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Thursday, March 26, 2026
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अस्पताल एयरस्ट्राइक: यूरोपीय संघ ने पाकिस्तान की कड़ी निंदा की

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काबुल: अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में अस्पताल पर हुए कथित हवाई हमले को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। यूरोपीय संघ (EU) ने इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन बताया है।

यह हमला 16 मार्च की रात को हुआ बताया जा रहा है, जब काबुल के पुल-ए-चरखी इलाके में स्थित एक बड़े चिकित्सा केंद्र को निशाना बनाया गया। अफगान पक्ष का दावा है कि यह हमला पाकिस्तान की ओर से किया गया था।

यूरोपीय संघ ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि किसी भी परिस्थिति में नागरिकों और चिकित्सा सुविधाओं को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। ऐसे संस्थान जेनेवा कन्वेंशन के तहत संरक्षित होते हैं और उन पर हमला गंभीर अपराध माना जाता है।

EU ने पाकिस्तान और अफगानिस्तान दोनों से अधिकतम संयम बरतने की अपील की है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ मिलकर तत्काल युद्धविराम और बातचीत फिर से शुरू करने का आग्रह किया है।

अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री मौलवी अमीर खान मुत्ताकी ने इस हमले को “जानबूझकर किया गया” बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी सेना ने सैन्य विमानों और ड्रोन के जरिए अस्पताल को निशाना बनाया।

मुत्ताकी के अनुसार, इस हमले में नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती 408 से अधिक मरीजों की मौत हो गई, जबकि 265 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। उन्होंने कहा कि मृतकों की संख्या अभी और बढ़ सकती है।

अफगान पक्ष का यह भी कहना है कि हमले का समय बेहद संवेदनशील था, क्योंकि यह रमजान के अंतिम दिनों और ईद-उल-फितर से ठीक पहले हुआ। इस कारण इस घटना ने लोगों में और अधिक आक्रोश पैदा किया है।

मुत्ताकी ने पाकिस्तान पर आरोप लगाया कि उसने न केवल अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन किया, बल्कि इस्लामी युद्ध सिद्धांतों की भी अनदेखी की है। उन्होंने इसे अफगान समाज के कमजोर वर्गों पर सीधा हमला बताया।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अफगान सुरक्षा बलों ने जवाबी कार्रवाई की है, लेकिन केवल उन सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया है जहां से हमले किए गए थे।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव और बढ़ गया है। दोनों देशों के बीच पहले से चल रहे संघर्ष में यह घटना एक खतरनाक मोड़ मानी जा रही है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई देशों और संगठनों ने इस घटना पर चिंता जताई है और क्षेत्र में शांति बनाए रखने की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द कूटनीतिक प्रयास नहीं किए गए, तो यह संघर्ष और गहरा सकता है।

फिलहाल, इस हमले की स्वतंत्र जांच की मांग भी उठ रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं और जिम्मेदारी किसकी है।

यह घटना एक बार फिर युद्ध के दौरान नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है और बताती है कि संघर्ष की आग में सबसे ज्यादा नुकसान आम लोगों को ही उठाना पड़ता है।

ब्रह्म दत्त द्विवेदी हत्याकांड: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टली, पुत्र विधायक की पैनी नजर, हत्यारों को सजा दिलाने की लड़ाई जारी

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➤ पूर्व मंत्री स्व. ब्रह्म दत्त द्विवेदी हत्याकांड फिर चर्चा में
➤ पूर्व विधायक विजय सिंह समेत आरोपियों को उम्रकैद
➤ सुप्रीम कोर्ट में अपील पर सुनवाई टली, अगली तारीख का इंतजार
➤ पुत्र और सदर विधायक सुनील द्विवेदी कर रहे मजबूत पैरवी

नई दिल्ली /फर्रुखाबाद: प्रदेश के चर्चित स्व. ब्रह्म दत्त द्विवेदी हत्याकांड में एक बार फिर न्यायिक प्रक्रिया सुर्खियों में है। इस मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे पूर्व विधायक विजय सिंह की सुप्रीम कोर्ट में अपील पर बुधवार को प्रस्तावित सुनवाई टल गई।

सुनवाई टलने के साथ ही अब एक बार फिर पूरे जिले की नजरें अगली तारीख पर टिक गई हैं। वहीं दूसरी ओर, दिवंगत नेता के पुत्र और फर्रुखाबाद सदर से विधायक सुनील द्विवेदी इस मामले में लगातार सक्रिय भूमिका निभाते हुए अपने पिता के हत्यारों को सख्त सजा दिलाने के लिए प्रबल पैरवी कर रहे हैं।

वर्ष 1997 में फर्रुखाबाद में भाजपा के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री ब्रह्म दत्त द्विवेदी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना ने पूरे प्रदेश की राजनीति को झकझोर कर रख दिया था। हत्या के पीछे राजनीतिक रंजिश और वर्चस्व की लड़ाई को प्रमुख कारण माना गया। पुलिस जांच के बाद पूर्व विधायक विजय सिंह समेत कई लोगों को आरोपी बनाया गया।

लंबी सुनवाई और गवाहों के बयान के आधार पर अदालत ने सभी मुख्य आरोपियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई, जिसे बाद में हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखा। हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ आरोपी पूर्व विधायक ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की थी। इस पर आज सुनवाई प्रस्तावित थी, लेकिन तकनीकी कारणों और मामलों के दबाव के चलते सुनवाई टल गई।

अब यह मामला अगली तारीख पर सुना जाएगा, जहां अंतिम निर्णय की दिशा तय हो सकती है। स्व. ब्रह्म दत्त द्विवेदी के पुत्र और वर्तमान सदर विधायक सुनील द्विवेदी इस पूरे मामले में लगातार नजर बनाए हुए हैं। सूत्रों के अनुसार, वह अपने पिता के हत्यारों को सख्त से सख्त सजा दिलाने के लिए कानूनी स्तर पर मजबूत पैरवी कर रहे हैं।

उनकी “तिरछी नजर” अब भी इस मामले में शामिल दोषियों पर बनी हुई है, और वह किसी भी स्तर पर ढील देने के पक्ष में नहीं हैं। यह हत्याकांड न सिर्फ एक आपराधिक मामला रहा, बल्कि इसने उत्तर प्रदेश की राजनीति को भी गहराई से प्रभावित किया। एक प्रभावशाली नेता की हत्या और उसके बाद की न्यायिक प्रक्रिया लंबे समय तक चर्चा का विषय रही है। अब सुप्रीम कोर्ट का फैसला इस बहुचर्चित मामले में अंतिम मोड़ साबित हो सकता है।

रामपुर बना शत-प्रतिशत फार्मर आईडी बनाने वाला प्रदेश का पहला जिला

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– सीएम योगी के निर्देश पर प्रदेश भर में शत-प्रतिशत फार्मर आईडी बनाने के लिए 1 जनवरी से चलाया जा रहा विशेष अभियान

– 31 मार्च तक हर जिले को दिया गया सभी आईडी बनाने का लक्ष्य

– गाजियाबाद ने निर्धारित लक्ष्य को हासिल करने में प्रदेश में दूसरा तो अंबेडकरनगर ने तीसरा स्थान प्राप्त किया

लखनऊ: प्रदेश के किसानों की आय बढ़ाने एवं सरकार की योजनाओं का लाभ दिलाने के उद्देश्य से अभियान चलाकर फार्मर रजिस्ट्री (फार्मर आईडी) बनाई जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के किसानों की शत प्रतिशत फार्मर आईडी बनाने के लिए 1 जनवरी से अभियान चलाने के निर्देश दिए थे, यह 31 मार्च तक जारी रहेगा। ऐसे में किसानों के घर-घर जाकर फार्मर आईडी बनाई जा रही है।

वहीं रामपुर जिला प्रशासन ने निर्धारित तिथि से पहले ही किसानों की 100 प्रतिशत फार्मर आईडी बनाने का लक्ष्य पूरा कर लिया है। इसी के साथ रामपुर जिला प्रशासन ने शत-प्रतिशत फार्मर आईडी बनाने में पहला स्थान प्राप्त किया है जबकि दूसरे स्थान पर गाजियाबाद और तीसरे स्थान पर अंबेडकरनगर हैं। उत्तर प्रदेश में 2,88,70,495 किसानों की फार्मर आईडी बनाने का लक्ष्य है। इसके सापेक्ष अब तक 1,99,42,798 फार्मर रजिस्ट्री बनाई जा चुकीं हैं।

सांस्कृतिक कार्यक्रम, खुली चौपाल, वॉल पेंटिंग से हासिल किया लक्ष्य

रामपुर जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप जिले में शत-प्रतिशत फार्मर आईडी बनाने के लिए 1 जनवरी से विशेष अभियान चलाया जा रहा है। ऐसे में लक्ष्य को हासिल करने के लिए अन्नदाताओं को जागरूक करने के लिए किसान गोष्ठी, गांवों में सांस्कृतिक कार्यक्रम, होर्डिंग, ग्राम पंचायत स्तर पर खुली चौपाल का आयोजन किया गया।

इसके साथ ही वॉल पेंटिंग एवं प्रचार वाहन के जरिये प्रचार-प्रसार किया गया। साथ ही राजस्व, कृषि, पंचायती राज, ग्राम्य विकास एवं गन्ना विभाग के कर्मचारियों को किसानों के घर-घर जाकर फार्मर आईडी बनाने के निर्देश दिए गये। जिलाधिकारी ने बताया कि वह खुद प्रत्येक सप्ताह अभियान की समीक्षा करते हैं। इस दौरान अच्छा कार्य करने वाले कर्मचारियों को प्रोत्साहित किया गया जबकि कम प्रगति वाले कर्मचारियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की गई।

टॉप टेन में औरैया, बाराबंकी, हरदोई और कन्नौज ने जगह बनाई

डीएम अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि रामपुर को 31 मार्च तक फार्मर रजिस्ट्री का कुल लक्ष्य 2,09,828 निर्धारित किया गया था। इसके सापेक्ष 17 मार्च तक शत प्रतिशत फार्मर आईडी बनाने का लक्ष्य प्राप्त कर लिया गया। उन्होंने बताया कि रामपुर ने लक्ष्य के सापेक्ष शत प्रतिशत 2,09,828 फार्मर आईडी बनाई जा चुकी है। इसी के साथ रामपुर ने प्रदेश में शत प्रतिशत फार्मर आईडी बनाने में पहला स्थान प्राप्त किया है।

उन्होंने बताया कि इससे पहले भी रामपुर प्रदेश में सर्वप्रथम 50 प्रतिशत फार्मर रजिस्ट्री को पूर्ण कर प्रथम पुरुस्कार प्राप्त कर चुका है। इसके अलावा गाजियाबाद ने निर्धारित लक्ष्य 38,909 के सापेक्ष अब तक 36,598 फार्मर आईडी बनाकर पूरे प्रदेश में दूसरा तथा अंबेडकरनगर ने 31 मार्च तक निर्धारित लक्ष्य 3,42,847 के सापेक्ष 3,10,145 फार्मर आईडी बनाकर तीसरा स्थान प्राप्त किया है। वहीं टॉप टेन में औरैया, बाराबंकी, फर्रुखाबाद, हरदोई, कन्नौज, मीरजापुर और बिजनौर ने अपनी जगह बनाई है।

यह हैं फार्मर रजिस्ट्री के लाभ

– किसान सम्मान निधि योजना का बिना बाधा लाभ प्राप्त होगा।
– कृषकों को उर्वरक सुविधाजनक एवं निर्धारित मूल्य पर प्राप्त होगा।
– किसान क्रेडिट कार्ड प्राप्त करने में अभिलेखों के सत्यापन की बाध्यता समाप्त होगी।
– राज्य एवं केन्द्र सरकार की नवीन योजना में शामिल होने के लिए बार-बार अभिलेखों के सत्यापन से मुक्ति मिलेगी।
– एग्रीस्टैक में सम्मिलित होने पर डिजीटल क्रॉप सर्वे के माध्यम से एमएसपी पर उत्पादों की बिक्री सुविधाजनक एवं त्वरित होगी।

पूर्व विधायक विजय सिंह के घर धमाके की जांच तेज, एटीएस व फॉरेंसिक टीमों ने संभाला मोर्चा

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– डीआईजी हरिश्चंद्र पहुंचे मौके पर, बेसमेंट ब्लास्ट की आशंका

फर्रुखाबाद: समाजवादी पार्टी (सपा) के पूर्व विधायक विजय सिंह के आवास में मंगलवार को हुए भीषण विस्फोट के मामले में अब जांच तेज हो गई है। घटना ने पूरे जिले में सनसनी फैला दी है, वहीं सुरक्षा एजेंसियां हर एंगल से मामले की तह तक पहुंचने में जुट गई हैं।

जानकारी के अनुसार, धमाका मकान के बेसमेंट में हुआ, जिसकी तीव्रता इतनी जबरदस्त थी कि तीन मंजिला इमारत को भारी नुकसान पहुंचा। खिड़कियां, दरवाजे, दीवारें और छत तक क्षतिग्रस्त हो गईं, जिससे आसपास के इलाकों में भी दहशत फैल गई।

इस हादसे में पूर्व विधायक के दो पुत्रों सहित कुल 6 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। सभी को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। घटना के बाद मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई और इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए लखनऊ से ए एटीएस , डॉग स्क्वाड और फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट्स की टीमों को मौके पर बुलाया गया है। ये टीमें घटनास्थल से साक्ष्य एकत्र कर रही हैं और विस्फोट के कारणों की गहन जांच कर रही हैं।
कानपुर मंडल के डीआईजी हरिश्चंद्र भी घटनास्थल पर पहुंचे और पूरे घटनाक्रम की बारीकी से पड़ताल की। उन्होंने अधिकारियों को हर पहलू की गंभीरता से जांच करने के निर्देश दिए।

एसपी और डीएम ने लिया जायजा

बुधवार को पुलिस अधीक्षक आरती सिंह और जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने भी भारी पुलिस बल के साथ मौके का निरीक्षण किया। प्रशासनिक अधिकारियों ने स्थिति का जायजा लेकर जांच को तेज करने के निर्देश दिए।

प्रारंभिक जांच में विस्फोटक सामग्री के कारण धमाका होने की आशंका जताई जा रही है। इसी आधार पर पुलिस ने पूर्व विधायक के पुत्रों सहित 6 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।

प्रशासन का कहना है कि फॉरेंसिक जांच और विशेषज्ञ टीमों की रिपोर्ट के बाद ही विस्फोट के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा।

यह विस्फोट अब सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि जांच एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है। एटीएस की एंट्री के बाद यह मामला और भी गंभीर हो गया है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि आखिर इस धमाके के पीछे की सच्चाई क्या है।

बुलंदशहर में सड़क हादसा: डंपर पलटा, दो मजदूरों की मौत, दो गंभीर रूप से घायल

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बुलंदशहर: बुलंदशहर (Bulandshahr) जिले के खुर्जा इलाके में एक भीषण सड़क हादसा (Road accident) हुआ, जहां सड़क निर्माण कार्य में लगा एक डंपर पलट गया, जिससे दो मजदूरों की मौत हो गई और दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। यह घटना मंगलवार तड़के करीब 7:30 बजे जिला मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर खबरा रोड पर मुबारकपुर के पास हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बजरी से लदा डंपर अचानक असंतुलित होकर पलट गया, जिससे उस पर बैठे मजदूर उसके नीचे दब गए।

प्रारंभिक रिपोर्टों से पता चलता है कि निर्माण स्थल पर फैली बजरी के कारण वाहन फिसल गया। इसके अलावा, एक यांत्रिक खराबी—संभवतः एक्सल या सस्पेंशन स्प्रिंग के टूटने—के कारण डंपर अनियंत्रित हो गया। हालाँकि, दुर्घटना होते ही पूरे घटना स्थल पर दहशत फैल गई। साथी कर्मचारी और स्थानीय लोग मदद के लिए दौड़े और काफी मशक्कत के बाद, पलटे हुए वाहन के नीचे फंसे श्रमिकों को बाहर निकालने में कामयाब रहे।

चारों घायल मजदूरों को तुरंत पास के अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने उनमें से दो को अस्पताल पहुंचते ही मृत घोषित कर दिया, जबकि बाकी दो की हालत गंभीर बताई जा रही है। दुर्घटना की सूचना मिलते ही खुर्जा नगर थाने से पुलिस मौके पर पहुंची। घायलों को इलाज के लिए जातीय अस्पताल में भर्ती कराया गया। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि पीड़ित दिबाई इलाके के निवासी हैं।

सर्किल ऑफिसर शोभित कुमार और स्टेशन हाउस ऑफिसर धर्मेंद्र सिंह समेत वरिष्ठ अधिकारियों ने घटनास्थल का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। डंपर को हटा दिया गया है और सड़क पर यातायात बहाल कर दिया गया है। पुलिस ने दुर्घटना के सटीक कारण का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी है और आश्वासन दिया है कि उचित कार्रवाई की जाएगी।

पूर्व विधायक विजय सिंह के घर धमाके की जांच तेज, एटीएस व फॉरेंसिक टीमों ने संभाला मोर्चा

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– डीआईजी हरिश्चंद्र पहुंचे मौके पर, बेसमेंट ब्लास्ट की आशंका — 6 लोगों पर मुकदमा
फर्रुखाबाद। समाजवादी पार्टी (सपा) के पूर्व विधायक विजय सिंह के आवास में मंगलवार को हुए भीषण विस्फोट के मामले में अब जांच तेज हो गई है। घटना ने पूरे जिले में सनसनी फैला दी है, वहीं सुरक्षा एजेंसियां हर एंगल से मामले की तह तक पहुंचने में जुट गई हैं।
जानकारी के अनुसार, धमाका मकान के बेसमेंट में हुआ, जिसकी तीव्रता इतनी जबरदस्त थी कि तीन मंजिला इमारत को भारी नुकसान पहुंचा। खिड़कियां, दरवाजे, दीवारें और छत तक क्षतिग्रस्त हो गईं, जिससे आसपास के इलाकों में भी दहशत फैल गई।
इस हादसे में पूर्व विधायक के दो पुत्रों सहित कुल 6 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। सभी को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। घटना के बाद मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई और इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए लखनऊ से ए एटीएस , डॉग स्क्वाड और फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट्स की टीमों को मौके पर बुलाया गया है। ये टीमें घटनास्थल से साक्ष्य एकत्र कर रही हैं और विस्फोट के कारणों की गहन जांच कर रही हैं।
कानपुर मंडल के डीआईजी हरिश्चंद्र भी घटनास्थल पर पहुंचे और पूरे घटनाक्रम की बारीकी से पड़ताल की। उन्होंने अधिकारियों को हर पहलू की गंभीरता से जांच करने के निर्देश दिए।
एसपी और डीएम ने लिया जायजा
बुधवार को पुलिस अधीक्षक आरती सिंह और जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने भी भारी पुलिस बल के साथ मौके का निरीक्षण किया। प्रशासनिक अधिकारियों ने स्थिति का जायजा लेकर जांच को तेज करने के निर्देश दिए।
प्रारंभिक जांच में विस्फोटक सामग्री के कारण धमाका होने की आशंका जताई जा रही है। इसी आधार पर पुलिस ने पूर्व विधायक के पुत्रों सहित 6 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।
प्रशासन का कहना है कि फॉरेंसिक जांच और विशेषज्ञ टीमों की रिपोर्ट के बाद ही विस्फोट के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा।
यह विस्फोट अब सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि जांच एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है। एटीएस की एंट्री के बाद यह मामला और भी गंभीर हो गया है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि आखिर इस धमाके के पीछे की सच्चाई क्या है।