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Tuesday, March 24, 2026
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राज्य सैनिक परिषद उत्तर प्रदेश के सदस्य नामित हुए मेजर सुनील दत्त द्विवेदी

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Sunil Dutt Dwivedi
Sunil Dutt Dwivedi

– कांग्रेस विधायक आराधना मिश्रा भी परिषद में होंगी शामिल

फर्रुखाबाद: जनपद फर्रुखाबाद (Farrukhabad) के सदर विधायक मेजर सुनील दत्त द्विवेदी (Sadar MLA Major Sunil Dutt Dwivedi) को राज्य सैनिक परिषद उत्तर प्रदेश का सदस्य नामित किया गया है। यह नामांकन 19 जून 2025 को हुआ, और परिषद का मुख्यालय राजधानी लखनऊ (Lucknow) में स्थित है। परिषद में उत्तर प्रदेश विधानसभा से दो माननीय सदस्यों को नामित किया जाता है, जिनमें इस बार भाजपा विधायक मेजर सुनील दत्त द्विवेदी के साथ-साथ कांग्रेस विधायक श्रीमती आराधना मिश्रा ‘मोना’ (विधायक, प्रतापगढ़) को भी सदस्य के रूप में मनोनीत किया गया है।

राज्य सैनिक परिषद उत्तर प्रदेश, राज्य के पूर्व सैनिकों, वीर नारियों और उनके परिजनों के कल्याण से संबंधित मुद्दों पर नीति निर्धारण और सुझाव देने वाली एक महत्वपूर्ण संस्था है। इस परिषद में निर्वाचित विधायकों की भूमिका नीतिगत निर्णयों और सैनिक समुदाय से संवाद के लिए महत्त्वपूर्ण होती है। ज्ञात हो कि मेजर सुनील दत्त द्विवेदी उत्तर प्रदेश पुलिस एवं आर्म्ड फोर्सेज सहायता संस्थान, लखनऊ की प्रबंध समिति के सदस्य भी हैं।

इस संस्थान की अध्यक्षता महामहिम राज्यपाल उत्तर प्रदेश द्वारा की जाती है, जबकि मुख्यमंत्री उपाध्यक्ष, और अन्य प्रमुख सदस्य जैसे मुख्य सचिव, वित्त सचिव तथा आर्मी के जीओसी एरिया के मेजर जनरल इसमें शामिल रहते हैं। यह संस्थान पुलिस और सशस्त्र बलों से जुड़े कार्मिकों के कल्याण के लिए कार्यरत है।

इसके अलावा मेजर द्विवेदी उत्तर प्रदेश की सार्वजनिक उपक्रम एवं निगम संयुक्त समिति के सभापति के रूप में भी कार्यरत हैं। यह समिति राज्य के सार्वजनिक उपक्रमों की कार्यप्रणाली, उनके वित्तीय लेन-देन और प्रशासनिक निरीक्षण की जिम्मेदारी संभालती है। इस समिति को उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी वित्तीय समिति भी माना जाता है।

राज्य सैनिक परिषद जैसे महत्वपूर्ण मंच पर नामित होने पर फर्रुखाबाद के लोगों में हर्ष की लहर है। विभिन्न संगठनों व आमजन द्वारा मेजर सुनील दत्त द्विवेदी को बधाई दी जा रही है। क्षेत्रीय राजनीतिक हलकों में इसे एक प्रभावशाली और सम्मानजनक उपलब्धि माना जा रहा है, जो जिले के लिए गौरव की बात है।

एम आई टी – वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी ने एडवांस्ड लिथियम-आयन और सोडियम-आयन टेक्नोलॉजी

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MIT
MIT

पर आधारित भारत के पहले प्राइवेट यूनिवर्सिटी बैटरी रिसर्च सेंटर का शुभारंभ किया

एम आई टी – वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी (MIT – World Peace University) ने सस्टेनेबल एनर्जी सॉल्यूशंस (Sustainable Energy Solutions) को आगे बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, अत्याधुनिक सुविधाओं वाली बैटरी फैब्रिकेशन एवं रिसर्च फैसिलिटी लॉन्च की है, जो लिथियम-आयन और सोडियम-आयन टेक्नोलॉजी (lithium-ion and sodium-ion technologies) पर आधारित है। किसी प्राइवेट स्टेट यूनिवर्सिटी की ओर से पहली बार इस तरह की पहल की गई है, जो आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया जैसे राष्ट्रीय मिशनों के साथ जुड़ी हुई है।इसका उद्देश्य भारत को बिजली के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में अपना योगदान देना है।

इस फैसिलिटी को बैटरी को शुरू से अंत तक पूरी तरह विकसित करने के लिए बनाया गया है, जिसमें एक्टिव मटेरियल सिंथेसिस से लेकर कॉइन सेल फेब्रिकेशन और इलेक्ट्रोकेमिकल परफॉर्मेंस के मूल्यांकन तक की सभी सुविधाएँ उपलब्ध हैं।एम आई टी – वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी रिसर्च टीम बैटरी परफॉर्मेंस के सभी मानकों को बेहतर बनाने के लिए, एडवांस्ड इलेक्ट्रोड मैटेरियल्स विकसित करने में जुटी है, जिसमें एनर्जी डेंसिटी, साइकिलिंग स्टेबिलिटी एवं ऑपरेशनल सेफ्टी शामिल है।

इसके साथ ही, नेक्स्ट जेनरेशन सॉलिड स्टेट इलेक्ट्रोलाइट्स विकसित करने की दिशा में भी कोशिश जारी है, जिनमें अधिक आयनिक कंडक्टिविटी और थर्मल स्टेबिलिटी वाले मैटेरियल्स पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। ये SSEs पारंपरिक लिक्विड इलेक्ट्रोलाइट्स की तुलना में ज्यादा सुरक्षित और अधिक कुशल विकल्प देते हैं, जो एनर्जी स्टोरेज टेक्नोलॉजी में एक बड़ी प्रगति को दर्शाता है।

ग्लास-पॉलीमर कंपोजिट इलेक्ट्रोलाइट्स के इस्तेमाल और पेपर-आधारित बैटरियों के विकास जैसे नए-नए तरीकों का भी पता लगाया जा रहा है। इसके अलावा, इस फैसिलिटी में लिथियम-आयन बैटरियों के लिए अधिक शुद्धता वाले सॉल्वैंट्स तथा इलेक्ट्रोलाइट्स के सिंथेसिस पर काम शुरू किया गया है, जो भारत में बैटरी बनाने वाली कंपनियों को अव्वल दर्जे की गुणवत्ता वाला कच्चा माल उपलब्ध कराने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

इस फैसिलिटी इसमें नए-नए टूल्स और इंस्ट्रूमेंटेशन मौजूद है। यह फैसिलिटी अकादमिक अनुसंधान और उद्योग व शोध संस्थानों के साथ मिलकर किए जाने वाले प्रोजेक्ट्स में भी सहायक है, जिससे अत्याधुनिक विचारों को बड़े पैमाने पर लागू किए जाने वाले और उपयोगी समाधानों में बदलने में मदद मिलती है।

जल्द ही, इस फैसिलिटी में सिलैंडरिकल तथा प्रिजमेटिक सेल्स के निर्माण की सुविधा भी उपलब्ध होगी, जिससे बैटरी के कई दूसरे तरह के उपयोगों के लिए इसकी क्षमताएं बढ़ेंगी।एम आई टी – वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी में सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस इन मैटेरियल्स साइंस के निदेशक तथा C-MET, MeitY, भारत सरकार, एम आई टी – वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी के पूर्व-निदेशक, प्रोफेसर डॉ. भरत काले, ने कहा: “अत्याधुनिक सुविधाओं वाली इस बैटरी फेब्रिकेशन एवं रिसर्च फैसिलिटी का शुभारंभ, एम आई टी – वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी के लिए सस्टेनेबल एनर्जी टेक्नोलॉजी को आगे बढ़ाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है।

भारत में पहली बार किसी प्राइवेट स्टेट यूनिवर्सिटी की ओर से इस तरह की पहल की गई है, जो आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया जैसे राष्ट्रीय मिशनों के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य बिजली के क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है। हमारे पास मटेरियल सिंथेसिस से लेकर सेल फेब्रिकेशन तथा इलेक्ट्रोकेमिकल मूल्यांकन तक की पूरी क्षमता उपलब्ध है, जिसकी मदद से हम सुरक्षित तथा अधिक कुशल लिथियम-आयन, सोडियम-आयन और लिथियम सल्फर बैटरियों के लिए एडवांस्ड इलेक्ट्रोड मैटेरियल्स और सॉलिड-स्टेट इलेक्ट्रोलाइट्स विकसित कर रहे हैं।

ये समूह एम आई डी स्वीडन के साथ मिलकर पेपर बैटरी पर भी काम कर रहा है। यह फैसिलिटी शिक्षा और उद्योग जगत के साथ सहयोग को बढ़ावा देने के अलावा, भविष्य के होनहार छात्रों को ट्रेनिंग देने के लिए एक प्लेटफॉर्म की भूमिका भी निभाती है। ANRF और देश में इसी तरह की फंडिंग एजेंसियों से अधिक सहायता मिलने पर, हमारे जैसे निजी संस्थान भारत के स्वच्छ ऊर्जा भविष्य में बेहद अहम योगदान दे सकते हैं।”

रिसर्च और इनोवेशन के अलावा, ये फैसिलिटी भविष्य की प्रतिभाओं को निखारने के इरादे पर अटल है। यह इंजीनियरिंग एवं विज्ञान के छात्रों को ट्रेनिंग देने के लिए बेहतरीन प्लेटफॉर्म की भूमिका निभाती है, साथ ही पीएच.डी. करने वालों और रिसर्च करने वालों को भी बैटरी टेक्नोलॉजी में उच्च-स्तरीय शोध करने के लिए रोमांचक अवसर प्रदान करती है।

वंदे भारत में यात्री के साथ हुई पिटाई, बीजेपी विधायक ने दी सफाई

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Vande Bharat
Vande Bharat

झांसी: भारत की सबसे तेज जानी मानी ट्रेन वंदे भारत (Vande Bharat) में सीट बदलने को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि यात्री को पीट दिया गया। बबीना से बीजेपी विधायक (BJP MLA) राजीव सिंह (Rajeev Singh) परिछा से एक यात्री ने सीट बदलने को लेकर कहा लेकिन उन्होंने ,मना कर दिया और बहस शुरू हो गई धीरे-धीरे मामला बढ़ता गया और विधायक के समर्थकों ने उसकी पिटाई करके नाक तोड़ दी। विधायक से यात्री के विवाद के बाद ट्रेन में हंगामा हो गया। ‘एक्स’ पर शिकायत के बाद खलबली मची और ट्रेन के झांसी पहुंचते ही जीआरपी और आरपीएफ ने मौके पर पहुंचकर घटना की जानकारी ली।

जानकारी के मुताबिक, हजरत निजामुद्दीन से चलकर रानी कमलापति जंक्शन जा रही वंदे भारत में भाजपा के विधायक परिवार के सदस्यों के साथ कोच ई-2 की 8, 50 व 51 नंबर सीट पर सवार होकर झांसी आ रहे थे तभी उन्होंने एक यात्री से उनकी सीट लेने को कहा। इसी बात पर यात्री और उसका साथी नाराज विधायक से विवाद करने लगा और विधायक से अभद्रता करने लगा तो हंगामा हो गया। यह देखकर सुरक्षाकर्मी भी आ गये, जिस पर यात्री उनसे भी उलझ गये। बीच-बचाव करने पहुंचे विधायक से पुन: विवाद करने लगे।

विधायक से यात्री के विवाद के बाद ट्रेन में हंगामा हो गया। ‘एक्स’ पर शिकायत के बाद खलबली मची और ट्रेन के झांसी पहुंचते ही जीआरपी और आरपीएफ ने मौके पर पहुंचकर घटना की जानकारी ली। घटना पर एसपी रेलवे झांसी विपुल श्रीवास्तव ने बयान देते हुए कहा कि पूरा मामला संज्ञान में है पीड़ित की ओर से शिकायत मिली है, सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है. दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी.

इधर बीजेपी विधायक राजीव सिंह परिछा ने भी इस मामले में अपनी सफाई देते हुए कहा कि यात्री ने अभद्रता की थी, लेकिन मेरे समर्थकों ने मारपीट की है। यदि किसी ने गलत किया है तो कार्रवाई होनी चाहिए। रेलवे पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

स्वादहीन महंगाई और गंदे तेल की दुर्गंध: बकेवर के नामी रेस्टोरेंट पर उठे सवाल, स्वास्थ्य एवं खाद्य सुरक्षा विभाग की चुप्पी बनी रहस्य

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इटावा (बकेवर): क्षेत्र का एक नामी रेस्टोरेंट इन दिनों लोगों की जुबान पर चर्चा का विषय बना हुआ है, लेकिन इसके पीछे की वजह इसकी लोकप्रियता नहीं, बल्कि वहां परोसे जा रहे खाने की गुणवत्ता है। स्थानीय लोगों और ग्राहकों का आरोप है कि इस रेस्टोरेंट में भोजन की कीमतें तो आसमान छू रही हैं, लेकिन न स्वाद है, न गुणवत्ता — उल्टे गंदे और बार-बार इस्तेमाल किए गए तेल की दुर्गंध भोजन में महसूस की जा रही है।

स्वास्थ्य विभाग और खाद्य सुरक्षा विभाग दोनों की संदिग्ध चुप्पी खुद में सवाल बनी है। स्थानीय जनता का कहना है कि यह रेस्टोरेंट लंबे समय से मानकों की अनदेखी कर रहा है, लेकिन स्वास्थ्य और खाद्य विभाग की ओर से कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई। इससे साफ संकेत मिलते हैं कि कहीं न कहीं विभागीय मिलीभगत भी इस मामले को दबाने में भूमिका निभा रही है।

लोगों की जान से हो रहा खिलवाड़

खराब और दूषित तेल, खुले मसाले, साफ-सफाई की कमी और कर्मचारियों की लापरवाही — यह सब मिलकर उपभोक्ताओं की सेहत के लिए एक बड़ा खतरा बन रहे हैं। कई ग्राहकों ने पेट दर्द, उल्टी और फूड प्वाइजनिंग जैसी समस्याओं की शिकायत की है।

आखिर क्यों नहीं होती नियमित विभागीय छापेमारी?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब शिकायतें मिल रही हैं, तब भी खाद्य विभाग की नियमित छापेमारी क्यों नहीं होती? क्या मानकों की खुलेआम अनदेखी करने वाले इस रेस्टोरेंट को किसी “ऊपर से संरक्षण” प्राप्त है? जनता ने उठाई जांच की मांग स्थानीय समाजसेवियों और जागरूक नागरिकों ने मांग की है कि खाद्य विभाग इस मामले को गंभीरता से लेकर तत्काल छापेमारी करे और मानकों की जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करे। साथ ही स्वास्थ्य विभाग की निष्क्रियता की भी उच्च स्तरीय जांच की जानी चाहिए। यह कोई पहली बार नहीं है जब इटावा जिले के क्षेत्र भर में संचालित सैकड़ों होटल रेस्टोरेंट में इस तरह की शिकायतें सामने आई हैं। जरूरत है कि जिम्मेदार विभाग सजग होकर जनहित में उचित कदम उठाएं, ताकि लोगों की जान के साथ किसी प्रकार का खिलवाड़ न हो।

योग फॉर वन अर्थ, वन हेल्थ

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विजय गर्ग

जैसा कि भारत 21 जून को योग के 11 वें अंतर्राष्ट्रीय दिवस का जश्न मनाने के लिए तैयार है, सरकार इस वर्ष के विषय के रूप में “योग फॉर वन अर्थ, वन हेल्थ” के साथ इस अवसर को चिह्नित करने के लिए राष्ट्रव्यापी घटनाओं की एक भीड़ का आयोजन कर रही है मुख्य कार्यक्रम योग संगम, 21 जून, 2025 को सुबह 6:30 बजे से 7:45 बजे तक पूरे भारत में 1 लाख से अधिक स्थानों पर कॉमन योगा प्रोटोकॉल के आधार पर एक सिंक्रोनाइज्ड मास योग प्रदर्शन का आयोजन करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में राष्ट्रीय कार्यक्रम का नेतृत्व करेंगे। इस सामूहिक उत्सव का उद्देश्य योग के कालातीत अभ्यास और आज की दुनिया में इसकी स्थायी प्रासंगिकता के लिए हमारी साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि करना है। प्राचीन भारतीय परंपरा का एक अमूल्य उपहार, योग शारीरिक और मानसिक कल्याण को बढ़ावा देने के लिए सबसे भरोसेमंद साधनों में से एक के रूप में उभरा है।

“योग” शब्द संस्कृत की जड़ ‘युज’ से लिया गया है, जिसका अर्थ है “शामिल होना,” “योग करना,” या “एकजुट होना।” यह मन और शरीर की एकता, विचार और क्रिया, संयम और पूर्ति, मानव और प्रकृति के बीच सद्भाव और स्वास्थ्य और कल्याण के लिए एक समग्र दृष्टिकोण का प्रतीक है। अपनी सार्वभौमिक अपील को पहचानते हुए, 11 दिसंबर, 2014 को, संयुक्त राष्ट्र ने 21 जून को संकल्प 69/131 द्वारा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में घोषित किया। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की स्थापना का मसौदा प्रस्ताव भारत द्वारा प्रस्तावित किया गया था और इसे रिकॉर्ड 175 सदस्य राज्यों द्वारा समर्थन दिया गया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार 27 सितंबर, 2014 को महासभा के 69 वें सत्र के उद्घाटन के दौरान अपने संबोधन में प्रस्ताव पेश किया था। 21 जून की तारीख को चुना गया क्योंकि यह उत्तरी गोलार्ध में वर्ष का सबसे लंबा दिन ग्रीष्मकालीन संक्रांति है। यह दिन प्रकृति और मानव कल्याण के बीच एक प्रतीकात्मक सद्भाव का प्रतिनिधित्व करता है और कई संस्कृतियों में महत्वपूर्ण है। यह समग्र स्वास्थ्य क्रांति के युग में विकसित हुआ, जिसमें इलाज के बजाय रोकथाम पर ध्यान दिया गया। 2015 में अपने पहले संस्करण के बाद से, भारत ने आयुष मंत्रालय के तत्वावधान में विश्व स्तर पर उत्सव का नेतृत्व किया है, जिसमें राज्य सरकारों, विदेशों में भारतीय मिशनों और संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों का सक्रिय समर्थन है, आयुष मंत्रालय के एक आधिकारिक बयान में कहा गया है।

योग दिवस के प्रतीक के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, बयान में कहा गया है, “लोगो में दोनों हाथों की तह योग का प्रतीक है, संघ, जो सार्वभौमिक चेतना के साथ व्यक्तिगत चेतना के संघ को दर्शाता है, मन और शरीर, मनुष्य और प्रकृति के बीच एक आदर्श सद्भाव; स्वास्थ्य और कल्याण के लिए एक समग्र दृष्टिकोण। भूरे रंग के पत्ते पृथ्वी तत्व का प्रतीक हैं, हरे पत्ते प्रकृति का प्रतीक हैं, नीला जल तत्व का प्रतीक है, चमक अग्नि तत्व का प्रतीक है, और सूर्य ऊर्जा और प्रेरणा के स्रोत का प्रतीक है। लोगो मानवता के लिए सद्भाव और शांति को दर्शाता है, जो योग का सार है।”

योग दिवस की यात्रा असाधारण से कम नहीं रही है, क्योंकि 2018 में 9.59 करोड़ व्यक्तियों की मामूली भागीदारी से यह उत्सव तेजी से बढ़ा है। 2024 में, अनुमानित 24.53 करोड़ लोग दुनिया भर में समारोह में शामिल हुए, इस कार्यक्रम की विशाल वैश्विक अपील का प्रदर्शन किया। रिलीज में कहा गया है कि यह दिन एक वैश्विक कल्याण आंदोलन बन गया है, जो देशों में लाखों लोगों को एकजुट करता है। यह वर्ष योग के 11 वें अंतर्राष्ट्रीय दिवस को “योग फॉर वन अर्थ, वन हेल्थ” विषय के साथ चिह्नित करता है।

यह विषय स्वास्थ्य, स्थिरता और पर्यावरण के परस्पर जुड़ाव के बारे में एक महत्वपूर्ण सच्चाई को प्रतिध्वनित करता है, जो भारत के “वन अर्थ, वन फैमिली, वन फ्यूचर” विजन के साथ अपने जी 20 प्रेसीडेंसी के दौरान हाइलाइट किया गया है। योग 2025 का अंतर्राष्ट्रीय दिवस केवल एक दिन का पालन नहीं होगा – यह समग्र स्वास्थ्य, पर्यावरण सद्भाव और वैश्विक कल्याण के लिए भारत की स्थायी प्रतिबद्धता को प्रतिबिंबित करेगा। अपने मार्गदर्शक सिद्धांत के रूप में “योग फॉर वन अर्थ, वन हेल्थ” के साथ, भारत शारीरिक फिटनेस को दिमागदार जीवन से जोड़ने में दुनिया का नेतृत्व करना जारी रखता है।

विजय गर्ग सेवानिवृत्त प्रिंसिपल, शैक्षिक स्तंभकार, प्रख्यात शिक्षाविद्, गली कौर चंद एमएचआर मलोट पंजाब

पूर्वांचल की नई धड़कन: गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे

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शरद कटियार

उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र की भूगोलिक एवं आर्थिक संरचना में एक नए युग की शुरुआत हो चुकी है। यह शुरुआत किसी साधारण उद्घाटन या रस्म अदायगी से नहीं, बल्कि उस महत्वाकांक्षी सोच और इच्छाशक्ति के परिणामस्वरूप हुई है, जो ‘नए भारत’ के निर्माण में ‘नए उत्तर प्रदेश’ की भूमिका को पुनर्परिभाषित कर रही है। गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे का लोकार्पण महज़ एक परियोजना का शुभारंभ नहीं, बल्कि पूर्वांचल की आकांक्षाओं को पंख देने का क्षण है।

गोरखपुर से आजमगढ़ तक फैला यह 91.352 किलोमीटर लंबा और चार लेन चौड़ा एक्सप्रेसवे आज जब जनता को समर्पित किया गया, तो वह दृश्य केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि एक बड़ी नियामक सोच का प्रतिबिंब था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में यह उद्घाटन न केवल विकास की प्रतीकात्मक तस्वीर बन गया, बल्कि यह स्पष्ट संदेश भी दे गया कि अब उत्तर प्रदेश विकास की धुरी लखनऊ और नोएडा तक सीमित नहीं रहने वाला।

यह परियोजना राज्य के उन क्षेत्रों को जोड़ने का कार्य कर रही है जिन्हें दशकों तक ‘पिछड़ा’, ‘अविकसित’ या ‘सामाजिक-राजनीतिक हाशिये’ पर देखा जाता रहा।

पूर्वांचल एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ प्राकृतिक संसाधन भरपूर हैं, जनशक्ति प्रचुर है, सांस्कृतिक परंपराएँ गहरी हैं, लेकिन आर्थिक दृष्टि से यह लंबे समय तक उपेक्षित रहा है। यहाँ के किसान, युवा, व्यापारी, कामगार और छात्र-छात्राएं वर्षों से इस क्षेत्र के विकास के लिए एक ठोस आधारभूत संरचना की बाट जोह रहे थे।

एक्सप्रेसवे जैसी सड़कें केवल यातायात का माध्यम नहीं होतीं, बल्कि वे अर्थव्यवस्था की नाड़ी होती हैं। एक ओर ये औद्योगिक निवेशकों के लिए नया द्वार खोलती हैं, तो दूसरी ओर किसानों के उत्पादों को बाज़ार तक शीघ्र और सस्ते तरीके से पहुँचाने का रास्ता भी बनती हैं।

इस परियोजना की लागत ₹7,283 करोड़ आँकी गई है और इसे उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) ने निष्पादित किया है। इस एक्सप्रेसवे में आधुनिक ट्रैफिक नियंत्रण प्रणाली, टोल प्लाजा, अंडरपास, इंटरचेंज, ब्रिज और सुरक्षा मानकों का समावेश किया गया है। यह पूरी तरह चार लेन का है और भविष्य में इसे छह लेन तक विस्तारित करने की योजना भी है।

कृषि, उद्योग और पर्यटन—तीनों ही क्षेत्रों में इसका प्रभाव आने वाले वर्षों में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होगा। गोरखपुर, मऊ, आजमगढ़ और आस-पास के जिलों से अब दिल्ली, लखनऊ, बनारस और प्रयागराज जैसे प्रमुख व्यापारिक केन्द्रों तक सीधा और तेज़ संपर्क स्थापित हो सकेगा।

किसी भी बड़ी परियोजना की सफलता के पीछे दो मुख्य आधार होते हैं—राजनीतिक इच्छाशक्ति और लोकसहभागिता। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने यह सिद्ध किया है कि यदि नीयत साफ हो और संकल्प दृढ़, तो बड़ी से बड़ी परियोजना भी समयबद्ध तरीके से पूरी की जा सकती है।

मुख्यमंत्री के वक्तव्य में ‘विकास के साथ संवाद’, ‘अधिग्रहण के साथ सम्मान’ और ‘संरचना के साथ सहमति’ जैसे शब्द नारे नहीं, बल्कि व्यवहारिक नीति के संकेतक हैं। ज़मीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में किसानों और ज़मीन मालिकों को जो सम्मान और पारदर्शिता दी गई, वह राज्य सरकार की संवेदनशीलता का उदाहरण है।

कार्यक्रम स्थल पर उपस्थित हजारों लोगों की आँखों में जो चमक थी, वह केवल समारोह की सजावट नहीं, बल्कि आने वाले उज्जवल भविष्य की झलक थी। स्थानीय व्यापारियों का मानना है कि अब उनके लिए बड़े बाजारों तक पहुँचना आसान होगा और परिवहन लागत में भी कमी आएगी।

किसानों के लिए यह परियोजना वरदान बनकर सामने आई है। अब वे अपने कृषि उत्पादों को गोरखपुर से बनारस या लखनऊ तक न्यूनतम समय और लागत में पहुँचा सकेंगे। यही नहीं, युवा वर्ग भी अब इस उम्मीद से है कि एक्सप्रेसवे के किनारे विकसित होने वाले औद्योगिक क्लस्टर उन्हें स्थानीय रोजगार के नए अवसर देंगे, जिससे ‘पलायन’ की विवशता भी कम होगी।

गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे केवल एक संरचना नहीं, बल्कि यह शासन के उस दृष्टिकोण का प्रतिबिंब है जो विकास को केवल ‘भौतिक’ नहीं, बल्कि ‘समावेशी’ बनाने की ओर अग्रसर है। उत्तर प्रदेश के 403 विधानसभा क्षेत्रों में समावेशी विकास की जो परिकल्पना मुख्यमंत्री योगी ने रखी है, यह एक्सप्रेसवे उसी की एक प्रायोगिक शुरुआत है।
विशेषकर यह बात ध्यान देने योग्य है कि इस तरह की परियोजनाओं के माध्यम से न केवल शहरी इलाकों को फायदा मिलता है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों को भी शहरों से जोड़ने में सहूलियत होती है। छोटे गांव, कस्बे और बाजार अब राष्ट्रीय स्तर की संरचनाओं से सीधे जुड़े रहेंगे।

गौर करने की बात यह भी है कि ऐसी परियोजनाओं में केवल नेतृत्व नहीं, बल्कि प्रशासनिक तंत्र और तकनीकी विशेषज्ञता की भी अहम भूमिका होती है। UPEIDA की भूमिका इस परियोजना में अनुकरणीय रही। समयसीमा का पालन, गुणवत्ता में कोई समझौता नहीं, और पारदर्शी टेंडर प्रणाली ने इस परियोजना को एक मॉडल के रूप में स्थापित कर दिया है।

जहाँ एक ओर यह एक्सप्रेसवे पूर्वांचल की रीढ़ बन सकता है, वहीं इसकी दीर्घकालिक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इसके किनारे कितनी जल्दी औद्योगिक विकास, लॉजिस्टिक पार्क, वेयरहाउसिंग और सर्विस सेंटर स्थापित किए जा सकते हैं।

राज्य सरकार को चाहिए कि अब अगले चरण में इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ ‘सॉफ्ट डेवलपमेंट’—जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, स्किल डेवेलपमेंट और स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा देने की दिशा में ठोस कदम उठाए।
साथ ही, ट्रैफिक मैनेजमेंट, टोल व्यवस्था की पारदर्शिता, और सुरक्षा के आधुनिक उपायों को भी समय-समय पर अपडेट करना आवश्यक होगा।

गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे के लोकार्पण के साथ ही पूर्वांचल ने केवल एक सड़क नहीं, बल्कि अपना आत्मबल, अपनी पहचान और अपनी आकांक्षाओं का रास्ता पा लिया है। यह एक्सप्रेसवे न केवल भौगोलिक दूरी को मिटाएगा, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक दूरी को भी कम करेगा।

आज जब भारत ‘विकसित राष्ट्र’ बनने की ओर अग्रसर है, तब यह आवश्यक है कि उसका हर क्षेत्र, हर गाँव, हर नागरिक उस विकास यात्रा में सहभागी बने। गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे यही सुनिश्चित करता है—कि कोई पीछे न छूटे।
यह परियोजना भावी उत्तर प्रदेश की उस तस्वीर का प्रारंभिक खाका है, जहाँ गति है, प्रगति है और समग्रता है।