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Saturday, March 21, 2026
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मानव-बाघ सह-अस्तित्व जागरूकता कार्यक्रम:बाघ एक्सप्रेस” पहुंची ग्रामीण अंचलों में

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Tiger
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पीलीभीत: टाइगर रिजर्व (Tiger reserve) के सौजन्य से एवं टीएसए फाउंडेशन इंडिया (TSA Foundation India) के तकनीकी सहयोग से “मानव-बाघ सह-अस्तित्व जागरूकता कार्यक्रम” का आयोजन किया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य मानव और बाघ (Tiger) के बीच सहअस्तित्व को बढ़ावा देना तथा मानव-वन्य जीव संघर्ष की घटनाओं को कम करना है।इस कार्यक्रम के अंतर्गत नुक्कड़ नाटक और गोष्ठियों के माध्यम से ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है।

आज “बाघ एक्सप्रेस” गांव सैदपुर, पंडरी और मेथी सैदुल्लागंज पहुंची, जहां ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। पीलीभीत टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर मनीष सिंह ने बताया कि “हमारा उद्देश्य केवल बाघों की सुरक्षा नहीं, बल्कि ग्रामीणों को उनके साथ सुरक्षित और सम्मानजनक तरीके से सह-अस्तित्व के लिए प्रेरित करना भी है।

टीएसए फाउंडेशन इंडिया के एजुकेशन ऑफिसर हर्षित सिंह ने कहा, “गांवों में जाकर प्रत्यक्ष संवाद स्थापित करना सबसे प्रभावी माध्यम है। नुक्कड़ नाटकों के ज़रिये हम स्थानीय भाषा और भावनाओं में बाघों की महत्ता और उनके साथ रहने के तरीके को समझा रहे हैं।

गोबर से बने प्लाई बोर्ड: किसानों को मिलेगा रोजगार, पर्यावरण को राहत

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By Divyanshu Katiyar
By Divyanshu Katiyar

-ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया संबल, पशुपालकों की आय बढ़ाने की पहल

दिव्यांशु कटियार

लखनऊ/नई दिल्ली: अब तक ईंधन और खाद के रूप में प्रयुक्त होने वाला गोबर (cow dung), अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने का एक नया जरिया बन रहा है। देश में कई स्टार्टअप और अनुसंधान केंद्रों द्वारा गोबर से प्लाई बोर्ड (Ply board) (गोबर प्लाई) बनाने की प्रक्रिया पर काम किया जा रहा है, जिससे न केवल पर्यावरण (Environment) को राहत मिलेगी, बल्कि किसानों को भी आय का नया स्रोत मिलेगा।

प्लाई बोर्ड बनाने की इस नवीन तकनीक में गोबर को पहले सुखाकर प्रोसेस किया जाता है। इसके बाद इसमें प्राकृतिक एडिटिव्स (जैसे बायो-रेजिन, लिग्निन आधारित चिपकने वाले तत्व) मिलाए जाते हैं, जिससे यह मजबूत, टिकाऊ और जल-प्रतिरोधी बनता है। इस तकनीक को IIT दिल्ली, ICAR, और कुछ स्टार्टअप कंपनियों जैसे “Gauply” और “BioCraft Innovation” ने मिलकर विकसित किया है।

भारत में हर साल लगभग 300 मिलियन टन गोबर उत्पन्न होता है। यदि इसका सिर्फ 10% भी प्लाई बोर्ड निर्माण में लगाया जाए, तो लगभग 30 मिलियन टन गोबर का व्यावसायिक उपयोग हो सकता है। इससे किसानों को प्रति टन ₹500-₹700 तक की अतिरिक्त आय प्राप्त हो सकती है। हर 1 टन गोबर से लगभग 40-50 वर्ग फीट गोबर प्लाई बनाया जा सकता है। इसके लिए स्थानीय स्तर पर प्लाई यूनिट्स, गोबर संग्रहण, प्रोसेसिंग, और पैकेजिंग जैसे कई कार्यों की आवश्यकता होगी। एक अनुमान के अनुसार, हर 100 गांवों में 1 यूनिट से 50-70 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिल सकता है।

हर साल भारत में लाखों पेड़ प्लाईवुड निर्माण के लिए काटे जाते हैं। गोबर प्लाई बोर्ड अपनाने से लकड़ी पर निर्भरता 30% तक घट सकती है। साथ ही, गोबर के खुले में जलने से जो मेथेन और CO₂ जैसी गैसें निकलती हैं, वह भी नियंत्रित होंगी। लाभ हैं जैसे,पर्यावरण हितैषी लकड़ी की जगह गोबर का प्रयोग, वनों की कटाई में कमी होगी।स्थायित्व बायो-रेजिन आधारित प्रक्रिया से यह बोर्ड सामान्य प्लाई जितना ही मजबूत है। कृषक हित किसानों को गोबर बेचने से सीधी कमाई का जरिया है।

स्थानीय रोजगार ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार और लघु उद्योग को बढ़ावा, सस्ते निर्माण विकल्प पारंपरिक प्लाई की तुलना में 15-20% तक सस्ता है।सभी गोबर में आवश्यक फाइबर नहीं होता, जिससे गुणवत्ता में अंतर आ सकता है।शुरुआती मशीनें और सेटअप लागतपूर्ण हैं – एक यूनिट की स्थापना में ₹10-15 लाख तक खर्च हो सकता है। लोगों में अभी जागरूकता की कमी है और “गोबर से बना” सुनकर पूर्वाग्रह भी हो सकता है। पर्याप्त सब्सिडी और तकनीकी प्रशिक्षण की आवश्यकता है।

कृषि मंत्रालय, MSME मंत्रालय और गौ सेवा आयोग जैसे कई संस्थान गोबर आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए सहयोग कर रहे हैं। सरकार की ‘गौधन न्याय योजना’ (छत्तीसगढ़) और ‘ग्रामोद्योग योजना’ के तहत कई गोबर आधारित उद्योग शुरू किए गए हैं। 2023 में शुरू हुआ “गौ-काष्ठ बोर्ड” अब कई सरकारी भवनों में इस्तेमाल हो रहा है।

IIT दिल्ली और NIAM जयपुर में इस तकनीक पर शोध कर टिकाऊ और कम लागत वाली प्लाई विकसित की जा रही है। खादी ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) ने भी “गोबर प्लाई” को छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए प्रमोट करने की दिशा में काम शुरू कर दिया है। गोबर से बना प्लाई बोर्ड केवल एक तकनीकी नवाचार नहीं है, यह भारत के ग्रामीणों की आर्थिक आजादी की ओर एक बड़ा कदम है। यह पहल ‘गांव से ग्लोबल’ की अवधारणा को साकार कर सकती है, जिसमें परंपरा, पर्यावरण और प्रोद्योगिकी का सुंदर समागम दिखाई देता है।

अगर सरकार, शोध संस्थान और निजी क्षेत्र मिलकर इसे बढ़ावा दें, तो आने वाले वर्षों में गोबर से बना प्लाई बोर्ड भारत की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण दोनों को नया जीवन दे सकता है। सरकार यदि पंचायत स्तर पर गोबर प्लाई यूनिट की स्थापना के लिए 50% अनुदान, बैंक ऋण और तकनीकी प्रशिक्षण जैसे प्रावधान करे तो ग्रामीण भारत में यह क्रांति की तरह साबित हो सकती है।

लेखक इंद्रप्रस्थ आयल प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ हैँ।

जैविक खेती की राह: मिट्टी से रिश्ता निभाने का समय- एक जागरूक गन्ना किसान की कलम से

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farmer
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मैं एक सामान्य किसान (farmer) हूँ, पीलीभीत (pilibhit) की उसी उपजाऊ धरती से जुड़ा हुआ, जहाँ गन्ना (sugarcane) हमारे खेतों की पहचान है और पेट भरने का साधन। वर्षों से हम किसान अपने खेतों को हरा-भरा रखने के लिए हर संभव कोशिश करते आए हैं। कीटों से बचाव के लिए रासायनिक दवाओं का सहारा लिया, वैज्ञानिक सलाह ली, और नई-नई विधियों को अपनाया, लेकिन नतीजा यह हुआ कि लागत आसमान छूने लगी, मुनाफा कम होता गया, और हमारी मिट्टी धीरे-धीरे निढाल हो गई।

बीते दिन हमारे गाँव में जिला गन्ना अधिकारी खुशीराम भार्गव का आगमन हुआ। आमतौर पर अधिकारी आते हैं, भाषण देते हैं और चले जाते हैं, लेकिन भार्गव जी ने कुछ अलग किया। उन्होंने हम किसानों से हमारी भाषा में बात की। उन्होंने हमें समझाया कि खेती में कीटों से लड़ने के लिए केवल जहरीले रसायनों का सहारा लेना ही एकमात्र विकल्प नहीं है। उन्होंने हमें ट्राईकोकार्ड, फेरोमोन ट्रैप, नीम तेल जैसे जैविक उपायों के बारे में बताया — ये सब हमारे लिए नए नाम थे, लेकिन उनकी वैज्ञानिकता और पर्यावरणीय फायदे जानकर हमें पहली बार लगा कि खेती में सचमुच बदलाव संभव है।

खुशीराम भार्गव जिला गन्ना अधिकारी की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि उन्होंने किसानों को श्रोता नहीं, सहभागी माना। उन्होंने हमारी समस्याओं को गंभीरता से सुना और हमारे अनुभवों को महत्व दिया। उनका यह संदेश कि “जैविक खेती केवल पर्यावरण रक्षा का माध्यम नहीं, बल्कि किसानों की आर्थिक मजबूती का आधार भी बन सकती है” — हमारे मन में गूंजता रहा।

उन्होंने हमें समझाया कि जैविक तरीकों से केवल फसल को ही नहीं बचाया जाता, बल्कि मिट्टी की सेहत भी सुधरती है, पानी में जहर नहीं घुलता, और खेतों में फिर से मधुमक्खियों की गूंज सुनाई देती है — जो इस धरती की असली धड़कन हैं। ये बातें किसी किताब से नहीं, बल्कि एक ज़मीन से जुड़े अधिकारी की ज़ुबान से निकलकर आईं, जो आज के समय में दुर्लभ है।

आज मैं अपने तमाम साथी किसानों से कहना चाहता हूँ कि अब वक्त आ गया है कि हम रासायनिक खेती की लत से बाहर निकलें। खेती को केवल मुनाफे का सौदा न समझें, यह हमारी आने वाली पीढ़ियों की जिम्मेदारी है। जो मिट्टी आज हमसे थक चुकी है, वह हमारी थोड़ी समझदारी से फिर से हरी हो सकती है।
अगर हमारी मिट्टी ज़िंदा रहेगी, तभी हमारा भविष्य भी ज़िंदा रहेगा। जैविक खेती की यह राह कठिन जरूर है, लेकिन यही वह राह है, जो हमारी मिट्टी से रिश्ता निभाने की सच्ची मिसाल है।

संपादकीय लेख
मुकेश कुमार

अमरनाथ यात्रा ड्यूटी पर जा रहे BSF के 1200 जवानों को मिली खस्ताहाल ट्रेन

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BSF
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गुवाहाटी: सीमा सुरक्षा बल ‘BSF’ के जवानों की वीरता को खुद आप सभी ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान देखा था किस तरह सेना के साथ मिलकर पाकिस्तान को धूल चटाई थी। BSF के जम्मू फ्रंटियर ने 118 से ज्यादा पाकिस्तान की पोस्ट को तबाह करके भारी नुकसान पहुंचाया था। बीएसएफ की इस पराक्रम के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सराहना की थी। आज इन्ही BSF के जवानों के साथ भारतीय रेलवे ने गलत व्यवहार किया है। गुवाहाटी (Guwahati) से अमरनाथ यात्रा (Amarnath Yatra) ड्यूटी पर जा रहे BSF के 1200 जवानों को खस्ताहाल ट्रेन दे दी गई। खिड़की, दरवाजे, टॉयलेट, प्लग जर्जर हालत में थे। जवानों ने इस ट्रेन में बैठने से मना कर दिया। करीब 4 दिन बाद उन्हें दूसरी ट्रेन दी गई। रेलवे ने इस मामले में 4 अफसरों को सस्पेंड कर दिया है।

BSF के जवानों की एक टुकड़ी को त्रिपुरा के उदयपुर से जम्मू में अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा में तैनाती के लिए भेजा जाना था। बीएसएफ ने रेलवे से ट्रेन में AC-2 टियर के 2 कोच, AC-3 टियर के 2 कोच, 16 स्लीपर कोच और 4 जनरल/SLR कोच की मांग की थी लेकिन उन्हें खस्ताहाल ट्रेन दे दी गई। इस जर्जर ट्रेन का वीडियो भी वायरल हो रहा है।

इस वायरल वीडियो में देख सकते है कि, ट्रेन की खिड़कियां टूटी हुई थीं, दरवाजे जाम थे, टॉयलेट्स काफी गंदे थे। सीटें उखड़ी हुई थीं, इसके चलते सीट की लोहे की रॉड भी दिखाई दे रही हैं। ट्रेन की खराब हालत की शिकायत की तब रेलवे ने तुरंत कार्रवाई करते हुए ट्रेन बदल दी। अब नई ट्रेन के जरिए बीएसएफ के जवान अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा को लेकर त्रिपुरा के उदयपुर से रवाना हो चुके हैं। वही बीएसएफ को खस्ताहाल ट्रेन देने के मामले में 4 लोगों को निलंबित किया गया है।

 

 

जयपुरिया मैनेजमेंट कॉलेज में लगी भीषड़ आग, मचा हड़कंप

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Jaipuria Management College
Jaipuria Management College

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के सभी राज्यों में भीषड़ गर्मी का तपन चालू है और इसके साथ आग की घटनाएं बढ़ती जा रही है। राजधानी लखनऊ (Lucknow) के गोमतीनगर (Gomtinagar) इलाके के जयपुरिया मैनेजमेंट कॉलेज (Jaipuria Management College) में बिल्डिंग की सेकंड फ्लोर में बुधवार दोपहर भीषण आग लग गई। आग लगने से स्कूल के प्रबंधन व इलाके में हड़कंप मच गया। आग लगने की खबर लगते ही फायर स्टेशन गोमती नगर से दो मोटर फायर इंजन व एफएसओ गोमतीनगर घटनास्थल पर पहुंच गए। दमकल कर्मियों ने कड़ी मेहनत करके किसी तरह से आग पर काबू पाया।

जानकारी के मुताबिक, गोमतीनगर इलाके के जयपुरिया मैनेजमेंट कॉलेज में बिल्डिंग की सेकंड फ्लोर की फैकल्टी में बुधवार दोपहर भीषण आग लग गई। आग सूचना मिलते ही दमकल विभाग की पांच गाड़ियां मौके पर पहुंच गई। इसके साथ ही एफएसओ गोमतीनगर घटनास्थल पर पहुंच गए। दमकल की गाडी पहुंचने से पहले आग की तेज लपटे विकराल रूप ले रही थी और फैकल्टी रूम में बढ़ते जा रही थी। दमकल विभाग की गाड़ियों ने करीब 1 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह से काबू पा लिया गया।

आग किस कारणों से लगी थी अभी तक इसका पता नहीं चल सका है। आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट की वजह सुनने में आ रही है। आग की वजह से रूम के भीतर रखे कंप्यूटर व बिजली के उपकरण समेत प्लास्टिक के कुर्सी मेज और कई सामान पूरी तरह से जल गए। कॉलेज में छुट्टी होने की वजह से परिसर में बच्चे मौजूद नहीं थे, इस कारण हादसा होने से टल गया।

 

 

78वें जन्मदिन पर लालू प्रसाद यादव ने 78 पाउंड का काटा केक, राबड़ी देवी भी रहीं मौजूद

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बिहार। राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव बुधवार को अपना 78वां जन्मदिन सेलिब्रेट कर रहे हैं। पार्टी मुखिया के जन्मदिन के मौके पर कार्यकर्ताओं ने काफी उत्साह दिखाया है। बता दें कि इस अवसर को उनके चाहने वाले उनके 11 जून को ‘सामाजिक सद्भावना दिवस’ के रूप में मना रहे हैं।

मजेदार बात ये है कि बड़ी संख्या में नेता और कार्यकर्ता अपने नेता को जन्मदिन की बधाई देने के लिए पूर्व सीएम राबड़ी देवी के आवास पर पहुंच रहे हैं। वहीं इस मौके में राबड़ी देवी आवास पर लालू यादव ने 78 पाउंड का केक काटा है। बताते चलें कि लालू प्रसाद यादव की पत्नी पूर्व सीएम राबड़ी देवी भी मौजूद रहीं हैं। राबड़ी देवी ने लालू को केक का टुकड़ा खिलाया और जन्मदिन की बधाई दी।

वहीं पाटलिपुत्र की सांसद मीसा भारती ने अपने फेसबुक वॉल पर भी केक काटने की तस्वीर पोस्ट की है इस तस्वीर में लालू यादव केक काटते नजर आ रहे हैं। उन्होंने लिखा, हिम्मत के हिमालय, न्याय के अथाह सागर, जन चेतना के प्रदीप्त लौ, हर वंचित की आवाज़, आदरणीय पापा को उनके 78वें जन्मदिन की बहुत-बहुत शुभकामनाएं। आप हैं तो सब कुछ है! आप हैं तो जहां है।

इस अवसर में राबड़ी आवास में सुबह से ही जश्न का महौल है, चुनावी साल में पार्टी के लोग इस जन्मदिन को अपने खास तरीके से मना रहा है। कार्यकर्ता भी अलग-अलग अंदाज में पहुंच रहे हैं और अपने नेता को बधाई दे रहे हैं। कोई 78 किलो का लड्डू ला रहा है, तो कोई बैंड बाजे के साथ राबड़ी देवी के आवास पहुंच रहा है। हमारी तरफ से भी पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को जन्म दिन शुभकामनाएं।