लखनऊ: राजधानी लखनऊ में हाल के 59 दिनों के भीतर 342 सड़क हादसे दर्ज किए गए, जिनमें 128 लोगों की मौत हुई और 321 लोग घायल हुए। यह स्थिति सड़क सुरक्षा को लेकर चलाए जा रहे लगातार अभियानों और जागरूकता प्रयासों के बावजूद बनी हुई है। विशेषज्ञों और अधिकारियों का कहना है कि विभाग इन हादसों पर अंकुश लगाने में असफल साबित हो रहा है।
सड़क हादसों में हुई इस वृद्धि पर शनिवार को मंडलायुक्त कार्यालय में हुई मंडलीय सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में चिंता व्यक्त की गई। मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने परिवहन विभाग के अधिकारियों को हादसों की वजह, स्थान, वृद्धि के कारण और निवारण उपायों का विवरण तैयार कर रिपोर्ट बनाने का निर्देश दिया। अधिकारियों ने कहा कि महीने भर के अंदर यह रिपोर्ट सौंपी जाएगी।
मौजूदा रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी और फरवरी 2026 में लखनऊ में 342 हादसे हुए, जो पिछले वर्ष 271 से बढ़कर 26.2 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाते हैं। मृतकों की संख्या 99 से बढ़कर 128 हुई (29.3% वृद्धि) और घायलों की संख्या 187 से बढ़कर 321 हुई, यानी 71.7 प्रतिशत की वृद्धि। लखनऊ संभाग में कुल हादसों की संख्या 1049 से बढ़कर 1074 हुई, मृतक 549 से 551 और घायल 732 से 832 हो गए।
बैठक में ब्लैक स्पॉट्स की समीक्षा भी की गई। वर्ष 2025 में लखनऊ मंडल में कुल 283 ब्लैक स्पॉट्स चिन्हित किए गए थे, जिनमें 151 लोक निर्माण विभाग, 100 एनएचएआई और 32 नेशनल हाईवे/पीडब्ल्यूडी से संबंधित थे। मंडलायुक्त ने निर्देश दिए कि इन ब्लैक स्पॉट्स को जल्द सुधार कर मानक के अनुसार सुरक्षित किया जाए। बैठक में अपर जिलाधिकारी (नगर) एमपी सिंह, आरटीओ (प्रवर्तन) प्रमात पाण्डेय, अधीक्षण अभियंता जेपी सिंह, सहायक पुलिस आयुक्त (यातायात) अभिनव यादव सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
सहयोगी जिलों की तुलना में लखनऊ की स्थिति सबसे खराब पाई गई। हरदोई में हादसे 191 से घटकर 163 हुए, लखनऊ में गंभीर वृद्धि देखी गई। अन्य जिलों जैसे उन्नाव, रायबरेली, सीतापुर और लखीमपुर खीरी में हादसे घटे या मामूली बढ़े। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि लखनऊ में सड़क सुरक्षा को लेकर त्वरित और प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है।


