एयरपावर पर बड़ा झटका—नई तकनीक से बदला युद्ध का समीकरण
तेहरान। मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच ईरान ने अमेरिका की सैन्य ताकत को बड़ा झटका देते हुए उसके दो प्रमुख लड़ाकू विमानों को मार गिराने का दावा किया है। इनमें A-10 वॉर्थोग और F-15E स्ट्राइक ईगल शामिल हैं। बीते कई वर्षों में पहली बार अमेरिकी एयरपावर को इस तरह की सीधी चुनौती मिली है, जिससे वैश्विक सैन्य संतुलन को लेकर नई बहस छिड़ गई है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, शुक्रवार को ईरान ने F-15E लड़ाकू विमान को निशाना बनाकर गिराया, जिसमें सवार दो क्रू मेंबर में से एक को अमेरिकी सेना ने सुरक्षित निकाल लिया, जबकि दूसरे की तलाश जारी है। वहीं फारस की खाड़ी क्षेत्र में A-10 विमान को भी ईरानी एयर डिफेंस सिस्टम ने टारगेट किया, जिससे वह दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस घटनाक्रम ने अमेरिकी सैन्य दावों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर उस समय जब डोनाल्ड ट्रंप यह दावा कर रहे हैं कि ईरानी सैन्य क्षमता को भारी नुकसान पहुंचाया जा चुका है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, ईरान ने इस हमले में पारंपरिक रडार आधारित सिस्टम के बजाय अत्याधुनिक इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल और इन्फ्रारेड (EO/IR) तकनीक का इस्तेमाल किया है। इस तकनीक के जरिए मिसाइल सिस्टम दुश्मन के विमान के इंजन से निकलने वाली गर्मी (हीट सिग्नेचर) को ट्रैक करता है और उसी के आधार पर लक्ष्य को लॉक कर हमला करता है। खास बात यह है कि इसमें रडार सिग्नल का उपयोग नहीं होता, जिससे दुश्मन के लिए हमले का पहले से पता लगाना बेहद मुश्किल हो जाता है।
बताया जा रहा है कि ईरान की स्वदेशी ‘मजीद’ (AD-08) सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली इस ऑपरेशन में शामिल हो सकती है। यह मोबाइल प्लेटफॉर्म पर आधारित सिस्टम कम ऊंचाई पर उड़ने वाले विमानों, हेलीकॉप्टरों और ड्रोन को निशाना बनाने में सक्षम है। इसकी खासियत यह है कि यह बिना रडार उत्सर्जन के लगभग 15 किलोमीटर तक लक्ष्य का पता लगा सकता है और 8 किलोमीटर की दूरी तक सटीक हमला कर सकता है।
ईरान की इस रणनीति ने यह साबित कर दिया है कि आधुनिक युद्ध में केवल महंगे और उन्नत फाइटर जेट ही निर्णायक नहीं होते, बल्कि सटीक और कम लागत वाली तकनीक भी बड़ी ताकतों को चुनौती दे सकती है। बीते कुछ दिनों में ईरान द्वारा अमेरिकी और इजरायली ड्रोन तथा विमानों को गिराए जाने की घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि वह बहुस्तरीय वायु रक्षा प्रणाली के जरिए अपने हवाई क्षेत्र की प्रभावी सुरक्षा कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इसी तरह अमेरिकी विमानों को नुकसान होता रहा, तो यह न केवल युद्ध की दिशा बदल सकता है, बल्कि अमेरिका की वैश्विक सैन्य साख पर भी असर डाल सकता है। फिलहाल, यह घटनाक्रम दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों और रणनीतिकारों के लिए अध्ययन का विषय बन गया है, क्योंकि इससे भविष्य के युद्धों की रणनीति में बड़े बदलाव की संभावना जताई जा रही है।


