लखनऊl राज्य में नए पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की नियुक्ति को लेकर प्रक्रिया तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत अब राज्यों को डीजीपी चयन के लिए संघ लोक सेवा आयोग को वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों का पैनल भेजना अनिवार्य किया गया है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश सरकार ने मंगलवार को गृह विभाग के माध्यम से योग्य आईपीएस अधिकारियों के नामों का पैनल आयोग को भेज दिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस पैनल में उन आईपीएस अधिकारियों को शामिल किया गया है, जिन्होंने कम से कम 30 वर्ष की सेवा पूरी कर ली है। सूत्रों के मुताबिक, वर्ष 1990 से 1996 बैच के तीन दर्जन से अधिक अधिकारियों के नाम इस सूची में शामिल किए गए हैं। अब यूपीएससी इन नामों में से वरिष्ठता और सेवा रिकॉर्ड के आधार पर तीन अधिकारियों का चयन करेगा और उनका पैनल राज्य सरकार को वापस भेजेगा।
इसके बाद राज्य सरकार इन तीन नामों में से किसी एक अधिकारी को डीजीपी पद के लिए अंतिम रूप से नियुक्त करेगी। वर्तमान वरिष्ठता सूची के अनुसार 1990 बैच की आईपीएस अधिकारी और डीजी रेणुका मिश्रा का नाम सबसे ऊपर बताया जा रहा है। उनके बाद 1991 बैच के आलोक शर्मा (डीजी, एसपीजी) और पीयूष आनंद (डीजी, एनडीआरएफ) का स्थान है। इसके बाद मौजूदा डीजीपी राजीव कृष्ण का नाम भी प्रमुख दावेदारों में शामिल है।
सूत्रों की मानें तो आयोग से पैनल वापस आने के बाद राज्य सरकार द्वारा वर्तमान डीजीपी राजीव कृष्ण के नाम पर ही अंतिम मुहर लगाए जाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि अंतिम निर्णय यूपीएससी की सिफारिश और राज्य सरकार की मंजूरी के बाद ही होगा।
यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता और वरिष्ठता के आधार पर चयन सुनिश्चित करने के लिए लागू की गई है, जिससे पुलिस प्रशासन में स्थिरता और पेशेवर दक्षता को बढ़ावा मिल सके।
डीजीपी नियुक्ति प्रक्रिया तेज, यूपी सरकार ने यूपीएससी को भेजा आईपीएस अधिकारियों का पैनल
राहत :80 हजार मीट्रिक टन कच्चा तेल लेकर ‘जग लाडकी’ टैंकर मुंद्रा पोर्ट पहुंचा, पश्चिम एशिया में जारी
नई दिल्ली
भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध जैसे हालात के बीच भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति के मोर्चे पर राहत भरी खबर सामने आई है। तमाम आशंकाओं के बावजूद कच्चे तेल और एलपीजी की सप्लाई बिना किसी बाधा के भारत पहुंच रही है, जिससे देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिली है।
इसी क्रम में भारतीय ध्वज वाला क्रूड ऑयल टैंकर ‘जग लाडकी’ गुजरात के मुंद्रा स्थित अदाणी पोर्ट्स पर सुरक्षित रूप से पहुंच गया। इस टैंकर में करीब 80,886 मीट्रिक टन कच्चा तेल लदा हुआ था, जिसे संयुक्त अरब अमीरात के फुजैराह बंदरगाह से लोड किया गया था। यह आगमन इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि जिस दिन यह जहाज फुजैराह से रवाना हुआ था, उसी दिन वहां के तेल टर्मिनल पर हमला हुआ था, जिससे वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई थी।
इसके बावजूद ‘जग लाडकी’ का सुरक्षित भारत पहुंचना यह दर्शाता है कि भारत ने अपनी आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत और सुरक्षित बनाए रखा है। इससे पहले भी ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ नामक टैंकर सफलतापूर्वक भारत पहुंच चुके हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि संकट के समय में भी भारत के ऊर्जा आपूर्ति तंत्र में निरंतरता बनी हुई है।
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा परिस्थितियों में भारत ने अपने आयात स्रोतों में विविधता लाकर और रणनीतिक भंडारण को बढ़ाकर स्थिति को संतुलित किया है। सरकार लगातार अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर नजर बनाए हुए है और आवश्यकता के अनुसार त्वरित फैसले लेकर देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा कर रही है।
कुल मिलाकर, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए यह घटनाक्रम राहत देने वाला है, जो न केवल आपूर्ति की निरंतरता सुनिश्चित करता है बल्कि वैश्विक संकट के दौर में देश की मजबूत रणनीतिक तैयारी को भी दर्शाता है।
ईरान युद्ध के बीच भारत ने बढ़ाई ऊर्जा सुरक्षा, रूस से तेल आयात तेज; चीन जा रहा टैंकर भारत की ओर मुड़ा
नई दिल्ली ईरान-अमेरिका-इजरायल के बीच जारी तनाव और युद्ध जैसे हालात ने वैश्विक तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है। मध्य पूर्व क्षेत्र से कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने के चलते कई देशों के सामने ऊर्जा संकट गहराने लगा है। इस बीच भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए रणनीतिक कदम उठाते हुए रूस से तेल आयात बढ़ाने का फैसला किया है।
ताजा घटनाक्रम में एक रूसी तेल टैंकर, जो मूल रूप से चीन के रिजाओ बंदरगाह की ओर जा रहा था, दक्षिण चीन सागर में अचानक अपना मार्ग बदलकर भारत की ओर मुड़ गया। यह घटनाक्रम वैश्विक ऊर्जा बाजार में तेजी से बदलते समीकरणों को दर्शाता है। जानकारों के अनुसार, यह बदलाव भारत की बढ़ती मांग और मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के चलते हुआ है।
ईरान में जारी संघर्ष के कारण खाड़ी क्षेत्र से तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। भारत, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है, ऐसे समय में वैकल्पिक स्रोतों की ओर तेजी से बढ़ रहा है।
रूस, जो पहले से ही भारत का प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ता बन चुका है, अब इस संकट के दौर में और अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। भारत सरकार ने रियायती दरों पर रूसी तेल खरीद को बढ़ावा दिया है, जिससे न केवल देश की ऊर्जा जरूरतें पूरी हो रही हैं बल्कि महंगाई पर भी नियंत्रण रखने में मदद मिल रही है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान-अमेरिका-इजरायल के बीच तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति और अधिक प्रभावित हो सकती है। ऐसे में भारत का यह कदम उसकी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण रणनीति साबित हो सकता है।
पालम में भीषण आग से 9 लोगों की मौत, शॉर्ट सर्किट की आशंका से मचा हड़कंप
नई दिल्ली। देश की राजधानी नई दिल्ली के दक्षिण-पश्चिमी जिले के पालम इलाके में बुधवार सुबह एक दर्दनाक हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। पालम थाना क्षेत्र के साध नगर स्थित राम चौक बाजार में एक बहुमंजिला इमारत में लगी भीषण आग में तीन मासूम बच्चों समेत कुल नौ लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी और चीख-पुकार का माहौल बन गया।
जानकारी के अनुसार, सुबह करीब 6:40 बजे इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर स्थित एक कॉस्मेटिक दुकान में अचानक आग लग गई। प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है। आग ने कुछ ही मिनटों में विकराल रूप धारण कर लिया और तेजी से ऊपरी मंजिलों तक फैल गई, जहां रिहायशी फ्लैट मौजूद थे। उस समय अधिकांश लोग गहरी नींद में थे, जिससे उन्हें संभलने या बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला।
इमारत के भीतर धुएं का घना गुबार भर जाने के कारण कई लोग अंदर ही फंस गए और दम घुटने की स्थिति पैदा हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, लोग अपनी जान बचाने के लिए खिड़कियों और बालकनियों से मदद की गुहार लगाते नजर आए। इस भयावह स्थिति में परिजनों ने बच्चों को बचाने के लिए उन्हें पहली मंजिल से नीचे फेंक दिया, जहां नीचे खड़े लोगों ने उन्हें पकड़कर सुरक्षित बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया।
सूचना मिलते ही दमकल विभाग की लगभग 30 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। दमकल कर्मियों ने सात घायलों को सुरक्षित बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया, जिनमें तीन बच्चे भी शामिल थे। वहीं, आग से बचने के प्रयास में इमारत से कूदने वाले दो अन्य लोगों को भी गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया।
हालांकि, इस दुखद घटना में तीन बच्चों सहित कुल नौ लोगों की जान नहीं बचाई जा सकी। स्थानीय लोगों का आरोप है कि दमकल विभाग को घटनास्थल पर पहुंचने में 40 से 45 मिनट की देरी हुई, जिसके चलते बचाव कार्य प्रभावित हुआ और नुकसान अधिक हुआ। यदि समय रहते राहत कार्य शुरू हो जाता, तो संभवतः और अधिक लोगों की जान बचाई जा सकती थी।
घटना के बाद पुलिस और प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। पूरे मामले की गहन जांच की जा रही है ताकि आग लगने के सटीक कारणों का पता लगाया जा सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। यह हादसा राजधानी में सुरक्षा व्यवस्थाओं और अग्निशमन तंत्र की तत्परता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
भाजपा सरकार के 9 साल
पहचान के संकट से उबरकर विकास की राह पर यूपी : योगी आदित्यनाथ
लखनऊ। प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी सरकार के नौ वर्ष पूरे होने के अवसर पर बुधवार को लोकभवन, लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वार्षिक पुस्तक का विमोचन किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि बीते नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने एक नई पहचान बनाई है और विकास की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश पहचान के संकट से जूझ रहा था, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इस स्थिति को बदलने में सफलता मिली है।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि पहले प्रदेश की आधी आबादी पलायन को मजबूर थी, लेकिन अब कानून-व्यवस्था में सुधार के चलते लोगों का भरोसा बढ़ा है और प्रदेश विकास के पथ पर तेजी से अग्रसर है। उन्होंने कहा कि आज उत्तर प्रदेश अपनी पूरी क्षमता के साथ आगे बढ़ रहा है और निवेश, रोजगार व आधारभूत संरचना के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है।
9 साल में यूपी की तस्वीर बदली, विकास जमीन पर दिख रहा : ब्रजेश पाठक
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि यदि नौ साल पहले के उत्तर प्रदेश और आज के उत्तर प्रदेश की तुलना की जाए तो बदलाव साफ दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि पहले प्रदेश की सड़कों की हालत बेहद खराब थी और बिजली आपूर्ति भी अनियमित रहती थी, जो अब काफी बेहतर हुई है।
जनता ने सेवा करने वालों को चुना, स्वार्थ की राजनीति को नकारा : प्रदेश अध्यक्ष
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने कहा कि वर्ष 2017 में प्रदेश की जनता ने सेवा करने वाली सरकार को चुना और स्वार्थ की राजनीति करने वालों को बाहर का रास्ता दिखाया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार लगातार जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने का प्रयास कर रही है।
अब यूपी में माफिया नहीं, कानून का राज: केशव प्रसाद मौर्य
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में माफिया और गुंडों का बोलबाला था, जबकि अब कानून का राज स्थापित है। उन्होंने कहा कि विपक्ष सत्ता से बाहर होने पर अपना चरित्र बदलता रहता
केरल चुनाव के खातिर भाजपा की तैयारी लम्बे समय से चल रही है
अशोक भाटिया , वसई
भाजपा ने केरल में राजधानी तिरुवनंतपुरम की नगर निगम पर पहली बार कब्जा करने के बाद इस साल होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए राज्य की राजनीति में अपनी महती उपस्थिति दर्ज करा दी है। अब वह विधानसभा में दस्तक देने की तैयारी में जुट गई है। संगठन के स्तर पर पार्टी ने अगले लोकसभा चुनावों के लिए अपनी रणनीति तैयार की है, जिसमें विधानसभा चुनाव प्रभारियों की नियुक्ति के साथ संगठन प्रभारियों में बदलाव भी शामिल है। इस साल 5 राज्यों असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चुनाव होने जा रहे है। वैसे तो भाजपा के लिए सभी राज्य प्रमुख है पर इस बार केरल पर विशेष जोर लगाया जा रहा है ।
भाजपा को उम्मीद है कि केरल में राजधानी तिरुवनंतपुरम की नगर निगम व कुछ नगरपालिकाओं में मिली सफलता के बाद वह विधानसभा में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा सकती है। उसकी नजर राज्य की आधा दर्जन सीटों पर है, जहां पर जीत सकती है। अभी तक भाजपा को केरल के इतिहास में केवल एक बार 2026 में ही एक विधानसभा सीट जीतने का मौका मिला था, जब ओ राजगोपाल ने नेमम सीट जीती थी। इसके अलावा पिछले लोकसभा चुनाव में उसने त्रिशूर का लोकसभा चुनाव जीता था, जिसमें फिल्म अभिनेता गोपी सुरेश की अपनी लोकप्रियता भी शामिल थी।
अब भाजपा राजनीतिक व सामाजिक समीकरणों के जरिए अपनी पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रही है। राज्य में हिंदू समुदाय को वामपंथी दलों के समर्थन से अपने साथ लाने की कोशिशों के साथ वह ईसाई समुदाय को भी साध रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद लगातार ईसाई समुदाय के प्रमुख नेताओं से मिलते रहते हैं और हर साल क्रिसमस पर चर्च जाकर प्रार्थना में भी हिस्सा लेते हैं। देश में केरल ही एक मात्र राज्य हैं जहां वामपंथी शासन में है। अब भाजपा यहां पर उसके ही समर्थक वर्ग में सेंध लगा रही है। ध्रुवीकरण की राजनीति में वह कांग्रेस के साथ सीधे मुकाबले की कोशिश कर रही है। अब जबकि निकाय चुनावों से कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ सत्ता का प्रबल दावेदार बन कर उभरा है, उस समय भाजपा खुद को माकपा की जगह विपक्ष की राजनीति में स्थापित करने की कोशिश में है।
इस तयारी में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह केरल का दौरा भी महत्वपूर्ण हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भाजपा के मिशन 2026 ‘हम विकसित केरल चाहते हैं’ को लॉन्च करने के लिए तिरुवनंतपुरम पहुंचे तो संदेश बिलकुल सीधा और साफ था। राज्य में भाजपा लंबे समय से अपनी पकड़ बनाने के लिए संघर्ष कर रही है और शाह पार्टी की इसी कोशिश को आगे बढ़ाने के लिए पहुंचे । अभियान का स्लोगन भी उनके इस इरादे की पुष्टि करता है और यह स्लोगन है- जो कभी नहीं बदला, वह अब बदलेगा। भाजपा द्वारा चुने गए 2,000 से अधिक स्थानीय निकाय प्रतिनिधियों को शाह ने संबोधित किया और पार्टी के आगामी लक्ष्यों को साफ किया। उन्होंने कहा कि भाजपा केवल वोट शेयर बढ़ाने के लिए चुनाव नहीं लड़ रही है, बल्कि एक ऐसे भविष्य की दिशा में काम कर रही है, जहां केरल में भाजपा का मुख्यमंत्री हो।
इस दौरान शाह ने केरल के प्रमुख राजनीतिक दलों पर तीखा हमला बोला था और आरोप लगाया था कि एलडीएफ और यूडीएफ के बीच “मैच फिक्सिंग” के कारण वर्षों से विकास रुका हुआ है। उन्होंने कहा कि सत्ता इन दोनों के बीच बदलती रहती है, लेकिन इनकी प्राथमिकताएं काफी समान रहती हैं, जिसके कारण इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्टों में देरी होती है और नीतिगत निष्क्रियता बनी रहती है, जिससे आर्थिक अवसरों का नुकसान होता है। साथ ही शाह ने तर्क दिया कि भाजपा का उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मतदाताओं को विकास केंद्रित तीसरा विकल्प प्रदान करना और इस राजनीतिक चक्र को तोड़ना है।
चुनावी आंकड़ों से पता चलता है कि भाजपा का यह आत्मविश्वास बेवजह नहीं है। केरल में एनडीए का वोट शेयर लगातार बढ़ा है। 2001 में भाजपा का वोट शेयर करीब 3% था जो 2016 और 2021 के बीच बढ़कर 12-15% हो गया है। हालांकि वोटों में यह बढ़ोतरी विधानसभा सीटों में आनुपातिक रूप से परिवर्तित नहीं हुई है। हालांकि बार-बार हार के बावजूद पार्टी का संगठनात्मक आधार बरकरार है।
गौरतलब है कि तिरुवनंतपुरम नगर निगम में भाजपा पिछले दो स्थानीय निकाय चुनावों में प्रमुख विपक्षी दल के रूप में उभर कर सामने आई है। वहीं हालिया चुनाव में उसने 101 वार्डों में से 50 वार्ड जीतकर इतिहास रच दिया और पहली बार केरल में भाजपा का मेयर बना। सभी छह नगर निगमों में भाजपा-एनडीए गठबंधन ने 23% से अधिक का वोट शेयर हासिल किया, जिससे यह विश्वास मजबूत हुआ है कि शहरी मतदाता विशेषकर युवा, पार्टी के विकास के दावों को गंभीरता से ले रहा है। अमित शाह ने बताया कि 79 ग्राम पंचायतों में भाजपा दूसरे स्थान पर रही और यह सब दर्शाता है कि भाजपा केवल शहर केंद्रित पार्टी नहीं है।
सबरीमाला मुद्दे को पार्टी में धीमी गति से विकसित होने वाले राजनीतिक फैक्टर के रूप में देखा जाता है। हालांकि इसका चुनावी प्रभाव क्षेत्र के अनुसार भिन्न-भिन्न है, भाजपा का मानना है कि इसने हिंदू मतदाताओं के कुछ वर्गों के साथ पार्टी का स्थायी संबंध बनाने में मदद की है, खासतौर पर दक्षिणी केरल में।
स्थानीय निकाय चुनाव के आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि एझवा ओबीसी समुदाय के कुछ वर्गों के मतदान में बदलाव आया है, जिसे पारंपरिक रूप से वामपंथी झुकाव वाला समुदाय माना जाता है। यहां पर सीमित बदलाव भी करीबी मुकाबले वाले निर्वाचन इलाके में निर्णायक साबित हो सकता है क्योंकि ओबीसी समुदाय हिंदू समुदाय का 26 प्रतिशत है। दिलचस्प बात यह है कि पार्टी के शीर्ष नेता के सुरेंद्रन, वी मुरलीधरन और शोभा सुरेंद्रन भी ओबीसी समुदाय से आते हैं, जिन्होंने जमीनी स्तर पर अपनी राजनीतिक सूझबूझ को प्रदर्शित किया है।
तिरुवनंतपुरम जिला भाजपा का प्रमुख चुनावी क्षेत्र बनकर उभरा है। नेमोम, वट्टियूरकावु, कझाकूटम, तिरुवनंतपुरम सेंट्रल और अटिंगल जैसी सीटों पर अब कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है। अटिंगल में पूर्व केंद्रीय मंत्री वी मुरलीधरन ने पिछले लोकसभा चुनाव में 3 लाख से अधिक वोट प्राप्त किए थे और तीसरे स्थान पर रहे थे, लेकिन शीर्ष दो उम्मीदवारों के काफी करीब थे। भाजपा ऐसे प्रदर्शन को इस बात का प्रमाण मानती है कि वह पारंपरिक वोट बैंकों में सेंध लगाकर रणनीतिक रूप से बदलाव ला सकती है। अटिंगल में भाजपा का वोट शेयर 2019 में 24। 97% से बढ़कर 2024 में 31। 64% हो गया है। उत्तरी केरल में कासरगोड का मंजेश्वरम एक प्रतीकात्मक स्थान रखता है। भाजपा नेता के सुरेंद्रन एक बार वहां मात्र 80 वोटों से हार गए थे, जो इस बात को बताता है कि मामूली अंतर भी राजनीतिक परिणामों को बदल सकता है।
केरल की करीब 48% आबादी ईसाई और मुस्लिम है, इसलिए अल्पसंख्यक संपर्क भाजपा की रणनीति का एक अहम हिस्सा बन गया है। त्रिशूर में सुरेश गोपी की जीत को बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है, खासकर ईसाई समुदाय के साथ जुड़ाव के लिहाज से। गोपी ने 2024 में त्रिशूर लोकसभा सीट 4,12,338 वोटों (37। 8% वोट शेयर) से जीती, जो केरल में पार्टी की पहली संसदीय जीत थी। उन्होंने 74,686 वोटों के भारी अंतर से जीत हासिल की। इसे जातिगत भेदभाव से परे हिंदू एकजुटता का प्रतीक माना गया।
हाल ही में केरल की राजनीति में और बड़ा बदलाव देखने को मिला है। कॉरपोरेट समर्थित क्षेत्रीय पार्टी Twenty20 ने आगामी विधानसभा चुनावों से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में शामिल होने की घोषणा कर दी है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने हाल ही में राजधानी तिरुवनंतपुरम में आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में Twenty20 के प्रदेश अध्यक्ष साबू एम। जैकब का गठबंधन में स्वागत किया। साबू जैकब ने कहा कि पार्टी ने गठबंधन राजनीति से दूरी बनाए रखने की अपनी दशक पुरानी नीति को छोड़ने का फैसला किया है। उन्होंने बताया कि 2025 के स्थानीय निकाय चुनावों में एलडीएफ, यूडीएफ, एसडीपीआई और वेलफेयर पार्टी ऑफ इंडिया के कथित गठजोड़ से Twenty20 को लगभग अस्तित्व का संकट झेलना पड़ा। पार्टी अपने चार में से दो पंचायत क्षेत्रों में हार गई, हालांकि नए इलाकों में उसने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
जैकब ने कहा कि स्थानीय चुनावों के दौरान पार्टी के खिलाफ जिस तरह का माहौल बना, वह उनके लिए आंखें खोलने वाला अनुभव रहा। उन्होंने दावा किया कि Twenty20 की विकास की सोच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण से मेल खाती है। उन्होंने कहा कि हमारे अस्तित्व को खत्म करने की कोशिश करने वाले राजनीतिक गठजोड़ के खिलाफ हमें मजबूत सहयोगियों की जरूरत थी और एनडीए से बेहतर विकल्प हमें नहीं मिला। उन्होंने केरल की राजनीति में एलडीएफ-यूडीएफ द्विध्रुवीय व्यवस्था को राज्य के विकास में बाधक बताते हुए कहा कि भ्रष्टाचार और घोटालों से भरी राजनीति के चलते पढ़े-लिखे युवा रोजगार के लिए राज्य छोड़ने को मजबूर हैं। जैकब ने आरोप लगाया कि केरल निवेशकों के लिए अनुकूल माहौल नहीं रहा है और एलडीएफ सरकार की कथित शत्रुतापूर्ण नीतियों के कारण उन्हें अपना गारमेंट व्यवसाय आंशिक रूप से तेलंगाना स्थानांतरित करना पड़ा, जहां उन्होंने 50,000 रोजगार सृजित किए।
जैकब ने यह भी कहा कि स्थानीय निकाय चुनावों में Twenty20 का प्रदर्शन कमजोर नहीं रहा, बल्कि पार्टी का वोट शेयर 9 प्रतिशत से बढ़कर 12 प्रतिशत हो गया और वह कोल्लम तथा पलक्कड़ में एक निर्णायक तीसरी शक्ति के रूप में उभरी। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि ट्वेंटी20 के एनडीए में शामिल होने से केरल में गठबंधन का विस्तार तेज होगा। उन्होंने बताया कि साबू जैकब शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तिरुवनंतपुरम दौरे के दौरान मंच साझा करेंगे।
इससे पहले, जनाधिपत्य संरक्षण समिति (जेएसएस) के एक धड़े ने भी एनडीए में शामिल होने की घोषणा की। हालांकि, जेएसएस के प्रदेश सचिव राजन बाबू ने पार्टी में विभाजन से इनकार करते हुए कहा कि पूर्व विधायक ए। वी। थमराक्षण को पहले ही संगठन से निष्कासित किया जा चुका है। विधानसभा चुनाव को देखते हुए इसे एनडीए और भाजपा की तैयारी बताई जा रही है।
अशोक भाटिया,
वरिष्ठ स्वतंत्र पत्रकार ,लेखक, समीक्षक, एवं टिप्पणीकार
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