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Saturday, April 4, 2026

ईरान ने गिराए अमेरिका के दो घातक जेट, A-10 ‘टैंक किलर’ भी बना निशाना—युद्ध में अमेरिका को बड़ा झटका

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वॉशिंगटन/तेहरान। ईरान के खिलाफ जारी युद्ध में अमेरिका को शुक्रवार का दिन भारी पड़ गया, जब ईरानी वायु रक्षा प्रणाली ने उसके दो प्रमुख सैन्य विमानों को मार गिराने का दावा किया। इनमें F-15E स्ट्राइक ईगल और A-10 थंडरबोल्ट II शामिल हैं। इस घटनाक्रम ने न केवल युद्ध के हालात को और गंभीर बना दिया है, बल्कि अमेरिकी एयरपावर की मजबूती पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सबसे पहले ईरान ने F-15E फाइटर जेट को निशाना बनाया, जिसके बाद अमेरिकी सेना ने तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। इसी दौरान फारस की खाड़ी के ऊपर A-10 थंडरबोल्ट II भी ईरानी हमले की चपेट में आ गया और दुर्घटनाग्रस्त हो गया। 28 फरवरी से शुरू हुए इस युद्ध के बाद यह पहली बार है जब अमेरिका को अपने इस बेहद अहम हमलावर विमान का नुकसान उठाना पड़ा है।

A-10 थंडरबोल्ट II को अमेरिकी वायुसेना का सबसे भरोसेमंद ‘टैंक किलर’ माना जाता है। 1976 में सेवा में शामिल यह विमान खासतौर पर जमीनी हमलों और क्लोज एयर सपोर्ट (CAS) मिशनों के लिए डिजाइन किया गया है। इसकी सबसे बड़ी ताकत इसकी 30 मिमी की GAU-8 एवेंजर रोटरी तोप है, जो प्रति मिनट हजारों राउंड फायर करने की क्षमता रखती है। यह विमान कम ऊंचाई पर उड़ते हुए दुश्मन के टैंकों, बख्तरबंद वाहनों और ठिकानों को बेहद सटीकता के साथ निशाना बना सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, A-10 की मजबूती इसे अन्य लड़ाकू विमानों से अलग बनाती है। इसका कॉकपिट टाइटेनियम कवच से सुरक्षित होता है, जो भारी हमलों को भी झेल सकता है। यही कारण है कि इसे कई बार F-35 जैसे आधुनिक स्टील्थ जेट से भी ज्यादा उपयोगी माना जाता है, खासकर जमीनी युद्ध अभियानों में।

हालांकि, इस बार ईरान की वायु रक्षा प्रणाली के सामने यह विमान भी बेबस नजर आया। माना जा रहा है कि ईरान ने अत्याधुनिक मिसाइल और ट्रैकिंग सिस्टम के जरिए इन विमानों को निशाना बनाया। इससे यह साफ हो गया है कि ईरान ने अपने एयर डिफेंस नेटवर्क को काफी मजबूत कर लिया है, जो अब अमेरिकी जैसे शक्तिशाली देश के विमानों को भी चुनौती देने में सक्षम है।

इस घटनाक्रम के बाद वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ गई है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इसी तरह अमेरिकी सैन्य संपत्तियों को नुकसान होता रहा, तो यह युद्ध की दिशा को बदल सकता है। साथ ही, इससे यह भी संकेत मिलता है कि आधुनिक युद्ध में तकनीक और रणनीति का संतुलन तेजी से बदल रहा है, जहां पारंपरिक सैन्य ताकत को भी नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

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