डिजिटल अरेस्ट के सात मामलों में 1.01 करोड़ रुपये से अधिक रकम फ्रीज, 16.81 लाख रुपये पीड़ितों को लौटाए
लखनऊ। साइबर ठगी के पीड़ितों की फ्रीज या होल्ड धनराशि वापस कराने के लिए साइबर क्राइम पुलिस ने एमआरएम पोर्टल की सुविधा शुरू की है। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि साइबर ठगी होने पर तत्काल 1930 पर सूचना दें और एमआरएम के माध्यम से रकम वापसी के लिए आवेदन करें।
राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) और सीएफसीएफआरएमएस के तहत फ्रीज अथवा लियन खातों से संबंधित शिकायतों के निस्तारण के लिए जीआरएम मॉड्यूल भी संचालित किया जा रहा है। ‘ऑपरेशन डिजिटल कवच’ के तहत साइबर क्राइम पुलिस नागरिकों को इन ऑनलाइन माध्यमों की जानकारी देकर जागरूक कर रही है।
पुलिस के अनुसार लखनऊ में वर्ष 2026 में डिजिटल अरेस्ट के सात मुकदमों में 1.01 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि फ्रीज अथवा होल्ड कराई गई। इनमें से डिजिटल अरेस्ट के पीड़ितों की 16.81 लाख रुपये की धनराशि वापस कराई जा चुकी है।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक साइबर ठगी के बाद समय पर सूचना मिलने से ठगी की रकम को आगे ट्रांसफर होने से रोकने और संबंधित खातों में फ्रीज कराने की कार्रवाई की जा सकती है। इसलिए पीड़ितों को बिना देरी किए 1930 पर शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी गई है।
निर्दोष खाताधारक भी करा सकते हैं समीक्षा
साइबर पुलिस ने बताया कि यदि किसी निर्दोष व्यक्ति का बैंक खाता साइबर अपराध से संबंधित जांच के कारण फ्रीज हो गया है तो खाताधारक संबंधित बैंक शाखा से संपर्क कर सकता है। इसके बाद जीआरएम के माध्यम से खाते को लेकर समीक्षा कराई जा सकती है।
पुलिस ने साइबर ठगी के बाद होने वाली दूसरी ठगी से भी लोगों को सावधान किया है। रिफंड या खाता अनफ्रीज कराने के नाम पर किसी अनजान व्यक्ति को ओटीपी, बैंक खाते की जानकारी अथवा अन्य गोपनीय विवरण नहीं दें। किसी व्यक्ति के कहने पर रिफंड के नाम पर रकम भी न भेजें।
एडीसीपी क्राइम आईपीएस किरन यादव ने नागरिकों से साइबर अपराध के प्रति सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि ठगी होने पर तत्काल पुलिस को सूचना दें और 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।


