19 C
Lucknow
Friday, March 20, 2026
Home Blog Page 130

कोरोना की चुनौती से अवसर तक: अलीगढ़ की सुजाता ने बदली अपनी तकदीर

0
कोरोना की चुनौती से अवसर तक: अलीगढ़ की सुजाता राघव ने बदली अपनी तकदीर

डिजिटल प्लेटफॉर्म से देशभर तक पहुंचा कारोबार

योगी सरकार की पहल से महिलाओं को मिल रहा स्वरोजगार और सशक्तीकरण का लाभ

लखनऊ: अलीगढ़ के हरदुआगंज क्षेत्र के बड़ा गांव उखलाना की रहने वाली सुजाता राघव ने यह साबित कर दिया कि कठिन परिस्थितियां भी नए अवसरों की राह खोल सकतीं हैं। कोरोना काल में जब उनके पति की नौकरी छूटने के बाद परिवार के सामने आय का संकट खड़ा हो गया, तब सुजाता ने हार मानने के बजाय आत्मनिर्भर बनने का रास्ता चुना। इसी दौरान उन्हें राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के बारे में जानकारी मिली। इस योजना से प्रेरित होकर उन्होंने गांव की महिलाओं के साथ मिलकर स्वयं सहायता समूह बनाया। उनका कहना है कि योगी सरकार की नीतियों से उनको आत्मनिर्भर बनने में काफी मदद मिली।

एनआरएलएम से जुड़ने के बाद सुजाता राघव को अपने व्यवसाय की शुरुआत करने के लिए आवश्यक आर्थिक सहयोग प्राप्त हुआ। इस योजना के माध्यम से उन्हें स्वयं सहायता समूह के जरिए शुरुआती पूंजी उपलब्ध कराई गई, जिससे उन्होंने पूजा सामग्री के निर्माण का कार्य शुरू किया।

एनआरएलएम से मिली वित्तीय सहायता ने न केवल उनके व्यवसाय की नींव मजबूत की, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी दिया। इस सहयोग से उन्होंने धीरे-धीरे अपने काम का विस्तार किया, नए उत्पाद जोड़े और अन्य महिलाओं को भी इस पहल से जोड़कर उन्हें रोजगार के अवसर प्रदान किए।

समूह की ताकत से बनाया ‘श्री शुभांग’ नाम से ब्रांड

सुजाता ने वर्ष 2022 में अन्य महिलाओं के साथ मिलकर “श्री राघव ग्रामीण महिला आजीविका स्वयं सहायता समूह” का गठन किया। शुरुआत मिट्टी के दीये के लिए सूती बातियों से की। धीरे-धीरे मांग बढ़ने लगी और उत्पादों की विविधता भी बढ़ती गई। इसके बाद समूह ने धूपबत्ती, 6 तरह की धूप स्टिक, 8 तरीके की धूप कोन, हवन सामग्री, सत्यनारायण पूजा किट और जन्माष्टमी पूजा किट जैसे अन्य पूजा से जुड़ी किट्स भी बनाने शुरू किए।

अपने उत्पादों को अलग पहचान देने के लिए उन्होंने “श्री शुभांग” नाम से एक ब्रांड बनाया और उसका ट्रेडमार्क भी पंजीकृत कराया। उन्होंने अपने उत्पाद अमेज़न, फ्लिपकार्ट, जियो मार्ट पर भी रजिस्टर किये हैं। इससे उन्हें सालाना 2 से 2.50 लाख तक की बिक्री हो जाती है। आज यह ब्रांड केवल अलीगढ़ तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसकी खुशबू देश के कई हिस्सों तक पहुंच चुकी है। मंदिरों, बड़े किराना स्टोर्स और सरकारी कैंटीनों तक इन उत्पादों की आपूर्ति की जा रही है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म से देशभर में पहुंचा कारोबार

सुजाता राघव की सफलता में डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी बड़ा योगदान रहा है । उन्होंने अपने उत्पादों को ओएनडीसी (Open Network for Digital Commerce) प्लेटफॉर्म से जोड़ दिया, जिससे उनका कारोबार जिला स्तर से निकलकर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गया। अब ग्राहक ‘श्री शुभांग’ से देश के किसी भी हिस्से से ऑनलाइन ऑर्डर कर सकते हैं।

सुजाता के लिए डिजिटल तकनीक की जानकारी शुरू में बहुत चुनौतीपूर्ण जरूर थी, लेकिन ओएनडीसी टीम, एनआरएलएम और परिवार के सहयोग से उन्होंने इसे सीख लिया। आज मोबाइल पर आसानी से ऑर्डर आ जाते हैं, इन्वेंटरी मैनेज होती है। ऑनलाइन कैटलॉग के जरिए ग्राहक उनके उत्पाद आसानी से देख सकते हैं और अपनी जरूरत के अनुसार ऑर्डर कर लेते हैं।

रोजगार पाकर महिलाओं को मिली नई पहचान

सुजाता राघव की पहल आज कई महिलाओं के जीवन में बदलाव की वजह बन चुकी है। उनके समूह से 10 महिलाओं को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिल रहा है, और अन्य 10 महिलाओं को भी पैकिंग और आपूर्ति जैसे कार्यों से कई अन्य लोग भी अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ गए हैं। समूह से जुड़ी हर महिला लगभग 7 से 8 हजार रुपये प्रतिमाह कमा रही है और समूह की कुल मासिक आय सवा से डेढ़ लाख रुपये से ऊपर तक पहुंच चुकी है।

सुजाता का मानना है कि जब महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत बनतीं हैं, तो पूरा परिवार और समाज मजबूत होता है। उनकी यह यात्रा बताती है कि अगर संकल्प मजबूत हो और सामूहिक प्रयास किया जाए, तो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है। सुजाता राघव की यह कहानी केवल एक व्यवसाय ही नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, महिला सशक्तीकरण और सामूहिक प्रयास को दर्शाती है, जिसने कई घरों में रोजगार और उम्मीद की नई खुशबू पहुंचाई है।

“नफरत की राजनीति से देश विश्व गुरु नहीं बन सकता”:अखिलेश

0

मुंबई | यूथ इंडिया: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मुंबई में भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जब भारतीय जनता पार्टी को देश को “विश्व गुरु” बनाने का मौका मिला, तब वह इस लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाई।

अखिलेश यादव ने कहा कि आज दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध जैसी स्थिति है और ऐसे समय में भारत को शांति और संवाद का रास्ता दिखाना चाहिए था। उनके अनुसार भारत को युद्ध के खिलाफ मजबूती से खड़ा होना चाहिए था, ताकि दुनिया में शांति का संदेश दिया जा सके।

सपा प्रमुख ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी की राजनीति नफरत पर आधारित है। उन्होंने कहा कि सभी धर्म लोगों को जोड़ने और एकजुट रहने का संदेश देते हैं, लेकिन भाजपा समाज में विभाजन पैदा करने की कोशिश करती है।

अखिलेश यादव ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के लोग अफवाह फैलाने की राजनीति करते हैं और समाज में भ्रम पैदा करने का प्रयास करते हैं। उन्होंने कहा कि भारत जैसे विविधता वाले देश में सभी धर्मों और समुदायों को साथ लेकर चलना ही देश को मजबूत बनाने का रास्ता है। समाज में भाईचारा और एकता ही भारत को आगे बढ़ा सकती है। अखिलेश यादव के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में एक बार फिर सियासी बयानबाजी तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

आरटीई के तहत लाखों बच्चों के लिए खुले निजी स्कूलों के दरवाजे

0

योगी सरकार की पहल से प्रथम और द्वितीय चरणों में 1.56 लाख से अधिक बच्चों को मिला प्रवेश

प्रथम चरण में प्रदेश भर में 1.09 लाख से अधिक सीटों का हुआ आवंटन

द्वितीय लॉटरी में 47 हजार से ज्यादा बच्चों को निजी स्कूलों में मिला प्रवेश

लखनऊ, कानपुर नगर और आगरा जैसे जनपदों में सर्वाधिक छात्रों को मिला प्रवेश का अवसर

लखनऊ, 14 मार्च। योगी सरकार शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत आर्थिक रूप से कमजोर एवं वंचित वर्ग के बच्चों को निजी विद्यालयों में निशुल्क शिक्षा दिलाने की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। पारदर्शी ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से आवेदन, सत्यापन और लॉटरी प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया जा रहा है।

प्रदेश में आरटीई के अंतर्गत प्रथम और द्वितीय चरण में मिलाकर 1.56 लाख से अधिक छात्रों को निजी स्कूलों में प्रवेश सुनिश्चित किया गया है। प्रथम चरण में लगभग 1.09 लाख सीटों का आवंटन किया जा चुका है जबकि द्वितीय लॉटरी में 47 हजार से अधिक बच्चों को निजी स्कूलों में प्रवेश मिला है। इस प्रकार बड़ी संख्या में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए बेहतर शिक्षा के अवसर सुनिश्चित किए गए हैं।

बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार प्रदेश के विभिन्न जिलों में बड़ी संख्या में आवेदन सत्यापित किए गए। आरटीई के तहत सर्वाधिक प्रवेश लखनऊ, कानपुर नगर, आगरा, मुरादाबाद और बुलंदशहर जैसे जनपदों में हुए हैं, जहां हजारों बच्चों को निजी विद्यालयों में पढ़ने का अवसर मिला है। इसी प्रकार अलीगढ़, गौतम बुद्ध नगर, गाजियाबाद, फीरोजाबाद और बरेली जैसे जिलों में भी हजारों बच्चों को निजी स्कूलों में प्रवेश का अवसर मिला है।

आरटीई अधिनियम के तहत निजी विद्यालयों में निर्धारित सीटों पर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और वंचित वर्ग के बच्चों को प्रवेश दिया जाता है। योगी सरकार ने इस व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन और पारदर्शी बनाया है ताकि चयन प्रक्रिया में निष्पक्षता सुनिश्चित हो सके। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मानना है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा समाज के हर वर्ग के बच्चों तक पहुंचनी चाहिए। इसी उद्देश्य के साथ प्रदेश सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे भी निजी विद्यालयों में पढ़कर अपने भविष्य को बेहतर बना सकें।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार आरटीई के तहत प्रवेश प्रक्रिया के आगामी चरण भी जल्द पूरे किए जाएंगे ताकि अधिक से अधिक पात्र बच्चों को इस योजना का लाभ मिल सके।

सर्वाधिक प्रवेश वाले जनपद

लखनऊ
L1: 12,097
L2: 3,489
कुल: 15,586 सीटें

कानपुर नगर
L1: 7,128
L2: 1,822
कुल: 8,950 सीटें

वाराणसी
L1: 7,140
L2: 989
कुल: 8,129 सीटें

आगरा
L1: 4,989
L2: 1,771
कुल: 6,760 सीटें

मुरादाबाद
L1: 4,080
L2: 1,890
कुल: 5,970 सीटें

अलीगढ़
L1: 4172
L2: 1189
कुल: 5,361 सीटें

बुलंदशहर
L1: 3,761
L2: 1,584
कुल: 5,345 सीटें

मेरठ
L1: 3,691
L2: 1,235
कुल: 4,926 सीटें

गाजियाबाद
L1: 3,540
L2: 1,350
कुल: 4,890 सीटें

भारत से लौट रहे ईरान के युद्धपोत पर हमला, 104 नौसैनिकों की मौत;

0

तेल अवीव/तेहरान: मध्य पूर्व में जारी युद्ध अब पंद्रहवें दिन में प्रवेश कर चुका है और स्थिति लगातार तनावपूर्ण बनी हुई है। ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच लड़ाई के बीच क्षेत्र के देशों में भय और असुरक्षा का माहौल है। ईरान की सेना ने हिंद महासागर में अपने युद्धपोत पर हुए अमेरिकी हमले को गंभीर मामला बताया है। ईरान के सैन्य प्रमुख अमीर हातमी ने कहा है कि यह हमला भूलने योग्य नहीं है और इसका उचित जवाब अवश्य दिया जाएगा। उनका यह भी कहना है कि डेना युद्धपोत और उसके जवानों का बलिदान हमेशा ईरान की नौसेना के इतिहास में याद रखा जाएगा और देश अपनी समुद्री सीमाओं की सुरक्षा को और मजबूत करेगा।

चार मार्च को हिंद महासागर में श्रीलंका के शहर गाले के पास ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस डेना पर हमला किया गया। इस हमले में एक सौ चार नौसैनिक शहीद हो गए। ईरान के अनुसार यह जहाज भारत में हुए बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास मिलन २०२६ से लौट रहा था और उस समय किसी युद्ध या लड़ाई में शामिल नहीं था।

ईरान की सरकारी समाचार संस्था इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज़ एजेंसी ने यह भी बताया कि डेना युद्धपोत पर हमला न केवल नौसैनिक बल की हानि का कारण बना बल्कि यह ईरानी समुद्री सामर्थ्य और राष्ट्रीय गौरव पर भी चोट है। अमीर हातमी ने कहा कि ईरान अपनी नौसेना को और अधिक सशक्त बनाएगा और समुद्री मार्गों की सुरक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगा।

इस बीच, ईरान ने महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही पर नजर रखना और नियंत्रण कड़ा कर दिया है। यह मार्ग विश्व के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि विश्व के कुल तेल आपूर्ति का लगभग बीस प्रतिशत इसी मार्ग से होकर गुजरता है। ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों को विशेष सुरक्षा उपाय अपनाने होंगे।

युद्ध का असर केवल सैन्य क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ गई है। कई देशों ने तेल और गैस आपूर्ति में संभावित बाधा को देखते हुए अपने आपातकालीन भंडार को सक्रिय करने की तैयारी शुरू कर दी है। जापान ने अपने आपातकालीन तेल भंडार खोलने का निर्णय लिया है। टोक्यो और अन्य क्षेत्रों में ईंधन की बढ़ती कीमतों का असर मछुआरों, समुद्री व्यापार और दैनिक जीवन पर स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि ईरान अब युद्ध में कमजोर पड़ चुका है और समझौता करना चाहता है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ कई सफल सैन्य कार्रवाइयां की हैं। वहीं अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाते हुए लगभग ढाई हजार समुद्री सैनिक और युद्धपोत यूएसएस त्रिपोली को क्षेत्र की ओर भेजा है।

इजराइल की सेना ने भी लेबनान में हिजबुल्लाह के लड़ाकों पर हवाई हमला किया और क्षेत्र में अपनी सक्रियता बढ़ा दी। ईरान ने अमेरिका और इजराइल को चेतावनी दी है कि अगर उनके हमले जारी रहे तो इसका जवाब अवश्य मिलेगा। ईरानी सेना के प्रवक्ता अबोलफजल शेकरची ने मिडिल ईस्ट के देशों से कहा कि वे अमेरिका और इजराइल के खिलाफ एकजुट होकर खड़े हों और अमेरिका पर भरोसा न करें।

युद्ध के कारण वैश्विक पर्यटन और यात्रा क्षेत्र भी भारी नुकसान झेल रहा है। विश्व यात्रा एवं पर्यटन परिषद का अनुमान है कि मध्य पूर्व में जारी युद्ध के कारण दुनिया भर के टूर और ट्रैवल सेक्टर को प्रतिदिन हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। भारतीय पर्यटक अब थाईलैंड, मलेशिया और जापान जैसे देशों की जगह घरेलू पर्यटन स्थलों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

वैश्विक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संघर्ष लंबे समय तक चला, तो इसका प्रभाव केवल आर्थिक ही नहीं बल्कि भू-राजनीतिक क्षेत्र में भी दिखाई देगा। तेल और गैस की आपूर्ति में बाधा से देशों की ऊर्जा सुरक्षा पर संकट बढ़ेगा। इस बीच फ्रांस और इटली ने ईरान से बातचीत शुरू की है ताकि उनके जहाज बिना खतरे के होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर सकें।

युद्ध की यह भयावह स्थिति यह सिखाती है कि “जहाँ क्रोध और हिंसा बढ़ती है, वहाँ शांति और समझौते का महत्व और भी बड़ा हो जाता है।”

जहाँ डर वहाँ दूरी, अमेरिका को पाकिस्तान से हो सावधानी : लौरा लूमर

0

वाशिंगटन: ट्रम्प समर्थक और विवादित एक्टिविस्ट लौरा लूमर ने पाकिस्तान को लेकर एक बार फिर तीखा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान दुनिया में सबसे ज्यादा इस्लामी आतंकवाद फैलाने वाला देश है। उनके अनुसार, अमेरिका को पाकिस्तान के साथ संबंधों में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए और किसी भी तरह के नजदीकी कदम उठाने से पहले पूरी सावधानी बरतनी चाहिए।

लूमर ने यह टिप्पणी इंडिया टुडे कॉन्क्लेव के मंच से की, जहाँ उन्होंने सीधे तौर पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान पर लंबे समय से जिहादी विचारधारा फैलाने और अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगते रहे हैं। उनके अनुसार, ऐसे माहौल में अमेरिका को पाकिस्तान के साथ किसी भी रणनीतिक संबंध को बनाने से पहले गंभीर समीक्षा और सतर्कता आवश्यक है।

लूमर पहले भी अपने मुस्लिम विरोधी और विवादित बयानों के कारण सुर्खियों में रही हैं। इससे पहले उन्होंने भारत को लेकर विवादित टिप्पणियाँ की थीं। उन्होंने भारतीय प्रवासियों को ‘पिछड़ा देश’ कहा और बॉलीवुड का मजाक उड़ाया। उनके बयानों ने कई बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचाई और राजनयिक तनाव के मुद्दों को जन्म दिया।

विशेषज्ञों का कहना है कि लूमर के इस बयान का असर सिर्फ मीडिया तक सीमित नहीं रहेगा। यह अमेरिका और पाकिस्तान के बीच मौजूदा राजनीतिक और सामरिक संबंधों पर भी अप्रत्यक्ष प्रभाव डाल सकता है। पाकिस्तान की वर्तमान सरकार पर पहले से ही आतंकवाद और सुरक्षा चुनौतियों को लेकर कई आरोप लगते रहे हैं। ऐसे समय में विदेशी नेताओं और विश्लेषकों की टिप्पणियाँ इस तनावपूर्ण माहौल को और बढ़ा सकती हैं।

इतिहास को देखें तो अमेरिका और पाकिस्तान के संबंध हमेशा उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं। 1970 के दशक से लेकर हाल तक, दोनों देशों ने सामरिक, आर्थिक और राजनीतिक कारणों से कई बार सहयोग किया है और कई बार दूरी भी बनाई है। आतंकवाद और जिहादी गतिविधियों को लेकर अमेरिका ने पाकिस्तान को कई चेतावनियाँ दी हैं, लेकिन हर बार क्षेत्रीय रणनीति और वैश्विक हितों ने निर्णयों को जटिल बना दिया।

लूमर के बयान ने अमेरिका में पाकिस्तान नीति पर नई बहस को जन्म दिया है। विश्लेषक मानते हैं कि पाकिस्तान की राजनीतिक स्थिरता और सुरक्षा चुनौतियों को ध्यान में रखकर ही किसी भी निर्णय पर पहुँचना चाहिए। उनका कहना है कि अमेरिका को पाकिस्तान के साथ नजदीकी संबंध बनाने से पहले अपने अंतरराष्ट्रीय हित, क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा जोखिमों का पूरा आकलन करना होगा।

लूमर की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब पाकिस्तान और अमेरिका के बीच राजनयिक संवाद लगातार जारी है, लेकिन दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी और ऐतिहासिक विवाद इसे हमेशा चुनौतीपूर्ण बनाते हैं। अमेरिकी विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे विवादित बयान नीति निर्धारण में सहायक नहीं होते, लेकिन ये मीडिया और सार्वजनिक बहस को प्रभावित करने में अत्यंत प्रभावशाली होते हैं।

इस प्रकार, लौरा लूमर ने फिर से अपनी तीखी आलोचना के माध्यम से यह संदेश दिया है कि अंतरराष्ट्रीय रिश्तों में सतर्कता, रणनीति और ऐतिहासिक संदर्भ को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार, जहाँ डर और अस्थिरता हो, वहाँ दूरी बनाए रखना ही सुरक्षित नीति है।

अमेरिकी दबाव में बदला था भारत का ऊर्जा समीकरण, हुईं थी ईरान से दूरी

0

– मजबूरी में बदली तेल नीति!

नई दिल्ली | यूथ इंडिया | विशेष रिपोर्ट: भारत और ईरान के बीच कभी ऊर्जा सहयोग की मजबूत साझेदारी थी। ईरान भारत को सस्ता कच्चा तेल देता था, भुगतान की आसान व्यवस्था थी और शिपिंग तक में रियायत मिलती थी। लेकिन वैश्विक राजनीति के दबाव, खासकर अमेरिकी प्रतिबंधों ने इस समीकरण को पूरी तरह बदल दिया। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को अपनी ऊर्जा नीति में बदलाव आर्थिक कारणों से कम और अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण अधिक करना पड़ा।

कई वर्षों तक ईरान भारत के प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल रहा। भारत को वहां से अंतरराष्ट्रीय बाजार से 2 से 5 डॉलर प्रति बैरल तक सस्ता तेल मिलता था। भुगतान व्यवस्था भी भारत के लिए सुविधाजनक थी। भारत ईरान को तेल का भुगतान रुपये में करता था और इसके लिए यूको बैंक की कोलकाता शाखा में विशेष खाता संचालित किया जाता था।
इस व्यवस्था से भारत की विदेशी मुद्रा बचती थी और ईरान उस रुपये से भारत से चावल, चाय, दवाइयां और अन्य सामान खरीदता था।

ईरान कई बार अपने टैंकरों से भारत को तेल भेजता था। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के समय जहाजों का बीमा भी ईरान खुद करता था। इससे भारत की आयात लागत कम हो जाती थी और ऊर्जा आपूर्ति स्थिर बनी रहती थी। 2018 में अमेरिका ने ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए। उस समय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प थे। अमेरिका ने स्पष्ट संकेत दिया कि जो देश ईरान से तेल खरीदना जारी रखेंगे, उनके बैंक और कंपनियों पर भी आर्थिक प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।

भारत के लिए यह स्थिति बेहद संवेदनशील थी, क्योंकि अमेरिका के साथ उसका व्यापार, निवेश और रक्षा सहयोग अरबों डॉलर का है। ऐसे में भारत के लिए अमेरिकी वित्तीय प्रणाली से टकराव का जोखिम उठाना संभव नहीं था। इन परिस्थितियों के चलते भारत ने 2019 में ईरान से कच्चे तेल का आयात लगभग बंद कर दिया। इसके बाद भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए नए स्रोत तलाशने पड़े।भारत ने इसके बाद रसिया , इराक और सऊदी अरबिया जैसे देशों से तेल आयात बढ़ा दिया।

रणनीतिक रिश्ते अभी भी कायम

हालांकि तेल व्यापार लगभग बंद हो गया, लेकिन भारत और ईरान के बीच रणनीतिक संबंध पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं।
दोनों देश अभी भी चाबहार पोर्ट परियोजना पर सहयोग कर रहे हैं, जिसे भारत के लिए मध्य एशिया और अफगानिस्तान तक पहुंच का महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है।

भारत और ईरान के बीच ऊर्जा सहयोग आर्थिक रूप से लाभकारी था। लेकिन वैश्विक राजनीति और अमेरिकी प्रतिबंधों के दबाव ने भारत को अपनी नीति बदलने के लिए मजबूर कर दिया। तेल केवल ऊर्जा का स्रोत नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति और कूटनीति का भी बड़ा हथियार है।