सरदार सेना की आरक्षण बचाओ पदयात्रा पहुंची राजधानी, इको गार्डन में धरना जारी
लखनऊ। आरक्षण में कथित अनियमितताओं के खिलाफ सरदार सेना के संस्थापक डॉ. आर. एस. पटेल के नेतृत्व में 26 अगस्त से शुरू हुई ‘आरक्षण बचाओ पदयात्रा’ बुधवार को राजधानी लखनऊ पहुंच गई। प्रयागराज स्थित इलाहाबाद विश्वविद्यालय से शुरू हुई यह पदयात्रा कौशाम्बी, फतेहपुर और रायबरेली होते हुए लखनऊ पहुंची। पदयात्रा में बड़ी संख्या में पीड़ित अभ्यर्थी, सरदार सेना के कार्यकर्ता और आरक्षण समर्थक शामिल हुए।
भारी बारिश के बावजूद प्रदर्शनकारियों का उत्साह कम नहीं हुआ। रास्ते में विभिन्न स्थानों पर पदयात्रा का फूल-मालाओं से स्वागत किया गया और आरक्षण के समर्थन में नारे लगाए गए।
लखनऊ पहुंचने के बाद चारबाग रेलवे स्टेशन से बड़ी संख्या में आंदोलनकारी मुख्यमंत्री से मुलाकात की मांग को लेकर आगे बढ़े। हजरतगंज क्षेत्र में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोक दिया। सरदार सेना ने आरोप लगाया कि इस दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के साथ बर्बरता की। संगठन का दावा है कि कई सरदार सैनिकों और छात्रों के कपड़े फाड़े गए तथा प्रदर्शनकारियों के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की गई।
इसके बाद आंदोलनकारी इको गार्डन पहुंचे, जहां धरना जारी है।
डॉ. आर. एस. पटेल ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पिछले कई वर्षों से विभिन्न सरकारी भर्तियों में आरक्षण व्यवस्था को लेकर गंभीर अनियमितताओं और विसंगतियों के आरोप सामने आते रहे हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग, 68,500 और 69 हजार शिक्षक भर्ती, पशुपालन विभाग, चिकित्सा विभाग तथा लेखपाल भर्ती समेत कई भर्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए निर्धारित पदों पर पात्र अभ्यर्थियों के अधिकार प्रभावित होने की शिकायतें लगातार उठती रही हैं।
उन्होंने कहा कि इन भर्तियों में सरदार सेना के कार्यकर्ता और उनके परिजन भी प्रभावित हुए हैं। इसी को लेकर 26 अगस्त से प्रयागराज से लखनऊ तक पदयात्रा निकाली गई।
डॉ. पटेल ने 69 हजार शिक्षक भर्ती का उदाहरण देते हुए दावा किया कि एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के करीब 20 हजार पद कथित तौर पर अनारक्षित कोटे में समाहित किए जाने का मामला सामने आया है। उन्होंने कहा कि आरक्षण से जुड़े अभ्यर्थी पिछले कई वर्षों से न्याय की मांग कर रहे हैं और सरकार तथा न्यायालय के बीच अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
उन्होंने मांग की कि 69 हजार शिक्षक भर्ती समेत उन सभी भर्तियों की निष्पक्ष, स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, जिनमें आरक्षण संबंधी अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। प्रत्येक भर्ती में आरक्षण रोस्टर, कटऑफ, चयन सूची, नियुक्ति प्रक्रिया और श्रेणीवार पदों का विशेष ऑडिट कराने की भी मांग की गई।


