लखनऊ।राजधानी से जुड़े नगर निगम विवाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सख्त रुख अपनाते हुए मेयर के रुख पर प्राइमा फेसिए सवाल खड़े किए हैं। अदालत ने अपने अवलोकन में कहा कि मेयर का रुख प्रथम दृष्टया नगर निगम अधिनियम 1959 की धारा 77 और 85 के विपरीत प्रतीत होता है।
कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि राज्य सरकार पहले ही 4 फरवरी को इस मामले में आवश्यक अनुपालन के निर्देश जारी कर चुकी है, इसके बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। अदालत ने अपने पूर्व आदेश का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता ललित किशोर तिवारी को सभासद निर्वाचित घोषित किया जाना चाहिए।
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव मेहरोत्रा ने प्रभावी पैरवी की, वहीं अधिवक्ता नदीम मुर्तजा और उत्सव मिश्रा ने भी पक्ष को मजबूती से रखा।
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि नगर निगम अधिनियम की धारा 85(2) के संभावित दुष्प्रभाव याचिकाकर्ता पर लागू नहीं होंगे और नगर निगम तथा मेयर को कानून के प्रावधानों का पालन करना ही होगा।
कोर्ट ने विपक्षी पक्ष को 7 दिन के भीतर जवाब दाखिल करने और उसके बाद 3 दिन में प्रत्युत्तर देने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 7 अप्रैल को निर्धारित की गई है, जहां इस प्रकरण में अंतिम निस्तारण या अंतरिम राहत पर फैसला लिया जा सकता है।
लखनऊ नगर निगम मामला: हाईकोर्ट सख्त, मेयर के रुख पर उठाए सवाल


