फर्रुखाबाद: कमालगंज थाना (Kamalganj police station) क्षेत्र के गांव बझेरा में 17 साल पहले हुई एक मामूली विवाद से शुरू हुई कहासुनी आखिरकार हत्या तक जा पहुँची थी। उस मामले में करीब 17 साल लंबी सुनवाई के बाद अब न्यायालय ने दो ग्रामीणों को दोषी करार (found guilty) दिया है। गांव निवासी वीरेंद्र सिंह ने 3 नवंबर 2008 को थाना कमालगंज में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उनके अनुसार, वह बकरी को लेकर घर जा रहे थे। इस दौरान गांव के गुबरे उर्फ गोवर्धन, उसका बेटा भोला उर्फ सुरेंद्र और परिवार का ही सर्वेश उनसे भिड़ गए।
आरोप है कि खेत में खड़ी मूंगफली की फसल बकरी द्वारा चर लेने की वजह से पहले से ही दोनों पक्षों में रंजिश चल रही थी। उसी बात को लेकर आरोपियों ने वीरेंद्र को रोक लिया, गाली-गलौज की और जब विरोध हुआ तो लाठी-डंडों से बुरी तरह पीट दिया।
हमले में घायल वीरेंद्र की इलाज के दौरान मौत हो गई। शुरू में मामला मारपीट का दर्ज किया गया था, लेकिन बाद में गैर इरादतन हत्या की धारा में तब्दील कर विवेचना की गई और तीनों आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल हुआ।
सुनवाई के दौरान मुख्य आरोपी गुबरे उर्फ गोवर्धन की मौत हो गई। शेष दो आरोपियों भोला उर्फ सुरेंद्र और सर्वेश पर मुकदमा चलता रहा। अभियोजन पक्ष की ओर से एडवोकेट संजीव पाल ने दलीलें रखीं।
एडीजे प्रथम शैली रॉय की अदालत ने गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर दोनों को गैर इरादतन हत्या का दोषी करार देते हुए न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। अब 29 अगस्त को अदालत दोनों को सजा सुनाएगी।