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Wednesday, April 1, 2026

मदरसा बोर्ड विवाद पर बयानबाज़ी तेज, मौलाना शहाबुद्दीन ने उठाए सवाल

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बरेली
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने उत्तराखंड मदरसा बोर्ड को समाप्त करने के फैसले और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि मदरसों पर इस तरह के आरोप लगाना और बोर्ड को खत्म करना एक बड़ी गलती है, क्योंकि इन संस्थानों का देश के इतिहास में महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

मौलाना ने दावा किया कि मदरसों से जुड़े हजारों उलेमा और छात्रों ने आज़ादी की लड़ाई में हिस्सा लिया और बड़ी कुर्बानियां दीं। उनके अनुसार, 1857 से लेकर 1947 तक स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लगभग 55 हजार लोग शहीद हुए, जो मदरसों से जुड़े थे। उन्होंने यह भी कहा कि देश के हर महत्वपूर्ण दौर में मदरसों के लोग राष्ट्र के साथ खड़े रहे हैं।

उन्होंने मुख्यमंत्री धामी के उस बयान पर आपत्ति जताई, जिसमें मदरसों में “विभाजनकारी सोच” और “जिहादी शिक्षा” की बात कही गई थी। मौलाना का कहना है कि बिना इतिहास को समझे ऐसे आरोप लगाना न केवल गलत है बल्कि असंवैधानिक भी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को शिक्षा संस्थानों में सुधार की दिशा में काम करना चाहिए, न कि उन्हें बदनाम करना चाहिए।

मौलाना ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने बड़ी संख्या में मदरसों को बंद कराया है और धार्मिक स्थलों पर भी कार्रवाई की गई है। उनके अनुसार, यह कदम धार्मिक शिक्षा को खत्म करने की दिशा में उठाया गया प्रतीत होता है, जिससे समाज में असंतोष बढ़ सकता है।

वहीं, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कहना है कि मदरसा बोर्ड को समाप्त करने का निर्णय राज्य में समान शिक्षा व्यवस्था लागू करने और विभाजनकारी विचारों को रोकने के उद्देश्य से लिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जुलाई 2026 से सभी संस्थानों में एक समान पाठ्यक्रम लागू करने की योजना है, ताकि छात्र मुख्यधारा की शिक्षा से जुड़कर देश की प्रगति में योगदान दे सकें।

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