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Friday, March 20, 2026
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यूपी में 47 पीपीएस अधिकारियों का प्रमोशन, डिप्टी एसपी से बने एएसपी

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लखनऊ | यूथ इंडिया: उत्तर प्रदेश सरकार ने पुलिस विभाग में बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए 47 पीपीएस (प्रांतीय पुलिस सेवा) अधिकारियों को पदोन्नति दी है। इन अधिकारियों को डिप्टी एसपी (उप पुलिस अधीक्षक) पद से प्रमोट कर एएसपी (अपर पुलिस अधीक्षक) बनाया गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार शासन स्तर पर जारी आदेश के तहत लंबे समय से पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे पीपीएस अधिकारियों को यह राहत मिली है। पदोन्नति के बाद इन अधिकारियों को अब अपर पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनाती दी जाएगी।

सरकार का मानना है कि इन पदोन्नतियों से पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली और अधिक मजबूत होगी तथा जिलों में कानून व्यवस्था बनाए रखने में अधिकारियों की जिम्मेदारी और प्रभाव बढ़ेगा।

लंबे समय से लंबित था मामला

बताया जा रहा है कि पीपीएस अधिकारियों के प्रमोशन का यह मामला काफी समय से लंबित था। शासन के आदेश के बाद अब 47 अधिकारियों को पदोन्नति का लाभ मिल गया है। इस फैसले के बाद पुलिस विभाग में प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं और संबंधित अधिकारियों की नई तैनाती को लेकर भी जल्द आदेश जारी किए जा सकते हैं।

पश्चिम एशिया युद्ध की आंच मुरादाबाद तक, गैस किल्लत से उपला पांच रुपये का

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मुरादाबाद: मध्य पूर्व में चल रहे तनाव का असर अब स्थानीय बाजारों तक दिखाई देने लगा है। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में गैस सिलिंडर की कमी और बढ़ती लागत के कारण पारंपरिक ईंधन के दाम तेजी से बढ़ गए हैं। हालत यह है कि जो उपला पहले तीन रुपये में मिल जाता था, अब उसकी कीमत बढ़कर पांच से छह रुपये तक पहुंच गई है।

शहर में गैस और कामर्शियल सिलिंडरों की आपूर्ति प्रभावित होने के कारण होटल, रेस्टोरेंट और छोटे ढाबों ने अब कोयला, लकड़ी और उपलों का इस्तेमाल बढ़ा दिया है। इससे इन ईंधनों की मांग अचानक बढ़ गई और कीमतों में तेजी आ गई।

स्थानीय दुकानदारों के अनुसार पिछले सप्ताह तक एक उपला लगभग तीन रुपये का मिल रहा था, लेकिन अब कई जगहों पर इसकी कीमत पांच रुपये हो गई है। कुछ स्थानों पर यह छह रुपये तक में बिक रहा है। उपलों की सबसे ज्यादा मांग सड़क किनारे चाय, पकौड़ी और नाश्ते के ठेले लगाने वाले छोटे दुकानदारों के बीच देखी जा रही है।

ईंधन की बढ़ती कीमतों का असर लकड़ी और कोयले पर भी पड़ा है। पहले जो लकड़ी लगभग दस रुपये प्रति किलो मिलती थी, उसका भाव अब बढ़कर करीब तेरह रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। वहीं अलग-अलग किस्म के कोयले की कीमतों में भी वृद्धि दर्ज की गई है।

ढाबों और छोटे भोजनालयों में भी अब गैस की जगह देसी चूल्हों का इस्तेमाल बढ़ने लगा है। कई हाईवे किनारे स्थित ढाबों ने खाना पकाने के लिए लकड़ी और कोयले की भट्टियां फिर से जलानी शुरू कर दी हैं।

शहर के एक ठेला व्यापारी राहुल कश्यप बताते हैं कि उन्हें कई दिनों से गैस सिलिंडर नहीं मिल रहा है। मजबूरी में अब अंगीठी में उपले या लकड़ी जलाकर काम चलाना पड़ रहा है। उनका कहना है कि अब तो उपला भी महंगा हो गया है और एक-एक उपले के लिए पांच रुपये तक देने पड़ रहे हैं।

कुछ दुकानदारों का कहना है कि उपले आसानी से मिल भी नहीं रहे हैं और कई लोग इन्हें आसपास के गांवों से लाकर इस्तेमाल कर रहे हैं। पाकबड़ा इलाके के रहने वाले सद्दाम का कहना है कि बड़े होटल वाले तो कोयला खरीद सकते हैं, लेकिन छोटे दुकानदारों के लिए उपला और लकड़ी ही सहारा है।

व्यापारियों के अनुसार फिलहाल शहर में ईंधन के प्रमुख दाम इस प्रकार हैं—

उपला: लगभग पांच रुपये प्रति पीस

लकड़ी: करीब तेरह रुपये प्रति किलो

लकड़ी वाला कोयला: लगभग पैंतीस रुपये प्रति किलो

नेट कोक: करीब चालीस रुपये प्रति किलो

हार्डकोक: लगभग अठारह रुपये प्रति किलो

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि गैस की आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं हुई तो आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतें और बढ़ सकती हैं। इससे छोटे व्यापारियों और आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ने की आशंका भी बढ़ गई है।

15 साल बाद साधु बनकर लौटा पति, पत्नी ने बीच सड़क पकड़ा; भीड़ ने तोड़ी कार, जमकर हुई पिटाई

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मथुरा। जिले में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां पंद्रह साल पहले पत्नी और बच्चों को छोड़कर चला गया युवक अचानक साधु के वेश में इलाके में पहुंच गया। लेकिन उसकी पहचान छिप नहीं सकी। खबर मिलते ही पत्नी ने उसका पीछा किया और बीच रास्ते में पकड़ लिया। इसके बाद गुस्साए लोगों ने उसे घेर लिया और जमकर पिटाई कर दी।
मामला जिले के बलदेव थाना क्षेत्र से जुड़ा बताया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, युवक का विवाह करीब उन्नीस वर्ष पहले मांट क्षेत्र की महिला से हुआ था। शादी के बाद वह नौकरी के सिलसिले में बाहर रहने लगा और एक कंपनी में साफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में काम करता था। आरोप है कि इसी दौरान उसका किसी अन्य महिला से संबंध बन गया और वह पत्नी व बच्चों को छोड़कर उसके साथ रहने लगा।

परिवार का आरोप है कि युवक पिछले पंद्रह वर्षों से घर नहीं लौटा और न ही उसने परिवार की कोई जिम्मेदारी निभाई। इस बीच पत्नी बच्चों के साथ अकेले जीवन बिताती रही। हाल ही में महिला को सूचना मिली कि उसका पति साधु के भेष में इलाके में आया हुआ है और राया की ओर जा रहा है। यह खबर मिलते ही महिला ने कुछ परिचितों के साथ उसका पीछा शुरू कर दिया।

जब वह मांट रेलवे क्रॉसिंग के पास पहुंचा तो महिला ने उसे पहचान लिया और रास्ते में रोक लिया। इसके बाद मौके पर मौजूद लोगों की भीड़ भी इकट्ठा हो गई। लोगों ने उसकी कार को घेर लिया और गुस्से में आकर वाहन का शीशा तोड़ दिया। देखते ही देखते भीड़ ने उसकी पिटाई शुरू कर दी।

घटना के दौरान सड़क पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया और कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित हो गया। इसी बीच किसी ने पुलिस को सूचना दे दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और भीड़ से युवक को बचाकर हिरासत में ले लिया। पुलिस उसे थाने ले गई, जहां उससे पूछताछ की जा रही है।

पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है। यदि महिला की शिकायत के आधार पर कोई आपराधिक मामला बनता है तो आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं इस घटना का वीडियो भी सामने आया है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है।

मायावती ने कांग्रेस पर दलित हस्तियों का अपमान करने का लगाया आरोप

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लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (BSP) की प्रमुख मायावती (Mayawati) ने शनिवार को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (Congress) पर तीखा हमला करते हुए उस पर ऐतिहासिक रूप से दलित नेताओं का अपमान करने और अब उनके नाम पर राजनीतिक लाभ उठाने का आरोप लगाया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कई पोस्ट में मायावती ने कांग्रेस को “दलितों के अपमान का प्रतीक” बताया और आरोप लगाया कि पार्टी ने अपने लंबे शासनकाल में भारतीय संविधान के निर्माता बी.आर. अंबेडकर को सम्मानित करने में विफल रही।

उन्होंने कहा कि दशकों तक देश पर शासन करने के बावजूद, कांग्रेस सरकार ने अंबेडकर को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान, भारत रत्न, कभी नहीं दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि पार्टी अब बसपा संस्थापक कांशी राम का सम्मान करने का दावा कैसे कर सकती है। मायावती के अनुसार, कांग्रेस की नीतियों और रवैये ने ही कांशी राम को दलितों और अन्य हाशिए पर पड़े समुदायों के अधिकारों के लिए लड़ने के लिए बहुजन समाज पार्टी की स्थापना करने के लिए विवश किया था।

बसपा प्रमुख ने कांशी राम की मृत्यु के समय को याद करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने एक दिन का भी राष्ट्रीय शोक घोषित नहीं किया। उन्होंने समाजवादी पार्टी की भी आलोचना करते हुए कहा कि तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार भी उनके सम्मान में राजकीय शोक घोषित करने में विफल रही।

मायावती ने दावा किया कि दोनों ही दलों ने दलित नेताओं और उनके योगदान के प्रति ऐतिहासिक रूप से संकीर्ण मानसिकता रखी है। अपने संबोधन में मायावती ने छोटे दलित संगठनों और राजनीतिक समूहों को भी निशाना बनाया और उन पर कांशी राम के नाम का राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करने का आरोप लगाया, जबकि वे परोक्ष रूप से प्रतिद्वंद्वी दलों को बसपा को कमजोर करने में मदद कर रहे थे। उन्होंने अपने समर्थकों से ऐसी “चालों” के प्रति सतर्क रहने का आग्रह किया, जिनका उद्देश्य पार्टी के मूल समर्थन आधार को कमजोर करना है।

अपने संदेश के समापन में मायावती ने पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों से कांशी राम की जयंती के उपलक्ष्य में 15 मार्च को देशभर में बड़े और सफल कार्यक्रम आयोजित करने की अपील की। उन्होंने जोर देकर कहा कि बहुजन समाज पार्टी एकमात्र ऐसी राजनीतिक पार्टी है जो कांशी राम के सिद्धांतों के प्रति दृढ़ता से प्रतिबद्ध है और दलितों, पिछड़े वर्गों और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखे हुए है।

बालोतरा में कपड़ा मिल के गाद टैंक में सफाई करने के दौरान तीन मजदूरों की मौत

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बालोतरा: राजस्थान के बालोतरा शहर (Balotra) के औद्योगिक क्षेत्र में शुक्रवार को एक कपड़ा मिल में गाद टैंक (sludge tank) की सफाई करते समय दम घुटने से तीन कारखाने के मजदूरों की मौत हो गई। तीनों लालजीवाला मिल के गाद टैंक की सफाई के लिए 10 से 12 फीट नीचे उतरे थे, लेकिन वहीं बेहोश हो गए। कुछ देर बाद जब उनके साथी श्रमिकों ने स्थिति को भांपते हुए टैंक के पास पहुंचे, तो उन्हें भी बेहोश पाया। उन्हें तुरंत पास के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, मृतकों की पहचान गुमाना राम (25), विश्वंभर तिवारी (54) और श्रवण (32) के रूप में हुई है। सूत्रों ने बताया कि पीड़ितों ने उचित सुरक्षा उपकरण पहने बिना ही टैंक में उतरे थे, जबकि उन्हें सुरक्षा उपकरण पहनना अनिवार्य था। पुलिस ने घटना की जांच शुरू कर दी है।

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने दुखद परिस्थितियों में हुई इन मौतों पर गहरा दुख व्यक्त किया है। गहलोत ने कहा कि यह जानकर खेद होता है कि हाथ से मैला ढोने की प्रथा अभी तक पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। उन्होंने राज्य सरकार से तीनों मृतकों के परिजनों को राहत और पर्याप्त मुआवजा सुनिश्चित करने का आह्वान किया।

गर्मियों में आग लगने की न हों घटनाएं, सीएम योगी के निर्देश पर अफसरों ने संभाली कमान

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जंगलों में आग लगने की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए लखनऊ मुख्यालय में अग्नि नियंत्रण सेल हुआ सक्रिय

प्रभागीय वनाधिकारी के कार्यालय में भी बने अग्नि नियंत्रण कक्ष, छोटी-छोटी घटनाओं पर रखी जा रही नजर

24 घंटे कार्य करेगा सेल, हर घटनाओं से मुख्यालय को कराना होगा अवगत

मुख्यालय स्तर पर जारी किए गए हेल्पलाइन नंबर 0522-2977310,0522-2204676, 9651368060,7017112077

लखनऊ| मौसम में परिवर्तन के साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर वन विभाग ने आग से बचाव की तैयारी पूरी कर ली है। मुख्यमंत्री ने वन विभाग के आलाधिकारियों से कहा है कि गर्मी में जंगलों में आग की घटनाएं न हों, इसके लिए अभी से तैयार रहें। वन विभाग ने ऐसी घटनाओं पर निगरानी और रोकथाम के लिए मुख्यालय से लेकर प्रभागीय स्तर, जोनल-मंडलीय मुख्य वन संरक्षक स्तर पर नियंत्रण कक्ष बनाया है। प्रदेश मुख्यालय पर बनाए गए अग्नि नियंत्रण सेल कार्य कर रहे हैं।

मुख्यालय व प्रभागीय स्तर पर बनाए गए अग्नि नियंत्रण सेल
प्रत्येक प्रभाग, वृत्त, जोन तथा मुख्यालय स्तर पर प्रदेश में कुल 116 अग्नि नियंत्रण सेल स्थापित किए जा चुके हैं। यह सेल 24 घंटे कार्य करेंगे। सेल में तीन शिफ्ट (सुबह छह से दोपहर दो बजे तक, दोपहर दो बजे से रात्रि 10 बजे तक व रात्रि 10 से सुबह छह बजे तक) में कर्मचारियों की तैनाती रहेगी। हीलाहवाली न हो, इसके लिए विभिन्न रेंजों में समस्त सूचनाएं रजिस्टर में पंजीकृत कर तत्काल उसके निदान पर कार्य भी किया जाएगा।

हेल्पलाइन नंबर पर दी जा सकेगी जानकारी
आग से जुड़ी घटनाओं के संबंध में आम नागरिक भी सूचना दे सकेंगे। जनपद से मिली इन सूचनाओं को जनपदीय अधिकारी तत्काल मुख्यालय के नियंत्रण सेल को प्रेषित करेंगे। आमजन की सुविधा के लिए लखनऊ में भी हेल्पलाइन नंबर जारी किया गया है। 0522-2977310, 0522-2204676, 9651368060, 7017112077 पर इससे जुड़ी सूचनाएं दी जा सकती हैं। अन्य सभी जनपदों में भी आमजन व अन्य विभागों के अधिकारियों को स्थानीय हेल्पलाइन नंबर भी उपलब्ध कराया जाएगा। फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया देहरादून की वेबसाइट-fsi.nic.in पर वन अग्नि अलर्ट सूचना के लिए प्रदेश के 3792 अधिकारियों, कर्मचारियों व आमजन ने पंजीकरण भी कराया है।

अतिसंवेदनशील व मध्य संवेदनशील प्रभागों में भी कर ली गई तैयारी
प्रदेश में वन अग्निकाल 15 जून तक माना गया है। पहले के वर्षों में हुई अग्नि घटनाओं के आधार पर अतिसंवेदनशील व मध्य संवेदनशील (चित्रकूट, सोनभद्र, पीलीभीत टाइगर रिजर्व, कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग, बहराइच, महराजगंज, दुधवा राष्ट्रीय उद्यान, उत्तर खीरी-दक्षिण खीरी, बलरामपुर, सहारनपुर, बिजनौर, गोंडा, गोरखपुर, मीरजापुर, चंदौली, ललितपुर, बांदा, हमीरपुर, वाराणसी व कैमूर वन्य जीव प्रभाग घोषित किए गए हैं। इनमें फॉरेस्ट फायर मॉक ड्रिल भी की जा चुकी है। संवेदनशील जनपदों में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समिति भी गठित की गई है।

वर्जन
मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के निर्देश के क्रम में वन अग्नि नियंत्रण के लिए सारी तैयारी पूरी कर ली गई है। प्रभागीय स्तर पर आग लगने की किसी भी सूचना से तत्काल मुख्यालय स्तर को सूचित करने का निर्देश दिया गया है। आमजन की सुविधा के लिए मुख्यालय स्तर पर हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया है। वन्य जीवों को वन क्षेत्र के अंदर पीने के लिए जल उपलब्ध कराने के लिए पक्का होल निर्माण व पुराने वाटर होल की मरम्मत कर उसमें नियमित जल भी भरा जा रहा है। वन क्षेत्र के अंदर वाच टावर का निर्माण व पुराने वाच टावर का रखररखाव भी किया जा रहा है।
अदिति शर्मा, मुख्य वन संरक्षक प्रचार प्रसार उत्तर प्रदेश