परिजनों का लोहिया अस्पताल में हंगामा, पुलिस मौके पर
फर्रुखाबाद। स्वास्थ्य सेवाओं की लापरवाही एक बार फिर उजागर हुई है। मोतीझाला (संभावित संक्रामक रोग) और सांस की समस्या से जूझ रही 16 वर्षीय किशोरी की कथित रूप से गलत इलाज और इंजेक्शन लगाने से मौत हो गई। घटना के बाद आक्रोशित परिजनों ने देर रात लोहिया अस्पताल में जमकर हंगामा किया, जिससे अफरा-तफरी मच गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने किसी तरह स्थिति को नियंत्रित किया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कोतवाली कायमगंज क्षेत्र के गांव जियोनी निवासी संजीव कुमार की 16 वर्षीय पुत्री उपासना पिछले 10-12 दिनों से मोतीझाला और सांस की परेशानी से पीड़ित थी। परिजन पहले झोलाछाप चिकित्सकों से उसका इलाज कराते रहे, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद उसे सरकारी अस्पताल कायमगंज ले जाया गया, जहां से उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) बरौन रेफर कर दिया गया।
आरोप है कि सीएचसी बरौन पहुंचने पर वहां कोई चिकित्सक मौजूद नहीं था। इसी बीच वहां मौजूद कर्मचारियों ने किशोरी को इंजेक्शन लगा दिया। परिजनों का कहना है कि इंजेक्शन लगते ही उसकी हालत बिगड़ गई और कुछ ही देर में उसकी मौत हो गई। मामले को दबाने के लिए कर्मचारियों ने आनन-फानन में किशोरी को लोहिया अस्पताल रेफर कर दिया।
जब परिजन किशोरी को लेकर लोहिया अस्पताल पहुंचे, तो वहां मौजूद चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। यह सुनते ही परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया। स्थिति बिगड़ती देख अस्पताल प्रशासन ने पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने समझा-बुझाकर परिजनों को शांत कराया।
अगले दिन सुबह पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मृतक किशोरी के पिता संजीव कुमार ने सीएचसी बरौन के कर्मचारियों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है।
इस घटना ने एक बार फिर सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि अस्पतालों में चिकित्सकों की अनुपस्थिति और कर्मचारियों द्वारा मनमाने तरीके से इलाज करना आम बात हो गई है, जिसका खामियाजा आम जनता को अपनी जान देकर चुकाना पड़ रहा है।
सीएचसी बरौन में कर्मचारियों ने किशोरी को लगाया इंजेक्शन, हुई मौत


