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Monday, March 30, 2026

महाभारत सर्किट में चमकेगा काम्पिल्य, 4.70 करोड़ की परियोजना से बनेगा वर्ल्ड क्लास टूरिस्ट हब

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– मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जिले को विशेष सौगात
– पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह नें जारी किये आदेश
फर्रुखाबाद।
महाभारत काल की ऐतिहासिक विरासत को संजोए काम्पिल्य (कंपिल) अब उत्तर प्रदेश के पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान बनाने जा रहा है। प्रदेश सरकार ने महाभारत सर्किट के तहत इस पौराणिक स्थल के समेकित विकास के लिए 4.70 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी योजना को मंजूरी दे दी है, जिसमें पहली किश्त के रूप में 1.40 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि द्रौपदी की जन्मस्थली और प्राचीन सांस्कृतिक धरोहरों से समृद्ध काम्पिल्य को विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करना सरकार की प्राथमिकता है।
महाभारत की स्मृतियां होंगी सजीव
महाभारत सर्किट के अंतर्गत काम्पिल्य में आधुनिक तकनीक के माध्यम से इतिहास को जीवंत किया जाएगा। करीब 2.37 करोड़ रुपये की लागत से चार इंटरैक्टिव इंटरप्रिटेशन इंस्टॉलेशन लगाए जाएंगे, जिनमें द्रौपदी के जन्म, श्रीकृष्ण से उनकी मित्रता, स्वयंवर और कपिल मुनि के आश्रम से जुड़े प्रसंगों को डिजिटल और विजुअल तकनीक से प्रस्तुत किया जाएगा।
इस पहल से पर्यटकों को केवल दर्शन ही नहीं, बल्कि महाभारत काल का सजीव अनुभव भी मिलेगा।
रामेश्वर नाथ मंदिर को मिलेगा भव्य स्वरूप
काम्पिल्य स्थित प्राचीन रामेश्वर नाथ मंदिर को भी पर्यटन योजना में शामिल किया गया है। लगभग 30 लाख रुपये की लागत से यहां पारंपरिक स्थापत्य शैली में भव्य प्रवेश द्वार का निर्माण किया जाएगा।
मान्यता है कि त्रेता युग में भगवान राम के अनुज शत्रुघ्न ने यहां शिवलिंग की स्थापना की थी, जिसके चलते सावन माह में यहां भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
साथ ही, पर्यटकों को ऐतिहासिक जानकारी देने के लिए स्टोन स्टोरी बोर्ड इंटरप्रिटेशन पैनल भी लगाए जाएंगे।
पर्यटक सुविधाओं का होगा विस्तार
पर्यटकों की सुविधा के लिए लगभग 55 लाख रुपये की लागत से आधुनिक टूरिस्ट फैसिलिटी सेंटर बनाया जाएगा। इसमें स्वच्छ शौचालय, पेयजल, विश्राम स्थल, कैफेटेरिया और प्रशासनिक कार्यालय जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिससे देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव मिलेगा।
बढ़ रहा है पर्यटन, 21.67 लाख पहुंचे पर्यटक
वर्ष 2025 में फर्रुखाबाद जनपद में 21.67 लाख से अधिक पर्यटक पहुंचे, जिनमें विदेशी पर्यटकों की भी अच्छी संख्या रही। यह आंकड़ा दर्शाता है कि क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को लेकर लोगों में लगातार आकर्षण बढ़ रहा है।
जैन और बौद्ध धर्म से भी जुड़ा है काम्पिल्य
काम्पिल्य केवल महाभारत कालीन महत्व तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जैन और बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए भी आस्था का केंद्र है। जैन धर्म के 13वें तीर्थंकर भगवान विमलनाथ की जन्मस्थली होने के साथ ही निकट स्थित संकिसा भगवान बुद्ध से जुड़े प्रमुख स्थलों में शामिल है।
अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने कहा कि काम्पिल्य, जो कभी पांचाल की राजधानी रहा, आज भी अपनी ऐतिहासिक पहचान बनाए हुए है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश को विभिन्न पर्यटन सर्किटों में विकसित किया जा रहा है, जिसमें महाभारत सर्किट भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
उन्होंने कहा कि यह परियोजना न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देगी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के नए अवसर भी सृजित करेगी।
काम्पिल्य का यह विकास केवल एक पर्यटन परियोजना नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक तकनीक के माध्यम से दुनिया के सामने प्रस्तुत करने की एक बड़ी पहल है। आने वाले समय में यह स्थल न केवल श्रद्धालुओं, बल्कि इतिहास और संस्कृति के शोधकर्ताओं के लिए भी आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन सकता है।

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