नई दिल्ली
देश में जारी चुनावी माहौल के बीच कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के एक विवादित बयान ने सियासी पारा चढ़ा दिया है और अब मामला कानूनी दायरे में पहुंच गया है। इलेक्शन कमीशन ऑफ़ इंडिया ने इस बयान पर कड़ा संज्ञान लेते हुए उन्हें नोटिस जारी किया है, जिससे राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
दरअसल, चेन्नई में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान खरगे ने नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए उन्हें “आतंकवादी” कह दिया था। यह टिप्पणी उस समय आई जब वह अन्नाद्रमुक और भाजपा के गठबंधन की आलोचना कर रहे थे और द्रविड़ नेताओं की विचारधारा का हवाला दे रहे थे। बयान सामने आते ही भारतीय जनता पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे देश और प्रधानमंत्री का अपमान बताया तथा कांग्रेस की मानसिकता पर सवाल उठाए।
विवाद बढ़ने के बाद खरगे ने सफाई देते हुए कहा कि उनके बयान को गलत संदर्भ में पेश किया गया है। उनका आशय प्रधानमंत्री को आतंकवादी बताना नहीं था, बल्कि यह कहना था कि सरकार की नीतियां और कार्यशैली लोकतांत्रिक संस्थाओं और विपक्षी दलों को “आतंकित” कर रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर विपक्ष की आवाज दबाई जा रही है।
इधर, चुनाव आयोग ने इसे आदर्श आचार संहिता का गंभीर उल्लंघन मानते हुए खरगे से 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है। आयोग का यह कदम ऐसे समय पर आया है जब तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में मतदान से ठीक पहले राजनीतिक बयानबाजी अपने चरम पर है। माना जा रहा है कि आयोग का सख्त रुख चुनावी मर्यादाओं को बनाए रखने के लिए एक बड़ा संदेश है।
इस पूरे घटनाक्रम ने देश की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है, जहां एक ओर भाजपा इसे जनता का अपमान बता रही है, वहीं कांग्रेस इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राजनीतिक टिप्पणी का हिस्सा बताकर बचाव कर रही है। आने वाले समय में चुनाव आयोग के फैसले और खरगे के जवाब पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।


