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Friday, March 20, 2026
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विफलताओं की मिसाल साबित हुए हैं मोदी शासन के 11 साल : खरगे

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नयी दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मोदी सरकार के 11 साल के शासन काल को विफल, संवैधानिक ढांचे को नुकसान पहुंचाने, हकीकत की जगह सिर्फ जुमलेबाजी करने और सामाजिक ताने बाने को आघात पहुंचाने वाला करार देते हुए सोमवार को कहा कि इस दौरान राज्यों की अनदेखी हुई तथा संघीय ढांचे को कमजोर किया गया है।

श्री खरगे ने कहा कि पिछले 11 वर्ष में मोदी सरकार ने लोकतंत्र, अर्थव्यवस्था और सामाजिक ताने-बाने को गहरा आघात पहुँचाया है। भाजपा-आरएसएस ने हर संवैधानिक संस्था को कमज़ोर कर, उनकी स्वायत्तता पर कड़ा प्रहार किया है। चाहे वो जनमत चुराकर पिछले दरवाज़े से सरकारें गिराना हो या एक-दलीय तानाशाही शासन जबरन लागू करना हो। इस दौरान, राज्यों के हकों की अनदेखी हुई है और संघीय ढांचे को कमज़ोर किया गया है।

उन्होंने कहा कि समाज में नफ़रत, धमकी और डर का वातावरण फैलाने की कोशिश जारी है। दलित, आदिवासी, पिछड़े, अल्पसंख्यक तथा कमज़ोर वर्गों का शोषण लगातार बढ़ा है। इनके आरक्षण और बराबरी के अधिकार से वंचित रखने की साजिश जारी है। मणिपुर की ना थमने वाली हिंसा भाजपा की प्रशासनिक विफलता का सबसे बड़ा सबूत है। भाजपा-आरएसएस ने देश के जीडीपी विकास दर को 5-6 प्रतिशत की आदत डाल दी, जो यूपीए सरकार के दौरान औसतन आठ प्रतिशत हुआ करता था। सालाना दो करोड़ नौकरियों का वादा पूरा करने के बजाय युवाओं से करोड़ों नौकरियाँ छीनी गयी गई। महँगाई से जनता की बचत 50 साल में सबसे कम हो गई है और आर्थिक असमानता 100 साल में सबसे अधिक कर दी गई है।

कांग्रेस अध्यक्ष ने मोदी सरकार की हर नीति को विफल करार देते हुए कहा कि नोटबंदी, गलत जीएसटी, अनियोजित लॉक-डाउन और असंगठित क्षेत्र पर हथौड़ा चलाकर करोड़ों का भविष्य बर्बाद किया। मेक इन इंडिया, स्टार्ट अप इंडिया, स्टैंउ अप इंडिया, डिजिटल इंडिया, नमामी गंगे, 100 स्मार्ट शहर, सब फेल हुए। रेलवे का बंटाधार किया। केवल कांग्रेस-यूपीए के बनाए गए ढांचे के फ़ीते काटे।

उन्होंने मोदी सरकार पर तानाशही का अरोप लगाया और कहा,“पिछले 11 वर्ष, मोदी सरकार ने संविधान के हर पन्ने पर तानाशाही की स्याही रगड़ने में गँवाए हैं।”

जापान के ओकिनावा में अमेरिकी कडेना एयर बेस पर विस्फोट, कई लोग घायल

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टोक्यो: जापान के दक्षिणी प्रांत ओकिनावा में अमेरिका की सेना के कडेना एयर बेस के गोला-बारूद भंडारण क्षेत्र में सोमवार को विस्फोट होने से कई लोग घायल हो गए।

स्थानीय मीडिया ने यह जानकारी दी। सार्वजनिक प्रसारक एनएचके ने जापान के आत्मरक्षा बलों (एसडीएफ) सूत्रों का हवाला देते हुए बताया कि विस्फोट एसडीएफ से संबंधित एक सुविधा केन्द्र में हुआ, जिसका उपयोग अस्थायी रूप से अप्रयुक्त गोला-बारूद को संग्रहीत करने के लिए किया जाता है।

स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 11:20 बजे अग्निशमन विभाग को एसडीएफ द्वारा प्रबंधित सुविधा में विस्फोट के बारे में एक रिपोर्ट मिली और बताया गया कि विस्फोट में कई लोग घायल हुए हैं।

मीडिया ने बताया कि घटना के बाद कई एसडीएफ कर्मियों को अस्पताल ले जाया गया।

एयरफोर्स वन की सीढ़ियां चढ़ते समय लड़खड़ाए ट्रंप, लोग बोले- शुरू हो गया बाइडेन 2.0

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एयरफोर्स वन की सीढ़ियां चढ़ते समय गिरते-गिरते बचे। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया की ‘दुनिया’ में हलचल मचा दी और नेटिजन्स इसे ‘बाइडेन 2. 0’ कहकर मौज लेने लगे। यह घटना तब हुई जब न्यूजर्सी में ट्रंप और विदेश मंत्री मार्को रुबियो कैंप डेविड जाने के लिए एयरफोर्स वन में सवार होने वाले थे, लेकिन तभी सीढ़ियां चढ़ते समय ट्रंप अपना बैलेंस खो बैठे। यह घटना भले ही छोटी हो, लेकिन इसने सोशल मीडिया पर एक नई बहस छेड़ दी है। जहां कुछ नेटिजन्स इसे मानवीय भूल मान रहे हैं, वहीं कुछ लोगों ने इसे ‘कर्मों का फल’ बताया है।

यह घटना इसलिए भी दिलचस्प है, क्योंकि ट्रंप ने अपने इलेक्शन कैंपेन के दौरान अक्सर पूर्व राष्ट्रपति जो बाइ़डन के सार्वजनिक रूप से लड़खड़ाने का मजाक उड़ाया था। अब चूंकि ट्रंप खुद ही इसका शिकार हो गए हैं, तो सोशल मीडिया पर लोगों को बैठे-बैठे मौज लेने का मौका मिल गया है।

शेयर कर क्रिस डी जैक्सन नाम के यूजर ने लिखा, ट्रंप एयरफोर्स वन चढ़ते समय लड़खड़ा गए। यूं कहें कि लगभग गिर गए।

एक यूजर ने तंज कसा, जब बाइडेन के साथ कुछ ऐसा हुआ था, तब मीडिया कई दिनों तक इस पर चर्चा करता रहा। तब जानबूझकर एक नैरेटिव सेट किया गया। अब जब ट्रंप फिसले हैं, तो यही लोग चुप हैं। क्यों, क्योंकि भैया इंसान फिसलते हैं, और इसमें नई बात क्या है।

‘शुरू हो गया बाइडेन 2. 0’

एक अन्य यूजर ने कमेंट किया, लो भैया…बाइडेन 20 शुरू हो गया। वहीं, एक यूजर ने तो यह तक कह दिया कि लगता है फिर से न्यूरोलॉजिकल फिटनेस टेस्ट का वक्त आ गया है। एक और यूजर ने मजाकिया लहजे में लिखा, 80 की उम्र है, फिर भी प्रेसिडेंट बने हैं।

‘हमें किडनैप कर लिया गया है…’, इजरायली ऑपरेशन के बाद ग्रेटा थनबर्ग ने जारी किया पहला वीडियो

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नई दिल्ली। इजरायली सेना ने गाजा की ओर बढ़ रहे पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग सहित अन्य 11 मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के जहाज को बीच रास्ते में ही रोककर उसे कब्जे में ले लिया है। बता दें कि ग्रेटा सहित जहाज में सवार सभी लोगों को इजरायली सेना ने डिटेन कर लिया है और उन्हें इजरायल ले जाया गया है।

इस बीच ग्रेटा ने वीडियो जारी कर बताया है कि उन्हें और उनके साथियों को किडनैप कर लिया गया है। वीडियो में ग्रेटा ने कहा कि मेरा नाम ग्रेटा थनबर्ग है। मैं स्वीडन से हूं। अगर आप ये वीडियो देख रहे हैं, तो बता दूं कि इजरायली सेना और इजरायल का समर्थन करने वाली सेना ने हमें इंटरनेशनल वॉटर में रोककर किडनैप कर लिया है। मैं अपने सभी दोस्तों, परिवार और सहयोगियों से अनुरोध करती हूं कि मुझे और मेरे सहयोगियों को जल्द से जल्द रिहा कराने के लिए स्वीडन सरकार पर दबाव बनाएं।

गाजा पहुंचने के लिए इटली के सिसली से एक जून को रवाना हुए इस जहाज का नाम The Madleen है, जो मानवाधिकार संगठन Freedom Flotilla Coalition (FFC) से जुड़ा हुआ है, लेकिन सोमवार सुबह इजरायल की 5 स्पीड बोट्स ने जहाज को घेर लिया। इसके बाद सैनिकों ने जहाज पर चढ़कर उसे अपने कंट्रोल में ले लिया। यह जहाज गाजा के लोगों के लिए राहत सामग्री लेकर जा रहा था। मैडलीन नाम के इस जहाज पर 12 लोग सवार हैं। सभी इजरायल सेना की हिरासत में हैं।

इस जहाज में चिकित्सा सुविधाएं, खाद्य सामग्री और अन्य जरूरी सामान है। इस जहजा में ग्रेटा थनबर्ग  के साथ-साथ 11 अन्य कार्यकर्ता भी हैं, जिनमें फ्रांस की सांसद रीमा हसन, जर्मनी की यासमीन जार, फ्रांस के बैप्टिस्टे आंद्रे, ब्राजील के थियागो अविला, फ्रांस के उमर फईद, पैस्कल और यानीस महादी, तुर्किए के सूयाब ओर्दू, स्पेन के सर्गियो टॉर्बियो, नीदरलैंड्स के मार्को वैन रेन्स और फ्रांस की रेवा वियार्ड शामिल हैं।

बता दें कि ग्रेटा थनबर्ग  की इस गाजा यात्रा पर इजरायल की सेना ने आपत्ति जताई थी इजरायली सेना  के प्रवक्ता एफी डेफ्रिन  ने कहा था कि हम इस पर नजर रखे हुए हैं। ग्रेटा थनबर्ग  दुनियाभर के 11 और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर जहाज से गाजा के लिए रवाना हुई थी। इस दौरान जहाज से खींची गई उनकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुई थीं। इनमें वह फिलिस्तीन का झंडा पकड़े देखी गई थी। उन्हें गाजा के समर्थन में नारे लगाते देखा गया था।

बता दें कि गाजा में 2007 से इजरायल की नौसेना की नाकेबंदी है, जो सामान और लोगों की आवाजाही को प्रतिबंधित करता है। फ्रीडम फ्लोटिला  इजरायल की इस नाकेबंदी को प्रतीकात्मक रूप से तोड़ने का प्रयास है, जिसे इजरायल अवैध और उकसाने वाला मानता है।

दो भाजपाई उप मुख्यमंत्री, दो समाज के लोगों को आपस में लड़वा रहे…, अखिलेश यादव ने भाजपा पर लगया बड़ा आरोप

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यूपी के कौशांबी में रेप के आरोपी के पिता रामबाबू तिवारी की आत्महत्या का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस मामले में कुछ लोग बच्ची से रेप पीड़िता के समर्थन में खड़े नजर आ रहे हैं तो कुछ रामबाबू तिवारी के परिवार को न्याय दिलाने की मांग कर रहे हैं। इस बीच समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा पर समाज को बांटने का आरोप लगाया है। उन्होंने बिना किसी का नाम लिया कहा कि कौशांबी में दो भाजपाई उप मुख्यमंत्री, दो समाज के लोगों को आपस में लड़वा रहे हैं।

यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ‘भाजपा की अंदरूनी राजनीति की शर्मनाक लड़ाई में, अब कौशांबी में दो भाजपाई उप मुख्यमंत्री, दो समाज के लोगों को आपस में लड़वा रहे हैं। पहले एक उप मुख्यमंत्री ने नाइंसाफी करते हुए ‘पाल’ समाज के लोगों को मोहरा बनाया, फिर दूसरे उप मुख्यमंत्री ने अपने उस समाज के नाम पर झूठी सहानुभूति दिखाई, जो समाज इन दोनों के ‘ऊपरवालों’ को नहीं भाता है, इसीलिए पीछे से वो भी सक्रिय हो गये, जिनकी पहलेवाले उप मुख्यमंत्री से पुरानी खींचातानी है। और फिर इन ऊपरवालों के ऊपरवालों की भी आपस में टकराहट है, इसीलिए केंद्रवाले, कौशांबी की राजनीति करनेवालों के साथ खड़े हैं।’

अखिलेश यादव ने आगे लिखा, ‘ध्यान से समझा जाए तो ये भाजपा की अंदर की राजनीति में मचा एक बड़ा घमासान है, जिसमें दो या दो से अधिक समाजों को आपस में भिड़वाकर ‘कौशांबी, लखनऊ, दिल्ली’ की भाजपाई राजनीति अपना वीभत्स खेल–खेल रही है, जिसका शिकार जनता हो रही है। इस लड़ाई में वो भी कूद पड़े हैं जिनका समाज ‘सत्ता सजातीय’ राजनीति का विशेष रूप से शिकार है और लगातार सत्ता के निशाने पर है, जिसके कारण दूसरे उप मुख्यमंत्री अपने समाज पर हो रहे अत्याचार और अपमान पर अपनी कुर्सी बचाने के लिए सुविधाजनक चुप्पी साधे बैठे हैं। कौशांबी के मामले में उनको लगा कि जब वो कुछ सक्रियता दिखाएँगे तो शायद सत्ता द्वारा निरंतर उत्पीड़ित व अपमानित किये जा रहे उनके अपने समाज में वो मुँह दिखाने लायक बन जाएंगे। सच तो ये है कि भाजपाइयों को जनता या किसी समाज की कुछ नहीं पड़ी है, सब अपनी-अपनी खो चुकी ज़मीन की संभावना फिर से तलाशना चाहते हैं लेकिन अब जनता बहुत चौकन्नी और जागरूक है, वो भाजपा की विभाजनकारी नकारात्मक राजनीति को अब और पनपने नहीं देगी।’

सपा अध्यक्ष ने लिखा, ‘शीर्ष भाजपाइयों’ और ‘शिखर भाजपाइयों’ के आपसी झगड़े के कारण, हर वर्ग और समाज बीच में पिस रहा है। सच्चाई तो ये है कि समाज को बाँटना और लड़ाना ही भाजपाइयों की पुरानी साज़िशाना सियासत रही है, जिसे उन्होंने उन अंग्रेज़ों से सीखा है, जिनका उन्होंने हमेशा साथ दिया था। कौशांबी भाजपा के अन्याय का शिकार है। भाजपा से हर वर्ग और समाज को अब और भी सचेत व सतर्क रहना पड़ेगा, नहीं तो ये भाजपाई समाजों के बीच आग लगाकर अपनी सियासी रोटी सेंकने में लगे रहेंगे, एक को फँसाकर आत्महत्या पर मजबूर करेंगे तो दूसरे पर इनाम घोषित करवाएँगे। कौशांबी का बच्चा-बच्चा जानता है कि सच क्या है।’

अखिलेश ने लिखा, ‘भाजपा राजनीति को इस स्तर पर ले जाएगी किसी ने सोचा भी न था। अब जनता, भाजपा की बँटवारे की इस राजनीति को समझ रही है और समझदारी से इनके ख़िलाफ़ एकजुट हो रही है। यही कारण है कि जहाँ भी कुछ लोग और समाज भाजपा के विरुध्द जाते दिखते हैं ये भाजपाई उनके बीच झूठे आरोप-प्रत्यारोप और एफ़आइआर-मुक़दमों की दीवार खड़ी कर देते हैं। भाजपा के सियासी षड्यंत्र का मुक़ाबला समाज की एकता ने देना शुरू कर दिया है। इसीलिए हर पीड़ित-उत्पीड़ित भाजपा को हराने-हटाने के लिए लामबंद हो गया है। भाजपाई नाइंसाफ़ी हारेगी।’

मणिपुर: विरोध प्रदर्शन में कलेक्टर कार्यालय जलाया, दो पत्रकार सहित 15 घायल

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इंफाल: मणिपुर में अरम्बाई टेंगोल नेता की गिरफ्तारी को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी है। जिनमे दो पत्रकारों सहित 15 लोग घायल हो गए।

सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए इंटरनेट सेवाओं को निलंबित कर दिया है और पांच जिलों इंफाल पश्चिम, इंफाल पूर्व, काकचिंग, थौबल और बिष्णुपुर में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगा दिया है।

पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि एटी नेता कानन को सीबीआई ने किसी अन्य मामले में गिरफ्तार किया था, न कि एटी के नेता के रूप में। पुलिस ने कहा कि कानन के साथ गिरफ्तार किए गए चार अन्य लोगों को भी रिहा कर दिया गया और केवल कानन को रविवार को राज्य से बाहर ले जाया गया।

पुलिस ने कहा कि वह स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है, हालांकि कुछ अज्ञात लोगों ने रविवार रात इंफाल पूर्व जिले के याइरीपोक तुलिहाल में उप-विभागीय कलेक्टर (एसडीसी) कार्यालय को जलाने की कोशिश की। अरम्बाई टेंगोल ने अपने नेता की गिरफ्तारी के विरोध में दस दिवसीय बंद की घोषणा के बीच सोमवार को बड़ी संख्या में लोग कर्फ्यू का उल्लंघन करते हुए अपना विरोध दर्ज कराने के लिए घरों से बाहर निकले और सड़कों को अवरुद्ध कर दिया।

रविवार को शुरू हुए बंद के कारण सभी शैक्षणिक संस्थान बंद हो गए हैं, बाजार बंद हो गए हैं और परीक्षाएं स्थगित कर दी गई हैं। एडिटर्स गिल्ड मणिपुर (ईजीएम) और ऑल मणिपुर वर्किंग जर्नलिस्ट्स यूनियन (एएमडब्ल्यूजेयू) ने भी इंफाल के क्वाकेथेल में सार्वजनिक विरोध प्रदर्शन को कवर करने के लिए ड्यूटी पर तैनात सीआरपीएफ कर्मियों द्वारा इम्पैक्ट टीवी न्यूज के दो पत्रकारों पर किए गए हमले की कड़ी निंदा की है। घटना के संबंध में एफआईआर दर्ज की जाएगी क्योंकि पत्रकारों पर हमला तब भी किया गया जब उन्होंने अपनी पहचान बताई थी।

सोमवार को सभी अखबारों के संपादकीय खाली थे और उन पर एक ही नारा था “एएमडब्ल्यूजेयू और ईजीएम पत्रकारों पर बार-बार किए गए हमले और धमकी की निंदा करते हैं।