– विदेश यात्राओं पर भी ब्रेक
लखनऊ।योगी आदित्यनाथ ने मंत्रिमंडल विस्तार के तुरंत बाद शासन-प्रशासन की कार्यशैली में बड़ा बदलाव लाने का संकेत दे दिया है। मुख्यमंत्री आवास पर हुई विस्तारित मंत्रिमंडल की पहली बैठक में योगी आदित्यनाथ ने मंत्रियों और वरिष्ठ अफसरों को साफ संदेश दिया कि अब सरकार “मितव्ययिता, जवाबदेही और ऊर्जा संरक्षण” के नए मॉडल पर चलेगी।
बैठक में सबसे बड़ा फैसला यह रहा कि मंत्रियों से सप्ताह में कम से कम एक दिन सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने की अपील की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि मंत्री मेट्रो, बस, ई-रिक्शा, कार पूलिंग और यहां तक कि साइकिल का भी इस्तेमाल करें, ताकि जनता के बीच सकारात्मक संदेश जाए। इसके साथ ही मंत्रियों की वाहन फ्लीट को 50 प्रतिशत तक कम करने का आह्वान भी किया गया।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पेट्रोल-डीजल खपत कम करने के आह्वान का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में ईंधन संरक्षण केवल आर्थिक मुद्दा नहीं बल्कि राष्ट्रीय जिम्मेदारी बन चुका है। ऐसे में उत्तर प्रदेश सरकार को खुद उदाहरण पेश करना होगा।
बैठक में अगले छह महीने तक मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों की विदेश यात्राओं पर भी लगभग रोक लगाने का फैसला लिया गया। केवल अपरिहार्य परिस्थितियों में ही विदेश यात्रा की अनुमति होगी। सरकार का फोकस अब डिजिटल और वर्चुअल प्रशासन पर रहेगा। अंतरजनपदीय बैठकों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और विधानमंडल समितियों की बैठकों को अधिकतम हाइब्रिड मोड में आयोजित करने के निर्देश दिए गए।
सरकारी दफ्तरों में भी सख्ती दिखाई गई। सचिवालय और निदेशालय स्तर पर एसी का तापमान 24 से 26 डिग्री के बीच रखने, प्राकृतिक रोशनी का अधिक इस्तेमाल करने और जरूरत के अनुसार ही लिफ्ट चलाने के निर्देश दिए गए। 50 से अधिक कर्मचारियों वाले संस्थानों में सप्ताह में कम से कम दो दिन “वर्क फ्रॉम होम” व्यवस्था लागू करने पर भी जोर दिया गया।
योगी सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए नई नीति लाने का संकेत भी दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वच्छ और ऊर्जा-कुशल परिवहन प्रणाली विकसित करना समय की जरूरत है। साथ ही सौर ऊर्जा के उपयोग और वर्षा जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने की बात कही गई।
बैठक में “वोकल फॉर लोकल” को लेकर भी बड़ा संदेश दिया गया। मुख्यमंत्री ने मंत्रियों से कहा कि उपहार में वही वस्तुएं दी जाएं जो उत्तर प्रदेश में निर्मित हों। “एक जनपद-एक उत्पाद” योजना के उत्पादों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया।


