बीजिंग। वैश्विक तनाव के बीच एक अहम कूटनीतिक पहल सामने आई है। डोनाल्ड ट्रंप अब 14-15 मई को चीन का दौरा करेंगे, जहां उनकी मुलाकात राष्ट्रपति शी जिनपिंग से होगी। इस बैठक को अंतरराष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
व्हाइट हाउस के अनुसार, यह यात्रा पहले मार्च के अंत में प्रस्तावित थी, लेकिन ईरान के साथ बढ़ते सैन्य तनाव के कारण इसे स्थगित कर दिया गया था। अब नई तारीखों के साथ यह दौरा फिर तय किया गया है।
अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह शिखर बैठक वैश्विक आर्थिक और सुरक्षा सहयोग के लिए बेहद अहम साबित हो सकती है। दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
बताया गया है कि ट्रंप के साथ उनकी पत्नी मेलानिया ट्रंप भी इस दौरे पर जाएंगी। वहीं, भविष्य में शी जिनपिंग और उनकी पत्नी की अमेरिका यात्रा भी प्रस्तावित है, जिससे द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने कहा कि दोनों देशों के नेताओं के बीच संवाद वैश्विक स्थिरता के लिए जरूरी है और यह बैठक उसी दिशा में एक बड़ा कदम होगी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप और शी जिनपिंग की पिछली मुलाकात पिछले साल अक्टूबर में एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान हुई थी। इसके बाद से दोनों नेताओं के बीच यह पहली आमने-सामने की बातचीत होगी।
हालांकि, इस मुलाकात का समय ऐसे दौर में तय हुआ है, जब पश्चिम एशिया में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। अमेरिका और इस्राइल की कार्रवाई के बाद पूरे क्षेत्र में संघर्ष फैल गया है।
इस संघर्ष का असर केवल क्षेत्रीय स्तर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ा है। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव ने तेल और गैस की आपूर्ति को प्रभावित किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप और शी जिनपिंग की यह बैठक सिर्फ द्विपक्षीय मुद्दों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसमें पश्चिम एशिया संकट, व्यापार और वैश्विक अर्थव्यवस्था जैसे विषय भी शामिल होंगे।
ट्रंप ने पहले भी संकेत दिया था कि वह चीन के साथ संबंधों को बेहतर बनाना चाहते हैं और सहयोग के नए रास्ते तलाशना चाहते हैं। वहीं, चीन भी इस वार्ता को सकारात्मक नजरिए से देख रहा है।
माना जा रहा है कि यह बैठक दोनों देशों के बीच तनाव कम करने और सहयोग बढ़ाने की दिशा में अहम भूमिका निभा सकती है।


