बरेली | यूथ इंडिया
बरेली जिले में स्वास्थ्य विभाग की 27 एम्बुलेंस कंडम घोषित कर दी गई हैं। ये सभी एम्बुलेंस लंबे समय से उपयोग के लायक नहीं थीं और फिलहाल 300 बेड अस्पताल परिसर में खड़ी हुई हैं।
जानकारी के अनुसार इन एम्बुलेंस को नीलाम करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इसके लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) ने शासन से अनुमति मांगी है। अनुमति मिलने के बाद कंडम घोषित वाहनों की नीलामी की जाएगी।
वायरल हुआ एम्बुलेंस का वीडियो
इन कंडम एम्बुलेंस का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसमें अस्पताल परिसर में खड़ी कई जर्जर एम्बुलेंस दिखाई दे रही हैं। वीडियो सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
बताया जा रहा है कि ये सभी एम्बुलेंस बरेली के 300 बेड अस्पताल परिसर में लंबे समय से खड़ी हैं। वाहन खराब और अनुपयोगी होने के कारण इन्हें कंडम घोषित कर दिया गया है।
सीएमओ के अनुसार शासन से अनुमति मिलने के बाद इन एम्बुलेंस की नीलामी कर दी जाएगी। इससे अस्पताल परिसर में खड़े जर्जर वाहनों को हटाया जा सकेगा और स्थान खाली हो जाएगा।
पूरा मामला बरेली के बारादरी थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है।
बरेली में 27 एम्बुलेंस कंडम घोषित, नीलामी की तैयारी
उत्कृष्ट कार्य करने वाले 8 बीएलओ सम्मानित, डीएम ने दिया प्रशस्ति पत्र व नगद पुरस्कार
फर्रुखाबाद | यूथ इंडिया |
जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी ने कलेक्ट्रेट सभागार फतेहगढ़ में आयोजित कार्यक्रम में त्रिस्तरीय पंचायत निर्वाचन की पंचायत निर्वाचक नामावली के वृहद पुनरीक्षण कार्य में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 8 बीएलओ को सम्मानित किया।
इस दौरान ई-बीएलओ एप पर मतदाताओं की फीडिंग में उत्कृष्ट कार्य करने वाले बीएलओ को प्रशस्ति पत्र के साथ प्रोत्साहन धनराशि भी प्रदान की गई। जिलाधिकारी ने कहा कि मतदाता सूची का सही और समय पर अद्यतन होना लोकतंत्र की मजबूती के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
इन बीएलओ में राजेश कुमार सिंह – प्रथम स्थान – ₹10,000,श्याम जी अवस्थी – द्वितीय स्थान –₹8,000,कालीचरन – तृतीय स्थान – ₹6,000,भूपेंद्र दीक्षित – सांत्वना पुरस्कार – ₹3,000,आशीष गुप्ता – ₹3,000
ममता देवी – ₹3,000,ममता दीक्षित – ₹3,000,नर सिंह – ₹3,000 प्रशस्ति पत्र सहित प्रदान किये गए।
जिलाधिकारी ने सभी सम्मानित बीएलओ की सराहना करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से पंचायत चुनाव के लिए मतदाता सूची को सटीक और अद्यतन बनाने में महत्वपूर्ण सहयोग मिला है।
कार्यक्रम में सहायक निर्वाचन अधिकारी पंचायत सहित संबंधित विभागों के अधिकारी भी मौजूद रहे।
खबर लिखने से नाराज़ दबंगों ने पत्रकार को पीटा
फतेहपुर | यूथ इंडिया
फतेहपुर जिले में एक पत्रकार पर दबंगों द्वारा हमला किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि खबर प्रकाशित करने से नाराज़ कुछ लोगों ने पत्रकार को घेरकर जमकर मारपीट की। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया।
जानकारी के अनुसार पत्रकार ने क्षेत्र में चल रहे अवैध मिट्टी खनन से जुड़ी खबर प्रकाशित की थी। इसी बात से नाराज़ बताए जा रहे दबंगों ने पत्रकार को रोककर उसके साथ मारपीट कर दी। बताया जा रहा है कि हमलावर स्थानीय खनन माफिया से जुड़े लोग हैं।
खबर से नाराज़ होकर किया हमला
स्थानीय लोगों के मुताबिक पत्रकार लगातार इलाके में अवैध गतिविधियों को लेकर खबरें लिख रहे थे। इसी कारण दबंग उनसे नाराज़ थे और मौका मिलते ही उन्होंने हमला कर दिया।
कल्याणपुर थाना क्षेत्र का मामला
घटना फतेहपुर के कल्याणपुर थाना क्षेत्र की बताई जा रही है। मारपीट में पत्रकार को चोटें आई हैं। मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
पत्रकार संगठनों ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है और ऐसी घटनाएं लोकतंत्र के लिए चिंताजनक हैं।
दीप प्रज्वलित कर लोक अदालत का उद्घाटन, मां सरस्वती को अर्पित किए पुष्प
फर्रुखाबाद | यूथ इंडिया
राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ पारंपरिक विधि-विधान के साथ किया गया। इस अवसर पर जनपद न्यायाधीश ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया तथा मां सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर न्यायिक कार्यवाही की मंगलकामना की।
कार्यक्रम में न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं और न्यायालय कर्मियों की उपस्थिति में लोक अदालत की कार्यवाही प्रारंभ की गई। इस दौरान जनपद न्यायाधीश ने कहा कि लोक अदालत का उद्देश्य आम लोगों को सुलभ, त्वरित और कम खर्च में न्याय उपलब्ध कराना है।
उन्होंने कहा कि लोक अदालत के माध्यम से आपसी सहमति से विवादों का समाधान किया जाता है, जिससे न्यायालयों में लंबित मामलों का निस्तारण भी तेजी से होता है और पक्षकारों को लंबे समय तक मुकदमेबाजी से राहत मिलती है।
लोक अदालत में बैंक ऋण, मोटर दुर्घटना, पारिवारिक विवाद, विद्युत बिल, राजस्व एवं अन्य समझौता योग्य मामलों का निस्तारण किया जाता है। इसके माध्यम से बड़ी संख्या में मामलों का निपटारा कर लोगों को त्वरित न्याय देने का प्रयास किया जाता है।
कार्यक्रम में न्यायिक अधिकारियों ने अधिक से अधिक मामलों को आपसी सहमति से निपटाने का आह्वान किया, ताकि न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी और सरल बनाया जा सके।
गैस संकट और राजनीति: असली सवाल जनता की रसोई का
देश की संसद में जब भी किसी मुद्दे को लेकर तीखी बहस होती है तो उसका सीधा संबंध आम जनता की जिंदगी से होता है। हाल ही में राज्यसभा में रसोई गैस की उपलब्धता और कीमतों को लेकर हुई बहस ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या देश में ऊर्जा सुरक्षा और आम लोगों की रसोई वास्तव में सुरक्षित है, या यह मुद्दा केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित होकर रह गया है।
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने संसद में गैस संकट का मुद्दा उठाते हुए केंद्र सरकार पर सवाल खड़े किए। उनका आरोप था कि देश के कई हिस्सों में लोग गैस सिलेंडर के लिए परेशान हैं और इस गंभीर विषय पर सरकार की ओर से स्पष्ट जवाब नहीं मिल रहा। यह बयान राजनीतिक रूप से भले ही तीखा हो, लेकिन इसके पीछे छिपा मूल सवाल बेहद महत्वपूर्ण है—क्या देश में रसोई गैस की आपूर्ति और कीमतें आम आदमी की पहुंच में हैं?
बढ़ती निर्भरता और ऊर्जा सुरक्षा
भारत में पिछले एक दशक में एलपीजी कनेक्शनों की संख्या तेजी से बढ़ी है। सरकारी योजनाओं के जरिए करोड़ों गरीब परिवारों तक गैस कनेक्शन पहुंचाया गया, जिससे धुएं से भरे चूल्हों की जगह गैस स्टोव ने ली। आज देश में लगभग 21 करोड़ से अधिक परिवार एलपीजी पर निर्भर हैं।
लेकिन इसके साथ ही एक बड़ी चुनौती भी सामने आती है—भारत अपनी जरूरत की बड़ी मात्रा में गैस विदेशों से आयात करता है। अनुमान है कि देश की कुल एलपीजी जरूरत का लगभग दो-तिहाई हिस्सा आयात से पूरा होता है। हर साल करीब 30 से 31 मिलियन मीट्रिक टन एलपीजी की खपत होती है।
इसका सीधा अर्थ यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव, युद्ध या भू-राजनीतिक तनाव का असर भारत की रसोई तक पहुंच सकता है।
गैस सिलेंडर केवल एक ईंधन नहीं है, बल्कि करोड़ों परिवारों के दैनिक जीवन का हिस्सा है। खासकर मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों के लिए रसोई गैस की कीमत और उपलब्धता बेहद संवेदनशील मुद्दा है।
यदि किसी क्षेत्र में गैस की आपूर्ति बाधित होती है या कीमतों में अचानक वृद्धि होती है, तो इसका असर सीधे घरों की रसोई पर पड़ता है। कई बार लोग मजबूरी में फिर से लकड़ी या कोयले जैसे पारंपरिक ईंधनों की ओर लौटने लगते हैं, जिससे स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों प्रभावित होते हैं।
भारतीय लोकतंत्र में विपक्ष का काम सरकार से सवाल पूछना है और सरकार की जिम्मेदारी उन सवालों का जवाब देना। लेकिन कई बार संसद की बहस समाधान की दिशा में जाने के बजाय केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रह जाती है।
गैस संकट जैसे मुद्दे पर भी यही स्थिति देखने को मिलती है। विपक्ष सरकार पर ऊर्जा नीति को लेकर सवाल उठाता है, जबकि सरकार वैश्विक परिस्थितियों और आपूर्ति प्रबंधन का हवाला देती है।
सच्चाई यह है कि इस समस्या का समाधान केवल राजनीतिक बयानबाजी से नहीं बल्कि ठोस नीतिगत कदमों से निकल सकता है।
ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में भारत को दीर्घकालिक रणनीति अपनाने की जरूरत है। इसमें कई पहलू शामिल हो सकते हैं—
घरेलू गैस उत्पादन बढ़ाना
आयात के स्रोतों में विविधता लाना
वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देना,
गरीब परिवारों के लिए सब्सिडी और सहायता योजनाओं को मजबूत करना,
साथ ही गैस वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने की भी आवश्यकता है, ताकि कालाबाजारी या कृत्रिम संकट की स्थिति पैदा न हो।
गैस सिलेंडर का मुद्दा केवल राजनीति का विषय नहीं होना चाहिए। यह करोड़ों भारतीय परिवारों की रोजमर्रा की जरूरत से जुड़ा सवाल है। संसद में होने वाली बहस तब सार्थक होगी जब उसका परिणाम आम जनता को राहत देने वाली नीतियों और फैसलों के रूप में सामने आए।
देश की राजनीति में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन जब बात जनता की रसोई और ऊर्जा सुरक्षा की हो तो प्राथमिकता समाधान को मिलनी चाहिए, न कि केवल आरोप-प्रत्यारोप को।
संसद में गूंजा गैस संकट का मुद्दा, संजय सिंह ने सरकार को घेरा
नई दिल्ली | देश में गैस सिलेंडर की कथित कमी और बढ़ती कीमतों का मुद्दा संसद तक पहुंच गया है। राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने सरकार को घेरते हुए कहा कि देश के कई हिस्सों में लोग गैस सिलेंडर के लिए परेशान हैं, लेकिन केंद्र सरकार इस पर स्पष्ट जवाब नहीं दे रही है।
संसद में बोलते हुए संजय सिंह ने कहा कि गांव से लेकर शहर तक लोग रसोई गैस की समस्या से जूझ रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब देश के कई इलाकों में गैस सिलेंडर के लिए लोग लाइन में लगे हैं, तब प्रधानमंत्री सामने आकर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं कर रहे हैं।
संसद में चर्चा की मांग
संजय सिंह ने राज्यसभा में इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा कराने की मांग भी की। उन्होंने कहा कि एलपीजी की आपूर्ति, कीमतों और कालाबाजारी जैसे मामलों पर सरकार को संसद में जवाब देना चाहिए।
आंकड़ों के साथ उठाया मुद्दा
संजय सिंह ने कहा कि देश में आज करोड़ों परिवार रसोई गैस पर निर्भर हैं।
भारत में करीब 21 करोड़ से अधिक एलपीजी उपभोक्ता हैं।
देश में हर साल लगभग 31 मिलियन मीट्रिक टन एलपीजी की खपत होती है।
भारत अपनी जरूरत का लगभग दो-तिहाई से ज्यादा एलपीजी विदेशों से आयात करता है।
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय हालात और सप्लाई में बाधा का असर सीधे आम लोगों पर पड़ता है। ऐसे में सरकार को गैस की उपलब्धता और कीमतों को लेकर स्पष्ट नीति बतानी चाहिए।
वहीं केंद्र सरकार की ओर से कहा गया है कि देश में घरेलू गैस की आपूर्ति सामान्य है और किसी प्रकार की कमी नहीं है। सरकार का दावा है कि वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद देश में एलपीजी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं।
गैस संकट को लेकर संसद में हुई इस तीखी बहस के बाद राजनीतिक माहौल एक बार फिर गर्म हो गया है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और जोर पकड़ सकता है।







