फर्रुखाबाद। सावन में भगवान भोलेनाथ के दर्शन के लिए निकली कांवड़ यात्रा उस समय मातम में बदल गई, जब रास्ते में एक कांवड़िये की अचानक तबीयत बिगड़ गई। अस्पताल में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना की खबर गांव पहुंचते ही परिवार में कोहराम मच गया।
शमशाबाद थाना क्षेत्र के ग्राम कुइयां खेड़ा के ग्रामीणों ने आपसी सहयोग और चंदे से गोला गोकर्णनाथ धाम तक कांवड़ यात्रा निकालने का निर्णय लिया था। पिकअप में डीजे सजाकर और भगवान भोलेनाथ की कांवड़ लेकर श्रद्धालु गाजे-बाजे के साथ रवाना हुए। यात्रा के दौरान हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयकारों से माहौल भक्तिमय बना हुआ था।
बताया गया कि फर्रुखाबाद पहुंचने से पहले ही जत्थे में शामिल 40 वर्षीय शेर सिंह पुत्र बलवंत सिंह की अचानक तबीयत बिगड़ गई। उन्हें घबराहट और सीने में दर्द की शिकायत हुई और वह अचेत हो गए। साथी कांवड़ियों ने परिजनों को सूचना दी और उन्हें फर्रुखाबाद के डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल पहुंचाया।
हालत गंभीर होने पर चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद शेर सिंह को राजकीय मेडिकल कॉलेज तिर्वा, कन्नौज रेफर कर दिया। परिजन उन्हें लेकर तिर्वा पहुंचे, जहां उपचार के दौरान चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। छोटे भाई मोहित कुमार ने इसकी पुष्टि की।
शेर सिंह की मौत की खबर गांव पहुंचते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई। मृतक की पत्नी नन्हीं देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। शेर सिंह पांच भाइयों में दूसरे नंबर के थे और अपने पीछे पत्नी, तीन बेटे आकाश, विकास व कौशिक तथा दो बेटियां शिवानी और पूनम को छोड़ गए हैं। सुबह एंबुलेंस से शव गांव पहुंचा तो परिजन शव से लिपटकर बिलख पड़े। ग्रामीणों के मुताबिक एक दिन पहले जिस घर में कांवड़ यात्रा को लेकर खुशी का माहौल था, वहां अब मातम पसरा हुआ है।
परिजनों ने बताया कि शेर सिंह खेती-बाड़ी और मेहनत-मजदूरी करके परिवार का पालन-पोषण करते थे। उनके वृद्ध माता-पिता बलवंत सिंह और राजकुमारी मध्य प्रदेश में दर्शन के लिए गए हुए थे और घटना के समय गांव में मौजूद नहीं थे।
कांवड़ यात्रा की खुशियां मातम में बदलीं, कांवड़िये की इलाज के दौरान मौत


