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Saturday, March 21, 2026
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भाजपा सरकार के 11 वर्ष पूर्ण: सांसद मुकेश राजपूत और वरिष्ठ नेताओं ने की उपलब्धियों की चर्चा

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-पत्रकार वार्ता और प्रोफेशनल मीट में केंद्र सरकार की योजनाओं व कार्यों की दी जानकारी

 

फर्रुखाबाद: भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार (Central government) के 11 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में गुरुवार को आवास विकास स्थित जिला मुख्यालय एवं मसेनी चौराहे के कुसुम बैंक्विट हॉल में पत्रकार वार्ता एवं प्रोफेशनल मीट का आयोजन किया। इन आयोजनों में केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और उपलब्धियों पर विस्तार से प्रकाश डाला गया।

पत्रकार वार्ता में बोले सांसद – मोदी सरकार ने रचा विकास का इतिहास

भाजपा सांसद मुकेश राजपूत ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि 2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बनी भाजपा सरकार ने बीते 11 वर्षों में गांव, गरीब, किसान, महिला, नौजवान और दलित वर्ग के उत्थान के लिए ऐतिहासिक कार्य किए हैं। उन्होंने धारा 370, तीन तलाक, राम मंदिर निर्माण जैसे जटिल मुद्दों के समाधान को सरकार की बड़ी उपलब्धि बताया।

उन्होंने बताया कि मोदी सरकार ने पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन कर सामाजिक न्याय को बढ़ावा दिया है। महिला सशक्तिकरण के तहत 33% आरक्षण, प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत गरीबों को पक्के मकान, हर घर नल योजना, मुफ्त अनाज वितरण और किसान क्रेडिट कार्ड जैसी योजनाएं सरकार की प्राथमिकता में रहीं।

सांसद ने कहा कि आतंकवाद पर कठोर नीति अपनाते हुए देश की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है। भारत अब दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। विपक्ष को मुद्दा विहीन बताते हुए उन्होंने कहा कि जनमत एक बार फिर मोदी के साथ है। प्रोफेशनल मीट में ऑपरेशन सिंदूर और ब्रह्मोस्त्र मिसाइल का जिक्र मसेनी चौराहे पर आयोजित प्रोफेशनल मीट कार्यक्रम में जिला संगठन प्रभारी शिव महेश दुबे, सांसद मुकेश राजपूत और अमृतपुर विधायक सुशील शाक्य ने मुख्य वक्ता के रूप में भाग लिया।

शिव महेश दुबे ने कहा कि सरकार ने आतंकवाद को उसी की भाषा में जवाब देने के लिए ऑपरेशन सिंदूर जैसी साहसिक कार्रवाई की। भारत की ब्रह्मोस्त्र मिसाइल ने आतंकवाद के ठिकानों को ध्वस्त कर भारत की रक्षा ताकत का परिचय दिया है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार जन औषधि केंद्रों के माध्यम से दवाएं सस्ती कर आमजन को राहत दे रही है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आधुनिक कौशल विकास से युवा सशक्त हो रहे हैँ।

सांसद मुकेश राजपूत ने कहा कि मोदी सरकार ने 2014 से लेकर 2025 तक न्यू इंडिया की नींव रखी है। यह कालखंड केवल उपलब्धियों का नहीं, बल्कि देश के प्रोफेशनलों के ‘असली एंपावरमेंट’ का है। रेल, शिक्षा, सुरक्षा, और रोजगार जैसे क्षेत्रों में सरकार ने ऐतिहासिक काम किए हैं।

“जातिवाद और तुष्टिकरण से ऊपर है भाजपा”: विधायक सुशील शाक्य

विधायक सुशील शाक्य ने कहा कि भारत संगठित होगा तभी विकसित होगा। जो दल जातिवाद और तुष्टिकरण की राजनीति करते हैं, उनका भविष्य खतरे में है। भाजपा ने राष्ट्र प्रथम की नीति को अपनाकर देश को आतंकवाद और भ्रष्टाचार से मुक्त करने का कार्य किया है। भाजपा जिला अध्यक्ष फतेह चंद्र वर्मा ने कहा कि संगठन का लक्ष्य है कि सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों की जानकारी हर घर तक पहुंचे। कांग्रेस की तुष्टिकरण की नीति के विपरीत भाजपा सरकार ने भारत को वैश्विक पटल पर प्रतिष्ठित राष्ट्र बनाया है।

मंच संचालन और उपस्थिति

पत्रकार वार्ता का संचालन जिला मीडिया प्रभारी शिवांग रस्तोगी ने किया जबकि प्रोफेशनल मीट का संचालन जिला मंत्री अभिषेक बाथम ने किया। युवा मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष प्रांशु दत्त द्विवेदी, पूर्व विधायक कुलदीप गंगवार, पूर्व जिला अध्यक्ष डॉ. भूदेव सिंह राजपूत, सतपाल सिंह, जिला महामंत्री डीएस राठौर, सुनील रावत, फतेहगढ़ मंडल अध्यक्ष रमला राठौर, रश्मि दुबे, बबीता पाठक, गोपाल राठौर, अतुल दीक्षित, अनिल प्रताप सिंह, धर्मेंद्र राजपूत, कृष्ण मुरारी राजपूत आदि।

जिलाधिकारी की अध्यक्षता में नागरिक सुरक्षा को लेकर समीक्षा बैठक सम्पन्न

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District Magistrate
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आपदा और युद्धकालीन सेवाओं की तैयारियों को लेकर दिए गए महत्वपूर्ण निर्देश

फर्रुखाबाद: कलक्ट्रेट सभागार (Collectorate Auditorium) में जिलाधिकारी/नियंत्रक (District Magistrate) की अध्यक्षता में नागरिक सुरक्षा विभाग (Civil Defense Department) की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में अपर जिलाधिकारी (वि./रा.) अरुण कुमार सिंह, नागरिक सुरक्षा विभाग के मुख्य वार्डन, उपनियंत्रक, चीफ वार्डन सहित समस्त अनुभागीय अधिकारी एवं कमांडिंग ऑफिसर्स उपस्थित रहे।

बैठक में जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी ने नागरिक सुरक्षा की आपातकालीन और युद्धकालीन सेवाओं की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने विशेष रूप से समस्त अधिकारियों को निर्देशित किया कि नगर और ग्रामीण क्षेत्रों में किसी भी आपदा या आपातकाल के दौरान नागरिक सुरक्षा विभाग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है, अतः सभी को सजग, सक्रिय और पूरी तरह से तैयार रहना होगा।

अपर जिलाधिकारी अरुण कुमार सिंह ने विभागीय ढांचे की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी प्रशिक्षित स्वयंसेवक समय-समय पर मॉक ड्रिल और प्रशिक्षण शिविरों में भाग लें। उन्होंने सभी अनुभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि अपने-अपने क्षेत्रों में नागरिक सुरक्षा के क्रियान्वयन हेतु विशेष सतर्कता बरती जाए और नियमित रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।

बैठक में यह भी बताया गया कि आगामी त्योहारों, परीक्षाओं और संभावित आपदा की दृष्टि से नागरिक सुरक्षा की सभी इकाइयों को हाई अलर्ट मोड में रखा जाएगा। नागरिक सुरक्षा सेवाओं के सुदृढ़ीकरण हेतु स्वास्थ्य विभाग, अग्निशमन विभाग, नगर निकाय, पुलिस प्रशासन एवं अन्य संबंधित विभागों से समन्वय स्थापित किया जाएगा।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि नागरिक सुरक्षा के प्रमुख पदाधिकारी जैसे कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी, प्रमुख अधिशासी अधिकारी, अग्निशमन अधिकारी, उपजिलाधिकारीगण, तहसीलदार, थानाध्यक्ष, एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से समय-समय पर समन्वय स्थापित कर योजनाओं को क्रियान्वित किया जाएगा।

अंत में जिलाधिकारी ने कहा कि नागरिक सुरक्षा विभाग एक जिम्मेदार और अत्यंत आवश्यक सेवा इकाई है, जिसकी तत्परता किसी भी आपदा के समय आम नागरिकों के जीवन की रक्षा में सहायक होती है। अतः विभागीय अधिकारी अपने कार्यों को पूर्ण निष्ठा और ईमानदारी से करें।

सांसद ने किया भाजपा कार्यकाल के ग्यारह साल बेमिसाल पुस्तक का विमोचन

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-आने वाले साल तक आसपास के चार जिलों को बिजली सप्लाई कर सकेगा जनपद

 

फर्रुखाबाद: भारतीय जनता पार्टी (BJP) की केंद्र सरकार (Central government) के 11 वर्षों की उपलब्धियों पर आधारित “11 साल बेमिसाल” पुस्तक का विमोचन भाजपा जिला कार्यालय आवास विकास के सभागार में सांसद मुकेश राजपूत (MP Mukesh Rajput) ने किया। कार्यक्रम में भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारी, विधायकगण, एमएलसी व संगठन से जुड़े कार्यकर्ता मौजूद रहे।

पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में बोलते हुए सांसद मुकेश राजपूत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि बीते 11 वर्षों में भारत ने हर क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है। उन्होंने कहा कि “मोदी है तो मुमकिन है” अब केवल एक नारा नहीं, बल्कि जमीन से जुड़ी हुई सच्चाई है। आज भारत अंतरराष्ट्रीय मंच पर तेजी से उभरती चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है।

उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर जैसी सैन्य कार्रवाई ने सिद्ध कर दिया कि भारत अब रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो चुका है। सरकार ने करोड़ों लोगों को गरीबी से बाहर निकालने के लिए योजनाओं का संचालन किया है, जिनमें प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, महिला कल्याण योजना और आयुष्मान भारत जैसे कार्यक्रम शामिल हैं।

सांसद ने बताया कि 2026 तक फर्रुखाबाद जिला न केवल बिजली के क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो जाएगा, बल्कि आसपास के चार जिलों को भी बिजली आपूर्ति करने की स्थिति में आ जाएगा। उन्होंने जनता से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि सभी को मिलकर जिले के विकास के लिए कार्य करना होगा। हालांकि स्थानीय समस्याओं पर बात करते हुए उन्होंने आत्मचिंतन की बात कही और कहा कि इन समस्याओं के लिए हम सभी कहीं न कहीं ज़िम्मेदार हैं। लोहिया अस्पताल में बिजली संकट और जनरेटर संचालन से जुड़ी समस्या पर उन्होंने जल्द ही खुद मौके पर जाकर निरीक्षण करने और संबंधित अधिकारियों से जांच कराने की बात कही।

विधायक अमृतपुर सुशील शाक्य, भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष एवं एमएलसी प्रांशु द्विवेदी, डॉ. भूदेव सिंह राजपूत, दुग्ध संघ अध्यक्ष सत्यपाल सिंह, कोऑपरेटिव बैंक अध्यक्ष कुलदीप गंगवार, भाजपा जिलाध्यक्ष फतेह चंद्र वर्मा, मीडिया प्रभारी शिवांग रस्तोगी, वरिष्ठ पदाधिकारी संजीव गुप्ता, जीएस राठौर, हिमांशु गुप्ता, डॉ. धर्मेंद्र राजपूत, भाजपा विकलांग प्रकोष्ठ के प्रदेश सहसंयोजक अभिषेक त्रिवेदी, सांसद प्रतिनिधि राहुल राजपूत, कैप्टन डीएस राठौर, कठेरिया जी, भाजपा महिला मोर्चा अध्यक्ष बबीता पाठक, ममता सक्सेना सहित अनेक कार्यकर्ता व गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

बाल श्रम बचपन मे बोझ … बाल श्रम पर सामाजिक और नैतिक चेतना की आवश्यकता

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Sharad Katiyar
Sharad Katiyar

शरद कटियार

हर साल 12 जून को विश्व बाल श्रम निषेध दिवस (World Day Against Child Labour) मनाया जाता है। यह दिन हमें यह सोचने को विवश करता है कि क्या हम बच्चों को बचपन दे पा रहे हैं? क्या हमारी आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था (political system) इतनी सक्षम हो पाई है कि बच्चों को मजदूरी, अत्याचार और शोषण से मुक्त किया जा सके? बाल श्रम न केवल एक कानूनी अपराध है, बल्कि यह मानवीय मूल्यों और सभ्यता पर भी एक कलंक है। यह संपादकीय न केवल बाल श्रम की भयावहता को उजागर करता है, बल्कि इसके मूल कारणों, सामाजिक जिम्मेदारियों और संभावित समाधानों पर भी विस्तृत दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है।

बाल श्रम: परिभाषा और स्वरूप

बाल श्रम वह स्थिति है जिसमें कोई बच्चा — जिसे कानूनी रूप से शिक्षा प्राप्त करनी चाहिए — आजीविका कमाने के लिए कार्य करता है। यह कार्य उनकी उम्र, शारीरिक क्षमता, मानसिक विकास और सामाजिक अधिकारों के प्रतिकूल होता है। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के अनुसार, 5 से 17 वर्ष की उम्र के वे सभी बच्चे जो खतरनाक काम कर रहे हैं, जिनसे उनका शारीरिक, मानसिक, नैतिक या सामाजिक विकास प्रभावित हो रहा है, वे बाल श्रमिक की श्रेणी में आते हैं।

भारत में बाल श्रम (प्रतिषेध और विनियमन) अधिनियम 1986 के अंतर्गत 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को किसी भी कार्य में लगाना अपराध माना गया है। परंतु यह केवल कागजों तक ही सीमित है। धरातल पर आज भी बाल मजदूर होटल, फैक्ट्री, खेतों, दुकानों, ईंट भट्टों, खदानों, घरेलू नौकरियों और भीख मांगने जैसे कृत्यों में लिप्त पाए जाते हैं।

बाल श्रम केवल एक आर्थिक समस्या नहीं है, यह एक सामाजिक, सांस्कृतिक और नैतिक विफलता भी है। इसके पीछे अनेक कारक कार्य करते हैं:

यह बाल श्रम का सबसे बड़ा कारण है। जब एक परिवार का भरण-पोषण संभव नहीं हो पाता, तब माता-पिता बच्चों को मजदूरी पर लगा देते हैं। 2023 के आंकड़ों के अनुसार, भारत की कुल जनसंख्या में 21% आबादी गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन कर रही है।शिक्षा की अनुपलब्धता ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी विद्यालयों की संख्या कम है, और जो हैं भी, वे गुणवत्ता से कोसों दूर हैं। प्राथमिक शिक्षा के प्रति उदासीनता और अव्यवस्था भी बच्चों को स्कूल से दूर कर श्रम की ओर ढकेल देती है।

अज्ञानता और परंपरागत सोच

कई परिवार यह मानते हैं कि काम करने से बच्चा ‘कमाई सीखता है’, यह उसकी ‘प्रैक्टिकल ट्रेनिंग’ है। यह सोच उन्हें बच्चे की पढ़ाई के बजाय काम कराने की दिशा में ले जाती है। बाल श्रम विरोधी कानून हैं, लेकिन उनका पालन करने वाला तंत्र लचर है। नियोक्ता सस्ते श्रम के लिए बच्चों को काम पर रखते हैं और सरकार की निगरानी एजेंसियां मौन बनी रहती हैं।

शहरीकरण और पलायन

ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों की ओर पलायन करने वाले परिवार अस्थायी रोजगार की तलाश में बच्चों को भी मजदूरी में लगा देते हैं। लंबे समय तक कठोर कार्य करने से बच्चों के शरीर पर बुरा असर पड़ता है। कई बार वे खतरनाक यंत्रों और रसायनों के संपर्क में आते हैं जिससे उनका जीवन संकट में पड़ जाता है। शिक्षा से वंचित होना मजदूरी करने वाले बच्चों के पास स्कूल जाने का समय और ऊर्जा नहीं होती। वे शिक्षा के अधिकार से वंचित रह जाते हैं और अशिक्षा उनके जीवन में स्थायी अभिशाप बन जाती है।

ऐसे बच्चे असुरक्षित होते हैं और तस्करों, अपराधियों व यौन शोषकों का आसान शिकार बनते हैं। ‘बाल वेश्यावृत्ति’ और ‘बाल तस्करी’ जैसे अपराध इसी की उपज हैं। बाल श्रम से जुड़ा बच्चा न तो कुशल बन पाता है, न ही जागरूक नागरिक। यह देश के मानव संसाधन की क्षति है, जो दीर्घकालिक रूप से राष्ट्र के विकास में बाधक है।

भारत में 5-14 वर्ष की आयु के अनुमानित 1 करोड़ से अधिक बच्चे बाल मजदूरी में लगे हुए हैं। हालांकि सरकार समय-समय पर जनजागरूकता अभियान, कानूनों में संशोधन, और सर्व शिक्षा अभियान जैसे कार्यक्रम चलाती है, परंतु जमीनी सच्चाई बहुत ही जटिल है। उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में बाल मजदूरी की घटनाएं बहुत अधिक हैं। सरकारी प्रयास और उनकी सीमाएं हैँ, बाल श्रम (प्रतिषेध और विनियमन) अधिनियम, 1986 व संशोधन 2016

इस अधिनियम के तहत 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को किसी भी प्रकार के रोजगार में लगाना अवैध है। 2016 के संशोधन में 14-18 वर्ष के किशोरों को खतरनाक कामों में लगाने पर भी रोक है। परंतु यह अधिनियम घरेलू कामकाज और पारिवारिक व्यवसाय में लगे बच्चों को छूट देता है, जो कि एक बड़ा छेद है। सर्व शिक्षा अभियान, यह शिक्षा को सार्वभौमिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण योजना है। हालांकि इसके बावजूद बाल श्रम की संख्या में गिरावट बहुत धीमी है। राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना (NCLP), इस परियोजना के तहत बाल श्रमिकों को निकाल कर उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। लेकिन कई जिलों में यह योजना या तो बंद हो चुकी है या नाममात्र के लिए चल रही है।

भारतीय न्यायपालिका ने समय-समय पर बाल श्रम के विरुद्ध सख्त टिप्पणियां की हैं। सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 1996 के एक निर्णय में कहा था कि “बच्चों को शिक्षा का अधिकार दिलाना राज्य का नैतिक व संवैधानिक दायित्व है।” परंतु न्यायपालिका के आदेशों के अनुपालन की निगरानी करने वाला कोई स्वतंत्र प्राधिकरण नहीं है। भारत में कई ऐसे संगठन हैं जो बाल श्रम के विरुद्ध लगातार कार्यरत हैं, जैसे:बचपन बचाओ आंदोलन (BBA)कैलाश सत्यार्थी द्वारा स्थापित यह संगठन अब तक लाखों बच्चों को बाल श्रम और बंधुआ मजदूरी से मुक्त करा चुका है। CRY (Child Rights and You) यह संस्था बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए कार्य करती है, खासतौर पर शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा के क्षेत्र में।

ये संगठन सरकार पर दबाव बनाते हैं, जनजागरूकता फैलाते हैं और कई बार जमीनी स्तर पर बच्चों को बचाने के लिए जोखिम भी उठाते हैं।सामाजिक चेतना का विकास जब तक समाज यह नहीं समझेगा कि बाल श्रम एक गंभीर अपराध है, तब तक यह कुरीति समाप्त नहीं हो सकती। हर नागरिक को सजग होना होगा और बच्चों को काम करते देख रिपोर्ट करना होगा। बच्चों को ग्राहक मत बनाओ कोई बच्चा यदि दुकान या ढाबे पर काम कर रहा है, तो उससे सेवा लेना भी एक प्रकार से अपराध में सहभागी बनना है। समाज को यह सोच बदलनी होगी।

मीडिया को बाल श्रम के मुद्दों पर गंभीर और निरंतर रिपोर्टिंग करनी चाहिए। सामाजिक विज्ञापन, फीचर स्टोरी, डॉक्यूमेंट्री आदि के माध्यम से इस मुद्दे को जनचेतना तक लाया जाना चाहिए। विद्यालयों को सतत प्रयास करना चाहिए कि वे अपने क्षेत्र के सभी बच्चों को विद्यालय में लाएं। जो बच्चे विद्यालय से छूट गए हैं, उन्हें पुनः जोड़ने के लिए विशेष कार्यक्रम चलाए जाने चाहिए।

शिक्षा का अधिकार कानून (RTE) का कड़ाई से पालन

यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि 6 से 14 वर्ष का हर बच्चा स्कूल जाए। शिक्षा को आकर्षक और प्रोत्साहित करने वाला बनाना चाहिए ताकि गरीब परिवार भी बच्चों को स्कूल भेजें।

मजदूरों के लिए सामाजिक सुरक्षा

माता-पिता को रोजगार सुरक्षा, स्वास्थ्य बीमा, खाद्यान्न सहायता आदि मिलने पर वे बच्चों को काम पर नहीं भेजेंगे। स्थानीय प्रशासन, बाल कल्याण समितियों और NGO को मिलकर बाल श्रम की नियमित निगरानी करनी चाहिए। बाल श्रम केवल एक कानून का उल्लंघन नहीं है, यह एक सामाजिक अपराध है। यह हमारे भविष्य — यानी बच्चों — को बचपन से वंचित कर रहा है। यह दिन केवल एक औपचारिकता नहीं होना चाहिए, बल्कि यह आत्मविश्लेषण और कर्तव्य-बोध का दिन होना चाहिए। हमें यह याद रखना होगा कि एक देश का वास्तविक विकास तब ही मापा जा सकता है जब उसका हर बच्चा मुस्कुराते हुए विद्यालय जाए, किताबें पढ़े, खेल खेले, और एक उज्ज्वल भविष्य की ओर अग्रसर हो।

अंततः यही प्रश्न शेष रह जाता है:

“क्या हम आने वाली पीढ़ियों को यह कह पाएंगे कि हमने उन्हें मजदूर नहीं, विद्यार्थी बनाया?”

शरद कटियार

प्रधान संपादक, दैनिक यूथ इंडिया

प्रतिष्ठित समाजसेवी अनुराग अग्रवाल का हैदराबाद में भव्य अभिनंदन समारोह संपन्न

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अभिनंदन समारोह
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हैदराबाद/फर्रुखाबाद: सहज कविता के प्रवर्तक एवं ‘जेम्स ऑफ फर्रुखाबाद’ (Farrukhabad) की उपाधि से विभूषित स्वर्गीय ओमप्रकाश अग्रवाल के सुपुत्र, बहुआयामी समाजसेवी अनुराग अग्रवाल (Anurag Agarwal, social worker) के सम्मान में आज हैदराबाद (Hyderabad) स्थित हिन्दी प्रचार सभा के सभागार में एक भव्य अभिनंदन एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।

यह आयोजन हिस्सा आन्दोलन, सीलकोड्स, गीत चांदनी, हिंदी लेखक संघ, तथा गोलकोण्डा दर्पण विचार मंच के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ, जिसमें देश के विभिन्न हिस्सों से आए साहित्य एवं समाजसेवा से जुड़े प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों ने सहभागिता की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहे पूर्व न्यायाधीश गोपाल सिंह ठाकुर, जबकि विशेष अतिथि के रूप में मंच पर हिस्सा आन्दोलन एवं सीलकोड्स के राष्ट्रीय संयोजक विद्या प्रकाश कुरील, आशीष भारद्वाज (मथुरा), सुशील कुमार बूदिया (कोलकाता), ध्रुव कुमार (कानपुर), साहित्यकार अंजनी कुमार गोयल, श्रुति कांत भारती, सलाउद्दीन नैय्यर, डॉ. रत्न कला मिश्रा, गोविन्द अक्षय प्रमुख रूप से शामिल रहे।

समारोह में अनुराग अग्रवाल को पगड़ी, माला, सम्मान वस्त्र, स्मृति चिन्ह एवं सम्मान पत्र भेंट कर मंचासीन अतिथियों ने सम्मानित किया। जैसे ही उनके सम्मान की घोषणा हुई, सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा, और समस्त उपस्थितजनों ने खड़े होकर अभिनंदन किया। समारोह के उपरांत एक भव्य काव्य गोष्ठी का आयोजन भी किया गया जिसमें हिंदी-उर्दू के स्थानीय कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से सामाजिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक सरोकारों को मंच पर प्रस्तुत किया। रचनाओं की गूंज और श्रोताओं की सराहना ने पूरे वातावरण को रससिक्त कर दिया। इस अवसर के स्मरणीय चित्र और सम्मान-पत्र की प्रति संलग्न की गई है।

सपा सैनिक प्रकोष्ठ की बैठक में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर मंथन

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military cell
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-पूर्व सैनिकों की भागीदारी से बूथ प्रबंधन और जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रचार पर रहा ज़ोर

फर्रुखाबाद: समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के सैनिक प्रकोष्ठ (military cell) की मासिक बैठक गुरुवार को नेकपुर कलां स्थित न्यू कॉलोनी में जिलाध्यक्ष के. के. यादव की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में मुख्य अतिथि के रूप में सपा जिलाध्यक्ष चंद्रपाल सिंह यादव (SP District President Chandrapal Singh Yadav) मौजूद रहे। इस मौके पर जिला महासचिव इलियास मंसूरी, मुख्य संगठन के अन्य वरिष्ठ नेता, पदाधिकारी एवं सैकड़ों पूर्व सैनिकों ने सहभागिता की। बैठक का आयोजन जिला उपाध्यक्ष सैनिक प्रकोष्ठ राजेंद्र सिंह यादव के आवास पर किया गया, जिसमें पूर्व सैनिकों ने पार्टी की विचारधारा और भावी रणनीति पर व्यापक चर्चा की।

बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और सैनिक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष कर्नल शरद सरेन के निर्देशों के अनुसार आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव में सैनिक प्रकोष्ठ की भूमिका को लेकर विचार-विमर्श हुआ। सपा शासनकाल की डायल 100, 108, 102, लैपटॉप वितरण, समाजवादी पेंशन योजना, साइकिल योजना, वृद्धावस्था पेंशन जैसी कल्याणकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए पूर्व सैनिकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया गया।

बैठक में कैप्टन रामाधार सिंह यादव, बृजेश सिंह यादव, बेचे लाल यादव, अमित कुमार, दीप सिंह, कैलाश चंद्र, राम सिंह पाल सहित कई अन्य वक्ताओं ने सैनिक और पीडीए (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) विचारधारा को लेकर अपने विचार रखे। बैठक में समाजवादी पार्टी सैनिक प्रकोष्ठ की सदस्यता अभियान के तहत कई नए पूर्व सैनिकों को सदस्यता दिलाई गई। अखिल कठेरिया (राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य, समाजवादी छात्र सभा), रामपाल सिंह यादव (फ्रंटल संगठन प्रभारी), ओमप्रकाश शर्मा (पूर्व जिला कोषाध्यक्ष), रजत क्रांतिकारी मोहम्मद अकलीम, शीलू खां, जिला सचिव शिव शंकर शर्मा आदि मौजूद रहे।

बैठक का उद्देश्य पूर्व सैनिकों को पार्टी से जोड़कर बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करना और समाजवादी सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाना रहा। कार्यक्रम का संचालन संगठनात्मक अनुशासन और एकजुटता के साथ संपन्न हुआ।