछ इलाकों में अधिकतम तापमान अगले कुछ दिन 45-46 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जबकि बाकी इलाकों में तापमान 42-44 डिग्री के आसपास रहेगा। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में कई हिस्सों में मेघगर्जन और बारिश की संभावना है। वहीं, तापमान भी 46 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। वातावरण में नमी की मात्रा बढ़ने से उमस भरी गर्मी और असहज स्थिति बने रहने का अनुमान है।

मौसम विभाग के जयपुर केंद्र के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने बताया कि वर्तमान में राज्य के ऊपर पूर्वी हवाओं में ट्रफ बना हुआ है। इस वजह से आज दोपहर बाद जोधपुर, बीकानेर, अजमेर और जयपुर संभाग के कुछ भागों में तेज मेघगर्जन, अंधड़ (50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा) के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। मौसम केंद्र जयपुर के अनुसार, उदयपुर और कोटा संभाग के कुछ क्षेत्रों में अगले 2-3 दिन मेघगर्जन के साथ मध्यम से तेज बारिश की संभावना है। बीकानेर, जयपुर और भरतपुर संभाग में भी 29 और 30 मई को आंधी और बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है.

मौसम विज्ञान के अनुसार, राज्य के कुछ हिस्सों में मंगलवार को हल्की बारिश दर्ज की गई। राज्य के शेष भागों में मौसम शुष्क रहा. बीकानेर और जोधपुर संभागों में कुछ जगह गर्म हवाएं (लू) और गर्म रातें दर्ज की गईं. मंगलवार को बाड़मेर में सर्वाधिक अधिकतम तापमान 46.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 4 डिग्री अधिक है। झालावाड़ के अकलेरा में सर्वाधिक 15 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई। न्यूनतम तापमान बीकानेर में 33.7 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।

10 रुपये के सिक्कों को लेकर परेशानी, RBI ने जारी किया टोल-फ्री नंबर

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coins
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नई दिल्ली: दस रुपये (Rs 10) के सिक्के (coins) को लेकर अक्सर बाजारों में दुकानदार और कस्टमर से नोकझोक हुआ करती है। दस रूपये के सिक्के 14 अलग-अलग डिज़ाइन के मार्किट में चल रहे है जिसे RBI ने जारी किया है। इनमे से 10 रूपये का ऐसा सिक्का होता है जिसमे आर नहीं बना होता तो उससे दुकानदार लेने से कतराते है और कहते है यह सिक्का नकली है। यह जानना महत्वपूर्ण है कि कोई भी दुकानदार 10 रुपये का सिक्का लेने से मना नहीं कर सकता। ऐसा करने पर उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

RBI की नई गाइडलाइन, दुकानदारों को दी चेतावनी..!

1. RBI के अनुसार, अब तक 14 अलग-अलग डिज़ाइन में 10 रुपये के सिक्के जारी किए जा चुके हैं, जो सभी मान्य हैं।

2. किसी भी व्यक्ति, दुकानदार या संस्था को इन्हें स्वीकार करने से मना करने का अधिकार नहीं है।

3. ऐसा करने पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।

अगर आप सिक्के की असलियत को लेकर संशय में हैं, तो RBI ने टोल-फ्री नंबर 14440 जारी किया है। इस नंबर पर कॉल करने के कुछ सेकंड बाद अपने-आप फोन आता है, जिसमें IVR सिस्टम के जरिए 10 रुपये के सिक्कों की सारी जरूरी जानकारी दी जाती है।

तीसरे बड़े मंगल पर नाका थाने में भव्य भंडारा, इंस्पेक्टर ने वितरण किया प्रसाद

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Naka
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लखनऊ: राजधानी लखनऊ (Lucknow) के नाका थाना (Naka police station) परिसर में मंगलवार को भव्य भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। यह आयोजन हनुमान जी के प्रति आस्था और भक्ति का प्रतीक बन गया, जिसमें पुलिसकर्मियों से लेकर स्थानीय नागरिकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। भंडारे की शुरुआत हनुमान चालीसा (hanuman chalisa) के पाठ से हुई, जिसके बाद भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया। इसके पश्चात भंडारे का शुभारंभ थाना प्रभारी (इंस्पेक्टर) वीरेंद्र त्रिपाठी ने हनुमान जी को भोग अर्पित कर किया।

उन्होंने स्वयं श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया, जिससे मौके पर मौजूद लोगों में प्रसन्नता और भक्ति भाव का संचार हुआ। इंस्पेक्टर वीरेंद्र त्रिपाठी ने कहा, “यह आयोजन हमारे मन की आस्था का प्रतीक है। पुलिस की ड्यूटी के साथ-साथ समाज से जुड़ाव और धर्म के प्रति सम्मान भी जरूरी है। भंडारे जैसे आयोजन हमें एकजुट करते हैं और सकारात्मक ऊर्जा देते हैं।”

भंडारे में खिचड़ी, पूड़ी-सब्जी, हलवा सहित कई तरह के स्वादिष्ट व्यंजन श्रद्धालुओं को परोसे गए। थाना परिसर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम थे, लेकिन आयोजन पूरी तरह शांतिपूर्ण और व्यवस्थित रहा। स्थानीय निवासियों और व्यापारियों ने भी इस आयोजन की सराहना की। उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग द्वारा ऐसे धार्मिक और सामाजिक आयोजनों से जनता और प्रशासन के बीच विश्वास बढ़ता है। यह आयोजन न सिर्फ एक धार्मिक क्रियाकलाप था, बल्कि एक सामाजिक समरसता और आपसी सहयोग का उदाहरण भी पेश करता है।

कैबिनेट की बैठक में किसानो के लिए अहम फैसले

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farmers
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नई दिल्ली: भारत सरकार (Government of India) लगातार किसानो (farmers) का ध्यान रखते हुए उनके लिए अहम फैसले लेते हुए दिखाई दें रही है। इसी कर्म में के बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार (PM Narendra Modi government) ने बुधवार को केंद्रीय कैबिनेट (central cabinet) की बैठक कर के किसानो को और अधिक लाभ देने के लिए पांच अहम फैसलों पर मुहर लगाई है। इसमें से तीन अहम फैसले किसानो के लिए किए गए है। मोदी सरकार ने बुधवार को कैबिनेट की बैठक में किसानों को तोहफा देते हुए खरीफ फसल की एमएसपी में इजाफे के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।

फैसलों की जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि, किसानों के लिए एक बड़ा फैसला लिया गया है। पिछले 10-11 वर्षों में खरीफ फसलों के लिए MSP में भारी वृद्धि की गई है। इसी कड़ी में खरीफ विपणन सत्र 2025-26 के लिए MSP को कैबिनेट द्वारा अनुमोदित किया गया है। कुल राशि लगभग 2,07,000 करोड़ रुपये होने का अनुमान है… हर फसल के लिए लागत के साथ 50% को ध्यान में रखा गया है।

बता दें कि एमआईएसएस एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के माध्यम से किसानों को किफायती ब्याज दर पर अल्पकालिक ऋण की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। इसके माध्यम से 7% की रियायती ब्याज दर पर 3 लाख रुपये तक के अल्पकालिक ऋण प्राप्त हुए। जिसमें पात्र ऋण देने वाली कंपनियों को 1.5% ब्याज दिया गया।

MSP में बढ़ोतरी

धान – MSP में ₹69 प्रति क्विंटल की वृद्धि

तिल (सेसमे) – MSP में ₹452 प्रति क्विंटल की भारी बढ़ोतरी

अरहर (तूर) और उड़द – MSP में ₹300 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी

किसानो के तीन और बाकि दो पसताव पर मंजूरी

MSP में बढ़ोतरी से किसानो को लाभ मिलेगा

रेलवे परियोजना से परिवहन में होगा सुधार

किसानो के लिए ब्याज सहायता योजना

नए गोदामों का निर्माण

कृषि क्षेत्र में सुधार

 

 

न्याय का मुंह ताकती गैंगरेप पीड़िता—कब जागेगी पुलिस व्यवस्था की संवेदनशीलता?

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शरद कटियार

उत्तर प्रदेश सरकार लगातार यह दावा करती रही है कि प्रदेश में महिला सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। तमाम योजनाएं, नीतियां और महिला सशक्तिकरण के वादे इसके प्रमाण स्वरूप प्रस्तुत किए जाते हैं। लेकिन जब ज़मीनी हकीकत पर दृष्टि डालते हैं, तो कई बार इन दावों की विश्वसनीयता पर ही प्रश्नचिह्न लग जाता है। जनपद फर्रुखाबाद के शमसाबाद थाना क्षेत्र के ग्राम गदनपुर वक्स में हुई गैंगरेप की घटना और उस पर पुलिस की निष्ठुर चुप्पी उसी सच्चाई का आइना है, जो शासन-प्रशासन की संवेदनहीनता को उजागर करता है।

11 मई को शाहजहांपुर की एक युवती के साथ गैंगरेप जैसी बर्बर घटना होती है। उसका अपहरण किया जाता है, नशीला पदार्थ खिलाकर बेहोश किया जाता है, उसे बंद कमरे में कैद कर के उसके साथ तीन युवकों द्वारा दुष्कर्म किया जाता है। उसे बेल्ट से पीटा जाता है, जबरन शादी का दबाव डाला जाता है, उसकी अस्मिता और आत्मसम्मान को रौंदा जाता है। लेकिन इससे भी अधिक अमानवीय पहलू यह है कि 14 दिन बीतने के बाद भी वह न्याय से कोसों दूर खड़ी है। न मेडिकल परीक्षण हुआ, न मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान दर्ज हुआ और न ही अब तक किसी आरोपी की गिरफ्तारी हुई।
यह कोई मामूली लापरवाही नहीं है। यह वह खामोशी है जो अपराधियों के हौसले को बढ़ाती है और पीड़िता को दोबारा पीड़ित करती है। इस मामले में फर्रुखाबाद पुलिस का रवैया इस बात का प्रतीक बन गया है कि पीड़िताओं को न्याय मिलने का रास्ता कितना कठिन, पीड़ादायक और असंवेदनशील बन चुका है। शमसाबाद थाना पुलिस ने न सिर्फ अपनी कानूनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ा है, बल्कि महिला सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दे पर शासन के दावों को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है।

एक ओर जहां जीरो एफआईआर दर्ज की जा चुकी है, वहीं दूसरी ओर उस एफआईआर पर कोई ठोस कार्रवाई न होना बताता है कि पुलिस ने अपनी भूमिका महज़ खानापूर्ति तक सीमित रखी। ज़ीरो एफआईआर का मकसद यह होता है कि तत्काल कार्रवाई हो, मेडिकल परीक्षण कराया जाए, साक्ष्य जुटाए जाएं और अपराधियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित हो। लेकिन यहां इन सभी बिंदुओं की खुलेआम अवहेलना की गई है।

सरकारी नियम स्पष्ट कहते हैं कि किसी पीड़िता को स्टॉप सेंटर में अधिकतम 10 दिन तक ही रखा जा सकता है। लेकिन इस मामले में पीड़िता को 14 दिन से वही रखा गया है। यह साफ दर्शाता है कि महिला कल्याण से जुड़ी नीतियों की जानकारी तक पूरी तरह लागू नहीं हो रही है। जिला प्रोबेशन अधिकारी की स्वीकारोक्ति कि “अभी कार्रवाई अधूरी है”, अपने आप में इस बात का प्रमाण है कि प्रशासनिक स्तर पर समन्वय और संवेदनशीलता दोनों की भारी कमी है।

यह केवल एक कानूनी चूक नहीं है, यह उस युवती के आत्मसम्मान, उसके अस्तित्व, उसकी उम्मीदों और उसके जीवन के साथ क्रूर मज़ाक है। वह जिस पीड़ा और मानसिक आघात से गुज़र रही होगी, उसकी कल्पना भी किसी सामान्य व्यक्ति के लिए कठिन है।

जब कोई पीड़िता शिकायत लेकर थाने पहुंचती है, तो वह प्रशासन और न्याय प्रणाली पर अपने विश्वास को समर्पित करती है। लेकिन जब वही प्रणाली उसे 14 दिनों तक न्याय से वंचित रखती है, तो यह पूरे सिस्टम की सामूहिक विफलता बन जाती है।

यह घटना सिर्फ फर्रुखाबाद या उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है। यह पूरे देश के लिए एक चेतावनी है कि हम किस दिशा में जा रहे हैं। एक तरफ हम महिला आरक्षण की बात करते हैं, बेटियों को पढ़ाने और बढ़ाने के नारे लगाते हैं, और दूसरी तरफ हम उनकी पीड़ा के समय उन्हें अकेला छोड़ देते हैं।

बलात्कार जैसे जघन्य अपराध में मेडिकल परीक्षण का समय पर होना अत्यंत आवश्यक है। यह न केवल साक्ष्य के रूप में महत्वपूर्ण होता है, बल्कि पीड़िता के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा के लिए भी जरूरी होता है। देरी के कारण साक्ष्य समाप्त हो सकते हैं, जिससे न्यायिक प्रक्रिया कमजोर पड़ जाती है। इसी प्रकार मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान दर्ज न कराना भी न्याय में देरी का बड़ा कारण बनता है। ये चूकें न केवल कानून का उल्लंघन हैं, बल्कि यह पीड़िता के अधिकारों के साथ भी अन्याय है।

सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि इस पूरे घटनाक्रम के बाद क्या किसी पर कार्रवाई होगी? क्या शमसाबाद थानाध्यक्ष को जवाबदेह ठहराया जाएगा? क्या जिला प्रशासन अपनी भूमिका स्पष्ट करेगा? क्या पुलिस अधीक्षक इस मामले को गंभीरता से लेकर पीड़िता को न्याय दिलाने की दिशा में कोई ठोस कदम उठाएंगे?

और सबसे अहम सवाल—कब तक पीड़िताएं इस तरह सिस्टम की लापरवाही की शिकार होती रहेंगी? क्या हमारे देश की न्याय व्यवस्था इतनी बोझिल, इतनी असंवेदनशील और इतनी निर्लज्ज हो चुकी है कि एक गैंगरेप पीड़िता को न्याय के लिए भीख मांगनी पड़े?

ऐसे मामलों में स्थानीय और राष्ट्रीय मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। जब मीडिया चुप रहती है, तो अपराधी और व्यवस्था दोनों निडर हो जाते हैं। हमें ऐसे मामलों को उजागर कर, जिम्मेदारों को कठघरे में खड़ा करना होगा।

साथ ही, जनप्रतिनिधियों की भी जिम्मेदारी बनती है कि वे अपने क्षेत्र में हो रही घटनाओं पर संज्ञान लें। वे सिर्फ चुनावी वादों तक सीमित न रहें, बल्कि पीड़ित नागरिकों के लिए वास्तविक प्रयास करें।

इस मामले को महज एक पुलिसिया लापरवाही के तौर पर नहीं देखा जा सकता। यह एक मानवाधिकार हनन है, एक संविधान के मूल्यों की उपेक्षा है, और एक समाज की आत्मा पर गहरा घाव है। यह वह समय है जब हमें केवल प्रशासन से सवाल नहीं पूछना चाहिए, बल्कि समाज के रूप में अपने भीतर झांक कर देखना चाहिए कि हम कहां खड़े हैं।

जनमानस की मांग है कि—पीड़िता का तत्काल मेडिकल परीक्षण कराया जाए।मजिस्ट्रेट के समक्ष उसका बयान रिकॉर्ड कराया जाए।सभी आरोपियों को शीघ्र गिरफ्तार कर कड़ी सजा दिलाई जाए।मामले की निष्पक्ष जांच हो और लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। पीड़िता को समुचित सुरक्षा और परामर्श सहायता दी जाए।

आज अगर हम इस युवती के साथ खड़े नहीं हुए, तो कल यह अन्याय किसी और की बेटी, बहन या पत्नी के साथ दोहराया जाएगा। हमें चुप नहीं रहना चाहिए, क्योंकि चुप्पी भी अपराध का हिस्सा बन जाती है।

चालक को झपकी आने से पलटा मछली लदा ट्रक, बाल-बाल बचे कई वाहन

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  • आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर बड़ा हादसा टला, घंटों बाधित रहा यातायात

फर्रुखाबाद। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर उस समय अफरा-तफरी मच गई जब एक मछली से लदा ट्रक अचानक अनियंत्रित होकर पलट गया। बताया जा रहा है कि ट्रक चालक को झपकी आने के कारण यह हादसा हुआ। गनीमत यह रही कि कोई बड़ी जनहानि नहीं हुई, वरना ट्रक के पलटने से कई वाहन चपेट में आ सकते थे।

घटना बुधवार दोपहर 3 के बाद की है। मछली से भरा ट्रक तेज रफ्तार में लखनऊ की ओर जा रहा था, तभी अचानक चालक को नींद की झपकी आ गई और ट्र डिवाइडर से टकराते हुए पलट गया। ट्रक के पलटते ही मछलियों की बड़ी मात्रा सड़क पर फैल गई, जिससे वहां कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया।

दुर्घटना के तुरंत बाद हाईवे पेट्रोलिंग टीम और यूपीडा कर्मियों ने मौके पर पहुंचकर ट्रैफिक व्यवस्था संभाली। स्थानीय पुलिस ने क्रेन मंगवाकर ट्रक को हटवाया और सड़क को साफ कराया। करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद यातायात सामान्य हो सका।

मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि ट्रक के पलटने के बाद आसपास से गुजर रहे कई वाहन बाल-बाल बच गए। सड़क पर बिखरी मछलियों के चलते कई दुपहिया वाहन फिसलते-फिसलते बचे।

पुलिस ने ट्रक चालक को प्राथमिक उपचार दिलाकर पूछताछ शुरू कर दी है। मछली व्यापारी को भी सूचना दे दी गई है। दुर्घटना में चालक को हल्की चोटें आई हैं, जबकि ट्रक को भारी क्षति पहुंची है।