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Friday, March 20, 2026
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आरटीई के तहत लाखों बच्चों के लिए खुले निजी स्कूलों के दरवाजे

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योगी सरकार की पहल से प्रथम और द्वितीय चरणों में 1.56 लाख से अधिक बच्चों को मिला प्रवेश

प्रथम चरण में प्रदेश भर में 1.09 लाख से अधिक सीटों का हुआ आवंटन

द्वितीय लॉटरी में 47 हजार से ज्यादा बच्चों को निजी स्कूलों में मिला प्रवेश

लखनऊ, कानपुर नगर और आगरा जैसे जनपदों में सर्वाधिक छात्रों को मिला प्रवेश का अवसर

लखनऊ, 14 मार्च। योगी सरकार शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत आर्थिक रूप से कमजोर एवं वंचित वर्ग के बच्चों को निजी विद्यालयों में निशुल्क शिक्षा दिलाने की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। पारदर्शी ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से आवेदन, सत्यापन और लॉटरी प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया जा रहा है।

प्रदेश में आरटीई के अंतर्गत प्रथम और द्वितीय चरण में मिलाकर 1.56 लाख से अधिक छात्रों को निजी स्कूलों में प्रवेश सुनिश्चित किया गया है। प्रथम चरण में लगभग 1.09 लाख सीटों का आवंटन किया जा चुका है जबकि द्वितीय लॉटरी में 47 हजार से अधिक बच्चों को निजी स्कूलों में प्रवेश मिला है। इस प्रकार बड़ी संख्या में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए बेहतर शिक्षा के अवसर सुनिश्चित किए गए हैं।

बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार प्रदेश के विभिन्न जिलों में बड़ी संख्या में आवेदन सत्यापित किए गए। आरटीई के तहत सर्वाधिक प्रवेश लखनऊ, कानपुर नगर, आगरा, मुरादाबाद और बुलंदशहर जैसे जनपदों में हुए हैं, जहां हजारों बच्चों को निजी विद्यालयों में पढ़ने का अवसर मिला है। इसी प्रकार अलीगढ़, गौतम बुद्ध नगर, गाजियाबाद, फीरोजाबाद और बरेली जैसे जिलों में भी हजारों बच्चों को निजी स्कूलों में प्रवेश का अवसर मिला है।

आरटीई अधिनियम के तहत निजी विद्यालयों में निर्धारित सीटों पर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और वंचित वर्ग के बच्चों को प्रवेश दिया जाता है। योगी सरकार ने इस व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन और पारदर्शी बनाया है ताकि चयन प्रक्रिया में निष्पक्षता सुनिश्चित हो सके। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मानना है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा समाज के हर वर्ग के बच्चों तक पहुंचनी चाहिए। इसी उद्देश्य के साथ प्रदेश सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे भी निजी विद्यालयों में पढ़कर अपने भविष्य को बेहतर बना सकें।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार आरटीई के तहत प्रवेश प्रक्रिया के आगामी चरण भी जल्द पूरे किए जाएंगे ताकि अधिक से अधिक पात्र बच्चों को इस योजना का लाभ मिल सके।

सर्वाधिक प्रवेश वाले जनपद

लखनऊ
L1: 12,097
L2: 3,489
कुल: 15,586 सीटें

कानपुर नगर
L1: 7,128
L2: 1,822
कुल: 8,950 सीटें

वाराणसी
L1: 7,140
L2: 989
कुल: 8,129 सीटें

आगरा
L1: 4,989
L2: 1,771
कुल: 6,760 सीटें

मुरादाबाद
L1: 4,080
L2: 1,890
कुल: 5,970 सीटें

अलीगढ़
L1: 4172
L2: 1189
कुल: 5,361 सीटें

बुलंदशहर
L1: 3,761
L2: 1,584
कुल: 5,345 सीटें

मेरठ
L1: 3,691
L2: 1,235
कुल: 4,926 सीटें

गाजियाबाद
L1: 3,540
L2: 1,350
कुल: 4,890 सीटें

भारत से लौट रहे ईरान के युद्धपोत पर हमला, 104 नौसैनिकों की मौत;

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तेल अवीव/तेहरान: मध्य पूर्व में जारी युद्ध अब पंद्रहवें दिन में प्रवेश कर चुका है और स्थिति लगातार तनावपूर्ण बनी हुई है। ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच लड़ाई के बीच क्षेत्र के देशों में भय और असुरक्षा का माहौल है। ईरान की सेना ने हिंद महासागर में अपने युद्धपोत पर हुए अमेरिकी हमले को गंभीर मामला बताया है। ईरान के सैन्य प्रमुख अमीर हातमी ने कहा है कि यह हमला भूलने योग्य नहीं है और इसका उचित जवाब अवश्य दिया जाएगा। उनका यह भी कहना है कि डेना युद्धपोत और उसके जवानों का बलिदान हमेशा ईरान की नौसेना के इतिहास में याद रखा जाएगा और देश अपनी समुद्री सीमाओं की सुरक्षा को और मजबूत करेगा।

चार मार्च को हिंद महासागर में श्रीलंका के शहर गाले के पास ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस डेना पर हमला किया गया। इस हमले में एक सौ चार नौसैनिक शहीद हो गए। ईरान के अनुसार यह जहाज भारत में हुए बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास मिलन २०२६ से लौट रहा था और उस समय किसी युद्ध या लड़ाई में शामिल नहीं था।

ईरान की सरकारी समाचार संस्था इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज़ एजेंसी ने यह भी बताया कि डेना युद्धपोत पर हमला न केवल नौसैनिक बल की हानि का कारण बना बल्कि यह ईरानी समुद्री सामर्थ्य और राष्ट्रीय गौरव पर भी चोट है। अमीर हातमी ने कहा कि ईरान अपनी नौसेना को और अधिक सशक्त बनाएगा और समुद्री मार्गों की सुरक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगा।

इस बीच, ईरान ने महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही पर नजर रखना और नियंत्रण कड़ा कर दिया है। यह मार्ग विश्व के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि विश्व के कुल तेल आपूर्ति का लगभग बीस प्रतिशत इसी मार्ग से होकर गुजरता है। ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों को विशेष सुरक्षा उपाय अपनाने होंगे।

युद्ध का असर केवल सैन्य क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ गई है। कई देशों ने तेल और गैस आपूर्ति में संभावित बाधा को देखते हुए अपने आपातकालीन भंडार को सक्रिय करने की तैयारी शुरू कर दी है। जापान ने अपने आपातकालीन तेल भंडार खोलने का निर्णय लिया है। टोक्यो और अन्य क्षेत्रों में ईंधन की बढ़ती कीमतों का असर मछुआरों, समुद्री व्यापार और दैनिक जीवन पर स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि ईरान अब युद्ध में कमजोर पड़ चुका है और समझौता करना चाहता है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ कई सफल सैन्य कार्रवाइयां की हैं। वहीं अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाते हुए लगभग ढाई हजार समुद्री सैनिक और युद्धपोत यूएसएस त्रिपोली को क्षेत्र की ओर भेजा है।

इजराइल की सेना ने भी लेबनान में हिजबुल्लाह के लड़ाकों पर हवाई हमला किया और क्षेत्र में अपनी सक्रियता बढ़ा दी। ईरान ने अमेरिका और इजराइल को चेतावनी दी है कि अगर उनके हमले जारी रहे तो इसका जवाब अवश्य मिलेगा। ईरानी सेना के प्रवक्ता अबोलफजल शेकरची ने मिडिल ईस्ट के देशों से कहा कि वे अमेरिका और इजराइल के खिलाफ एकजुट होकर खड़े हों और अमेरिका पर भरोसा न करें।

युद्ध के कारण वैश्विक पर्यटन और यात्रा क्षेत्र भी भारी नुकसान झेल रहा है। विश्व यात्रा एवं पर्यटन परिषद का अनुमान है कि मध्य पूर्व में जारी युद्ध के कारण दुनिया भर के टूर और ट्रैवल सेक्टर को प्रतिदिन हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। भारतीय पर्यटक अब थाईलैंड, मलेशिया और जापान जैसे देशों की जगह घरेलू पर्यटन स्थलों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

वैश्विक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संघर्ष लंबे समय तक चला, तो इसका प्रभाव केवल आर्थिक ही नहीं बल्कि भू-राजनीतिक क्षेत्र में भी दिखाई देगा। तेल और गैस की आपूर्ति में बाधा से देशों की ऊर्जा सुरक्षा पर संकट बढ़ेगा। इस बीच फ्रांस और इटली ने ईरान से बातचीत शुरू की है ताकि उनके जहाज बिना खतरे के होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर सकें।

युद्ध की यह भयावह स्थिति यह सिखाती है कि “जहाँ क्रोध और हिंसा बढ़ती है, वहाँ शांति और समझौते का महत्व और भी बड़ा हो जाता है।”

जहाँ डर वहाँ दूरी, अमेरिका को पाकिस्तान से हो सावधानी : लौरा लूमर

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वाशिंगटन: ट्रम्प समर्थक और विवादित एक्टिविस्ट लौरा लूमर ने पाकिस्तान को लेकर एक बार फिर तीखा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान दुनिया में सबसे ज्यादा इस्लामी आतंकवाद फैलाने वाला देश है। उनके अनुसार, अमेरिका को पाकिस्तान के साथ संबंधों में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए और किसी भी तरह के नजदीकी कदम उठाने से पहले पूरी सावधानी बरतनी चाहिए।

लूमर ने यह टिप्पणी इंडिया टुडे कॉन्क्लेव के मंच से की, जहाँ उन्होंने सीधे तौर पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान पर लंबे समय से जिहादी विचारधारा फैलाने और अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगते रहे हैं। उनके अनुसार, ऐसे माहौल में अमेरिका को पाकिस्तान के साथ किसी भी रणनीतिक संबंध को बनाने से पहले गंभीर समीक्षा और सतर्कता आवश्यक है।

लूमर पहले भी अपने मुस्लिम विरोधी और विवादित बयानों के कारण सुर्खियों में रही हैं। इससे पहले उन्होंने भारत को लेकर विवादित टिप्पणियाँ की थीं। उन्होंने भारतीय प्रवासियों को ‘पिछड़ा देश’ कहा और बॉलीवुड का मजाक उड़ाया। उनके बयानों ने कई बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचाई और राजनयिक तनाव के मुद्दों को जन्म दिया।

विशेषज्ञों का कहना है कि लूमर के इस बयान का असर सिर्फ मीडिया तक सीमित नहीं रहेगा। यह अमेरिका और पाकिस्तान के बीच मौजूदा राजनीतिक और सामरिक संबंधों पर भी अप्रत्यक्ष प्रभाव डाल सकता है। पाकिस्तान की वर्तमान सरकार पर पहले से ही आतंकवाद और सुरक्षा चुनौतियों को लेकर कई आरोप लगते रहे हैं। ऐसे समय में विदेशी नेताओं और विश्लेषकों की टिप्पणियाँ इस तनावपूर्ण माहौल को और बढ़ा सकती हैं।

इतिहास को देखें तो अमेरिका और पाकिस्तान के संबंध हमेशा उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं। 1970 के दशक से लेकर हाल तक, दोनों देशों ने सामरिक, आर्थिक और राजनीतिक कारणों से कई बार सहयोग किया है और कई बार दूरी भी बनाई है। आतंकवाद और जिहादी गतिविधियों को लेकर अमेरिका ने पाकिस्तान को कई चेतावनियाँ दी हैं, लेकिन हर बार क्षेत्रीय रणनीति और वैश्विक हितों ने निर्णयों को जटिल बना दिया।

लूमर के बयान ने अमेरिका में पाकिस्तान नीति पर नई बहस को जन्म दिया है। विश्लेषक मानते हैं कि पाकिस्तान की राजनीतिक स्थिरता और सुरक्षा चुनौतियों को ध्यान में रखकर ही किसी भी निर्णय पर पहुँचना चाहिए। उनका कहना है कि अमेरिका को पाकिस्तान के साथ नजदीकी संबंध बनाने से पहले अपने अंतरराष्ट्रीय हित, क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा जोखिमों का पूरा आकलन करना होगा।

लूमर की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब पाकिस्तान और अमेरिका के बीच राजनयिक संवाद लगातार जारी है, लेकिन दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी और ऐतिहासिक विवाद इसे हमेशा चुनौतीपूर्ण बनाते हैं। अमेरिकी विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे विवादित बयान नीति निर्धारण में सहायक नहीं होते, लेकिन ये मीडिया और सार्वजनिक बहस को प्रभावित करने में अत्यंत प्रभावशाली होते हैं।

इस प्रकार, लौरा लूमर ने फिर से अपनी तीखी आलोचना के माध्यम से यह संदेश दिया है कि अंतरराष्ट्रीय रिश्तों में सतर्कता, रणनीति और ऐतिहासिक संदर्भ को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार, जहाँ डर और अस्थिरता हो, वहाँ दूरी बनाए रखना ही सुरक्षित नीति है।

अमेरिकी दबाव में बदला था भारत का ऊर्जा समीकरण, हुईं थी ईरान से दूरी

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– मजबूरी में बदली तेल नीति!

नई दिल्ली | यूथ इंडिया | विशेष रिपोर्ट: भारत और ईरान के बीच कभी ऊर्जा सहयोग की मजबूत साझेदारी थी। ईरान भारत को सस्ता कच्चा तेल देता था, भुगतान की आसान व्यवस्था थी और शिपिंग तक में रियायत मिलती थी। लेकिन वैश्विक राजनीति के दबाव, खासकर अमेरिकी प्रतिबंधों ने इस समीकरण को पूरी तरह बदल दिया। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को अपनी ऊर्जा नीति में बदलाव आर्थिक कारणों से कम और अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण अधिक करना पड़ा।

कई वर्षों तक ईरान भारत के प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल रहा। भारत को वहां से अंतरराष्ट्रीय बाजार से 2 से 5 डॉलर प्रति बैरल तक सस्ता तेल मिलता था। भुगतान व्यवस्था भी भारत के लिए सुविधाजनक थी। भारत ईरान को तेल का भुगतान रुपये में करता था और इसके लिए यूको बैंक की कोलकाता शाखा में विशेष खाता संचालित किया जाता था।
इस व्यवस्था से भारत की विदेशी मुद्रा बचती थी और ईरान उस रुपये से भारत से चावल, चाय, दवाइयां और अन्य सामान खरीदता था।

ईरान कई बार अपने टैंकरों से भारत को तेल भेजता था। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के समय जहाजों का बीमा भी ईरान खुद करता था। इससे भारत की आयात लागत कम हो जाती थी और ऊर्जा आपूर्ति स्थिर बनी रहती थी। 2018 में अमेरिका ने ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए। उस समय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प थे। अमेरिका ने स्पष्ट संकेत दिया कि जो देश ईरान से तेल खरीदना जारी रखेंगे, उनके बैंक और कंपनियों पर भी आर्थिक प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।

भारत के लिए यह स्थिति बेहद संवेदनशील थी, क्योंकि अमेरिका के साथ उसका व्यापार, निवेश और रक्षा सहयोग अरबों डॉलर का है। ऐसे में भारत के लिए अमेरिकी वित्तीय प्रणाली से टकराव का जोखिम उठाना संभव नहीं था। इन परिस्थितियों के चलते भारत ने 2019 में ईरान से कच्चे तेल का आयात लगभग बंद कर दिया। इसके बाद भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए नए स्रोत तलाशने पड़े।भारत ने इसके बाद रसिया , इराक और सऊदी अरबिया जैसे देशों से तेल आयात बढ़ा दिया।

रणनीतिक रिश्ते अभी भी कायम

हालांकि तेल व्यापार लगभग बंद हो गया, लेकिन भारत और ईरान के बीच रणनीतिक संबंध पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं।
दोनों देश अभी भी चाबहार पोर्ट परियोजना पर सहयोग कर रहे हैं, जिसे भारत के लिए मध्य एशिया और अफगानिस्तान तक पहुंच का महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है।

भारत और ईरान के बीच ऊर्जा सहयोग आर्थिक रूप से लाभकारी था। लेकिन वैश्विक राजनीति और अमेरिकी प्रतिबंधों के दबाव ने भारत को अपनी नीति बदलने के लिए मजबूर कर दिया। तेल केवल ऊर्जा का स्रोत नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति और कूटनीति का भी बड़ा हथियार है।

एसआई भर्ती परीक्षा के झांसे में आए अभ्यर्थी, एसटीएफ ने ठगी करने वाले गिरोह के सदस्य को आगरा से किया गिरफ्तार

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लखनऊ: प्रदेश में उप निरीक्षक नागरिक पुलिस और समकक्ष पदों की सीधी भर्ती-2025 की लिखित परीक्षा में अभ्यर्थियों को फर्जी प्रश्नपत्र दिलाने के झांसे में ठगी करने वाले गिरोह के एक सदस्य को एसटीएफ ने आगरा से गिरफ्तार किया है। आरोपी आयुष बघेल टेलीग्राम पर चैनल बनाकर अभ्यर्थियों को फर्जी प्रश्नपत्र भेजता था और उनसे ऑनलाइन धनराशि वसूलता था।

एसटीएफ के अनुसार, आयुष बघेल “यूपी एसआई यूपी पुलिस-2026”, “रिजल्ट पैनल प्राइवेट” और “यूपी एसआई परीक्षा प्रश्नपत्र-2026” नाम के चैनलों पर अभ्यर्थियों को उपनिरीक्षक भर्ती परीक्षा का प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का झांसा देता था। आरोपी प्रश्नपत्र के पहले पेज को एडिट कर असली बताकर भेजता और फिर क्यूआर कोड तथा भुगतान पहचान संख्या के माध्यम से पैसे वसूलता था।

इस मामले में थाना हुसैनगंज में उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अध्यादेश-2024 और आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। एसटीएफ को सूचना मिली कि गिरोह का एक सदस्य आगरा में मौजूद है, जिसके बाद न्यू आगरा थाना क्षेत्र की इंजीनियर्स कॉलोनी से आरोपी को गिरफ्तार किया गया।

पूछताछ में आयुष बघेल ने अपने कार्यों की स्वीकृति दी और बताया कि इस तरह अभ्यर्थियों का भरोसा जीतकर उनसे धनराशि ली जाती थी। एसटीएफ अन्य सदस्यों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड परीक्षा के मद्देनजर सोशल मीडिया पर लगातार निगरानी की जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे फर्जी चैनलों और ठगी के प्रयास अभ्यर्थियों के लिए गंभीर खतरा हैं और उन्हें सतर्क रहना चाहिए।

इस गिरफ्तारी से यह संदेश भी गया है कि परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया में धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ एसटीएफ और पुलिस सख्त कार्रवाई कर रही है, ताकि परीक्षा की निष्पक्षता और अभ्यर्थियों का भरोसा बनाए रखा जा सके।

दर्दनाक सड़क हादसा: दो युवकों की मौत पर गुस्साए लोग बाजार में जाम,

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अंबेडकरनगर। जिले में सड़क पर हुए एक भयावह हादसे ने इलाके को हिला दिया। दुर्घटना में दो युवकों की मौत हो गई, जिससे परिवार और स्थानीय लोग गहरे शोक में डूब गए। हादसा दोपहर के समय उस वक्त हुआ, जब दोनों युवक अपनी मंज़िल की ओर जा रहे थे और अचानक तेज रफ्तार वाहन की चपेट में आ गए।

जैसे ही घटना की जानकारी लोगों को मिली, आसपास का समुदाय सड़क पर इकट्ठा हो गया। गुस्साए लोग राजे सुल्तानपुर के मुख्य बाजार में पहुंच गए और प्रशासन से तुरंत कार्रवाई करने की मांग करते हुए सड़क जाम कर दिया। प्रदर्शन करीब एक घंटे तक जारी रहा, जिससे बाजार और मुख्य मार्ग दोनों प्रभावित हुए।

पुलिस ने स्थिति पर तुरंत नियंत्रण पाने की कोशिश की। मौके पर पहुंचे अपर पुलिस अधीक्षक श्याम देव ने प्रदर्शनकारियों और मृतकों के परिवार से बात की, उन्हें शांत किया और जाम हटवाया। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस मामले में दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और हादसे की पूरी जांच होगी।

स्थानीय प्रशासन ने यह भी कहा कि सड़क सुरक्षा को लेकर लगातार निगरानी रखी जा रही है और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए अतिरिक्त कदम उठाए जाएंगे। लोगों को भी अपनी सुरक्षा और सड़क नियमों का पालन करने की आवश्यकता है।

स्थानीय नागरिक हादसे की गंभीरता को देखकर सड़क सुरक्षा की दिशा में ठोस कदम उठाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में किसी और की जान न जाए और सड़कें सुरक्षित बनें।