लखनऊ। उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के लिए राहत भरी खबर है। प्रदेश में ऐसे शिक्षक, जो प्रधानाध्यापक के रिक्त पदों पर कार्यवाहक प्रधानाध्यापक के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, उन्हें निर्धारित शर्तें पूरी करने पर प्रधानाध्यापक पद का वेतन मिल सकेगा। इस संबंध में हाईकोर्ट के आदेश के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इससे उन शिक्षकों को लाभ मिलने की उम्मीद है, जो लंबे समय से कार्यवाहक प्रधानाध्यापक के रूप में काम करते हुए समान पद के लिए समान वेतन की मांग कर रहे हैं।
बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा की ओर से प्रदेश के सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (बीएसए) को संशोधित आदेश के अनुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। बीएसए को संबंधित शिक्षकों के मामलों की तथ्यात्मक जांच करनी होगी। इसमें मुख्य रूप से यह पता लगाया जाएगा कि संबंधित शिक्षक ने न्यूनतम पांच वर्ष की सेवा पूरी की है या नहीं और वह वास्तव में प्रधानाध्यापक के पद की जिम्मेदारियां निभा रहा है या नहीं। जांच में दोनों शर्तें पूरी होने की पुष्टि होने पर संबंधित शिक्षक को प्रधानाध्यापक पद का वेतन दिए जाने की कार्रवाई की जाएगी।
प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में वर्ष 2016 के बाद से पदोन्नति नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में प्रधानाध्यापक के पद खाली पड़े हैं। इन रिक्त पदों पर स्कूलों के वरिष्ठ शिक्षकों को कार्यवाहक प्रधानाध्यापक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ये शिक्षक विद्यालयों के संचालन और प्रधानाध्यापक से जुड़े दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं, लेकिन उन्हें वेतन के मामले में अपने नियमित पद के अनुसार ही भुगतान मिलता रहा है। इसी असमानता को दूर करने के लिए संबंधित शिक्षकों ने समान पद के लिए समान वेतन की मांग उठाई थी।
इस मामले में हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता शिक्षकों को राहत देते हुए प्रधानाध्यापक पद का वेतन देने के निर्देश दिए थे। इसके बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने आदेश को लागू करने के लिए संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए हैं। हालांकि, इसका लाभ सभी कार्यवाहक प्रधानाध्यापकों को स्वतः नहीं मिलेगा। संबंधित शिक्षक के लिए कम से कम पांच वर्ष की सेवा पूरी करना और वास्तविक रूप से प्रधानाध्यापक के पद पर कार्य करना जरूरी होगा। इन शर्तों की पुष्टि जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी की जांच के बाद ही की जाएगी।
विभाग के निर्देशों से उन शिक्षकों को फायदा मिल सकता है, जो निर्धारित पात्रता पूरी करने के बावजूद अब तक प्रधानाध्यापक पद के वेतन से वंचित थे। अब जिला स्तर पर होने वाली जांच के आधार पर पात्र शिक्षकों के मामलों में आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस फैसले से लंबे समय से कार्यवाहक प्रधानाध्यापक की जिम्मेदारी निभा रहे योग्य शिक्षकों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।
शिक्षकों के लिए बड़ी राहत: पांच साल की सेवा पूरी करने वाले कार्यवाहक प्रधानाध्यापकों को मिलेगा प्रधानाध्यापक का वेतन


