सोलन (हिमाचल प्रदेश)। हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले की अर्की तहसील के सरली गांव में 18 वर्षीय युवक ने बहादुरी दिखाते हुए तेंदुए से भिड़कर अपनी जान बचा ली। युवक ने तेंदुए के हमले का पत्थर और लाठी से मुकाबला किया। करीब 10 से 15 मिनट तक चले इस संघर्ष में युवक घायल तो हुआ, लेकिन आखिरकार तेंदुआ मारा गया।
बताया जा रहा है कि युवक प्रवेश शर्मा पर तेंदुए ने अचानक हमला कर दिया था। जान बचाने के लिए प्रवेश ने साहस दिखाते हुए पत्थरों और लाठी से तेंदुए का सामना किया। इस दौरान दोनों के बीच काफी देर तक संघर्ष चला। घटना के बाद जब गांव में यह खबर फैली तो लोग बड़ी संख्या में प्रवेश को देखने पहुंच गए।
घटना के बाद स्थानीय स्तर पर प्रवेश शर्मा की बहादुरी की खूब चर्चा हुई। वन विभाग ने भी उसकी हिम्मत की सराहना करते हुए उसे 5 हजार रुपये का इनाम दिया।
24 घंटे के भीतर दर्ज हुआ केस
हालांकि, इनाम मिलने के 24 घंटे के भीतर ही वन विभाग ने युवक के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया। विभाग का कहना है कि तेंदुआ संरक्षित वन्यजीव है और उसकी मौत के मामले में कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की गई है।
अर्की रेंज के वन अधिकारी अशोक कुमार ने बताया कि मामले में जांच की जा रही है और कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई होगी।
इस घटना के बाद सोशल मीडिया और स्थानीय लोगों के बीच यह मुद्दा चर्चा का विषय बन गया है।
तेंदुए से भिड़कर युवक ने बचाई जान, इनाम मिला… फिर वन विभाग ने दर्ज किया केस
समाज कल्याण विभाग में बंदरबांट के आरोप
आश्रम पद्धति विद्यालय की सप्लाई और स्वयं सहायता समूहों में अनियमितताओं की चर्चा
फर्रुखाबाद। गरीब, पिछड़े और वंचित वर्ग के कल्याण के लिए संचालित समाज कल्याण विभाग इन दिनों गंभीर आरोपों के चलते चर्चा में है। वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन, दिव्यांग पेंशन, छात्रवृत्ति और विवाह अनुदान जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी संभालने वाला यह विभाग जिले में कथित अनियमितताओं और बंदरबांट के आरोपों से घिरता दिखाई दे रहा है।
मोहम्मदाबाद क्षेत्र में समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित जयप्रकाश नारायण सर्वोदय आश्रम पद्धति विद्यालय में सप्लाई और व्यवस्थाओं को लेकर कई तरह की चर्चाएं सामने आ रही हैं। यह विद्यालय अनुसूचित जाति एवं जनजाति के गरीब छात्रों को कक्षा 6 से 12 तक निःशुल्क आवासीय शिक्षा, भोजन, किताबें और यूनिफॉर्म उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित किया जाता है, लेकिन आरोप है कि यहां व्यवस्थाओं में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है।
सूत्रों के अनुसार विद्यालय में अध्यापक जीत कुमार की पारिवारिक फर्म द्वारा विद्यालय और विभागीय कार्यालय में लगातार सप्लाई दी जा रही है। बताया जाता है कि इस सप्लाई के बदले विभाग से बड़ी धनराशि का भुगतान होता है और कथित रूप से इसका आपस में बंटवारा कर लिया जाता है। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि इस कार्य में अन्य किसी फर्म या व्यक्ति को प्रवेश तक नहीं दिया जाता, जिससे पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
विद्यालय में भोजन और अन्य व्यवस्थाओं से जुड़े कार्य अमन स्वयं सहायता समूह और मन्नत स्वयं सहायता समूह के माध्यम से कराए जाने की जानकारी सामने आई है। चर्चा है कि इन समूहों से भी कथित रूप से मोटी रकम मासिक तौर पर ली जाती है। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि यह पैसा कथित रूप से अध्यापक जीत कुमार के माध्यम से लिया जाता है और फिर ऊपर तक अधिकारियों तक पहुंचाने की बात कही जाती है। लेकिन स्थानीय स्तर पर इसे लेकर असंतोष का माहौल बताया जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस विभाग को गरीबों और वंचितों के कल्याण के लिए काम करना चाहिए, वहीं पर सरकारी धन के दुरुपयोग की चर्चा आम हो रही है। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि समाज कल्याण अधिकारी रेनू पर अपने गृह जनपद मैनपुरी की एक फर्म को काम देने और विभागीय बाबू संतोष द्वारा पूरे काम की सेटिंग करने की चर्चाएं हैं।
गौरतलब है कि एक ओर जिलाधिकारी डॉ. आशुतोष कुमार द्विवेदी और मुख्य विकास अधिकारी विनोद कुमार जिले की व्यवस्थाओं को पारदर्शी और बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर समाज कल्याण विभाग को लेकर उठ रहे ऐसे आरोप प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
अब जरूरत इस बात की है कि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कराकर सच्चाई सामने लाई जाए, ताकि गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए चलाई जा रही योजनाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनी रह सके।
फर्रुखाबाद में अब केवल होम डिलीवरी से मिलेगा गैस सिलेंडर
फर्रुखाबाद | यूथ इंडिया
फर्रुखाबाद जिले में गैस वितरण व्यवस्था को लेकर जिला पूर्ति विभाग ने नया निर्देश जारी किया है। अब उपभोक्ताओं को गैस रिफिल सिलेंडर केवल होम डिलीवरी के माध्यम से ही उपलब्ध कराया जाएगा। एजेंसियों पर मैन्युअल या सीधे सिलेंडर देने की व्यवस्था समाप्त कर दी गई है।
जिला पूर्ति अधिकारी के आदेश के अनुसार जिले के सभी गैस वितरकों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने-अपने गोदाम और शोरूम पर सूचना पंपलेट चस्पा करें, जिसमें स्पष्ट रूप से लिखा हो कि अब उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर केवल होम डिलीवरी के जरिए ही मिलेगा।
एजेंसियों को दिए गए सख्त निर्देश
विभाग की ओर से सभी गैस एजेंसियों को कहा गया है कि इस आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें। साथ ही शोरूम और गोदाम पर लगाए गए पंपलेट की फोटो भी संबंधित समूह में साझा करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि आदेश के पालन की पुष्टि हो सके।
विभाग का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य उपभोक्ताओं को बेहतर सुविधा देना और गैस वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाना है। होम डिलीवरी व्यवस्था लागू होने से एजेंसियों पर भीड़ कम होगी और उपभोक्ताओं को सिलेंडर के लिए लाइन में लगने की परेशानी नहीं झेलनी पड़ेगी।
जिला पूर्ति विभाग ने सभी गैस वितरकों से कहा है कि आदेश का तत्काल प्रभाव से पालन सुनिश्चित किया जाए।
खटारा और अवैध स्कूली वाहनों पर चलेगा बड़ा अभियान
1 से 15 अप्रैल तक विशेष जांच, 15 साल पुराने वाहनों पर पूर्ण प्रतिबंध
लखनऊ।उत्तर प्रदेश में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर परिवहन विभाग बड़ा अभियान चलाने जा रहा है। विभाग ने खटारा और अवैध रूप से चल रहे स्कूली वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। यह विशेष अभियान 1 अप्रैल से 15 अप्रैल तक पूरे प्रदेश में चलाया जाएगा।
परिवहन विभाग के अनुसार इस अभियान के दौरान ऐसे सभी वाहनों की जांच की जाएगी जो स्कूलों में बच्चों को लाने-ले जाने के लिए उपयोग किए जा रहे हैं। नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के खिलाफ चालान और जब्ती की कार्रवाई की जाएगी।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि 15 साल से अधिक पुराने वाहनों को स्कूली वाहन के रूप में चलाने पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। ऐसे वाहनों को सड़क पर पाए जाने पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
आगरा की घटना के बाद सख्ती
यह अभियान हाल ही में आगरा में हुई एक दर्दनाक घटना के बाद शुरू किया जा रहा है, जहां स्कूल वैन से गिरकर एक छात्रा की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद स्कूली वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठे थे।
स्कूलों से मांगी गई वाहनों की सूची
परिवहन विभाग ने सभी स्कूलों से उनके यहां चल रहे वाहनों की सूची मांगी है। साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि स्कूली वाहनों के फिटनेस, परमिट, ड्राइवर के दस्तावेज और सुरक्षा मानकों की भी सख्ती से जांच की जाए।
विभाग का कहना है कि अभियान का मुख्य उद्देश्य स्कूली बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और नियमों के अनुरूप वाहनों का संचालन कराना है। नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन मालिकों और संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
लोहिया अस्पताल का ऑक्सीजन प्लांट कई दिनों से बंद, मरीजों को सिलेंडर से दी जा रही ऑक्सीजन
फर्रुखाबाद। जनपद के प्रमुख सरकारी अस्पताल डॉ. राम मनोहर लोहिया चिकित्सालय में लगा ऑक्सीजन प्लांट कई दिनों से बंद पड़ा हुआ है। सर्विस न हो पाने के कारण प्लांट से ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित है, जिसके चलते अस्पताल प्रशासन को मरीजों को सिलेंडर के माध्यम से ऑक्सीजन उपलब्ध करानी पड़ रही है।
अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. जगमोहन शर्मा ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि तकनीकी खराबी और समय पर सर्विस न हो पाने के कारण ऑक्सीजन प्लांट फिलहाल बंद है। हालांकि मरीजों की सुविधा और उपचार में किसी प्रकार की बाधा न आए, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था के तहत ऑक्सीजन सिलेंडरों के जरिए मरीजों को ऑक्सीजन उपलब्ध कराई जा रही है।
उन्होंने बताया कि अस्पताल प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और प्लांट को जल्द से जल्द दुरुस्त कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। संबंधित तकनीकी टीम को इसकी जानकारी दे दी गई है और सर्विस का कार्य शीघ्र शुरू होने की संभावना है।
गौरतलब है कि डॉ. राम मनोहर लोहिया चिकित्सालय जिले का प्रमुख सरकारी अस्पताल है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में ऑक्सीजन प्लांट का बंद होना चिंता का विषय जरूर है, लेकिन अस्पताल प्रशासन का दावा है कि ऑक्सीजन की आपूर्ति में किसी प्रकार की कमी नहीं होने दी जा रही है और सभी जरूरतमंद मरीजों को समय पर ऑक्सीजन उपलब्ध कराई जा रही है।
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि जैसे ही प्लांट की सर्विस पूरी हो जाएगी, उसे पुनः चालू कर दिया जाएगा, जिससे ऑक्सीजन की आपूर्ति सामान्य रूप से शुरू हो सकेगी।
संसद में राघव चड्ढा ने उठाया सैनिटरी पैड का मुद्दा
बोले— शराब खुलेआम बिकती है, लेकिन सैनिटरी पैड अखबार में लपेटकर दिए जाते हैं
नई दिल्ली। संसद में आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्डा ने महिलाओं के स्वास्थ्य और मासिक धर्म से जुड़े सामाजिक नजरिये का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने कहा कि देश में आज भी सैनिटरी पैड को लेकर झिझक और सामाजिक संकोच बना हुआ है।
राघव चड्ढा ने संसद में कहा कि एक ओर शराब की बोतलें खुलेआम दुकानों पर बेची जाती हैं, लेकिन दूसरी ओर सैनिटरी पैड जैसी जरूरी चीज को आज भी दुकानदार अखबार या कागज में लपेटकर देते हैं। उन्होंने इसे समाज की सोच का विरोधाभास बताया।
उन्होंने कहा कि मासिक धर्म कोई शर्म की बात नहीं बल्कि महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ा प्राकृतिक विषय है। इसके बावजूद समाज में इसे लेकर चुप्पी और संकोच बना हुआ है, जिसे बदलने की जरूरत है।
राघव चड्ढा ने सरकार से मांग की कि महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े उत्पादों को लेकर जागरूकता अभियान चलाए जाएं, ताकि समाज में इस विषय पर खुलकर बातचीत हो सके और महिलाओं को आवश्यक सुविधाएं आसानी से मिल सकें।
महिलाओं के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की अपील
उन्होंने कहा कि महिलाओं की गरिमा, स्वास्थ्य और स्वच्छता को प्राथमिकता देना जरूरी है। सैनिटरी पैड को लेकर समाज में जो झिझक है, उसे दूर करने के लिए सरकार और समाज दोनों को मिलकर प्रयास करने होंगे।
संसद में उठाए गए इस मुद्दे के बाद महिलाओं के स्वास्थ्य और मासिक धर्म से जुड़े सामाजिक दृष्टिकोण पर एक बार फिर बहस तेज हो गई है।








