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Monday, March 23, 2026
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50 से ज्यादा झोपड़ियों में लगी भीषण आग, एक के बाद एक धमाकों से दहला इलाका

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कानपुर: पनकी थाना क्षेत्र के रतनपुर में मंगलवार देर रात खंभे से गिरी चिंगारी के कारण सड़क किनारे की 50 से ज्यादा झोपड़ियां चपेट में आ गई। जब तक लोग फायर बिग्रेड को पुलिस को सूचना देते आग ने विकराल रूप ले लिया।

झोपड़ियों में भीषण आग के कारण एक के बाद एक धमाके हुए, जिससे पूरा इलाका दहल गया। लोगों की सूचना पर फायर ब्रिगेड पहुंची और आग को काबू करने के प्रयास शुरू किए गए।

आग लगने से लोग अपने गृहस्थी लेकर जान बचाकर भागे। झोपड़ियों के अंदर सो रहे बच्चों और महिलाओं को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा गया। झोपडियों के अंदर रखे सिलेंडर और स्टोफ फटने से तेज धमाके हुए।

मुख्य अग्निशमन अधिकारी दीपक शर्मा ने बताया कि फायर ब्रिगेड की आठ गाड़ियों ने आग पर काबू पाया है। झोपड़ियों से सभी को बाहर सुरक्षित निकाल लिया गया है। हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ है। नुकसान का आकंलन किया जा रहा है।

रील्स की मायावी दुनिया का धोखा

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विजय गर्ग

यह बात आज से लगभग दो दशक पहले की है। हिंदी साहित्य जगत में उस समय मैत्रेयी पुष्पा का डंका बज रहा था। एक के बाद एक चर्चित उपन्यास लिखकर उन्होंने साहित्य जगत में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज की थी। गोष्ठियों में भी उनकी मांग थी। लोग उन्हें सुनना चाहते थे। मैत्रेयी पुष्पा भी अपने ग्रामीण अनुभवों के आधार पर बात रखतीं तो महानगरीय परिवेश में रहनेवालों को वह बिल्कुल नया जैसा लगता। मुझे जहां तक याद पड़ता है कि दिल्ली के हिंदी भवन में एक गोष्ठी थी। उसमें मैत्रेयी पुष्पा भी वक्ता के रूप में उपस्थित थीं। विषय स्त्री विमर्श से जुड़ा हुआ था। मैत्रेयी पुष्पा के अलावा जो भी वक्ता थीं, वह सब वहां स्त्री विमर्श को लेकर सैद्धांतिक बातें कर रही थी। मंच से बार बार ‘सिमोन द बीउआर’ के उपन्यास ‘सेकेंड सेक्स’ का नाम लिया जा रहा था। वस्तुतः वहां सिमोन की स्थापनाओं पर बात हो रही थी और उसे भारतीय परिदृश्य से जोड़कर बातें रखी जा रही थीं। उनमें से अधिकतर ऐसी बातें थीं जो अमूमन स्त्री विमर्श की गोष्ठियों में सुनाई पड़ती ही थीं।

अब बारी मैत्रेयी पुष्पा के बोलने की थी। उन्होंने माइक संभाला और फिर बोलना आरंभ किया। स्त्री विमर्श पर आने के पहले उन्होंने एक ऐसी बात कही जो उस समय नितांत मौलिक और उनके स्वयं के अनुभवों पर आधारित थी। उन्होंने कहा कि जब से औरतों के हाथ में मोबाइल पहुंचा है, वह बहुत सशक्त हो गई हैं। उन्हें एक ऐसा सहारा या साथी मिल गया जो वक्त-बेवक्त उनके काम आता है, उनकी मदद करता है। गांव की महिलाएं भी घूंघट की आड़ से अपनी पीड़ा दूर बैठे अपने हितचिंतकों को या अपने रिश्तेदारों को बता सकती हैं। संकट के समय मदद मांग सकती हैं। इस संबंध मैं मैत्रेयी पुष्पा ने कई किस्से बताए जो उनकी भाभी से जुड़े हुए थे। मैत्रेयी पुष्पा ने अपने गंवई अंदाज में मोबाइल को स्त्री सशक्तीकरण से जोड़कर ऐसी बात कह दी जो उनके साथ मंच पर बैठी अन्य स्त्रियों ने शयद सेचा भी न होगा। जब मैत्रेयी बोल रही थीं तो सभागार में जिस प्रकार की चुप्पी थी, उससे ऐस प्रतीत हो रहा था कि अधिकतर लोग उनकी इस स्थापना से सहमत हों।

आज से दो दशक पहले मैत्रेयी पुष्पा ने जब ऐस बोला था, तब शायद ही सोचा होगा कि मोबाइल स्त्रियों और पुरुषों की दबी आकांक्षाओं के प्रदर्शन का कारक भी बनेगा। पिछले दिनों मित्रों के साथ डिजिटल स्क्रीन पर व्यतीत होनेवाले समय पर बातचीत हो रही थी। चर्चा में सभी यह बताने में लगे थे कि किन-किन प्लेटफार्म पर उनका अधिक समय व्यतीत होता है। ज्यादतर मित्रों का कहना था कि ‘इंस्टा’ और ‘एक्स’ की रील्स देखने समय अधिक जाता है। इस चर्चा में ही एक मित्र ने कहा कि वह जब घरेलू और अन्य महिलाओं के वीडियो देखते हैं तो आनंद दोगुना हो जाता है। जिनको डांस करना नहीं आता वे भी डांस करते हुए वीडियो डालती हैं। कई बार तो पति पत्नी के बीच के संवाद भी रील्स में नजर आते हैं। उसमें वह रितेश देशमुख और जेनेलिया की भौंडी नकल करने का प्रयास करते हैं।

इस चर्चा के बीच एक बहुत मार्के की बात निकल कर आई। इंस्टा की रील्स एक ऐसा मंच बन गया है जो महिलाओं और पुरुषों के मन में दबी आकांक्षाओं को भी समने ला रही है। जिन महिलाओं को चर्चित होने का शौक था, जिनको पर्दे पर आने की इच्छा थी, जिनको डांस सीखने और मंच पर अपनी कला को प्रदर्शित करने की इच्छा थी, वो सारी इच्छाएं पूरी हो रही हैं। रील्स और इंस्टा के पहले इस तरह की आकांक्षाएं मन में ही दबी रह जाती थीं। उनके अंदर कुंठा पैदा करती थीं। मोबाइल और इंटरनेट की सुविधा नहीं होने से जो महिलाएं पहले अपनी नृत्य कला का प्रदर्शन करना चाहती थीं, आवश्यक संसाधन उपलब्ध नहीं होने के कारण वो ऐसा कर नहीं पाती थीं। इसमें बहुत सी अधेड़ उम्र की महिलाओं को भी रील्स में देखा जा सकता है। कई तो अजीबोगरीब करतब करते हुए भी नजर आती हैं। लेकिन अपने मन का कर तो रही हैं।

रील्स का यह एक सकारात्मक पक्ष माना जा सकता है जैसे मोबाइल फोन ने महिलाओं को सशक्त किया उसी तरह से इंटरनेट और इंटरनेट प्लेटफार्म्स ने महिलाओं की आकांक्षाओं को पंख लगा दिए। अब वो बगैर लज्जा, संकोच के अपने मन का कर रही हैं और समाज के सामने उसको प्रदर्शित भी कर रही हैं। वैसे रोल्स को लेकर पहले भी इस स्तंभ में चर्चा हो चुकी है जिसमें रोग से लेकर शेयर बाजार में निवेश करने से जुड़े टिप्स तक और धन कमाने से लेकर भाग्योदय तक के नुस्खों को केंद्र में रखा गया था। रील्स पर हो रही चर्चा में एक चिकित्सक मित्र ने एक मजेदार बात कही। उन्होंने कहा कि रोल्स ने डाक्टरों का फायदा करवाया है। रील्स देखकर स्वस्थ रहने के नुस्खे अपनाने वाले लोग बढ़ते जा रहे हैं। स्वस्थ रहने के तरीकों को देखकर और बिना विशेषज्ञ की सलाह के उन तरीकों को अपनाने से समस्याएं भी पैदा होती जा रही हैं। जैसे रोल्स में सेंधा नमक को लेकर बहुत अच्छी बातें कही जाती हैं। सलाह देनेवाले सेंधा नमक को स्वास्थ्य के लिए उपयोगी बताते हैं। रील्स देखकर लोग सैंधा नमक खाने लग जाते हैं। बगैर यह सोचे समझे कि आयोडाइज्ड नमक खाने के क्या लाभ थे और छोड़ देने के क्या नुकसान हो सकते हैं? जब शरीर में सोडियम और पोटैशियम का संतुलन बिगड़ता है तो चिकित्सकों के पास भागते हैं।

पता चलता है कि यह असंतुलन सैंधा नमक के निरंतर सेवन से हुआ। स्वस्थ रहने के इसी तरह के कई नुस्खे आपको इंस्टाग्राम पर भी मिल जाएंगे। सभी ऐसे बताए जाते हैं कि देखनेवालों का एक बार तो मन कर ही जाता है कि वह उसको अपना ले। चूंकि इस बात का उल्लेख रोल्स में नहीं होता है कि सलाह देनेवाले चिकित्सक या न्यूट्रिशनिस्ट है या नहीं, इसलिए इसे देखनेवाला यह मानकर चलता है कि रील्स बनाने वाला विशेषज्ञ होगा ही। रील की दुनिया बहुत ही मनोरंजक है। समय बहुत सोखती है। कई बार वहीं अच्छी सामग्री भी मिल जाती है, लेकिन एआइ के इस दौर में प्रामाणिकता को लेकर मन में एक प्रकार का संशय बना ही रहता है। किसी का भी वीडियो बनाकर उसमें किसी दूसरे की आवाज पिरोकर बहुप्रसारित करने का चलन भी बढ़ रहा है। ऐसे में इस आभासी दुनिया को केवल और केवल मनोरंजन के लिए ही उपयोग किया जाना चाहिए।

मन में दबी इच्छाओं को पूर्ण करने का मंच माना या बनाया जा सकता है। इस माध्यम को गंभीरता से लेने की आवश्यकता नहीं है। ऐसा प्रतीत होता है कि वह दिन दूर नहीं जब लोग इससे ऊबकर फिर से छपे हुए अक्षरों की और लौटेंगे। दरअसल जिस प्रकार की प्रामाणिकता प्रकाशित शब्दों या अक्षरों की होती है, वैसी इन आभासी माध्यमों में नहीं होती है। इस बात से इन्कार नहीं किया जा सकता है कि अभी इस माध्यम का समाज पर प्रभाव पड़ रहा है। लोग कई बार यहाँ सुझाई या कही गई बातों को सही मानकर अपनी राय बना लेते हैं। लेकिन जैसे-जैसे देश में शिक्षित लोगों की संख्या बढ़ेगी और इन सबके बारे में लोगों की समझ बढ़ेगी तो इसको विशुद्ध मनोरंजन के तौर पर ही देखा जाएगा, सूचना के माध्यम के तौर पर नहीं।

विजय गर्ग सेवानिवृत्त प्रिंसिपल मलोट पंजाब

गंभीर धाराओं में दर्ज मुकदमा, लेकिन कार्रवाई ठप्प

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-पीड़िता को नहीं पुलिस पर भरोसा, आरोपी बेखौफ, मंचों की बढ़ा रहे शोभा

फर्रुखाबाद। हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड (HURL) के तीन अधिकारियों आरुणि कुमार, धीरज मिश्रा और अवधेश सिंह के खिलाफ 8 मई 2025 को कोतवाली फर्रुखाबाद में गंभीर आपराधिक धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की जा चुकी है, लेकिन हैरानी की बात है कि आज तक न तो कोई गिरफ्तारी हुई और न ही इन अधिकारियों को निलंबित किया गया।

एफआईआर में धोखाधड़ी, धमकी, आर्थिक और मानसिक उत्पीड़न जैसे संगीन आरोप शामिल हैं। यह धारा गैर-जमानती है, फिर भी पुलिस की कार्यवाही शून्य बनी हुई है।

पीड़िता पूनम सक्सेना ने बताया कि उनके पुत्र निशांत गौरव को झूठे आधार पर फंसाकर 50 लाख की रिश्वत मांगी गई। पूरी रकम न दे पाने पर लगभग 13 लाख की जबरन वसूली की गई। पीड़िता ने पहले कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज करवानी चाही, लेकिन पुलिस ने टालमटोल किया। अंततः उन्हें न्यायालय की शरण लेनी पड़ी, जिसके आदेश पर ही मामला दर्ज हो सका।

पुलिस की भूमिका संदिग्ध

एफआईआर दर्ज होने के बावजूद अब तक कोई गिरफ्तारी या विभागीय कार्रवाई नहीं होना, यह साफ दर्शाता है कि पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं। सवाल यह है कि क्या पुलिस किसी दबाव में काम कर रही है या फिर जानबूझकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल रही है?

आरोपी बेखौफ, मंचों पर मौजूद

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिन अधिकारियों पर ये गंभीर आरोप हैं, वे आज भी कंपनी में अपने पदों पर बने हुए हैं, बल्कि सार्वजनिक कार्यक्रमों में खुलकर शिरकत कर रहे हैं और मंच की शोभा बन रहे हैं। बताया जा रहा है कि आरोपी अधिकारी कंपनी के प्रबंध निदेशक को भी गुमराह कर रहे हैं, जिससे उनके खिलाफ कोई ठोस कदम न उठाया जा सके।

पीड़िता ने कहा, हमें न्यायपालिका पर भरोसा है लेकिन पुलिस जिस तरह से मामले को दबा रही है, उससे हमारा भरोसा टूट रहा है। आरोपी अधिकारियों के हौसले बुलंद हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रपति से की शिष्टाचार भेंट

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– राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली में हुआ सौहार्दपूर्ण संवाद

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को भारत की महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली में शिष्टाचार भेंट की। यह भेंट पूर्णत: औपचारिक रही, लेकिन इसे राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रपति को उत्तर प्रदेश में चल रही विकास योजनाओं, कानून-व्यवस्था की स्थिति और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों की जानकारी दी। वहीं, राष्ट्रपति ने भी मुख्यमंत्री के प्रयासों की सराहना की और उन्हें जनसेवा के कार्यों में निरंतर सफलता की शुभकामनाएं दीं।

इस भेंट के दौरान देश और प्रदेश से जुड़े कई समसामयिक मुद्दों पर चर्चा की संभावना जताई गई, हालांकि आधिकारिक रूप से इसकी पुष्टि नहीं की गई है। मुख्यमंत्री और राष्ट्रपति के बीच यह मुलाकात सौहार्द और गरिमा का प्रतीक बनी।

यह शिष्टाचार भेंट न केवल लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन है, बल्कि केंद्र और राज्य के बीच समन्वय और सहयोग की भावना को भी सुदृढ़ करती है।

इस मुलाकात को लेकर उत्तर प्रदेश के राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में सकारात्मक संदेश गया है, जिससे राज्य और केंद्र के रिश्ते और अधिक मजबूत होने की उम्मीद है।

उत्तर प्रदेश का GeM पोर्टल पर ऐतिहासिक प्रदर्शन — सुशासन की नई परिभाषा

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शरद कटियार

भारत में शासन प्रणाली की पारदर्शिता और दक्षता को सुनिश्चित करने के लिए वर्षों से विभिन्न प्रयास किए जा रहे हैं। डिजिटल इंडिया अभियान के तहत इन्हीं प्रयासों में एक क्रांतिकारी कदम था GeM (Government e-Marketplace) पोर्टल की स्थापना। इस डिजिटल मंच को सरकारी खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी, दक्ष और जनसुलभ बनाने के उद्देश्य से लाया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रारंभ किया गया यह प्लेटफॉर्म आज पूरे देश में प्रभावी रूप से कार्य कर रहा है, और इस दिशा में उत्तर प्रदेश का प्रदर्शन विशेष रूप से उल्लेखनीय बनकर उभरा है।

वित्तीय वर्ष 2024-25 में उत्तर प्रदेश ने GeM पोर्टल के माध्यम से ₹16,828.75 करोड़ के क्रय आदेश पूरे किए हैं। इससे पूर्व के पांच वर्षों में कुल ₹65,227.68 करोड़ के आदेश इस पोर्टल पर पूरे किए गए हैं। यह न केवल एक रिकॉर्ड है, बल्कि यह बताता है कि उत्तर प्रदेश ने डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में कितनी तेज़ी और प्रतिबद्धता के साथ काम किया है।

GeM पोर्टल की अवधारणा और इसकी आवश्यकता

GeM पोर्टल की शुरुआत एक साधारण से विचार के साथ की गई थी — सरकारी खरीद को एक पारदर्शी और भ्रष्टाचारमुक्त प्रक्रिया बनाया जाए। पहले जहां सरकारी विभागों की खरीद प्रक्रिया में जटिलताएं, समय की बर्बादी और बिचौलियों की भूमिका सामने आती थी, वहीं GeM ने इन सभी समस्याओं का समाधान डिजिटल तरीके से प्रस्तुत किया। यह न केवल सरकारी क्रेताओं के लिए, बल्कि देश भर के छोटे-बड़े विक्रेताओं के लिए भी एक वरदान साबित हुआ है।

उत्तर प्रदेश में GeM का सफल कार्यान्वयन

उत्तर प्रदेश जैसे विशाल और विविध राज्य में किसी भी प्रणाली को सफलतापूर्वक लागू करना कोई साधारण कार्य नहीं होता। इस दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का नेतृत्व विशेष रूप से सराहनीय रहा है। राज्य में GeM पोर्टल को न केवल प्रोत्साहित किया गया, बल्कि इसे हर जिले, विभाग और इकाई तक पहुंचाया गया। इसके लिए व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम, कार्यशालाएं, और तकनीकी सहयोग सुनिश्चित किया गया।

वर्ष 2024-25 में GeM के माध्यम से ₹16,828.75 करोड़ के ऑर्डर का निष्पादन केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि यह राज्य के वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और नवाचार की गाथा है। यह प्रदर्शन बताता है कि उत्तर प्रदेश ने ‘न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन’ के मंत्र को सच्चाई में बदला है।

GeM के माध्यम से पारदर्शिता और समावेशिता

GeM पोर्टल का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है पारदर्शिता। यह पोर्टल यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी विभाग किसी उत्पाद या सेवा की खरीद करते समय उसके सभी विकल्प देख सके, उनकी तुलना कर सके और सर्वश्रेष्ठ विक्रेता को निष्पक्ष ढंग से चुन सके। उत्तर प्रदेश में इस व्यवस्था को बड़े ही अनुशासन के साथ अपनाया गया है।

इस प्रक्रिया में छोटे, मझोले और ग्रामीण क्षेत्र के उद्यमियों को भी समान अवसर मिलते हैं। महिला उद्यमियों, दिव्यांगजनों और स्टार्टअप को प्राथमिकता दी गई है। यह समावेशिता ही उत्तर प्रदेश को GeM के मामले में आदर्श राज्य बनाती है।

आर्थिक प्रभाव और सरकारी संसाधनों की बचत

GeM के माध्यम से खरीदारी में पारदर्शिता आने से राज्य सरकार को आर्थिक लाभ भी हुआ है। खुले बाजार में मिलने वाली वस्तुएं जब एक केंद्रीकृत पोर्टल से खरीदी जाती हैं, तो उसके मूल्य में प्रतिस्पर्धा के चलते गिरावट आती है। इससे सरकार को भारी बचत होती है।

उत्तर प्रदेश में बीते पांच वर्षों में किए गए ₹65,227.68 करोड़ के ऑर्डर का प्रत्यक्ष लाभ यह है कि हर खरीद एक नियत और प्रमाणित प्रक्रिया से हुई। इससे संसाधनों की बर्बादी रुकी, समय की बचत हुई और गुणवत्ता में सुधार आया। यह प्रशासनिक दक्षता का भी परिचायक है।

प्रशासनिक सुधार और नौकरशाही में उत्तरदायित्व

GeM के प्रभाव से नौकरशाही में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं। पहले जहां किसी भी खरीद प्रक्रिया में व्यक्तिगत विवेक और मनमानी का खतरा बना रहता था, वहीं अब GeM के माध्यम से प्रत्येक ऑर्डर एक डिजिटल ट्रेल में दर्ज होता है। इससे अधिकारी जवाबदेह बनते हैं और भ्रष्टाचार की संभावनाएं लगभग समाप्त हो जाती हैं।

उत्तर प्रदेश सरकार ने इस व्यवस्था को न केवल अपनाया, बल्कि अपने अधिकारियों को भी डिजिटल दक्षता प्रदान करने के लिए लगातार प्रशिक्षण दिया। इस नवाचार के चलते राज्य की नौकरशाही अधिक पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनी है।

डिजिटल इंडिया की अवधारणा को साकार करता उत्तर प्रदेश

प्रधानमंत्री मोदी का डिजिटल इंडिया अभियान केवल एक नारा नहीं, बल्कि देश के हर नागरिक को डिजिटल रूप से सशक्त करने की योजना है। उत्तर प्रदेश ने GeM के सफल उपयोग से यह सिद्ध किया है कि एक बड़ा, जटिल और संसाधनों से भरा राज्य भी डिजिटल रूपांतरण में अग्रणी बन सकता है।

अब राज्य का हर सरकारी विभाग, नगरपालिका, नगर निगम, शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग और यहां तक कि ग्रामीण क्षेत्रों की पंचायतें भी GeM के माध्यम से आवश्यक वस्तुओं की खरीदारी कर रही हैं। यह एक ऐसा मॉडल है जिसे देश के अन्य राज्यों को भी अपनाना चाहिए।

भविष्य की संभावनाएं और नीतिगत विस्तार

GeM पोर्टल की सफलता से यह स्पष्ट है कि सरकारी खरीद के लिए पारंपरिक और पेपर आधारित पद्धतियां अब अतीत की बात हो चुकी हैं। उत्तर प्रदेश सरकार को चाहिए कि वह इस मंच का उपयोग केवल खरीद तक सीमित न रखे, बल्कि इससे संबंधित डेटा एनालिटिक्स का भी उपयोग कर राज्य के व्यय को और प्रभावशाली बनाए।

GeM से प्राप्त आंकड़ों के माध्यम से यह समझा जा सकता है कि कौन सी वस्तुएं अधिक खरीदी जाती हैं, किन क्षेत्रों में गुणवत्ता की आवश्यकता है, और किस प्रकार की सेवाओं की मांग बढ़ रही है। इससे राज्य न केवल आर्थिक दृष्टि से सक्षम होगा, बल्कि नीतिगत निर्णय भी अधिक वैज्ञानिक और यथार्थपरक होंगे।

उत्तर प्रदेश ने GeM पोर्टल पर ऐतिहासिक प्रदर्शन कर यह दिखा दिया है कि इच्छाशक्ति, नेतृत्व और तकनीकी नवाचार के सम्मिलन से कोई भी राज्य सुशासन का आदर्श बन सकता है। ₹65,000 करोड़ से अधिक के ऑर्डर केवल आर्थिक उपलब्धि नहीं है, यह जनता के प्रति सरकार की जवाबदेही, पारदर्शिता और सेवा भाव का भी प्रमाण है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनकी टीम को इसके लिए बधाई दी जानी चाहिए कि उन्होंने केंद्र सरकार की डिजिटल पहल को इतनी गंभीरता से लिया और उसे जमीनी स्तर तक सफलतापूर्वक लागू किया। यह प्रदर्शन आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश को न केवल आर्थिक रूप से सशक्त बनाएगा, बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगा कि हर नागरिक तक सरकार की योजनाएं और सेवाएं समय पर और उचित ढंग से पहुंच सकें।

अब समय है कि अन्य राज्य भी उत्तर प्रदेश के इस डिजिटल क्रांति से प्रेरणा लें और अपने-अपने क्षेत्रों में GeM जैसी पारदर्शी प्रणालियों को अपनाएं। जब भारत के सभी राज्य इस प्रकार की पारदर्शिता और दक्षता की दिशा में एक साथ कदम बढ़ाएंगे, तभी ‘न्यू इंडिया’ का सपना वास्तव में साकार होगा।

(लेखक, दैनिक यूथ इंडिया के मुख्य संपादक)

पाकिस्तान के रेलवे ट्रैक पर भीषण धमाका, पटरी से उतरी जाफर एक्सप्रेस ट्रेन की 4 से 6 बोगियां

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पाकिस्तान के जैकबाबाद में रेलवे ट्रैक पर 18 जून बुधवार हुए एक भीषण धमाके के कारण जाफर एक्सप्रेस ट्रेन की 4 से 6 बोगियां पटरी से उतर गईं। पुलिस और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह घटना सदर थाना क्षेत्र के बोलान पम्प इलाके में हुई, जहां ट्रेन के गुजरने से ठीक पहले धमाके की आवाज सुनी गई। इस हादसे में अभी तक किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन रेलवे सेवाएं प्रभावित हुई हैं। प्रारंभिक जांच में इसे रेल यातायात को बाधित करने की साजिश माना जा रहा है, क्योंकि बलूचिस्तान में पहले भी रेलवे ट्रैक पर हमले हो चुके हैं।

इस घटना की जिम्मेदारी अभी तक किसी संगठन ने नहीं ली है, लेकिन बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) जैसे समूहों का इस क्षेत्र में पहले भी रेलवे हमलों से संबंध रहा है। रेलवे और सुरक्षा बल घटनास्थल पर पहुंचकर जांच कर रहे हैं, और बचाव कार्य शुरू कर दिए गए हैं। स्थिति पर और जानकारी की प्रतीक्षा है।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, धमाके के कारण रेलवे ट्रैक पर 3 फीट गहरा गड्ढा बन गया, जिससे ट्रेन की बोगियां डिरेल हुईं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस हादसे में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, और कोई जानी नुकसान नहीं हुआ। रेलवे ट्रैक को भी नुकसान पहुंचा है, जिसके कारण रेल यातायात अस्थायी रूप से बाधित हो गया। पुलिस और सुरक्षा बल घटनास्थल पर पहुंच गए हैं, और जांच जारी है। यह क्षेत्र पहले भी आतंकी गतिविधियों का केंद्र रहा है, और इस तरह के हमले पाकिस्तान के रेल परिवहन तंत्र को बाधित करने के इरादे से किए जाते हैं।

इस घटना ने एक बार फिर बलूचिस्तान में सुरक्षा स्थिति पर सवाल उठाए हैं, जहां पहले भी जाफर एक्सप्रेस ट्रेन को निशाना बनाया गया है, जैसे कि मार्च 2025 में बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) द्वारा ट्रेन को हाईजैक करने की घटना।