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Saturday, March 21, 2026
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इंडियन गैस एजेंसी बंद, उपभोक्ताओं को करना पड़ा परेशानियों का सामना

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लखनऊ | यूथ इंडिया: लखनऊ के वालाकदर रोड स्थित इंडियन गैस एजेंसी बंद मिलने से उपभोक्ताओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। एजेंसी के मुख्य गेट पर एक नोटिस चस्पा कर दिया गया, जिसमें गैस की गाड़ी न आने का हवाला दिया गया है।

जानकारी के अनुसार बड़ी संख्या में उपभोक्ता गैस सिलेंडर लेने के लिए एजेंसी पर पहुंचे, लेकिन एजेंसी बंद देखकर उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा। गेट पर लगे नोटिस में बताया गया कि गैस की आपूर्ति करने वाली गाड़ी नहीं पहुंचने के कारण वितरण संभव नहीं हो सका।

उपभोक्ताओं में नाराजगी

एजेंसी बंद होने से लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। कई उपभोक्ता दूर-दराज के इलाकों से गैस लेने पहुंचे थे, लेकिन गैस न मिलने के कारण उन्हें वापस लौटना पड़ा।

इस घटना के बाद गैस वितरण व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि यदि समय पर आपूर्ति नहीं होगी तो उन्हें रोजमर्रा के कामों में दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।

लोगों ने संबंधित अधिकारियों से गैस आपूर्ति व्यवस्था को सुचारु बनाने और उपभोक्ताओं को समय पर सिलेंडर उपलब्ध कराने की मांग की है।

रिश्वतखोरी के आरोप में सीएचसी विक्रमजोत का बाबू निलंबित

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लखनऊ/बस्ती | यूथ इंडिया: बस्ती जिले के सीएचसी विक्रमजोत में रिश्वतखोरी के आरोप सामने आने के बाद बड़ी कार्रवाई की गई है। स्वास्थ्य विभाग में तैनात बाबू प्रदीप श्रीवास्तव को निलंबित कर दिया गया है।

यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के निर्देश पर की गई है। बताया जा रहा है कि प्रदीप श्रीवास्तव पर घूस लेने के गंभीर आरोप लगे थे, जिसकी शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच कराई गई।

शिकायत के बाद हुई कार्रवाई

सूत्रों के अनुसार सीएचसी विक्रमजोत में कार्य से जुड़े मामलों में सुविधा देने के बदले रिश्वत मांगने की शिकायत सामने आई थी। शिकायत की जानकारी उच्च अधिकारियों तक पहुंचने के बाद जांच शुरू की गई।

मामले को गंभीर मानते हुए स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल प्रभाव से बाबू प्रदीप श्रीवास्तव को निलंबित कर दिया। अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि सरकारी अस्पतालों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

यूपी में 47 पीपीएस अधिकारियों का प्रमोशन, डिप्टी एसपी से बने एएसपी

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लखनऊ | यूथ इंडिया: उत्तर प्रदेश सरकार ने पुलिस विभाग में बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए 47 पीपीएस (प्रांतीय पुलिस सेवा) अधिकारियों को पदोन्नति दी है। इन अधिकारियों को डिप्टी एसपी (उप पुलिस अधीक्षक) पद से प्रमोट कर एएसपी (अपर पुलिस अधीक्षक) बनाया गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार शासन स्तर पर जारी आदेश के तहत लंबे समय से पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे पीपीएस अधिकारियों को यह राहत मिली है। पदोन्नति के बाद इन अधिकारियों को अब अपर पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनाती दी जाएगी।

सरकार का मानना है कि इन पदोन्नतियों से पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली और अधिक मजबूत होगी तथा जिलों में कानून व्यवस्था बनाए रखने में अधिकारियों की जिम्मेदारी और प्रभाव बढ़ेगा।

लंबे समय से लंबित था मामला

बताया जा रहा है कि पीपीएस अधिकारियों के प्रमोशन का यह मामला काफी समय से लंबित था। शासन के आदेश के बाद अब 47 अधिकारियों को पदोन्नति का लाभ मिल गया है। इस फैसले के बाद पुलिस विभाग में प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं और संबंधित अधिकारियों की नई तैनाती को लेकर भी जल्द आदेश जारी किए जा सकते हैं।

पश्चिम एशिया युद्ध की आंच मुरादाबाद तक, गैस किल्लत से उपला पांच रुपये का

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मुरादाबाद: मध्य पूर्व में चल रहे तनाव का असर अब स्थानीय बाजारों तक दिखाई देने लगा है। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में गैस सिलिंडर की कमी और बढ़ती लागत के कारण पारंपरिक ईंधन के दाम तेजी से बढ़ गए हैं। हालत यह है कि जो उपला पहले तीन रुपये में मिल जाता था, अब उसकी कीमत बढ़कर पांच से छह रुपये तक पहुंच गई है।

शहर में गैस और कामर्शियल सिलिंडरों की आपूर्ति प्रभावित होने के कारण होटल, रेस्टोरेंट और छोटे ढाबों ने अब कोयला, लकड़ी और उपलों का इस्तेमाल बढ़ा दिया है। इससे इन ईंधनों की मांग अचानक बढ़ गई और कीमतों में तेजी आ गई।

स्थानीय दुकानदारों के अनुसार पिछले सप्ताह तक एक उपला लगभग तीन रुपये का मिल रहा था, लेकिन अब कई जगहों पर इसकी कीमत पांच रुपये हो गई है। कुछ स्थानों पर यह छह रुपये तक में बिक रहा है। उपलों की सबसे ज्यादा मांग सड़क किनारे चाय, पकौड़ी और नाश्ते के ठेले लगाने वाले छोटे दुकानदारों के बीच देखी जा रही है।

ईंधन की बढ़ती कीमतों का असर लकड़ी और कोयले पर भी पड़ा है। पहले जो लकड़ी लगभग दस रुपये प्रति किलो मिलती थी, उसका भाव अब बढ़कर करीब तेरह रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। वहीं अलग-अलग किस्म के कोयले की कीमतों में भी वृद्धि दर्ज की गई है।

ढाबों और छोटे भोजनालयों में भी अब गैस की जगह देसी चूल्हों का इस्तेमाल बढ़ने लगा है। कई हाईवे किनारे स्थित ढाबों ने खाना पकाने के लिए लकड़ी और कोयले की भट्टियां फिर से जलानी शुरू कर दी हैं।

शहर के एक ठेला व्यापारी राहुल कश्यप बताते हैं कि उन्हें कई दिनों से गैस सिलिंडर नहीं मिल रहा है। मजबूरी में अब अंगीठी में उपले या लकड़ी जलाकर काम चलाना पड़ रहा है। उनका कहना है कि अब तो उपला भी महंगा हो गया है और एक-एक उपले के लिए पांच रुपये तक देने पड़ रहे हैं।

कुछ दुकानदारों का कहना है कि उपले आसानी से मिल भी नहीं रहे हैं और कई लोग इन्हें आसपास के गांवों से लाकर इस्तेमाल कर रहे हैं। पाकबड़ा इलाके के रहने वाले सद्दाम का कहना है कि बड़े होटल वाले तो कोयला खरीद सकते हैं, लेकिन छोटे दुकानदारों के लिए उपला और लकड़ी ही सहारा है।

व्यापारियों के अनुसार फिलहाल शहर में ईंधन के प्रमुख दाम इस प्रकार हैं—

उपला: लगभग पांच रुपये प्रति पीस

लकड़ी: करीब तेरह रुपये प्रति किलो

लकड़ी वाला कोयला: लगभग पैंतीस रुपये प्रति किलो

नेट कोक: करीब चालीस रुपये प्रति किलो

हार्डकोक: लगभग अठारह रुपये प्रति किलो

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि गैस की आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं हुई तो आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतें और बढ़ सकती हैं। इससे छोटे व्यापारियों और आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ने की आशंका भी बढ़ गई है।

15 साल बाद साधु बनकर लौटा पति, पत्नी ने बीच सड़क पकड़ा; भीड़ ने तोड़ी कार, जमकर हुई पिटाई

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मथुरा। जिले में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां पंद्रह साल पहले पत्नी और बच्चों को छोड़कर चला गया युवक अचानक साधु के वेश में इलाके में पहुंच गया। लेकिन उसकी पहचान छिप नहीं सकी। खबर मिलते ही पत्नी ने उसका पीछा किया और बीच रास्ते में पकड़ लिया। इसके बाद गुस्साए लोगों ने उसे घेर लिया और जमकर पिटाई कर दी।
मामला जिले के बलदेव थाना क्षेत्र से जुड़ा बताया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, युवक का विवाह करीब उन्नीस वर्ष पहले मांट क्षेत्र की महिला से हुआ था। शादी के बाद वह नौकरी के सिलसिले में बाहर रहने लगा और एक कंपनी में साफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में काम करता था। आरोप है कि इसी दौरान उसका किसी अन्य महिला से संबंध बन गया और वह पत्नी व बच्चों को छोड़कर उसके साथ रहने लगा।

परिवार का आरोप है कि युवक पिछले पंद्रह वर्षों से घर नहीं लौटा और न ही उसने परिवार की कोई जिम्मेदारी निभाई। इस बीच पत्नी बच्चों के साथ अकेले जीवन बिताती रही। हाल ही में महिला को सूचना मिली कि उसका पति साधु के भेष में इलाके में आया हुआ है और राया की ओर जा रहा है। यह खबर मिलते ही महिला ने कुछ परिचितों के साथ उसका पीछा शुरू कर दिया।

जब वह मांट रेलवे क्रॉसिंग के पास पहुंचा तो महिला ने उसे पहचान लिया और रास्ते में रोक लिया। इसके बाद मौके पर मौजूद लोगों की भीड़ भी इकट्ठा हो गई। लोगों ने उसकी कार को घेर लिया और गुस्से में आकर वाहन का शीशा तोड़ दिया। देखते ही देखते भीड़ ने उसकी पिटाई शुरू कर दी।

घटना के दौरान सड़क पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया और कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित हो गया। इसी बीच किसी ने पुलिस को सूचना दे दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और भीड़ से युवक को बचाकर हिरासत में ले लिया। पुलिस उसे थाने ले गई, जहां उससे पूछताछ की जा रही है।

पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है। यदि महिला की शिकायत के आधार पर कोई आपराधिक मामला बनता है तो आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं इस घटना का वीडियो भी सामने आया है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है।

मायावती ने कांग्रेस पर दलित हस्तियों का अपमान करने का लगाया आरोप

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लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (BSP) की प्रमुख मायावती (Mayawati) ने शनिवार को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (Congress) पर तीखा हमला करते हुए उस पर ऐतिहासिक रूप से दलित नेताओं का अपमान करने और अब उनके नाम पर राजनीतिक लाभ उठाने का आरोप लगाया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कई पोस्ट में मायावती ने कांग्रेस को “दलितों के अपमान का प्रतीक” बताया और आरोप लगाया कि पार्टी ने अपने लंबे शासनकाल में भारतीय संविधान के निर्माता बी.आर. अंबेडकर को सम्मानित करने में विफल रही।

उन्होंने कहा कि दशकों तक देश पर शासन करने के बावजूद, कांग्रेस सरकार ने अंबेडकर को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान, भारत रत्न, कभी नहीं दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि पार्टी अब बसपा संस्थापक कांशी राम का सम्मान करने का दावा कैसे कर सकती है। मायावती के अनुसार, कांग्रेस की नीतियों और रवैये ने ही कांशी राम को दलितों और अन्य हाशिए पर पड़े समुदायों के अधिकारों के लिए लड़ने के लिए बहुजन समाज पार्टी की स्थापना करने के लिए विवश किया था।

बसपा प्रमुख ने कांशी राम की मृत्यु के समय को याद करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने एक दिन का भी राष्ट्रीय शोक घोषित नहीं किया। उन्होंने समाजवादी पार्टी की भी आलोचना करते हुए कहा कि तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार भी उनके सम्मान में राजकीय शोक घोषित करने में विफल रही।

मायावती ने दावा किया कि दोनों ही दलों ने दलित नेताओं और उनके योगदान के प्रति ऐतिहासिक रूप से संकीर्ण मानसिकता रखी है। अपने संबोधन में मायावती ने छोटे दलित संगठनों और राजनीतिक समूहों को भी निशाना बनाया और उन पर कांशी राम के नाम का राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करने का आरोप लगाया, जबकि वे परोक्ष रूप से प्रतिद्वंद्वी दलों को बसपा को कमजोर करने में मदद कर रहे थे। उन्होंने अपने समर्थकों से ऐसी “चालों” के प्रति सतर्क रहने का आग्रह किया, जिनका उद्देश्य पार्टी के मूल समर्थन आधार को कमजोर करना है।

अपने संदेश के समापन में मायावती ने पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों से कांशी राम की जयंती के उपलक्ष्य में 15 मार्च को देशभर में बड़े और सफल कार्यक्रम आयोजित करने की अपील की। उन्होंने जोर देकर कहा कि बहुजन समाज पार्टी एकमात्र ऐसी राजनीतिक पार्टी है जो कांशी राम के सिद्धांतों के प्रति दृढ़ता से प्रतिबद्ध है और दलितों, पिछड़े वर्गों और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखे हुए है।