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Saturday, March 21, 2026
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देश में कोरोना संक्रमण के सक्रिय मामलों की संख्या सात हजार के करीब

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नयी दिल्ली: देशभर में कोराना संक्रमण के सक्रिय मामलों की संख्या मंगलवार सुबह तक 6815 पहुंच गयी और पिछले 24 घंटों के दौरान इसके संक्रमण से तीन और मरीजों की मौत होने से मृतकों की संख्या 68 पहुंच गयी है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार आज सुबह आठ बजे तक 324 नए संक्रमण के मामले सामने आए, जिससे कुल सक्रिय मामलों की संख्या 6,815 हो गई और इस बीमारी के संक्रमण से 7644 मरीज स्वस्थ हो गये हैं। पिछले 24 घंटों में कोरोना संक्रमण से तीन और मरीजों की जान जाने से मृतकों की संख्या 68 हो गयी है। इस अवधि में राष्ट्रीय राजधानी, केरल और झारखंड से एक-एक मरीज की मौत हुई है।

मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार सबसे ज्यादा मामले केरल में दर्ज किए गए हैं। देश में 30 राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों में कोरोना सक्रिय मामलों में वृद्धि हुई है। जिनमें से केरल, दिल्ली, गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में भी मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है।

कोरोना (Corona) संक्रमण के मामले में केरल सबसे अधिक प्रभावित राज्य है, जहां आज सुबह तक 96 सक्रिय मामले बढ़ने के साथ इसका आंकड़ा दो हजार पार कर 2053 तक पहुंच गया और दिल्ली में लगभग 37 मामलों के घटने से संक्रमितों की कुल संख्या 691 रह गई।

इसके अलावा गुजरात में 1109, पश्चिम बंगाल में 747, महाराष्ट्र में 613, कर्नाटक में 559, तमिलनाडु में 207, उत्तर प्रदेश में 225, राजस्थान में 124, हरियाणा में 108, आंध्र प्रदेश में 86, पुड्डुचेरी में नाै, सिक्किम में 36, मध्य प्रदेश में 52, छत्तीसगढ में 44, बिहार में 48, ओडिशा में 39, पंजाब मेें 30, जम्मू-कश्मीर में नौ, झारखंड में छह, असम में तीन, गोवा में पांच, तेलंगाना में 10, उत्तराखंड में छह, हिमाचल प्रदेश तीन, चंड़ीगढ़ में दो और त्रिपुरा में एक सक्रिय मामले हैं। मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश में कोरोना संक्रमण को कोई मामला सामने नहीं आया है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार देश में कोविड मामलों में मौजूदा उछाल ओमिक्रॉन के नए सब-वेरिएंट जैसे कि जेएन.1, एनबी.1.8.1, एलएफ.7 और एक्सएफसी के कारण है। इनमें संक्रमण की संभावना अधिक है, लेकिन इनमें लक्षण हल्के हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इन्हें वर्तमान में निगरानी में रखे गए वेरिएंट के रूप में वर्गीकृत किया है – अभी तक चिंता का विषय नहीं है, लेकिन सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

इस बीच, कोरान के लिए जिम्मेदार वायरस सार्स-सीओवी-2 खत्म नहीं हुआ है, लेकिन यह अब अप्रत्याशित आपातकाल की तरह व्यवहार नहीं करता है – बल्कि, यह फ्लू की तरह बीमारियों के आवर्ती चक्र का हिस्सा बन गया है। कोरोना के मामलों में वृद्धि के जवाब में, केंद्र सरकार ने अस्पतालों की तैयारी और ऑक्सीजन, आइसोलेशन बेड, वेंटिलेटर और आवश्यक दवाओं की उपलब्धता का मूल्यांकन करने के लिए विभिन्न राज्यों में मॉक ड्रिल शुरू की है।

यौन शोषण से तंग आकर महिलाओं ने बलात्कारी को जलाया, दो पुरुषों ने भी दिया साथ

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ओडिशा के गजपति जिले में यौन उत्पीड़न के आरोपी को जिंदा जलाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। कथित तौर पर 60 वर्षीय व्यक्ति के यौन उत्पीड़न की शिकार महिलाओं के एक समूह ने उसकी हत्या कर दी। इस मामले में आठ महिलाओं समेत कुल दस लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

जानकारी के अनुसार, पुलिस ने मृतक के परिजनों की शिकायत पर तलाशी शुरू की थी। जिसके बाद पुलिस ने गांव से करीब दो किलोमीटर दूर एक जंगल के पास पहाड़ी से जली हुई अस्थियां और राख बरामद की हैं। पुलिस ने सोमवार को मृतक की हत्या के बारे में जानकारी दी। इस मामले में मोहना थाना प्रभारी बसंत सेठी का कहना है कि उन्हें पता चला कि उस व्यक्ति की हत्या कर दी गई थी और उसके बाद उसके शव को जला दिया गया था।

थाना प्रभारी ने यह भी कहा कि इस मामले में गांव के एक वार्ड सदस्य सहित दस लोगों को गिरफ्तार किया गया है। यह घटना तीन जून की रात को हुई जब व्यक्ति ने गांव में 52 वर्षीय विधवा के साथ कथित तौर पर रेप किया था। जिसके बाद उसके द्वारा यौन उत्पीड़न का शिकार हुई पीड़ितों सहित कुछ महिलाओं ने एक बैठक में व्यक्ति की हत्या की योजना बनाई थी।

पुलिस अधिकारी ने कहा कि महिलाएं 60 वर्षीय व्यक्ति के घर गईं, जहां वह सो रहा था, और 52 वर्षीय विधवा ने अन्य लोगों की मदद से उस व्यक्ति की हत्या कर दी। दो पुरुषों ने भी महिलाओं की सहायता की थी। गिरफ्तार की गई छह महिलाओं ने यह स्वीकार किया है कि वे उस व्यक्ति द्वारा यौन शोषण का शिकार हो चुकी थीं और उन्होंने इस पीड़ा को समाप्त करने के लिए यह कदम उठाया।

हालांकि, गजपति के पुलिस अधीक्षक जतिंद्र कुमार का कहना है कि कथित यौन उत्पीड़न की शिकार महिलाओं ने उस व्यक्ति (मृतक) के खिलाफ पुलिस से शिकायत नहीं की थी और न ही कभी किसी तरह की मदद मांगी थी।

आईएएस अधिकारी के रिश्वत में पकड़े जाने पर उठे सवाल

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अशोक मधुप

(वरिष्ठ पत्रकार)

उडीसा के कलाहांडी जिले के धरमगढ़ में 2021 बैच के आईएएस अधिकारी डिप्‍टी कलेक्टर धीमन चकमा को ओडिशा विजिलेंस ने 10 लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा ।उनके निवास से 47 लाख रूपये अतिरिक्त बरामद हुए। विजीलेंस की जांच जारी है। मात्र चार साल के शुरूआती कैरियर में रिश्वत लेते पकड़े जाना, यह बताने के लिए काफी है कि आज भारतीय समाज के भ्रष्टाचार की जड़ कितनी गहराई तक पहुंच गई हैं।

व्यवस्था की सभी खंबे आज बेईमानी की जद में हैं।हम अधिकारी ,राजनेता और व्यवस्था के भ्रष्टाचार के खिलाफ तो खूब बोलते और लिखते है, किंतु न्यायपालिका के कदाचार पर चुप्पी साध जाते हैं, जबकि वहां भी हालत सब जगह जैसी ही है। दिल्ली उच्च न्यायालय के जस्टिस यशवंत वर्मा के घर नई दिल्ली स्थित 30, तुगलक क्रीसेंट स्थित सरकारी आवास के बाहरी हिस्से में 14 मार्च की रात आग लग गई।इसमें बड़ी तादाद में नोट जले।

जस्टिस वर्मा को दिल्ली से इलाहाबाद उच्च न्यायालय भेज दिया गया,किंतु लगभग तीन माह बीत जाने के बाद भी उनके खिलाफ कोई आरोप दर्ज नही हुआ।यदि यह ऐसा मामला किसी मंत्री, राजनेता या प्रशासनिक अधिकारी का होता तो उसके खिलाफ मुकदमा ही दर्ज नहीं होता, जेल भी जाना पड़ता।न्यायिक अधिकारी अपने को मिले विशेष अधिकार के बूते मामले दबा रहे हैं।राज्य सभा अध्यक्ष जगदीप जाखड़ भी इस पर तीखी टिप्पणी कर चुके हैं।

रिश्‍वत के आरोपी अधिकारी धीमन चकमा का जन्म त्रिपुरा के एक छोटे से कस्‍बे कंचनपुर में हुआ। उनके पिता स्कूल टीचर हैं, जबकि मां हाउस वाइफ हैं। धीमन ने अगर्तला के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एनआईटी ) से कंप्यूटर साइंस में बी.टेक किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद धीमन ने यूपीएससी की तैयारी शुरू की। उन्हें पहले भारतीय वन सेवा (आईएफएस) में जगह मिली और वह ओडिशा के मयूरभंज जिले में आईएफएस अधिकारी के तौर पर तैनात हुए।उनका सपना आईएएस बनने का था। 2020 में उन्होंने फिर से यूपीएससी की परीक्षा दी और इस बार 482वीं रैंक हासिल की। इस सफलता ने उन्हें 2021 बैच का IAS अधिकारी बनाया और वह ओडिशा कैडर में शामिल हुए।

2020 की कामयाबी के बाद उन्‍होंने एक साल की ट्रेनिंग ली ।इसके बाद वर्ष 2021 बैच का आईएएस नियुक्‍त किया गया।आठ जून 2025 को ओडिशा विजिलेंस ने धीमन चकमा को 10 लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा।बताया जा रहा है कि एक स्‍थानीय व्‍यापारी से 20 लाख रुपये मांगे गए थे।इसी तय राशि में से आधी रकम दी गई थी।

व्‍यापारी का आरोप था कि चकमा ने उनके स्टोन क्रेशर यूनिट के खिलाफ कार्रवाई की धमकी दी थी।इसके बाद विजिलेंस ने जाल बिछाया और चकमा अपने सरकारी आवास पर रिश्वत लेते पकड़े गए। केमिकल टेस्ट में उनके हाथ और दराज दोनों पॉजिटिव पाए गए। इसके बाद उनके आवास से 47 लाख रुपये नकद और बरामद हुए। सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं.कई लोगों ने इसे सिस्टम की नाकामी बताया, तो कुछ ने इसे व्यक्तिगत लालच का नतीजा माना। एक यूजर ने लिखा-चार साल की नौकरी में इतना भ्रष्टाचार? ये लोग यूपीएससी में एथिक्स कैसे पढ़ते हैं?।यह पहला मामला नही है। अधिकारी रिश्वत लेते पकड़े जाते रहे हैं किंतु सेवा प्रारंभ होने के दौरान ही रिश्वत लेने का पहला मामला है।इस मामले से समझा जा सकता है कि ये अब न पकड़े गए होते तो सेवा के दौरान जनता का कितना खून चूसते।

दिल्ली उच्च न्यायालय के जस्टिस वर्मा के घर नई दिल्ली स्थित 30, तुगलक क्रीसेंट स्थित सरकारी आवास के बाहरी हिस्से में 14 मार्च की रात करीब 11:30 बजे आग लगी।इसमें बड़ी तादाद में नोट जले। जस्टिस वर्मा कहते रहे कि रूपये उनके नही है।पूरी कोशिश मामले को दबाने की हुईं। मामले के न दबने पर इन्हें दिल्ली से इलाहाबाद उच्च न्यायालय भेज दिया गया,हालाकि इलाहाबाद के वकीलों ने इनके आने का विरोध किया।परिणाम स्वरूप इन्हें कार्य नही दिया गया,किंतु लगभग तीन माह बीत जाने के बाद भी उनके खिलाफ कोई आरोप दर्ज नही हुआ। जबकि सामान्य मामले में बड़े से बडे अधिकारी, जनसेवक, नेता और मंत्री के खिलाफ मुकदमा ही दर्ज नही होता, वे जेल भी जाते।इन घटनाओं के उदाहरण थोक में मिल जाएंगे। जस्टिस वर्मा का मामला राज्य सभा में भी उठ चुका है।

हाल ही में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के सदस्यों को संबोधित करते हुए न्यायपालिका में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने एक पुराने न्यायिक आदेश के कारण एफआईआर दर्ज न होने और जस्टिस वर्मा के आवास से बरामद नकदी के मामले पर सवाल उठाए।

उपराष्ट्रपति ने न्यायिक समितियों की भूमिका और न्यायिक निर्णयों पर पैसों के संभावित प्रभाव पर भी चिंता जताई।उन्होंने कहा कि सरकार आज “लाचार” है क्योंकि एक न्यायिक आदेश एफआईआर दर्ज करने में बाधा बना हुआ है। अगर कोई अपराध हुआ है तो उसकी एफआईआर दर्ज होनी चाहिए थी। यह सबसे बुनियादी और शुरुआती कदम है, जो पहले ही दिन उठाया जा सकता था।

उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा कि मौजूदा स्थिति में जब तक न्यायपालिका के सर्वोच्च स्तर से अनुमति नहीं मिलती, तब तक एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकती। उन्होंने सवाल उठाया कि ‘अगर यह अनुमति नहीं दी गई तो क्यों?’ ‘क्या किसी न्यायाधीश को हटाने का प्रस्ताव ही इस संकट का समाधान है? उपराष्ट्रपति ने जस्टिस यशवंत वर्मा के निवास से बरामद नकदी की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि यह न्यायपालिका की छवि को गहरा आघात देने वाला मामला है। उन्होंने पूछा, अगर यह घटना सामने नहीं आती, तो क्या हमें कभी पता चलता कि और भी ऐसे मामले हो सकते हैं?जगदीप धनखड़ ने जोर दिया कि जब नकदी मिलती है तो हमें यह जानना चाहिए कि वह पैसा किसका है, उसकी मनी ट्रेल क्या है, और क्या उस पैसे ने न्यायिक निर्णयों को प्रभावित किया।जगदीप धनखड़ ने कहा कि जब जनता का अन्य संस्थाओं से विश्वास उठता है, तब भी वे न्यायपालिका की ओर आशा से देखते हैं। उन्होंने कहा, हमारे न्यायाधीशों की बुद्धिमत्ता और परिश्रम अद्वितीय है लेकिन अगर वहीं संदेह की दृष्टि में आ जाएं तो लोकतंत्र की नींव ही हिल जाएगी। यह सोचना कि मीडिया का ध्यान हटते ही मामला ठंडा पड़ जाएगा, एक बहुत बड़ी भूल होगी। इस अपराध के लिए जो भी जिम्मेदार हैं, उन्हें बख्शा नहीं जाना चाहिए।

धनखड़ ने आगे कहा, मैं पूर्व मुख्य न्यायाधीश का आभार व्यक्त करता हूं कि उन्होंने दस्तावेजों को सार्वजनिक किया। हम ये कह सकते हैं कि नकदी की जब्ती हुई क्योंकि रिपोर्ट कहती है और रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक की। हमें लोकतंत्र के विचार को नष्ट नहीं करना चाहिए। हमें अपनी नैतिकता को इस कदर गिराना नहीं चाहिए। हमें ईमानदारी को समाप्त नहीं करना चाहिए।

इन मामलों को देख हमें सोचना होगा कि समाज कहां जा रहा है।प्रशासन तंत्र,जनसेवक और न्यायपालिका को सामाजिक मानदंड और एथिक्स में क्या पढ़ाया जा रहा है,कैसे पढ़ाया जा रहा है। दरअस्ल भारतीय समाज में बढ़ा कदाचार समाज में बढ़ी भौतिकता की देन है।पहले जीवन आदर्श महत्वपूर्ण थे।ईमानदार व्यक्ति को समाज में सम्मान मिलता था। अब समाज के मानक बदल गए। अब पैसे वाले को सम्मान मिलता है।ये कोई नही पूछता कि पैसा आया कहां से और कैसे आया।

परिवार सदस्य ही परिवार के ईमानदार मुखिया को बेवकूफ मानते हैं।ईमानदारी के लिए समय − समय पर उसका अपमान करते हैं। बढ़ते कदाचार को रोकने के लिए हमें अपने सामाजिक मिथक का पाठ प्रारंभ से ही बच्चों को पढ़ाना होगा।उन्हें ये भी बताना होगा कि कानून के हाथ बड़े लंबे हैं।इसके चंगुल में फंसने पर सजा तो काटनी ही पड़ेगी। सम्मान को भी बट्टा लगेगा। निगरानी तंत्र को मजबूत करना होगा।इन मामलों में त्वरित न्याय की व्यवस्था करानी होगी ताकि इनकी सजा से अन्य सीख लें।

ट्रांसफार्मर के नाम पर दो लाख की ठगी का आरोप

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-दो ग्रामीणों से ट्यूबवेल पर ट्रांसफार्मर लगवाने के नाम पर हुई एक-एक लाख की वसूली, आरोपी पर धमकी देने का भी आरोप

फर्रुखाबाद, नवाबगंज। थाना क्षेत्र के गांव नवादा में बिजली व्यवस्था से जुड़ी एक बड़ी ठगी का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को शिकायती प्रार्थना पत्र सौंपते हुए आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

ग्रामीणों ओमेंद्र सिंह पुत्र रफाल सिंह और सुमित कुमार पाल पुत्र रतीराम ने बताया कि फतेहगढ़ कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला नगला नैन्न निवासी करू चौहान नामक व्यक्ति ने खुद को बिजली विभाग का ठेकेदार बताते हुए उनसे ट्यूबवेल पर 25 केवीए का निजी ट्रांसफार्मर लगवाने के नाम पर एक-एक लाख रुपये की वसूली की।

पीड़ितों के अनुसार यह घटना कुछ माह पूर्व की है। जब उन्होंने कई बार फोन कर ट्रांसफार्मर लगवाने के संबंध में जानकारी मांगी और अपने पैसे वापस मांगे, तो आरोपी ने उन्हें फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी दी।

गंभीर आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने कहा कि आरोपी ने न केवल धन की ठगी की बल्कि अब वह जान से मारने और झूठे केस में फंसाने की भी धमकी दे रहा है। इससे परेशान होकर दोनों ग्रामीण सोमवार को संपूर्ण समाधान दिवस में जिलाधिकारी और अन्य सक्षम अधिकारियों से मिले और कानूनी कार्रवाई की मांग की।

निजीकरण में दलालों का बोलबाला, विभागीय सतर्कता पर उठे सवाल

यह मामला बिजली विभाग में निजीकरण के चलते बढ़ती दलाली की एक बानगी है। ग्रामीणों का आरोप है कि विभागीय सतर्कता की कमी के चलते क्षेत्र में ऐसे कई दलाल सक्रिय हैं, जो भोले-भाले किसानों और ग्रामीणों को झूठे आश्वासन देकर लाखों रुपये की ठगी कर रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि विभाग समय-समय पर जागरूकता और सतर्कता चौपाल आयोजित करता, तो इस तरह की घटनाओं पर अंकुश लग सकता था। पीड़ितों ने मांग की है कि आरोपी के खिलाफ तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाए ताकि अन्य ग्रामीण भी ऐसे झांसे से बच सकें।

जन्मदिन और उत्सव गौशालाओं में मनाएं, जिलाधिकारी की भावुक अपील

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सेवा, श्रद्धा और संस्कृति को समर्पित हो नई परंपरा, जनपदवासियों से सकारात्मक बदलाव की उम्मीद

विनय यादव

पीलीभीत। जनपद में सांस्कृतिक मूल्यों और सेवा भावना को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने एक भावनात्मक अपील जारी की है। उन्होंने जनपदवासियों से आग्रह किया है कि वे अपने जीवन के विशेष अवसर—जैसे जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ, सामाजिक या धार्मिक आयोजन—पारंपरिक होटल या पार्टी स्थलों की जगह स्थानीय गौशालाओं में मनाने की पहल करें।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक आयोजन स्थल बदलने की बात नहीं है, बल्कि एक सांस्कृतिक क्रांति की शुरुआत है। गौशाला में हवन-पूजन, गौसेवा और भक्ति भाव से जुड़े आयोजन व्यक्ति को आत्मिक संतोष और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा, “गौ माता की सेवा केवल धर्म नहीं, यह हमारी संस्कृति, हमारी मान्यता और हमारी जिम्मेदारी है।”

इस पहल को समाज में पुण्य, सकारात्मकता और सेवा के भाव से जोड़ते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि गौशाला में ऐसे आयोजन करने से व्यक्ति को न केवल आत्मिक लाभ होता है, बल्कि समाज में एक प्रेरक संदेश भी जाता है। उन्होंने इसे 1001 गुना पुण्य का कार्य बताते हुए कहा, “जीवन के पावन अवसरों को गौ सेवा से जोड़ें, यही सच्चा उत्सव है।”

जिला प्रशासन की ओर से यह अपील केवल एक औपचारिक संदेश नहीं, बल्कि एक जनांदोलन की शुरुआत मानी जा रही है। जनपद के हर नागरिक से अपेक्षा की गई है कि वे इस नई सोच को अपनाएं और समाज में धर्म, सेवा और सहभाव का एक नया अध्याय लिखें।

किसान पर बाघ का कहर: सिंचाई करने गए युवक की मौत, खेत में मिला अधखाया शव

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  • इलाके में दहशत फैली,पीलीभीत के मेवातपुर गांव की घटना, डीएम ने पहुंचकर दिया मदद का भरोसा

पीलीभीत। पीलीभीत जिले में मानव-वन्यजीव संघर्ष की एक और दर्दनाक घटना सामने आई है। न्यूरिया थाना क्षेत्र के गांव मेवातपुर उर्फ शेरगंज में रविवार रात खेत में सिंचाई करने गए किसान पर बाघ ने हमला कर दिया। हमले में किसान की मौके पर ही मौत हो गई। सोमवार सुबह खेत से उसका अधखाया शव मिलने के बाद गांव में कोहराम मच गया। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है।

ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। इस दौरान बाघ ने वन कर्मियों पर भी झपटने की कोशिश की, लेकिन रेंजर सहित सभी कर्मचारी बाल-बाल बच गए। घटनास्थल पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई। आक्रोशित ग्रामीणों ने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए विरोध जताया।

खेत में मिला अधखाया शव

जानकारी के अनुसार, गांव मेवातपुर निवासी मुकेश उर्फ गुड्डू (35) रविवार की रात माला रेंज क्षेत्र के गन्ने से घिरे खेत में फसल की सिंचाई करने गया था। देर रात तक वापस न लौटने पर परिजनों ने खोजबीन शुरू की। सोमवार सुबह बनकटी पुलिस चौकी के पास स्थित खेत में उसका शव बरामद हुआ, जो अधखाया हालत में था। शव को देखकर स्पष्ट हो गया कि उस पर जंगली जानवर, खासतौर से बाघ ने हमला किया है।

डीएम ने दिए तार फेंसिंग के निर्देश

घटना की सूचना मिलते ही न्यूरिया थानाध्यक्ष सुभाष मावी मौके पर पुलिस बल के साथ पहुंचे। कुछ ही देर में सदर एसडीएम आशुतोष गुप्ता और वन विभाग की टीम भी पहुंच गई। ग्रामीणों के बढ़ते आक्रोश को देखते हुए जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह खुद मौके पर पहुंचे और मृतक के परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने पीड़ित परिवार को हर संभव मदद का आश्वासन देते हुए शासन से अनुमन्य मुआवजा तत्काल दिलाए जाने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने जंगल से सटे गांवों में तार फेंसिंग का कार्य कराने के निर्देश भी डीएफओ को दिए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं रोकी जा सकें।

वन विभाग ने बढ़ाई निगरानी

माला रेंज के रेंजर रोबिन सिंह ने बताया कि यह हादसा रविवार रात हुआ जब मुकेश खेत में पानी लगा रहा था। प्राथमिक जांच में बाघ के हमले की पुष्टि हुई है। इलाके में वन विभाग की गश्त और निगरानी को बढ़ा दिया गया है। साथ ही आसपास के खेतों में कैमरे लगाकर बाघ की गतिविधियों पर नजर रखने की तैयारी की जा रही है।

ग्रामीणों में डर का माहौल

इस घटना के बाद मेवातपुर और आसपास के गांवों में भय का माहौल है। किसान अब रात के समय खेतों में जाने से डर रहे हैं। ग्रामीणों ने वन विभाग से बाघ को पकड़ने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यह पहला मामला नहीं है, इससे पहले भी कई बार जंगली जानवरों के हमले हो चुके हैं, लेकिन विभाग की ओर से सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए।