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Thursday, March 26, 2026
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पूर्व विधायक विजय सिंह के घर धमाके की जांच तेज, एटीएस व फॉरेंसिक टीमों ने संभाला मोर्चा

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– डीआईजी हरिश्चंद्र पहुंचे मौके पर, बेसमेंट ब्लास्ट की आशंका — 6 लोगों पर मुकदमा
फर्रुखाबाद। समाजवादी पार्टी (सपा) के पूर्व विधायक विजय सिंह के आवास में मंगलवार को हुए भीषण विस्फोट के मामले में अब जांच तेज हो गई है। घटना ने पूरे जिले में सनसनी फैला दी है, वहीं सुरक्षा एजेंसियां हर एंगल से मामले की तह तक पहुंचने में जुट गई हैं।
जानकारी के अनुसार, धमाका मकान के बेसमेंट में हुआ, जिसकी तीव्रता इतनी जबरदस्त थी कि तीन मंजिला इमारत को भारी नुकसान पहुंचा। खिड़कियां, दरवाजे, दीवारें और छत तक क्षतिग्रस्त हो गईं, जिससे आसपास के इलाकों में भी दहशत फैल गई।
इस हादसे में पूर्व विधायक के दो पुत्रों सहित कुल 6 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। सभी को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। घटना के बाद मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई और इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए लखनऊ से ए एटीएस , डॉग स्क्वाड और फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट्स की टीमों को मौके पर बुलाया गया है। ये टीमें घटनास्थल से साक्ष्य एकत्र कर रही हैं और विस्फोट के कारणों की गहन जांच कर रही हैं।
कानपुर मंडल के डीआईजी हरिश्चंद्र भी घटनास्थल पर पहुंचे और पूरे घटनाक्रम की बारीकी से पड़ताल की। उन्होंने अधिकारियों को हर पहलू की गंभीरता से जांच करने के निर्देश दिए।
एसपी और डीएम ने लिया जायजा
बुधवार को पुलिस अधीक्षक आरती सिंह और जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने भी भारी पुलिस बल के साथ मौके का निरीक्षण किया। प्रशासनिक अधिकारियों ने स्थिति का जायजा लेकर जांच को तेज करने के निर्देश दिए।
प्रारंभिक जांच में विस्फोटक सामग्री के कारण धमाका होने की आशंका जताई जा रही है। इसी आधार पर पुलिस ने पूर्व विधायक के पुत्रों सहित 6 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।
प्रशासन का कहना है कि फॉरेंसिक जांच और विशेषज्ञ टीमों की रिपोर्ट के बाद ही विस्फोट के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा।
यह विस्फोट अब सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि जांच एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है। एटीएस की एंट्री के बाद यह मामला और भी गंभीर हो गया है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि आखिर इस धमाके के पीछे की सच्चाई क्या है।

जनसुनवाई में उमड़ी भीड़, जिलाधिकारी ने दिए त्वरित निस्तारण के निर्देश

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फर्रुखाबाद। बुधवार को जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित जनसुनवाई के दौरान आम नागरिकों की समस्याओं को गंभीरता से सुना। जनसुनवाई में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में फरियादी अपनी-अपनी शिकायतें लेकर पहुंचे, जिनमें भूमि विवाद, पेंशन, आवास, राशन कार्ड, विद्युत आपूर्ति, जलभराव और अन्य विभागों से जुड़ी समस्याएं प्रमुख रूप से शामिल रहीं।
जिलाधिकारी ने प्रत्येक शिकायत को ध्यानपूर्वक सुनते हुए संबंधित विभागों के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी मामलों का निस्तारण निर्धारित समय सीमा के भीतर पारदर्शिता के साथ किया जाए। उन्होंने कहा कि जनसुनवाई का उद्देश्य आम जनता को उनकी समस्याओं का त्वरित और प्रभावी समाधान उपलब्ध कराना है, इसलिए इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इस दौरान कई मामलों में जिलाधिकारी ने मौके पर ही अधिकारियों को फोन कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए और कुछ गंभीर प्रकरणों को प्राथमिकता के आधार पर तत्काल निस्तारण के लिए चिह्नित किया। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि शिकायतों के निस्तारण में अनावश्यक देरी या लापरवाही पाई गई, तो संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जनसुनवाई में पुलिस, राजस्व, विकास, समाज कल्याण, विद्युत एवं नगर निकाय विभागों के अधिकारी भी मौजूद रहे, जिन्होंने मौके पर ही कई समस्याओं का समाधान किया। फरियादियों ने अपनी समस्याओं को सीधे जिलाधिकारी के समक्ष रखने का अवसर मिलने पर संतोष व्यक्त किया।
कार्यक्रम के अंत में जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने कहा कि प्रशासन जनता की सेवा के लिए प्रतिबद्ध है और हर नागरिक की समस्या का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपनी समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासन द्वारा आयोजित जनसुनवाई का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।

ट्रांसफार्मर फुंकने से नवाबगंज में जल संकट गहराया, 500 घरों में दो दिन से ठप जलापूर्ति

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नवाबगंज|  नगर में 25 केवीए का ट्रांसफार्मर फुंकने से जल संकट गहरा गया है। सोमवार रात हुए इस हादसे के बाद से नगर के लगभग 500 घरों में पिछले दो दिनों से पानी की आपूर्ति पूरी तरह ठप पड़ी है, जिससे सैकड़ों परिवारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सोमवार देर रात अचानक तेज धमाके के साथ ट्रांसफार्मर जल गया, जिसके बाद पूरे क्षेत्र की बिजली व्यवस्था प्रभावित हो गई। बिजली बाधित होने के कारण जलापूर्ति प्रणाली भी ठप हो गई और देखते ही देखते नगर के नलों ने पानी देना बंद कर दिया।
लगातार दो दिनों से पानी न मिलने के कारण स्थानीय निवासियों की दिनचर्या पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गई है। लोग दूर-दराज के हैंडपंपों, कुओं और अन्य जल स्रोतों से पानी लाने को मजबूर हैं। महिलाओं और बच्चों को विशेष रूप से कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। भीषण गर्मी और उमस के बीच यह समस्या और अधिक गंभीर हो गई है।
इस संबंध में अधिशासी अधिकारी प्रमोद कुमार ने बताया कि ट्रांसफार्मर फुंकने के कारण ही जलापूर्ति बाधित हुई है। उन्होंने कहा कि मामले की सूचना उच्चाधिकारियों को दे दी गई है और नया ट्रांसफार्मर मंगाने की प्रक्रिया जारी है।
ईओ के अनुसार, बुधवार तक नया ट्रांसफार्मर उपलब्ध हो जाएगा और उसे स्थापित करने के बाद बिजली आपूर्ति बहाल कर दी जाएगी। इसके साथ ही जलापूर्ति भी सुचारु रूप से शुरू हो जाएगी। उन्होंने नागरिकों से थोड़े धैर्य की अपील की है।
उधर, स्थानीय लोगों में प्रशासन के प्रति नाराजगी देखने को मिल रही है। मोहल्लेवासियों का कहना है कि प्रशासन को वैकल्पिक जल आपूर्ति की व्यवस्था पहले ही कर देनी चाहिए थी, ताकि लोगों को इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़ता।

गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतों पर सपा महिला सभा का प्रदर्शन, सरकार के खिलाफ नारेबाजी

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फतेहगढ़ कलेक्ट्रेट में सुलक्षणा सिंह के नेतृत्व में प्रदर्शन, गैस एजेंसियों पर भी लगाए आरोप
फतेहगढ़/फर्रुखाबाद। गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतों को लेकर समाजवादी पार्टी महिला सभा ने कलेक्ट्रेट फतेहगढ़ में जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान जिला अध्यक्ष सुलक्षणा सिंह के नेतृत्व में बड़ी संख्या में महिलाओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने “कम करो, कम करो गैस सिलेंडर के दाम करो”, “योगी-मोदी शर्म करो” जैसे नारे लगाए। साथ ही “ऐ नरेंद्र दे सिलेंडर” और “गली-गली में शोर है, गैस एजेंसी वाले चोर हैं” जैसे तीखे नारों से विरोध जताया।
गैस एजेंसियों पर भी गंभीर आरोप
महिला सभा की कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि गैस एजेंसियां उपभोक्ताओं का शोषण कर रही हैं और मनमाने तरीके से वसूली की जा रही है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि इस मामले में जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
प्रदर्शन में शामिल महिलाओं का कहना था कि लगातार बढ़ती गैस सिलेंडर की कीमतों ने घर का बजट बिगाड़ दिया है। गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए रसोई चलाना मुश्किल होता जा रहा है।
प्रशासन को सौंपा ज्ञापन
धरना-प्रदर्शन के बाद महिलाओं ने अपनी मांगों को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपा और जल्द राहत देने की मांग की।
गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतों को लेकर महिलाओं का यह आक्रोश सरकार के लिए एक बड़ा संकेत माना जा रहा है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर राजनीति और तेज होने की संभावना है।

खाड़ी संकट से बासमती निर्यात पर बड़ा असर, ईरान में फंसे 1000 करोड़ रुपये; किसानों और निर्यातकों पर दोहरी मार

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लखनऊ| पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध और तनाव का असर अब भारत के कृषि निर्यात पर भी साफ दिखाई देने लगा है। खासकर बासमती चावल उद्योग गंभीर संकट का सामना कर रहा है, जहां एक ओर ईरान में निर्यातकों के 1,000 करोड़ रुपये से अधिक के भुगतान फंसे हुए हैं, वहीं दूसरी ओर खाड़ी देशों से ऑर्डर रद्द होने और घरेलू बाजार में गिरती कीमतों ने स्थिति और खराब कर दी है।
मिली जानकारी के अनुसार, ईरान में पिछले चार से पांच महीनों के दौरान भेजे गए बासमती चावल का भुगतान अभी तक अटका हुआ है। बासमती एक्सपोर्ट डेवलपमेंट फाउंडेशन (BEDF) के संयुक्त निदेशक डॉ. रितेश शर्मा ने बताया कि यह बकाया राशि लगातार बढ़ती जा रही है, जिससे निर्यातकों की आर्थिक स्थिति कमजोर हो रही है। भुगतान में देरी के कारण कारोबारी नई डील करने से भी बच रहे हैं।
इस संकट का सीधा असर चालू वित्त वर्ष पर पड़ने की आशंका है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस स्थिति के चलते करीब 200 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो सकता है। यदि हालात जल्द नहीं सुधरे तो बासमती उद्योग के सामने बड़ा संकट खड़ा हो सकता है, जिससे हजारों किसानों और इससे जुड़े व्यापारियों की आजीविका प्रभावित होगी।
उधर, सऊदी अरब और यूएई जैसे खाड़ी देशों में जारी तनाव के कारण वहां तक समय पर आपूर्ति नहीं हो पा रही है। लॉजिस्टिक बाधाओं और सुरक्षा कारणों से कई शिपमेंट देरी से पहुंचे, जिसके चलते कई बड़े ऑर्डर रद्द कर दिए गए। इसका असर सीधे निर्यात पर पड़ा है।
घरेलू बाजार में भी बासमती चावल की कीमतों में गिरावट दर्ज की जा रही है, जिससे किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा। इस प्रकार निर्यात में गिरावट और कीमतों में कमी ने किसानों और व्यापारियों दोनों को दोहरी मार दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियां जल्द हस्तक्षेप नहीं करतीं, तो बासमती उद्योग को लंबे समय तक नुकसान झेलना पड़ सकता है। ऐसे में वैकल्पिक बाजारों की तलाश और भुगतान तंत्र को मजबूत करना बेहद जरूरी हो गया है, ताकि इस संकट से उबरने का रास्ता निकाला जा सके।

डीजीपी नियुक्ति प्रक्रिया तेज, यूपी सरकार ने यूपीएससी को भेजा आईपीएस अधिकारियों का पैनल

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लखनऊl राज्य में नए पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की नियुक्ति को लेकर प्रक्रिया तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत अब राज्यों को डीजीपी चयन के लिए संघ लोक सेवा आयोग को वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों का पैनल भेजना अनिवार्य किया गया है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश सरकार ने मंगलवार को गृह विभाग के माध्यम से योग्य आईपीएस अधिकारियों के नामों का पैनल आयोग को भेज दिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस पैनल में उन आईपीएस अधिकारियों को शामिल किया गया है, जिन्होंने कम से कम 30 वर्ष की सेवा पूरी कर ली है। सूत्रों के मुताबिक, वर्ष 1990 से 1996 बैच के तीन दर्जन से अधिक अधिकारियों के नाम इस सूची में शामिल किए गए हैं। अब यूपीएससी इन नामों में से वरिष्ठता और सेवा रिकॉर्ड के आधार पर तीन अधिकारियों का चयन करेगा और उनका पैनल राज्य सरकार को वापस भेजेगा।
इसके बाद राज्य सरकार इन तीन नामों में से किसी एक अधिकारी को डीजीपी पद के लिए अंतिम रूप से नियुक्त करेगी। वर्तमान वरिष्ठता सूची के अनुसार 1990 बैच की आईपीएस अधिकारी और डीजी रेणुका मिश्रा का नाम सबसे ऊपर बताया जा रहा है। उनके बाद 1991 बैच के आलोक शर्मा (डीजी, एसपीजी) और पीयूष आनंद (डीजी, एनडीआरएफ) का स्थान है। इसके बाद मौजूदा डीजीपी राजीव कृष्ण का नाम भी प्रमुख दावेदारों में शामिल है।
सूत्रों की मानें तो आयोग से पैनल वापस आने के बाद राज्य सरकार द्वारा वर्तमान डीजीपी राजीव कृष्ण के नाम पर ही अंतिम मुहर लगाए जाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि अंतिम निर्णय यूपीएससी की सिफारिश और राज्य सरकार की मंजूरी के बाद ही होगा।
यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता और वरिष्ठता के आधार पर चयन सुनिश्चित करने के लिए लागू की गई है, जिससे पुलिस प्रशासन में स्थिरता और पेशेवर दक्षता को बढ़ावा मिल सके।