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Saturday, March 21, 2026
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तपिश से बचने के लिये

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विजय गर्ग

ऐसे वक्त में जब भारत के अनेक हिस्सों में तेज गर्मी से पारा उछल रहा है, तपिश से बचने के लिये बिजली की मांग में अप्रत्याशित वृद्धि स्वाभाविक बात है। आम आदमी से लेकर खास आदमी तक गर्मी की तपिश से बचने के लिये कूलर से लेकर एसी तक का भरपूर इस्तेमाल करता है। हाल के दिनों में घरों, कार्यालयों, होटलों व मॉल तक में एसी का उपयोग बेतहाशा बढ़ा है। जिसके चलते गर्मियों के पीक सीजन में बिजली की खपत चरम पर पहुंच जाती है। ऐसे वक्त में केंद्र सरकार ने एयर कंडीशनर यानी एसी की पहचान बिजली की बढ़ती खपत के लिये जिम्मेदार खलनायक के रूप में की है।

केंद्र सरकार योजना बना रही है कि घरों,होटलों व कार्यालयों में बीस डिग्री से अट्ठाइस डिग्री सेल्सियस के बीच इस्तेमाल होने वाले इस उपकरण की कूलिंग रेंज को मानकीकृत किया जाए। नए दिशा-निर्देश लागू होने के बाद एसी निर्माताओं को बीस डिग्री से कम तापमान पर कूलिंग प्रदान करने वाले एसी बनाने से रोक दिया जाएगा।

केंद्रीय बिजली मंत्री मनोहर लाल खट्टर के अनुसार केंद्र सरकार की यह पहल बिजली बचाने और भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के प्रयासों का हिस्सा है। इस बात में दो राय नहीं कि गर्मियों की तपिश से बचने के लिये लोग अपने एसी को बहुत कम तापमान पर चलाते हैं। इस प्रवृत्ति का बिजली ग्रिड पर दबाव बहुत अधिक बढ़ जाता है। निश्चित रूप से इसके चलते बिजली कटौती की संभावना भी बहुत अधिक बढ़ जाती है। लेकिन इस संकट का अकेला मुख्य समाधान एसी को बेहद कम तापमान पर चलाया जाना ही नहीं है। इसके अलावा अन्य कारक भी हैं। यह भी एक हकीकत है कि सरकारी व निजी कार्यालयों में एसी का उपयोग काफी लंबे समय तक अंधाधुंध ढंग से किया जाता है। यहां इसके उपयोग में किफायत बरतने की दिशा में भी कदम उठाने की जरूरत है।

निस्संदेह, ऊर्जा मंत्रालय का ऊर्जा नियामक ब्यूरो, बिजली खपत कम करने वाले उपकरणों के उपयोग को बढ़ावा देता है। लेकिन जब गर्मी रिकॉर्ड तोड़ती बढ़ रही है तो तापमान बढ़ने पर बिजली की खपत अनिवार्य रूप से बढ़ने लगती है।

लेकिन इसका एकमात्र कारण एसी का बढ़ता उपयोग ही नहीं है। हमें खुद से सवाल पूछने की जरूरत है कि हमारे शहर इतने गर्म क्यों हो रहे हैं? हम इस बढ़ते तापमान से नागरिकों को राहत क्यों नहीं दे पा रहे हैं। अंधाधुंध-अवैज्ञानिक तरीके से हो रहे निर्माण कार्य भी इसमें कम दोषी नहीं हैं। हमने चारों तरफ कंक्रीट के जंगल तो बना दिए लेकिन शहरों में हरियाली का दायरा लगातार सिमटता जा रहा है। जिससे हवा का प्राकृतिक प्रवाह भी बाधित हो रहा है।

विकास के नाम पर जो सैकड़ों वर्ष पुराने पेड़ काटे जाते हैं, उसकी क्षतिपूर्ति नये पेड़ लगाकर नहीं की जाती है। हम घरों को प्राकृतिक रूप से ठंडा बनाये रखने वाली भवन निर्माण तकनीक नहीं अपना रहे हैं। यदि उष्मारोधी भवन निर्माण सामग्री को बढ़ावा दिया जाए तो लोगों को कम बिजली खपत से भी राहत मिल सकती है। हमारी जीवनशैली बिजली की खपत को लगातार बढ़ा रही है। यदि हमारे देश में सार्वजनिक परिवहन प्रणाली को बढ़ावा दिया जाए तो सड़कों पर निजी वाहनों का उपयोग कम होने से वाहनों के गर्मी बढ़ाने वाले उत्सर्जन को कम किया जा सकता है।

हमें भवन निर्माण में छतों को ठंडा रखने वाली तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देना चाहिए। ऐसी सामग्री या सिस्टम का उपयोग किया जाना चाहिए जो पारंपरिक छत की तुलना में ताप बढ़ाने वाली सूरज की रोशनी को परावर्तित कर सके। इन उपायों से हम ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को भी कम करने का प्रयास कर सकते हैं। इसके अलावा शहरी क्षेत्रों में हरियाली को बढ़ाकर और पारंपरिक जल निकायों को पुनर्जीवित करके हम तापमान को कम करने का प्रयास भी कर सकते हैं। सरकार और समाज की साझा जिम्मेदारी एक बड़े बदलाव की वाहक बन सकती है। स्थानीय निकाय, निजी क्षेत्र की संस्थाएं व गैर सरकारी संगठन निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

विजय गर्ग सेवानिवृत्त प्रिंसिपल मलोट पंजाब

एक रात में 100 बसों के चालान, पौने तीन लाख जुर्माना वसूला

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  • वॉल्वो, टूरिस्ट बसों और पैसेंजर व्हीकल पर कसा गया शिकंजा

कुल्लू- आरटीओ फ्लाइंग स्क्वाड कुल्लू की टीम ने बीती रात को मंडी से पंडोह के बीच नाकेबंदी के दौरान एक ही रात में 100 से ज्यादा वाल्वो, टूरिस्ट बसों और पेसेंजर व्हीकल के चालान काटकर 2 लाख 72 हजार का जुर्माना वसूल किया।

आरटीओ फ्लाइंग स्क्वाड कुल्लू की टीम ने पहले विंद्रावणी के पास नाका लगाया और उसके बाद पंडोह के पास नाका लगाकर बसों को रोका और उनके दस्तावेजों की जांच पड़ताल करने के साथ ही यात्रियों की सुरक्षा से संबंधित इंतजामों का भी जायजा लिया।

ट्रेफिक इंस्पेक्टर हेमंत शर्मा ने बताया कि रात भर वाल्वो, टूरिस्ट बसों और पेसेंजर व्हीकल को जांच के लिए रोका गया। जांच में पाया गया कि कुछ के पास परमिट नहीं थे, किसी ने हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट नहीं लगा रखी थी, कुछ प्रेशर हॉर्न लगा रखे थे तो कुछ ने मोडिफाइड लाइट्स लगा रखी थी। कुछ तो ऐसे भी थे जिन्होंने न तो टेक्स भरा हुआ था और न ही पॉल्यूशन सर्टिफिकेट उनके पास मौजूद थे।

हेमंत शर्मा ने बताया कि ऐसे सभी लगभग 100 वाहनों के चालान काटकर उनसे मौके पर ही जुर्माना वूसल किया गया है। जिन्होंने मौके पर चालान का जुर्माना अदा नहीं किया है उन्हें कार्यालय में आकर इसकी भरपाई करनी होगी। उन्होंने बताया कि नियमों की अवहेलना किसी भी लिहाज में बर्दाशत नहीं की जाएगी।

विभाग की टीमें समय-समय पर इस तरह की चैकिंग के लिए नाकेबंदी करती रहती है और टूरिस्ट सीजन के दौरान पर्यटकों की सुरक्षित यात्रा के लिए ऐसी जांच को को बढ़ा दिया गया है।

विजय गर्ग: सेवा, सृजन और साधना की मिसाल

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विजय गर्ग

पंजाब के फातुही खेड़ा गांव से निकले एक समर्पित शिक्षक, लेखक और समाजसेवी हैं। उन्होंने शिक्षा विभाग में 24 वर्षों तक गणित पढ़ाया, 125 से अधिक पुस्तकें लिखीं, और डिजिटल लाइब्रेरी बनाकर हज़ारों छात्रों का मार्गदर्शन किया। विज्ञान मेलों से लेकर लेखन तक, उनका योगदान बहुआयामी रहा है। सेवानिवृत्ति के बाद भी वे निःशुल्क कैरियर काउंसलिंग और पुस्तक वितरण द्वारा समाजसेवा में लगे हुए हैं। उनका जीवन सेवा, साधना और सृजन की मिसाल है।

15 अगस्त 1962 — देश के स्वतंत्रता दिवस पर, पंजाब के सांस्कृतिक रूप से समृद्ध गांव फातुही खेड़ा में एक ऐसा व्यक्तित्व जन्म लेता है, जो शिक्षा, सेवा और सृजन की त्रिवेणी से समाज को सतत् प्रेरणा देता रहा है। यह कहानी है विजय गर्ग की — एक शिक्षक, लेखक, वैज्ञानिक सोच के संवाहक और समाजसेवी, जिनका जीवन अपने आप में एक जीवंत पाठशाला बन गया।

शिक्षा के क्षेत्र में समर्पण

एमएससी, बीएससी, बीएड और पीजीडी इन स्टैटिस्टिक्स की शिक्षा पूरी करने के बाद विजय गर्ग ने पंजाब शिक्षा विभाग में गणित के लैक्चरार के रूप में 20 वर्षों तक कार्य किया। इसके बाद उन्होंने 4½ वर्ष तक पीईएस-1 प्रिंसिपल सरकारी कन्या सीनियर सेकेंडरी स्कूल, एमएचआर मालौट में प्राचार्य के रूप में सेवाएं दीं। उन्होंने सरकारी सेवा से प्रिंसिपल प् के पद से सेवानिवृत्ति ली। उनके अध्यापन का दायरा केवल अंकगणित तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने अपने विद्यार्थियों को जीवन के मूल्य और नैतिकताएँ भी सिखाईं। आज उनके शिष्य देश के विभिन्न क्षेत्रों में डॉक्टर, इंजीनियर, प्रोफेसर और प्रशासनिक अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं।

शिक्षक से समाजशिल्पी तक

विजय गर्ग की भूमिका केवल एक शिक्षक तक सीमित नहीं रही। वे एक मार्गदर्शक, एक विचारक और एक समाजशिल्पी भी हैं। उन्होंने डिजिटल माध्यमों का उपयोग करते हुए “न्यू नेशनल डिजिटल लाइब्रेरी” की स्थापना की, जहाँ विज्ञान और गणित के विद्यार्थियों के लिए अध्ययन सामग्री, मार्गदर्शन, प्रतियोगी परीक्षाओं की पुस्तकें और सामान्य ज्ञान संबंधी संसाधन उपलब्ध कराए जाते हैं। विशेष रूप से व्हाट्सएप ग्रुप्स के माध्यम से उन्होंने में ( नीट/ जेईई / युपीऐससी / आईएएस / ओलंपियाड / अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबें) जैसी कठिन परीक्षाओं के लिए सैकड़ों छात्रों को डिजिटल फॉर्मेट में किताबें और गाइड मुफ्त में उपलब्ध कराईं।

लेखन: विचारों की मशाल

विजय गर्ग ने लेखन को केवल शौक या पेशा नहीं, बल्कि एक सामाजिक उत्तरदायित्व माना। उन्होंने अंग्रेज़ी, हिंदी और पंजाबी भाषाओं में हज़ारों लेख राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय समाचार पत्रों व पत्रिकाओं में प्रकाशित किए। वे ‘जूनियर साइंस रिफ्रेशर’ जैसी प्रतिष्ठित पत्रिका में नियमित स्तंभकार रहे हैं। उनके लेखों का विषय केवल शिक्षा नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना, पर्यावरण, विज्ञान प्रसार, जीवन कौशल और विद्यार्थियों की मनोवैज्ञानिक आवश्यकताओं तक विस्तृत रहा है।

125 से अधिक पुस्तकें: ज्ञान का खजाना

एक लेखक के रूप में उन्होंने 125 से अधिक पुस्तकें लिखी हैं। ये पुस्तकें एनपटीएसई , एनएमएमएस, वैदिक गणित, सामाजिक विज्ञान, IX-X कक्षा की गणित और XII गणित के त्वरित संशोधन के लिए समर्पित हैं। उनके लेखन में सबसे बड़ी बात यह रही कि उन्होंने कठिन विषयों को सरल भाषा और रोचक उदाहरणों के माध्यम से विद्यार्थियों के लिए सुगम बनाया। उनकी पुस्तकों ने विशेषकर ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्रों को आत्मविश्वास दिया कि वे भी बड़े सपने देख सकते हैं।

विज्ञान के प्रति समर्पण

उनकी वैज्ञानिक दृष्टि केवल सिद्धांतों तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने राष्ट्रीय विज्ञान मेलों में भाग लेकर विद्यार्थियों को नवाचार की दिशा में प्रेरित किया। वे दो बार राष्ट्रीय विज्ञान मेला और तीन बार राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस में भाग ले चुके हैं। इसके अलावा, ‘जय विजय’ पत्रिका में प्रकाशित उनके लेखों को भी कई बार प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ। उनके छात्रों की विज्ञान परियोजनाएं राज्य स्तर पर चयनित होकर सम्मानित होती रही हैं।

सेवानिवृत्ति के बाद भी सक्रियता

सेवा से रिटायरमेंट नहीं होता — यह उन्होंने साबित किया। 58 वर्ष की आयु में जब उन्होंने शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्ति ली, तब भी उनका जीवन ठहरा नहीं। वे आज भी नई पुस्तकों के लेखन, डिजिटल शिक्षण सामग्री के वितरण और कैरियर काउंसलिंग में सक्रिय हैं। छात्रों और अभिभावकों के लिए वे निःशुल्क कैरियर मार्गदर्शन सत्र आयोजित करते हैं, जिनसे सैकड़ों परिवार लाभान्वित हो चुके हैं।

सम्मान और मान्यता

उनके योगदान को शिक्षा विभाग ने भी पहचाना। उन्हें “पंजाब शिक्षा सचिव” द्वारा विशेष प्रशंसा प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। यह सम्मान उनके सतत योगदान का एक औपचारिक मूल्यांकन है, मगर असली पहचान तो वे छात्र हैं जो आज उनके आशीर्वाद से जीवन में आगे बढ़ रहे हैं।

पारिवारिक जीवन और विरासत

विजय गर्ग की पारिवारिक पृष्ठभूमि भी शिक्षा के मूल्यों से भरी रही है। उनके पुत्र डॉ. अंकुश गर्ग, श्रीनगर के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में एमडी रेडियोलॉजी कर रहे हैं — यह इस बात का प्रमाण है कि उन्होंने अपने बेटे में भी वही मूल्यों की नींव रखी है।

थकान के पार समर्पण की शक्ति

आज, 62 वर्ष की आयु में जब शरीर विश्राम चाहता है, विजय गर्ग का मन और मस्तिष्क नई रचनाओं, नए विचारों और समाज सेवा की योजनाओं से व्यस्त रहता है। उनका जीवन एक जीवंत प्रमाण है कि सेवा और सृजन की कोई उम्र नहीं होती। वे निरंतर सीखने, सिखाने और समाज को दिशा देने में लगे हुए हैं।

उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि एक व्यक्ति, यदि संकल्पित हो तो बिना किसी मंच, बिना किसी पद या प्रचार के, समाज को दिशा दे सकता है। विजय गर्ग न केवल एक शिक्षक हैं, बल्कि वे एक विचारधारा हैं — सेवा और सादगी की विचारधारा, जो समय के साथ और प्रासंगिक होती जा रही है।

ऐसे व्यक्ति का जीवन किसी पुस्तक का विषय नहीं, बल्कि एक आंदोलन की शुरुआत हो सकता है — एक ऐसा आंदोलन जिसमें हर शिक्षार्थी शिक्षक बन सके और हर शिक्षक समाज का वास्तुकार बन सके।

JSSC CGL परीक्षा पेपर लीक मामले में 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट

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JSSC CGL, रांची जेएसएससी सीजीएल परीक्षा पेपर लीक मामले में सीआईडी ने अपना अनुसंधान पूरा कर लिया है। सीआईडी की ओर से 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल किया गया है।

चार्जशीट में कहा गया है कि प्रश्न पत्र उपलब्ध कराने के बदले आरोपियों ने अभ्यर्थियों से पैसों की वसूली की है। सभी आरोपी गिरफ्तार किये जा चुके हैं। इनमें आईआरबी के जवान भी शामिल हैं।

थाईलैंड से दिल्ली ​आ रही एअर इंडिया फ्लाइट की आपात लैंडिंग, बम की मिली धमकी

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थाईलैंड में एअर इंडिया के विमान की इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक फ्लाइट की आपात लैंडिंग बम की धमकी मिलने के बाद कराई गई। खबरों के मुताबिक विमान संख्या एआई-379 (AI-379) थाईलैंड के फुकेट से दिल्ली आ रहा था। विमान में 156 यात्री सवार थे। यात्रियों को विमान से सुरक्षित रूप से बाहर निकाल लिया गया है।

थाईलैंड हवाई अड्डा अधिकारियों ने बताया कि फुकेट से भारत की राजधानी नई दिल्ली आ रहे एयर इंडिया के विमान को शुक्रवार को बम की धमकी मिली।

फ्लाइट ट्रैकर फ्लाइटरडार24 के अनुसार विमान ने शुक्रवार को सुबह 9:30 बजे फुकेट हवाई अड्डे से भारत की राजधानी दिल्ली के लिए उड़ान भरी, लेकिन अंडमान सागर के चारों ओर चक्कर लगाते हुए विमान वापस थाई द्वीप पर उतर गया। विमान की इमरजेंसी लैंडिंग के बाद अफसरों ने पूरे विमान को खाली कराया और जांच शुरू कर दी है।

सिद्धार्थनगर में अवैध मदरसे व मस्जिद पर गरजा बुलडोजर

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सिद्धार्थनगर जिले के ढेबरुवा थानाक्षेत्र में बंजर जमीन पर बने मदरसे व मस्जिद को प्रशासनिक टीम ने बुलडोजर से ध्वस्त करा दिया। यह मस्जिद व मदरसा लगभग 60 वर्ष पहले यंहा बनाया गया था।

इस अवैध अतिक्रमण को हटाने से पूर्व धारा 67 राजस्व संहिता के तहत तहसीलदार शोहरतगढ़ के न्यायालय से आदेश पारित किए गया तथा अतिक्रमणकारी को अतिक्रमण हटाने हेतु निर्देशित किया गया था। जिसका अनुपालन न करने पर आज राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीम द्वारा अतिक्रमण हटाया गया।

वहीं इस मामले को लेकर जिलाधिकारी ने बताया कि गृह मंत्रालय के आदेश है कि इंडोनेपाल सीमा से 15 किलोमीटर के अंदर सरकारी भूमि पर किये गये अतिक्रमण को अतिक्रमण मुक्त कराना है।

बाइट 1.. मकबूल- ग्रामीण बाइट 2…राजा गणपति आर–जिला अधिकारी सिद्धार्थनगर