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Thursday, March 26, 2026
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शराब के नशे में सड़क पर गिरा युवक, समय पर पहुंची 108 एम्बुलेंस ने बचाई जान

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नशे में
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नया गनीपुर निवासी तारिश अली गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती

नवाबगंज, फर्रुखाबाद: थाना नवाबगंज (Nawabganj) क्षेत्र के नया गनीपुर निवासी तारिश अली मंगलवार को शराब के नशे में बबना रोड पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद राहगीरों और स्थानीय लोगों ने तत्काल 108 एम्बुलेंस (ambulance) सेवा को सूचना दी।

एम्बुलेंस चालक ने तत्परता दिखाते हुए मौके पर तुरंत पहुंचकर तारिश अली को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया। चिकित्सकों के अनुसार, तारिश की हालत गंभीर बनी हुई है और उसका उपचार जारी है।

स्थानीय लोगों ने 108 एम्बुलेंस सेवा और चालक की त्वरित कार्रवाई की सराहना की है। यदि समय पर प्राथमिक चिकित्सा न मिलती, तो तारिश अली की स्थिति और भी गंभीर हो सकती थी। घटना के बाद ग्रामीणों ने यह भी अपील की कि मुख्य सड़क पर रात में प्रकाश की व्यवस्था की जाए, ताकि इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।

पानी की बाल्टी में गिरने से मासूम की मौत, गांव में पसरा मातम

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मासूम
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राजेपुर, फर्रुखाबाद: थाना राजेपुर (Rajepur) क्षेत्र के ग्राम नगरिया जवाहर में बुधवार को एक हृदयविदारक हादसे में दो वर्षीय मासूम की पानी भरी बाल्टी (bucket) में गिरने से दम घुटने के कारण मौत हो गई। मृतक की पहचान बाबू उर्फ बाबू पुत्र राजवीर शर्मा के रूप में हुई है।

परिजनों के अनुसार, बच्चा आंगन में खेल रहा था, तभी खेलते-खेलते वह पानी से भरी बाल्टी में गिर गया। सिर नीचे और पैर ऊपर हो जाने के कारण बाल्टी में ही दम घुट गया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

घटना की सूचना मिलते ही ग्राम प्रधान के पति संजय सोमवंशी मौके पर पहुंचे और शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधाया। मृतक की मां इंदिरा के पांच बच्चे हैं—रियांशु, सौम्या, उपासना, प्रांशी और मृतक बाबू। इस दर्दनाक हादसे से पूरे गांव में शोक की लहर है। ग्रामीणों ने प्रशासन से पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता देने की मांग की है।

इटावा-बरेली हाईवे : चंद महीनों में ही टूटी डिवाइडर, गायब हुई जालियां, लाइट बंद

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फर्रुखाबाद। जनपद फर्रुखाबाद के अंतर्गत निर्मित इटावा-बरेली हाईवे को बने अभी कुछ ही महीने बीते हैं, लेकिन इतने कम समय में ही इस बहुप्रचारित सड़क परियोजना की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित यह हाईवे आज जनता के लिए मुसीबत का कारण बनता जा रहा है, लेकिन प्रशासन और निर्माण एजेंसियों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही।

सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि हाईवे के बीचोंबीच बनाई गई सीमेंटेड डिवाइडर जगह-जगह से टूट चुकी हैं, जिससे न केवल वाहनों की आवाजाही में बाधा उत्पन्न हो रही है, बल्कि दुर्घटनाओं की आशंका भी कई गुना बढ़ गई है। इसके अलावा, सड़क के दोनों ओर सुरक्षा के लिए लगाई गई लोहे की जालियां कई जगह गायब हो गई हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि न तो निर्माण में गुणवत्ता का ध्यान रखा गया और न ही सुरक्षा उपायों की निगरानी की जा रही है।स्थिति और भी चिंताजनक तब हो जाती है जब रात के समय इस हाईवे पर यात्रा की जाती है। हाईवे की स्ट्रीट लाइट्स महीनों से बंद पड़ी हैं, जिसके चलते पूरी सड़क अंधेरे में डूबी रहती है। रात्रि में सफर कर रहे वाहन चालकों को भारी परेशानी और जान का खतरा बना रहता है।

स्थानीय लोगों ने बताया कि निर्माण कार्य के दौरान ही कई बार यह आशंका जताई गई थी कि सड़क में घटिया सामग्री का प्रयोग किया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स और जनप्रतिनिधियों द्वारा भी समय-समय पर इस विषय को उठाया गया, लेकिन अफसोस की बात है कि न तो कोई जांच शुरू हुई और न ही किसी के खिलाफ कार्रवाई की गई।हाईवे निर्माण में लगे ठेकेदारों, अधिकारियों और इंजीनियरों की मिलीभगत से सरकारी धन का जबरदस्त दुरुपयोग और बंदरबांट किया गया है, लेकिन जिम्मेदारों की जवाबदेही तय करने की बजाय पूरा विभाग मौन साधे बैठा है।

जनपद फर्रुखाबाद के नागरिकों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस मामले में उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में यह हाईवे आमजन के लिए एक खतरनाक मौत का रास्ता बन सकता है।

इटावा में यादव कथावाचक से बदसलूकी पर बवाल: थाने पर पथराव, पुलिस की गाड़ी तोड़ी, हवाई फायरिंग कर खदेड़ा गया हुजूम

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Etawah
Etawah

– कथावाचक के साथ अभद्रता के विरोध में उग्र हुए यादव संगठन; भारी पुलिस बल तैनात, कई हिरासत में

इटावा: उत्तर प्रदेश के इटावा (Etawah) जिले में यादव समाज के कथावाचक (Yadav storyteller) के साथ कथित बदसलूकी के विरोध में रविवार को कई यादव संगठनों ने थाने पर जमकर हंगामा किया। गुस्साए लोगों ने पुलिस पर पथराव किया और एक सरकारी गाड़ी को क्षतिग्रस्त कर दिया। स्थिति बिगड़ते देख पुलिस (police) को हवाई फायरिंग करनी पड़ी और लाठीचार्ज कर भीड़ को तितर-बितर करना पड़ा।

यह घटना सैफई थाना क्षेत्र के अंतर्गत हुई, जहां कथावाचक पंडित रामनरेश यादव द्वारा एक स्थानीय धार्मिक कार्यक्रम में कथा सुनाई जा रही थी। कथित तौर पर कुछ युवकों ने कथावाचक से अभद्र भाषा में बात की और उनके साथ धक्का-मुक्की की। इसके विरोध में यादव समाज के लोग सोमवार सुबह सैकड़ों की संख्या में थाने पहुंचे और प्रदर्शन करने लगे।

प्रदर्शन के दौरान उत्तेजित भीड़ ने पुलिसकर्मियों पर ईंट-पत्थर फेंके, जिसमें तीन पुलिसकर्मी घायल हुए। भीड़ ने थाना परिसर के बाहर खड़ी पुलिस की एक जिप्सी गाड़ी के शीशे तोड़ दिए। मौके पर पहुंचे अतिरिक्त पुलिस बल ने हालात को काबू में लेने के लिए 5 राउंड हवाई फायरिंग की और भीड़ को खदेड़ा। अब तक 14 उपद्रवियों को हिरासत में लिया गया है।

CCTV फुटेज और वायरल वीडियो के आधार पर और लोगों की पहचान की जा रही है। पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ बलवा, सरकारी कार्य में बाधा, शासकीय सम्पत्ति को नुकसान पहुँचाने और जानलेवा हमले की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। इटावा के पुलिस अधीक्षक ने बताया कि “स्थिति अब नियंत्रण में है। उपद्रव करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। वीडियो फुटेज से पहचान कर सख्त कार्रवाई की जा रही है।”

सुरक्षा के मद्देनज़र क्षेत्र में RAF और PAC की तैनाती कर दी गई है, और संवेदनशील इलाकों में फ्लैग मार्च भी कराया गया। घटना को लेकर समाजवादी पार्टी के नेताओं ने कथावाचक के साथ हुई बदसलूकी को “समाज का अपमान” बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है, वहीं प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है।

कर्ज ने उजाड़ा परिवार, पति-पत्नी और 2 बच्चों ने खाया जहर

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family
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बिजनौर: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के बिजनौर (Bijnor) जिले से दर्दनाक घटना सामने आई, महंगाई की मार हर कोई झेल रहा है और इसी में एक परिवार (family) कर्ज का सामना नहीं कर सका जिसके बाद सब खत्म हो गया। नूरपुर थाना क्षेत्र के टेंडरा गांव में एक ही परिवार के पति-पत्नी और 2 बच्चों ने कर्ज से परेशान होकर ज़हर खा लिया। इस दिल दहला देने वाली घटना में मां और बड़ी बेटी की मौत हो गई, जबकि पिता और छोटी बेटी की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है। इस घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है। पैसो की तंगी और कर्ज से परेशानी की वजह से हंसता खेलता परिवार उजड़ गया।

जानकारी के मुताबिक, नूरपुर थाना क्षेत्र के टेंडरा गांव का है। जहां रह रहे पुखराज नाम के युवक ने साहूकारों से कर्ज ले रखा था। साहूकार पैसा वापस करने के लिए दबाव बना रहे थे और इसकी कर्ज से परेशान होता गया रोज-रोज की प्रताड़ना से तंग आकर पुखराज उसकी पत्नी और दोनों बेटियों ने जहर खाकर जान देने की कोशिश की। मां रमेशिया और बड़ी बेटी अनीता की मौके पर ही मौत हो गई। पिता पुखराज और छोटी बेटी सुनीता की हालत गंभीर है और उन्हें इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर किया गया है।दोनों की हालत नाजुक बनी हुई है।

इस घटना की जानकारी लगते ही मौके पर पुलिस पहुंची और दोनों के शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। घटना की जांच की जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि पूरे मामले की गहराई से जांच की जा रही है। प्रथम दृष्टि से पता चला रहा है कि इस आत्महत्या की वजह पैसो की तंगी सामने आ रही है। वे कर्ज में डूबे हुए थे और वसूली के दबाव ने किस हद तक इस परिवार को तोड़ा। पुलिस आगे की जांच में जुट है।

पढ़ाई की भाषा

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विजय गर्ग

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने जुलाई से शुरू होने वाले शैक्षिक वर्ष 2025-26 से बच्चों की शुरुआती शिक्षा उनकी मातृभाषा में कराने का निर्णय लिया है। प्रारंभिक शिक्षा को बुनियादी चरण माना गया है, जिसमें दूसरी कक्षा तक के बच्चे शामिल हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 के लागू होने के पश्चात इस बुनियादी चरण की शुरुआत हुई है। इससे पहले की शिक्षा नीति में केंद्रीय विद्यालयों में विद्यार्थियों को कक्षा एक से पढ़ाना शुरू होता था, किंतु अब उनका सीधे पहली कक्षा में नामांकन नहीं होता। इससे पहले बच्चों को तीन वर्ष ‘प्री-प्राइमरी’ यानी पूर्व-प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ाई कराई जाती है । उसके बाद पहली कक्षा में प्रवेश मिलता है । इस तरह पांच वर्ष बुनियाद बनाने में लगते हैं, जिसमें प्री- प्राइमरी स्कूल के तीन वर्ष तथा कक्षा एक और दो के दो वर्ष । नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में 5 जमा 3 जमा 3 जमा 4 का प्रारूप शामिल किया गया है। दूसरी कक्षा तक पहला चरण पांच वर्ष का, तीसरी कक्षा से पांचवीं तक तीन वर्ष का दूसरा, कक्षा छह से आठ तक तीन वर्ष का तीसरा और नौवीं से बारहवीं कक्षा तक चार वर्ष का चौथा चरण है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 से पहले शिक्षा नीति- 1986 लागू थी । उसमें 10 जमा 2 जमा 3 का प्रारूप था। पहली कक्षा में सीधे प्रवेश दिए जाने का उसमें प्रावधान था । तब प्री- प्राइमरी का चरण नहीं था । जबसे विद्यालयों में इस नए चरण की शुरुआत हुई है, तब से लगभग तीन वर्ष के बच्चे भी पढ़ने के लिए विद्यालय जाने लगे हैं ।

हम जानते हैं कि ऐसे सुकोमल, मासूम और अबोध नन्हे बच्चे- बच्चियों का मन पढ़ाई में जल्दी से नहीं लगता। उनका मन घर में धमा- चौकड़ी मचाने, खेलने-कूदने, मौज- मस्ती करने में ज्यादा रमता है। कंधे पर बस्ता लटकाए विद्यालय जाते हुए उनके मन में घबराहट बनी रहती है । जब वे कक्षा में पढ़ना शुरू करते हैं और उन्हें शिक्षक उनकी मातृभाषा की जगह अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाते हैं, तब वे परेशान हो जाते हैं । जो पढ़ाया जाता है, उसे वे समझ नहीं पाते । जब उन्हें समझ ही नहीं आएगा, तो वे नया सीखेंगे भी कैसे। ऐसे में बच्चों की मनोस्थिति, उनकी सोचने-समझने व ग्रहण करने की सामर्थ्य और सीमाओं का नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में पूरा ध्यान रखा गया है। उनकी पढ़ाई का माध्यम अंग्रेजी की जगह उनकी मातृभाषा रखने का व्यावहारिक और सराहनीय निर्णय लिया गया है ।

वर्तमान में पूरे देश में तीस हजार से अधिक विद्यालय केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से संबद्ध हैं और इनमें से अधिकांश में पढ़ाई का माध्यम अंग्रेजी है। नन्हे बच्चों को सबसे मुश्किल अंकगणित लगता है, लेकिन जब वे अंकों की पहचान, उनकी गिनती, जोड़ना, घटाना आदि अपनी मातृभाषा में सीखेंगे – पढ़ेंगे, तब उनके मन से गणित का भय दूर हो जाएगा और उनमें गणित सीखने की रुचि जागृत होगी । राष्ट्रीय शिक्षा नीति में विद्यार्थियों को आठवीं कक्षा तक पढ़ाई मातृभाषा, क्षेत्रीय या राज्य भाषा में कराने पर जोर दिया गया है। साथ ही कहा गया है कि बारहवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के लिए भारतीय भाषाओं के माध्यम से पढ़ाई का विकल्प होना चाहिए, ताकि वे अंग्रेजी भाषा के दबाव से मुक्त रह कर अपनी रुचि से पढ़ सकें ।

विश्व में जितनी भी भाषाएं हैं, वे मातृभाषा भी हैं। मां की बराबरी मां के अलावा कोई नहीं कर सकता, वैसे ही मातृभाषा की बराबरी भी कोई दूसरी भाषा नहीं कर सकती । केंद्रीय विद्यालयों में आरंभिक पढ़ाई मातृभाषा में कराए जाने का निर्णय निश्चित रूप से विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास के लिए लाभकारी तथा क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देने वाला है। मगर अंग्रेजी मोह में डूबे अभिभावक रुकावट डाल सकते हैं, इसलिए उन्हें समझाना जरूरी है। नगरों – महानगरों से लेकर गांव-ढाणियों तक अंग्रेजी माध्यम के निजी स्कूल फैल गए हैं। अधिकतर अभिभावकों की यह मानसिकता बनी हुई है कि अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में पढ़ा कर ही वे अपने अधूरे सपने बच्चों के माध्यम पूरे कर सकेंगे । हिंदी या मातृभाषा के माध्यम से पढ़ेंगे तो वे पिछड़ जाएंगे।

अभिभावकों को समझना होगा कि आरंभिक शिक्षा का माध्यम मातृभाषा होने से बच्चे सहजता से सीख लेंगे। पढ़ते, लिखते और सीखते उन्हें आनंद की अनुभूति होगी, मानसिक परेशानी नहीं। दरअसल, अंग्रेजी उनके लिए पराई भाषा है, मातृभाषा अपनी भाषा । यह ठीक है कि बच्चों को अंग्रेजी ही क्यों, अन्य भाषाएं भी सीखने के लिए प्रेरित व प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। जितनी भाषाओं से उनका सरोकार बनेगा, उतने ही वे मानसिक और शैक्षणिक स्तर पर समृद्ध होंगे। पर, मातृभाषा में आरंभिक पढ़ाई कराने का तात्पर्य अंग्रेजी भाषा की उपेक्षा करना नहीं, वरन बच्चों में पढ़ने के प्रति रुचि पैदा करना है। अभिभावकों को मातृभाषा में पढ़ाई के महत्त्व को लेकर जागरूक करने के साथ ही अंग्रेजी माध्यम के निजी विद्यालयों में आरंभिक शिक्षा का माध्यम मातृभाषा करने के लिए सख्त कदम उठाने की जरूरत है। तभी बच्चे शुरुआती पढ़ाई अपनी मातृभाषा में कर सकेंगे और आगे चलकर अपने भविष्य को संवार सकेंगे ।

विजय गर्ग सेवानिवृत्त प्रिंसिपल मलोट पंजाब